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Sunday, February 5, 2017

देशभक्ति एवं समाज सेवा की उम्दा मिशाल हैं सतीश राज देशवाल


“देहात भी अपना, बच्चे भी अपने!
मिल-जुल कर संवारे इनके सपने!!”


जी हाँ, इसी बुलन्द विचार को जमीनी स्तर पर पूरी मेहनत एवं लगन से दिन-रात जुटे हैं हरियाणा की पावन धरती में ही जन्में भाई सतीश राज देशवाल. जिनके बारे में भारत के ग्यारवें राष्ट्रपति एवं भारत रत्न डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम ने उनके अभियान सुना एवं समझा जिसे अपने निम्न शब्दों में कुछ इस तरह पिरोया: आप भी गौर फरमाएँ:

“मुझे पूर्ण विश्वास है कि सतीश राज देशवाल द्वारा ग्रामीण विकास को समर्पित अभियान अच्छी शिक्षा विकसित करने में युवाओं को शिखर पर ले जायेगा” -डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम 

जी बिलकुल, ग्रामीण बच्चों की प्रतिभा को पहचान दिलाने तथा उन्हें प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं सतीश राज देशवाल. आइए जानते हैं सतीश राज देशवाल जी के व्यक्तित्व तथा उनके द्वारा ग्रामीण परिवेश में नई पीढ़ी के चहुमुर्खी विकास की दिशा में किए जा रहे अनूठे प्रयासों के बारें में. आज सतीश राज देशवाल एक सफल उधमी हैं लेकिन अच्छे संस्कार, देशभक्ति एवं समाजसेवा उनमे कूट कूट कर भरी है. देशवाल जी का जन्म स्वंत्रता दिवस यानि 15 अगस्त को सन 1968 गाँव खेड़ी दमकन, जिला सोनीपत, हरियाणा राज्य मेंहुआ. इनके पिता कर्ण सिंह देशवाल स्वयं पुलिस अधिकारी तथा धार्मिक प्रवति वाली माताश्री होशियारी देवी (गृहणी) के देशभक्ति, अनुशाषित दिनचर्या, अच्छे संस्कारों, आदर्शों विचारों का इनके व्यक्तित्व पर काफी प्रभाव रहा है. जिसका साक्षात् उधाहरण ही है ग्रामीण प्रतिभा विकास समिति एवं साहिल विकलांग सहायतार्थ समिति का गठन एवं ग्रामीण स्कूलों बच्चों के लिए बौद्धिक प्रतियोगिता के तहत ”हर बच्चा बन सकता है जीनियस” प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाती है विशाल प्रतियोगिता.

समाज सेवा को समर्पित अनोखा व्यक्तिव 
विशेष अभियान 
• वार्षिक शैक्षिक प्रतियोगिता के आधार पर ग्रामीण स्कूली बच्चों को आत्मविश्वासी एवं आत्मनिर्भर बनाना
• कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीति के खिलाफ मुहीम जिसके तहत बेटी बचाओ अभियान में अहम योगदान
• ग्रामीण परिवेश में उपेक्षित सैनिक परिवारों के घर घर जाकर उपहार एवं मनोबल जैसे काबिले तारीफ प्रयास
• आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की कन्याओं के विवाह आदि की व्यवस्था करना
• समाज के अनेक प्रतिभाशाली विभूतियों को विशेष सम्मान एवं प्रोत्साहित करना प्रमुखता

जी हाँ, सतीश भाई ने अपने साथियों एवं सोनीपत के सैंकड़ों स्कूलों के प्रधानचार्यों की बदौलत एक ऐसा अभियान शुरू किया जिसके तहत वर्तमान समय में सोनीपत जिले के अठारह ब्लाकों के लगभग छ: हजार स्कूलों एक लाख से भी ज्यादा बारहवीं कक्षा के बच्चों को निशुल्क: प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के दिन “हर बच्चा बन सकता है जीनियस” नामक शैक्षिणिक प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है.

स्कूली पाठ्यक्रमों पर आधारित, इस शैक्षिणिक प्रतियोगिता के अधीन वार्षिक परीक्षा में उम्दा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विशेष रूप से मुख्य सरंक्षक सतीश राज देशवाल भाई समिति के सदस्यों के संग विभिन्न स्कूलों में स्वयं जाकर लैपटॉप,टैबलेट, साईकिल, छत का पंखा, एमरजेंसी लाईट, प्रैस, प्रतीक चिन्ह, एवं आवश्यक अध्ययन सामग्री से सम्मानित एवं प्रेरित करते है.

सतीश भाई स्वयं भारत रत्न एवं हिंदुस्तान के पूर्व-राष्ट्रपति अब्दुल कलाम साहेब के व्यक्तित्व से अत्याधिक प्रभावित रहें हैं. गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति कलाम साहेब से व्यक्तिगत मुलाकात करने पर सतीश भाई ने जब अपने इस ग्रामीण क्षेत्र में इस प्रयास के विषय में अपनी सक्रियता के बारे में बताया तो तत्काल राष्ट्रपति साहेब ने भी उनकी पीठ थपथपाई. उसके बाद सतीश भाई ने अपनी टीम के सदस्यों की बदौलत ग्रामीण स्कूली बच्चों के लिए “हर बच्चा बन सकता है जीनियस” नामक शैक्षिणिक प्रतियोगिता की रफ़्तार और बढ़ा दी है. उक्त शैक्षिणिक प्रतियोगिता के माध्यम से “गाँव गाँव अलख जगाएँगे सबको शिक्षित बनाएँगे” की तर्ज पर सोनीपत जिले के लाखों ग्रामीण बच्चों को अपनी स्कूली पढाई में अव्वल बनाने, मनोबल बढ़ाने, हायर एजुकेशन, इंटरव्यू एवं नौकरी पाने में सफल बनाने में शत प्रतिशत कामयाबी मिली है जिसका श्रेय ग्रामीण प्रतिभा विकास समिति के सफलता की ओर बढ़ते मजबूत कदम की तरफ संकेत करता है. वैसे भी ग्रामीण प्रतिभा विकास समिति के सफलता की ओर बढ़ते मजबूत कदम- विजन 2020 भी इस राष्ट्रव्यापी अभियान का अत्यंत महत्वपूर्ण मूलमंत्र है.

कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई की रोकथाम के लिए भी सतीश राज देशवाल ने कई प्रशंशनीय प्रयास किए हैं. (Photo of film)

अपने देश के माटी से विशेष लगाव रखते हैं और गाँव-गाँव जाकर सैनिकों के घरों में जाकर उनके परिवारों का हाल जानना तथा उनकी जरूरतों को हरसंभव पूरा करने का जज्बा रखते हैं सतीश राज देशवाल. (Photo with Army family-distributing gifts in villages) 

सतीश राज देशवाल-देशभक्त एवं समाजसेवी के अलावा एक सफल व्यवसायी भी हैं
हरियाणवी ग्रामीण परिवेश में जन्मे तथा दिल्ली विश्वविधालय से बी.कॉम. (स्नातक) की शिक्षा ग्रहण के साथ ही युवावस्था में ही अपना व्यवसायी कैरियर शुरू कर दिया था. ये बड़ी दिलचस्प कहानी है कि किस तरह सतीश राज देशवाल ने सन 1984 में 25 रूपये भुगतान कर एक मेले में पहली बार स्टाल लगाई. अपनी माताश्री होशियारी देवी जी से सौ रूपये लेकर उस स्टाल में खर्च कर कुल 167 रूपये कमाए. बस इसी 67 रूपये के लाभ ने उन्हें मनोरजन उद्योग में ही अपना कैरियर बनाने की मजबूत नींव रख डाली. और उसके बाद तो सतीश जी ने अपने उधोग में उपलब्धियों के कई कीर्तिमान स्थापित किए. इस अपार सफलता के पीछे उनकी सकरात्मक सोच, अच्छे संस्कार, अथक लगन, आत्मनिर्भरता, अनुशासित दिन चर्या तथा अपने व्यवसाय की नवीनतम जानकारियां से अवगत रहना आदि ने उन्हें एम्यूजमेंट पार्क एंड इंडस्ट्रीज के शिखर पर पंहुचा दिया. सतीश जी की सफलताओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे आज स्प्लैश वाटर पार्क ग्रुप समूह के मालिक हैं और इस समय देश की राजधानी दिल्ली सहित प्रमुख शहरों हिसार, अहमदाबाद, ग्वालियर, रोहतक में पांच वाटर पार्क का सुचारू रूप से सञ्चालन कर रहे हैं. और इन पांच यूनिटों के माध्यम से सैंकड़ों परिवारों को रोजगार प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहें हैं.

गौरतलब है कि सतीश राज देशवाल, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतिषिठित संस्था इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ एम्यूजमेंट पार्क एंड इंडस्ट्रीज, अँधेरी, मुंबई में बतौर डायरेक्टर ऑन बोर्ड जैसे पद पर आसीन हैं.

सतीश जी का एक ही सपना है कि उनके जिले एवं आसपास के क्षेत्र का प्रत्येक बच्चा जीनियस बन देश के विकास में अहम भूमिका अदा करे. उनका एक सुझाव यह भी है कि यदि देश के हर ब्लॉक अथवा जिले स्तर पर शैक्षिक दिशा में पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से काम कर ले तो चारों तरफ शैक्षिक माहौल से देश की तरक्की अपने आप हो जाएगी.

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