Search latest news, events, activities, business...

Sunday, April 10, 2016

मन की व्यथा


मन की व्यथा सुनाकर हारे

जब से दीप जलाया है अनन्य विश्वास का
हर पल नवीनता की उमग
कुछ प्रेरणा देती है उन्मुक्त विचार
फिर भी उसे न समझ सका
यही है मानव मन की व्यथा
जीवन की गति में अपनी गति ना मिला सका
सर्व ज्ञान से दूर रहा
विनती हमारी स्वीकारो प्रभु जी
हमें भी गति की मूलता समझा दो ना
मन की व्यथा सुनाकर हारे
कृपासिन्धु अब तो दे दो अनंत ज्ञान
दर्शन तेरा निशिदिन पाऊँ सारे भेद मिटाओ
रहे सदा हम शरण तुम्हारे
ऐसी कृपा करो हे स्वामी
मन में न रहे कोई व्यथा
मन की व्यथा सुनाकर हारे ||

                                              -मधुरीता

Thanks for your VISITs

 
How to Configure Numbered Page Navigation After installing, you might want to change these default settings: