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Friday, November 10, 2017

सर्वोच्च न्यायालय से प्रदूषण माफियाओं से मुक्ति दिलाने हेतु हस्तक्षेप की अपील : दयानंद वत्स

रेजिडेंट वैलफेयर एसोसिएशन, बरवाला गांव के अध्यक्ष दयानंद वत्स ने कहा है कि हाल ही में दिल्ली में जितने प्रदूषण पर हाहाकार मचा है उससे दुगना प्रदूषण बरवाला के लोग पिछले तीन से निगल रहे हैं पर दिल्ली सरकार और नार्थ दिल्ली.नगर निगम ने आज तक कोई भी कार्रवाई प्रदूषण माफिया के खिलाफ नहीं की है। कल शाम तक भी दिन दहाड़े रोहिणी हैलीपोर्ट के साथ पडी खाली जमीन में रबड और टायर फूंके जा रहे थे। प्रदूषण माफिया यहां धडल्ले से वायु प्रदूषण फैला रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद कोई भी कार्यवाही न होना हैरान करने वाला है।

दिल्ली का बरवाला गांव पिछले तीन साल से हर रात गैस चैम्बर में तब्दील हो जाता है। रोहिणी हेलीपोर्ट से कुछ ही दूरी पर पूठखुर्द गांव के लालडोरे में स्थित 300 गज के प्लाटों में अवैध रुप से चलाई जा रही प्रतिबंधित औधौगिक इकाइयों की भट्ठियों से निकलने वाले रासायनिक धुंए से बरवाला हर.रात गैस चैम्बर में परिवर्तित हो जाता है। रात 12 बजते ही फैकटरियों की भट्ठियां धुंआ उगलना शुरु कर देती है। जिसके कारण सांस लेना भी दूभर हो गया है। बदबू और जहरीले धुएं से लोग बीमारियों से जूझ रहे है। समस्या की भयावहता को देखते हुए हमने सभी स्तरों पर समस्या को उठाया लेकिन धुंआं उगलने वाली अवैध फैकटरियों के खिलाफ आज तक कोई एकशन नहीं लिया गया। यहां रबर, टायर फूंके जा रहे है। दमघोटू वातावरण से जीना दूभर हो गया है। मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ओर उप-मुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया जी को अवगत कराया गया है लेकिन अभी तक इन प्रदूषण फैला रही फैक्टरियों को बंद नहीं कराया गया है। बरवाला गांव विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित गांव बन गया है। रासायनिक धुंऐं से लोगों की आंखों में जलन, खांसी, अस्थमा जड जमा चुके हैं। मैं स्वयं भी हर रोज इस भयावह समस्या से जूझ रहा हूं। हैरानी इस बात की जिन एजेन्सियों पर कार्यवाई करने की जिम्मेदारी है वे जानकर भी अनजान बने हुऐ हैं। दिल्ली ओर केंद्र सरकार के उन सभी लोगों को समस्या से अवगत कराया गया है जो राजधानी दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्तरदायी हैं। स्थानीय प्रशासन, क्षेत्रीय सांसद, दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, सभी संबंधित पर्यावरण मंत्रियों को पत्र लिखे गये परन्तु आज तक भी यह प्रदूषण फैला रही इकाइयां धडल्ले से चल रही हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पत्रों की पावती के पत्र तो मिले हैं लेकिन यह फैक्ट्री कब बंद कराई जांएगी पता नहीं।

श्री वत्स ने कहा कि हमसे हमारा जीने का भी अधिकार हमसे छीन लिया गया है। मासूम बच्चे, बूढे.और अन्य हजारों लोग शुद्ध हवा को भी तरस गये हैं। यहां बरवाला में एयर क्वालिटी खतरनाकतम स्तर से भी अधिक है। श्री दयानंद वत्स ने एन.जी.टी, दिल्ली हाई कोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय से अपील की है कि प्रदूषण माफियाओं के विरुद्ध कडी कार्रवाई करने के आदेश दिए जाएं। तत्काल पूठखुर्द के लालडोरे में स्थित 300 मीटर प्लाटों की प्रदूषण कारी इकाइयों को बंद कराया जाए।

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