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Monday, December 5, 2016

कुरूक्षेत्र में 6 दिसम्बर से अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2016


‘‘कुरूक्षेत्र ‘सन्निहित सरोवर’का उल्लेख महाभारत तथा तमाम पुराणों में भी है। कहते है कि महाभारत के अति रक्तरंजित युद्ध के बाद पाण्डवों ने सभी दिंवगतों की मुक्ति के लिये यहाँ पर पिण्डदान किया था। यहां बाण गंगा और श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर,बाण गंगा का अपना ही अलग महत्व है कहते है यहाँ पर शर-शैय्या पर लेटे भीष्म पितामह को प्यास लगने पर अर्जुन ने अपने बाण द्वारा धरती से जलधारा प्रवाहित कर उनकी प्यास बुझाई थी। मान्यता है कि श्रीकृष्ण एवं बलराम जी का मुण्डन संस्कार भी यहीं पर हुआ था। यहाँ का स्थानेश्रर महादेव मंदिर भी श्रद्धा का प्रमुख केन्द्र है’’

-प्रेमबाबू शर्मा

महाभारत की रणभूमि रहीं कुरूक्षेत्र एक पावन स्थल है,यही वह स्थान है,जहाॅ भगवान श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। इस पावन भूमि पर कुरूक्षेत्र में आगामी 6 से 10 दिसंबर, 2016 के बीच अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2016 बडे ही भव्य रूप से मनाया जाएगा। देश के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2016 में मुख्य अतिथि होंगे तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खटटर उदघाटन करेंगे,इस मौके पर विभिन्न कार्यक्रमों व योजनाओं का शुरूआत भी करेगें। जो कि राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है।

समारोह में श्रीमद्भगवद गीता पर आधारित सेमिनार, कृष्ण-अर्जुन संवाद, गीता यज्ञ, गीता पूजन तथा नगर शोभायात्रा निकाली जाएगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने के लिए देश-विदेश से विभिन्न टीमों को आमंत्रित किया गया है जो इस कार्यक्रम के दौरान अपनी रंगारंग प्रस्तुति देगें। 

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2016 को पूरे विश्वस्तर पर मनाया जा रहा है,और समारोह में आने वाले मेहमानों और तीर्थ यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा ना हो इस पर पूरा ध्यान दिया गया है। क्योंकि कभी कभी छोटी सी चूक ही परेशानी का सबब बन जाता है।

विभिन्न देशों के राजदूतों सहित वहां की जानी-मानी हस्तियों केन्द्रीय मंत्रियों सहित अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों व राज्यपाल व मंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न विश्वविद्यालयों, जहां गीता पर शोध हुआ है और गीता के बारे में ज्ञान दिया जाता है, से जुड़े लोगों को भी आमंत्रित किया जाएगा और उनका संबोधन होगा। महोत्सव में विभिन्न देशों के विद्धानों को भी आमंत्रित किया जाएगा, जिनका संबोधन होगा। स्वर्ण जयंती उत्सव कमेटी के सभी सदस्यों भी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2016 में शामिल होंगे।

समारोह में गीता पर शोध करने वाले, गीता पर ब्लाग लिखने वाले और गीता से जुड़ी अन्य हस्तियां व जाने-माने व्यक्ति, जो अन्य क्षेत्रों मेें कार्यरत हैं, परंतु किसी न किसी प्रकार से उन्होंने गीता को बढ़ाने में अपना एक योगदान दिया है, इसके अलावा, विभिन्न देशों के विद्धानों को भी आमंत्रित किया है। महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों व स्थानों से 574 प्रतिभागी गीता के लिखे श्लोकों के पारम्परिक परिधानों को धारण कर अपने-अपने क्षेत्र से आगामी 6 दिसंबर को पवित्र नगरी कुरूक्षेत्र में पहुंचेंगें और उसके पश्चात वे अपने वस्त्रों को दान स्वरूप देकर जाएंगें बाद में उन वस्त्रों को बहुत ही भव्य तरीके से सजाकर एक संग्रहालय या मोबाइल संग्रहालय बनाया जाएगा ताकि आगंतुकों के लिए एक याद के रूप में दर्शाया जा सके। इसके अलावा, 18 हजार युवक व युवतियां इस महोत्सव में भाग लेंगे, जो गीता के सारभूत 18 श्लोकी गीता का वैश्विक पाठ करेंगे,जिसमें गीता के 700 श्लोकों में से 574 श्लोक भगवान कृष्ण के मुखारविंद से निकले थे।

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2016 के दौरान पूरे प्रदेश में भी यह आयोजन खंड स्तर और जिला स्तर पर आयोजित होगें, जिसमें गीता यज्ञ, प्रवचन के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगिताएं व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, जन समुदाय भागेदारी के माध्यम से स्वच्छता, पौधारोपण तथा अन्य सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगें। महोत्सव के दौरान सेमीनार आयोजित करके स्थानीय स्तर पर विभिन्न संतों व विद्धानों को भी जोड़ा जाएगा। 

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2016 से पहले पवित्र नगरी कुरूक्षेत्र को साफ-सुथरा रखने के लिए 1500 से ज्यादा कूड़ादान लगाए गये है, कुरूक्षेत्र के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया है, ताकि शहर साफ-सुथरा रहे। इसके अलावा,विकास बोर्ड के माध्यम से ई-रिक्शाओं को संचालित किया जाएगा ताकि लोगों को एक शटल सेवा प्रदान की जा सके। महोत्सव के दौरान लोगों की सुविधा के लिए हरियाणा परिवहन विभाग के माध्यम से विभिन्न बसों की व्यवस्था की जाएगी जो निर्धारित रूट पर संचालित होंगी।
दौरान शोभा यात्रा का आयोजन भी किया जाएगा। इस बार कारावास में बंदियों के साथ भी मनाया जाएगा और प्रत्येक जेल में यज्ञ आयोजित करवा कर बंदियों को प्रेरणा दी जाएगी और उन्हें उत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा, देश के सैनिकों- वीर जवानो-हार न मानो- के मूलमंत्र के साथ गीता महोत्सव को भी आयोजित किया जाएगा। 

कुरूक्षेत्र भारत के हरियाणा राज्य के उत्तर में स्थित एक जिला है जो अम्बाला, यमुना नगर कैथल और करनाल से जुड़ा है। यही वह जगह है जहाँ पर कौरवों और पाण्डवों के मध्य महाभारत का भीषण युद्ध हुआ था जिसमें बड़ी संख्या में योद्धाओं की मौत हुयी थी, शायद इसीलिये आज भी खुदाई करने पर यहाँ की मिट्टी का रंग लाल दिखायी पड़ता है।

यही पर युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था इस जगह को ज्योतिसर के नाम जाना जाता है जो यहाँ से मात्र 4 कि0मी0 की दूरी पर है।

कुरूक्षेत्र का महत्व
कुरूक्षेत्र को बहुत ही पवित्र तीर्थ माना जाता है, इसका हमारे वेदों, पुराणों एवं स्मृतियों में जगह-जगह में उल्लेख मिलता है। यहाँ की पौराणिक नदी संरस्वती भी अति वंदनीय है। कुरूक्षेत्र का सबसे प्रमुख आकर्षण ब्रह्म सरोवर है, सूर्यग्रहण के अवसर पर यहाँ एक विशाल मेले का आयोजन होता है जिसमें देश विदेश के लाखों लोग इस सरोवर में स्नान करके दान देकर पुण्य कमाते है।

‘सन्निहित सरोवर’
इस सरोवर का उल्लेख महाभारत तथा तमाम पुराणों में भी हुआ है। यहाँ का ‘सन्निहित सरोवर’ भी बहुत महत्व रखता है कहते है कि महाभारत के अति रक्तरंजित युद्ध के बाद पाण्डवों ने सभी दिंवगतों की मुक्ति के लिये यहाँ पर पिण्डदान किया था तभी से इस जगह में पिण्डदान का बहुत ही महत्व माना जाता है तथा प्रति वर्ष लाखों लोग अपने पूर्वजों का पिण्डदान यहाँ पर करवाते है तथा उनके मोक्ष की कामना करते है। 

बाण गंगा और श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर
कुरूक्षेत्र में स्थित बाण गंगा का अपना ही अलग महत्व है कहते है यहाँ पर शर-शैय्या पर लेटे भीष्म पितामह को प्यास लगने पर अर्जुन ने अपने बाण द्वारा धरती से जलधारा प्रवाहित कर उनकी प्यास बुझाई थी।
श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर जो दुर्गा माँ के शक्तिपीठों में है श्रद्धा एवं आस्था का बहुत बड़ा केन्द्र है यहाँ पर माँ दुर्गा का दायां टखना गिरा था। कहते है इस सिद्ध शक्तिपीठ में पाण्डवों ने महाभारत के युद्ध से पूर्व अपनी विजय के लिये माँ भद्रकाली की पूजा-अर्चना की थी। मान्यता है कि श्रीकृष्ण एवं बलराम जी का मुण्डन संस्कार भी यहीं पर हुआ था। यहाँ का स्थानेश्रर महादेव मंदिर भी श्रद्धा का प्रमुख केन्द्र है, कुरूक्षेत्र में आने वाले श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के यहाँ पर अवश्य ही दर्शन करते है।

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