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Tuesday, February 28, 2017

Blessings from Hon'ble Governor of Kerala for 2nd Media Literacy Conclave-2017


Blessings from Hon'ble Governor of Kerala for our 2nd Media Literacy Conclave-2017 to be held in MTTC, Trivandrum, Kerala from 1-3 March,2017





DELEGATES FROM UK VISITED THE INDIAN HEIGHTS SCHOOL


It is our endeavour at The Indian Heights School to provide international exposure to our students. With this line of thought, from time to time we keep organizing International Exchange Programs, and as a part of our International Exchange Program, a delegation from Whitchurch Primary School, Wales, UK visited The Indian Heights School, Sector 23, Dwarka from February 19, 2017 to February 24, 2017. The delegation was garlanded in a true Indian traditional manner followed by the floral welcome of the Guests by Ms. Madhu Gupta, Chairperson of the school and Principal, Ms. Archana Narain. The Guest teachers also introduced their school through a Power Point Presentation. A Plethora of activities were organized wherein teachers of both the schools got an opportunity to acquaint themselves with each other’s cultures, best practices and teaching methodologies followed in their respective schools, classroom observations and students & teachers interaction sessions. In order to give them a true glimpse of our rich and diverse culture a ‘Heritage Tour’ was organized and they visited to the various historical sites e.g. Red Fort, India Gate, Qutub Minar, Humayun Tomb, Jantar Mantar, Old Delhi and Rajghat. The highlight of the tour was a visit to Agra and they were spellbound and mesmerized to see the beautiful Taj Mahal. To bid them a goodbye, a scintillating cultural program was organized which enthralled our guests. Their foot tapping dance performance on the beats of Indian folk songs was enjoyed by one and all. Presentation of Mementos marked the culmination of Exchange program. This Exchange Program was a good learning experience for the teachers as well as for the students. We look forward to have more such Exchange Programs in the future. 

Received via email: THE INDIAN HEIGHTS SCHOOL

दिल्ली के युवा पत्रकार उत्कर्ष उपाध्याय को ह्यूमैनिटी एचीवर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया


उत्कर्ष मयूर पब्लिक स्कूल , आई . पी. विस्तार में दसवीं कक्षा के छात्र , ज़ी मीडिया के उद्यम एन. वाय. एस. में नवोदित पत्रकार , ऑल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सदस्य , मारवाह स्टूडियो में भी सक्रिय हैं , रचनात्मक दुनिया मीडिया अकादमी के संस्थापक स्वयंसेवक व टाइम्स ऑफ इंडिया के छात्र संस्करण का विद्यालय रिपोर्टर के तौर पर नियुक्त हैं । उत्कर्ष दो वर्ष पूर्व से विभिन्न क्षेत्रों के व्यक्तित्वों के साक्षात्कार ले चूकें हैं और अभी भी अग्रसर हैं ।

इस सम्मान समारोह में समाजसेवियों, कलाकारों, पत्रकारों सहित अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ठ योगदान करने वाले विभिन्न राज्यों से आये लोगों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ह्यूमन राईट एक्टिविस्ट श्रीमती अर्पिता बंसल मौजूद रहीं। ह्यूमैनिटी एचीवर्स अवॉर्ड से सरल समाज संगठन की संस्थापिका सोनिया गोयल को समाजसेवा क्षेत्र में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व व संचालन निवेदिता फाउंडेशन की महासचिव नीलिमा ठाकुर ने किया।

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Monday, February 27, 2017

वेजिटेबल मार्ट ने एनसीआर में रखा कदम, 100 करोड़ निवेश की योजना




-प्रेमबाबू शर्मा
देश में 50 रिटेल स्टोर खोलने के बाद वेजिटेबल मार्ट ने अब नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में कदम रख दिया है। कंपनी ने एनसीआर में अपना पहला स्टोर गाजियाबाद के इंद्रापुरम में खोला है। कंपनी की भविष्य में नोएडा, गुडगांव, फरीदाबाद के साथ ही जयपुर, आगरा जैसे स्थानों पर इस तरह के वेजिटेबल मार्ट खोलने की योजना है।
कंपनी फ्रेंचाइजी मॉडल पर भी मार्ट खोलने का अवसर दे रही है। इसके लिए कंपनी हब और रिटेल आउटलेट दो तरह के ऑप्शन उपलब्ध करा रही है। कंपनी फ्रेंचाइजी देने के बाद भी उसका प्रंबंधन अगले 10 साल तक अपने पास रखेगी। इसके पीछे कंपनी का लक्ष्य रिटेल स्टोर के बेहतर प्रबंधन के साथ ग्राहकों को वाजिब कीमत में सही चीज उपलब्ध करना है।

कंपनी ने अपने रिटेल स्टोर ऑपरेशन को एनसीआर में विस्तार देने के लिए करीब 100 करोड़ रुपए का बजट तय किया है। कंपनी का दावा है कि वेजिटेबल मार्ट में ताजी सब्जियों की कीमत दूसरे पहले से स्टोर बिग बॉस्केट या बिग बाजार से काफी कम होगी। कंपनी का दावा है कि वह अगले छह महीनों में इस मार्केट की दिशा बदल देगी। इसके लिए वह फ्रेंचाइजी पर रिटेल स्टोर देने के बाद भी अपने कर्मियों से उसका प्रबंधन कराएगी।
एनसीआर में पहला स्टोर खोलने के अवसर पर कंपनी के एमडी सुभाशिष राहा ने कहा कि हम एनसीआर में अपना पहला स्टोर खोलकर काफी खुश हैं। हम एनसीआर के मार्केट के लिए भले ही नए हैं लेकिन हम यहां के लोगों की जरूरत को भली-भांति समझते हैं। हम अपने ग्राहकों को उनकी जरूरत के हिसाब से ता फलजे, सब्जियों, दूध इत्यादि मार्केट से कम कीमत में उपलब्ध कराएंगे। हमरा पहला प्रयास है कि हम अपने ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मुहैया कराएं।

मि0 एण्ड मिस इण्डिया ग्रांड फिनाले के विजेता बने सिमरन तिवारी और कामिल खान


-प्रेमबाबू शर्मा

मिस्टर एण्ड मिस इण्डिया 2017 के ग्रांड फिनाले के विजेता बने सिमरन तिवारी और कामिल खान। शो के जज के शरद चैधरी,डायरेक्टर ड्रीम्ज प्रोडक्संश हाउस, फिल्म डायरेक्टर मधुर भण्डारकर, अभिनेत्री उर्वशी रौतेला, माॅडल, अभिनेत्री जोया अफरोज, अभिनेता रनविजय, अभिनेता करन कुंद्रा की सहमति के बाद में दोनों माॅडलों का चयन विजेता के रूप में हुआ। 
 
मिस्टर एण्ड मिस इण्डिया 2017 ग्रांड फिनाले में 35 लड़कियां और 40 लड़के ने भाग लिया। जिनका चयन प्रतिभा आधार पर सार्ट लिस्ट के द्वारा किया गया था। शरद चैधरी, डायरेक्टर ड्रीम्ज प्रोडक्संश हाउस ने बताया कि ‘यह एक ऐसा मंच है जहाॅ माॅडल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन वो अपने सपनों को जी भरके जी सकेगंे और प्रतियोगिता को जीतकर अपने आप को एक ब्रांड की तरह स्थापित कर सकेंगं ।‘

शरद चैधरी ने बताया कि ‘ड्रीम्ज प्रोडेक्स हाउस द्वारा फिल्म एंव फैशन इंडस्टी के एक नए हब की शुरूआत किया जा रहा है जिसका मकसद उभरते हुए तथा प्रतिभावान भारतीय माॅडल्स को माॅडलिंग, थियेटर, टेलीविजन तथा फिल्म के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करने के लिए एक प्लेटफार्म प्रदान करना है ।
इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों के चयन हेतु देश के 36 प्रमुख शहरों जैसे- दिल्ली, मुम्बई, पुणे, कोलकाता, चैन्नई, बैंग्लूरू, जयपुर और लखनऊ आदि में आॅडिसंश लिए गए हैं । आॅडीसंश के पश्चात सभी प्रतिभगियों की इमेज काउसंलिंग, ग्रूमिंग तथा रैम्प वाक के प्रशिक्षण दिल्ली में किया गया।

बारहवीं कक्षा के छात्र तनाव मुक्त होकर करें परीक्षा की तैयारीः दयानंद वत्स


सर्वोदय बाल विद्यालय प्रहलादपुर बांगर में आज प्रधानाचार्य श्री वी. के शर्मा की अध्यक्षता एवं शिक्षाविद् दयानंद वत्स के सान्निध्य में बारहवीं कक्षा के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की सभा का आयोजन किया गया। सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर इस बैठक का उद्देश्य छात्रों को तनावमुक्त परीक्षाओं के लिए प्रेरित करना था। इस अवसर पर प्रधानाचार्य श्री वी के.शर्मा ने कहा कि सभी छात्र मन लगाकर चौबीस में से कम कम पांच घंटे अवश्य पढें और प्रश्नों के उत्तरों का अभ्यास लिखकर भी करें। अपने खानपान का विशेष ध्यान रखें। सुबह जल्दी उठें और भोर वेला में कम से कम दो घंटे अभ्यास अवश्य करें।

अपने संबोधन में शिक्षाविद् दयानंद वत्स ने छात्रों से आग्रह किया कि वे तनावमुक्त होकर परीक्षा की तैयारी करें और भयमुक्त होकर परीक्षा देने जाऐं। श्री वत्स ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को
परीक्षा केंद्र जाने के लिए स्कूटर, मोटर साईकल आदि ना दें क्योंकि इससे दुर्घटना का खतरा बढ जाता है। एक-एक बाइक पर कई -कई छात्र बिना हैलमेट के स्पीड से चलते हैं जो अकसर साबित जानलेवा साबित होता है। प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों ने सभी छात्रों को परीक्षा के एडमिट कार्ड वितरित किए और बोर्ड परीक्षाओं के लिए अपनी शुभकामनाऐं दी।

अभिभावकों ने इस तरह की बैठक आयोजित कराने के लिए दिल्ली के शिक्षामंत्री श्री मनीष सिसोदिया की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। 12वीं के छात्र नीरज, प्रणव शर्मा, , मो. नियाज, गुलाब हसन, अरविंद अहमदअली, अजय , सौरव कुमार , सलीम मलिक और पवन कुमार ने स्कूल प्रशासन द्वारा दी गयी शुभकामनाओं के लिए सभी शिक्षकों और प्रधानाचार्य श्री वी के शर्मा और.शिक्षाविद् दयानंद वत्स का विशेष आभार जताया और परीक्षा पूर्व रखी गयी इस बैठक को छात्रोपयोगी बताया। इस अवसर पर बडी संख्या में अभिभावकों ने भाग लिया। स्कूल प्रबन्धन समिति के सदस्यों की उपस्थिति में हुई इस मीटिंग से छात्रों में अच्छा संदेश गया है।

Bagrodians shine at sports


Young sports stars of N.K.Bagrodia Public School, Dwarka have brought laurels to school at 62nd National School Games 2016-17. 34 dynamic students participated in the SGFI Games brought a proud moment for the school by representing Delhi state. The students were selected in different sports events for various categories and went through arduous training sessions under the guidance of the ingenious sports coaches.The games were held in different states .

The students showcased their acumen in a commendable manner by securing positions and winning medals in various sports events. Jeegyasa Sehrawat of class IX and Akshit Sahu of class IX won gold medals in Throwball . Rahul Tewatia of class X won silver medal in Hockey. Tanishq Gaur proved his talent in Mini Golf event by winning silver medal. Aastha Kalia of class X won silver in Thang-Ta. Dushyant of class XI in Taekwondo ,Aman Tomar of class VI in Fencing and Paras Bhalla of class VIII in Badminton won accolades by winning Bronze medals in their respective events.

The Principal of the school Dr. Rajee N. Kumar applauded the students for their exemplary performances and the Sports instructors Mr. Parveen Kumar, Mr. Manoj Kumar and Mr. Raju for their relentless efforts in rendering a proper training to all the participants.





Sunday, February 26, 2017

Practice Hair Yoga for Shiny Hair ,Happy hair comes from a happy person

Jawed Habib

Long, luscious,shiny,lustrous hair makes us feel pretty and feminine . There is very simple way to achieve thick , beautiful and voluminous hair according to renowned Hair Expert Jawed Habib . He says All one needs to do is Hair Yoga by following a healthy, balanced diet, have meals on time, drink milk, consume lots of water, spend some time with oneself (maybe a morning walk alone) and most importantly- smile for healthy, lustrous hair. Happy hair comes from a happy person.

Hair Expert Jawed Habib says that We all think good shampoos, conditioners and expensive salon treatments can make our hair healthy and beautiful. But we actually are completely unaware of the reality. Good products and treatments are definitely important for hair but only such things cannot make it healthy and beautiful. Hair care is beyond products and treatments. Understanding hair and its needs make things less complicated. Water is important for hair health. But not just drinking some 1-2 liters a day is all you need. Water for hair means drinking it well and rinsing it well. Yes drink plenty of water to make your hair hydrated and use plenty of water to rinse shampoo from it. Water plays the most important role in hair wash and other treatments. What you apply on hair has to be rinsed well finally. Use cool water for hair always. The pressure of water should be good while washing and never compromise on it's quantity. Either don't apply any hair care product or make sure you have enough water to wash it off. If you understand the water rule for hair, half of your hair problems are solved. It's simple - drink it well, rinse with it well!

Hair Expert Jawed Habib says that : Hair is hair, for youth or old. And to maintain hair in good condition it is important to understand it's needs. The problem with youth these days us too much fashion and little or wrong hair care. Following trends is good but taking care of hair is important. The main thing is to keep hair moisturized and in good shape. Young people think conditioner daily or an occasional spa treatments is enough.. No! Hair needs natural conditioning daily. Preconditioning is the answer - apply oil for 5 minutes daily before wash. Use basic oils and not blends. Wash hair with normal hair shampoo, no other shampoo is required. Cut hair regularly, which means about 8-10 weeks. No chemical experiments at home and healthy lifestyle. The crux is preconditioning and daily wash. It keeps hair healthy and beautiful. This hair care regime works for all kinds of hair & conditions. Now when it comes to styling, most young people are confused and simply follow the trends. Trends should be followed but according to the hair. Always remember trends are temporary but your hair is permanent, be wise. Work on balanced cuts. Haircut is the foundation of a good look. Don't keep the length too long, long hair is not easy to look stylish. Get color, honey blonde, hazelnut and khaki blondes are good options to get instant spark to the hair. Always go to professionals for hair styling, they know your hair more than you. So it's easy now - Preconditioning, Daily wash and balanced styling to make your hair look the best.

The only secret to wonderful hair is to keep it clean. It’s a must to wash hair everyday with a shampoo that suits that hair type. Most people believe that shampoo causes hair-loss which is not correct. Shampoos contain chemicals, but so does soap. Your scalp needs to be cleaned just the way your face does. A clean scalp prevents dandruff and greying. In case you need to use an anti-dandruff shampoo, use it just once a week says Hair Expert Jawed Habib

I believe hair grooming is a science. A hair dresser is both your doctor and your designer. He will know exactly what to do with your hair, according to your personality, skin tone and hair texture. You need a hair-cut every 6-8 weeks to remove dead and damaged hair and enable it to grow more.

Contrary to popular belief, oil has nothing to do with hair growth. Especially in south India, where hair is naturally frizzy and dense, people who have been using hair oil for ages believe that it helps hair growth and keeps it healthy. Oil does nothing but bring down the density of hair to manageable proportions — which can also be done by hair re-bonding and use of serums.

Short, shoulder-length hair can make any woman look beautiful. The shorter her hair is, the younger she looks. A hair-dresser can read and feel hair and a hair cut that originates from his or her mind and not eyes, makes the perfect cut says Hair Expert Jawed Habib

Who decides what course should I pursue in college?


Alok Saklani
Director
Apeejay School of Management

As most of us would agree, the broad purpose of primary education is to help us understand better and more logically, about the world around us, as also, how we should conduct ourselves in the society. Higher education may surely, enable us to further deepen our learning as also, prepare us to play a specific role in society.

But what kind of role ought i to play? this is a question which bothers nearly everyone until s/he finds a foothold in a career; at times, even after that. Surely, we are all exploring ourselves all the time; children would get surprised if some of them learn that their parents have realised only decades later, that their 'calling' was somewhere else; not in the career they were currently pursuing.

So who helps us understand this better? Perhaps, teachers, parents, relatives, and family friends, besides, of course, the modern 'counsellors'. Among these, parents seem to exert a greater influence on most young people, at least in the indian sub-continent, as well as in some other cultures in the orient.

And what do they tell us? Some parents are bold enough to ask their children to find out for themselves about what they want to do in life. Some others, while meaning well, tend to push their kids towards what they themselves feel is a good thing to do; perhaps something they could not achieve themselves, though they aspired to and did not succeed in.

its a good start, for the child now knows what to aim for. but the question is- is it what s/he wanted to do, or is good at, or would find fulfilment in? more often than not, the answer, sadly, is, No.

i know of a boy who went to Germany to do a graduation course in engineering since thats what his parents felt he should do, even while he wanted to enter into theatre; where he had already found some recognition and happiness.

four years later when he completed his engineering, he handed over his degree to his parents on the day of Graduation (Convocation), saying that this is what 'they' wanted and hence they should keep it. he refused the campus placement in europe and instead headed to Hollywood, where he completed a post graduate course in film making and is currently happy, though still struggling to become a film 'producer'.

then there was this daughter of a friend who wanted to get into literature but parents felt she should pursue science. unfortunately, even though the girl got her degree with good scores, and later went on to take a post graduate course in psychology, she is still looking around for something satisfying and meaningful.

yet again, there was this child who wanted to get into performing arts while his parents suggested he get into medicine, instead. half way through the program the young boy dropped out and got into making music. i understand he is now doing well, there.

being a teacher for more than three decades, i have come across scores of such examples, as some of those i know, have dropped in for a discussion about their child's 'future' at some stage or the other.

the small message for all of us here is that while we may suggest many possible careers to children we could do better by leaving them to ultimately, decide what they want to pursue in future. We are sure, as parents, we mean well, and based on our experience and exposure, know the work-place fairly well, but it would be good to remember that perhaps, we do not understand our children's competencies and dreams well enough, much as, possibly, some of them, still do not.

engineering is good as a career, so is medicine, just as is theatre, music, or writing. but not all of us would be good or happy in all of them, as a career. someone may be inclined towards performing arts, some in science, some others in writing, or even business, etc etc. Every child possesses unique abilities and the best that a parent can do is to help her/ him find that. is it a straight, simple road? i guess no. We must explore.

Khalil Gibran, the well known mystic- philosopher, in the best seller of all times, 'The Prophet' said something to the tune- that even as our children “come through us, they do not come from us”.
“For their souls dwell in the house of tomorrow, which you cannot visit, not even in your dreams”. so lets not force our dreams unto them, as they carry their own dreams, in their hearts, whose seeds have been sown by Life, itself.

राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका अहमः.फिल्म अभिनेता रजा मुराद


आल इंडिया अचीवर्स कॉंफ्रेंस के तत्वावधान में आज चाणक्यपुरी नई दिल्ली के होटल सम्राट में कार्यकारी निदेशक श्री अभिषेक बच्चन की अध्यक्षता एवं दि आर्ट आफ गिविंग फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिक्षाविद् दयानंद वत्स के सान्निध्य में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए एआईएसी आर्च आफ एक्सीलेंस, वूमन आफ सब्सटांस अवार्ड समारोह का भव्य.आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव श्री अनुरुद्ध लाल फिल्म अभिनेता रजा मुराद, राकेश बेदी और अवतार गिल ने इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय सेवाओं ओर उल्लेखनीय योगदान देने वाले समाज के अग्रणी लोगों को सम्मानित किया। शिक्षाविद दयानंद वत्स को शिक्षा के क्षेत्र में अनुकणीय कार्य के लिए ऑर्च ऑफ एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया।

चिकित्सा के क्षेत्र में यह सम्मान वरिष्ठ कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. के के कपूर को दिया गया। इस मौके पर 25 विशिष्ट महिलाओं को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए वूमन ऑफ सब्सटांस अवार्ड से नवाजा गया। सम्मानित होने वाली प्रमुख महिलाओं में पालमी सी सांघवी, तारा मल्होत्रा, अंकिता रॉय, रोमा हैदर खान, नीतू सिंघल, दलजीत कौर, नवाज सोहल, मीना महाजन, बरखा वर्षा, सपना तिवारी, अनामिका सिंह, सपना तिवारी, नीनू आनंद, दीपा देवराजन, रिचा चुटानी, मंजुला पूजा श्राफ, नवजोतकौर समायरा, रुचि रस्तोगी, श्वेता पददा, विशारद राशि गुप्ता, हरप्रीत शर्मा, भावना जोशी, रजनी पवार, अवलीन खोखर, नेहा भटनागर, सुहाशिनी सूदन माहेश्वरी, नेहा भटनागर, भावना जोशी प्रमुख हैं।
अपने संबोधन में फिल्म कभिनेता श्री रजा मुराद ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका अहम है। महिलाओं का सम्मान भारतीय सभ्यता और संस्कृति की खास विशेषता है। इसलिए सभी का यह दायित्व है कि महिलाओं का सम्मान करें।

मुख्य अतिथि श्री अनुरुद्ध लाल ने सभी सम्मानित हस्तियों को अपनी शुभकामनाऐं देते हुए कहा कि महिलाओं ने जीवन के हर क्षेत्र में अपनी मेहनत, ईमानदारी ओर समर्पण से जो नया मुकाम हासिल किया है वह सराहनीय है। शिक्षाविद् दयानंद वत्स ने इस भव्य आयोजन के लिए आल इंडिया अचीवर्स कांफ्रेंस के निदेशक श्री अभिषेक बच्चन की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण में सभी पुरुषों को महिलाओं को भरपूर सहयोग देना चाहिए तभी एक स्वस्थ समाज का सपना साकार होगा।
समारोह का संचालन आयोजक कार्यकारी निदैशक श्री अभिषेक बच्चन ने किया।

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Mr. S. S. Dogra - Mg Editor DWarka Parichay presenting the latest issue of
Education Hub-Delhi NCR to Mrs. Seema Ahuja-Principal, MBS International School

Mr. S. S. Dogra - Mg Editor DWarka Parichay presenting the latest issue of
Education Hub-Delhi NCR to Mrs.Archana Narain-Principal, The Indian Heights School

Mr. S. S. Dogra - Mg Editor DWarka Parichay presenting the latest issue of
Education Hub-Delhi NCR to Dr. Rajee N.Kumar-Principal N.K. Bagrodia Public School


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Importance of Motivation to lead a successful life

Geeta

Motivation is the characteristic that helps you achieve your goal. It is the drive that pushes you to work hard and reach whatever it is that you are after. It is the energy that gives you the strength to get up and keep going - even when things are not going your way.

Motivation can be intrinsic or extrinsic (internal and external) - With extrinsic motivation, you are motivated by rewards from an external source - you will be inspired by the recognition that you will get from external sources. Intrinsic motivation is something internal - you are motivated to reach your goal for your own internal benefits - Example - reading a book so that you can get the grade you are after versus reading a book so that you can learn something.

Intrinsic motivation is better than extrinsic motivation. But for many finding intrinsic motivation is not easy - it has to come from inside out. But once you get it, intrinsic motivation is much more powerful than the extrinsic.


Positive Motivation is where the focus is on what you want to achieve. You know where you're going. It is the result of positive thinking and will cause a sustained progress towards your goal. Holding the image of your goal in your thoughts will attract the inspiration needed to get you there. Its effect is strong and consistent and the results achieved are prolonged and steady.

Negative Motivation can best be described as wanting to get away from an existing condition. A good example is someone that has grown up in poverty and will do anything to not fall into it again. This is a strong motivation and can be an effective "Kick Start" but the results it achieves are markedly different from those of Positive Motivation. The effect can often be likened to a roller coaster ride. A classic example is the countless millionaires who make their fortunes and lose them time and time again. This type of motivation lacks the sustained results that come from Positive Motivation.

Self-motivation is a continuing process and the only way we become better and stronger is to create a few mistakes along the way and also face a few setbacks. In essence, you must take a specific sum of risk because it is the fantastic occasions and the bad that forces us to a better person.

The thing with us Personal Development types is, we're always talking about creating our best life.
We know that success is represented by different things for different people, but society teaches us that success is typically about money, position, attractiveness, power and influence There is are actually three effective ways on how you can easily motivate yourself and get things done easily.

First thing to remember, it is important to stay focused. Keep focused not on your things that you are facing with, but focus on the reward of that task once it has already been completed. Now, wouldn't that be much better if we know there is something waiting for us after completing that task? That is a pretty good motivation to think of. Keep your attention on your work and on your work alone - through this it will further help you to motivate yourself in completing the work rather than saving it for later.

Secondly, make sure that it is clear to you why you wanted to finish those things done. Preserve a clear vision of what you want. Visualize your wanted output and keep that in mind not until you are not yet done with the work. It is important that you are clear with the reason and you will simply get the motivation that you need.

And lastly, establish a daily habit in completing the things that needs to be done. Do the important tasks during a particular time every day. Make sure that you would only do important tasks during that time that you have set. Discipline yourself to follow to your own schedule, as motivation itself would always come with self-discipline below are great self motivation tips that are sure to help you become more active and productive every day.

Tips for Motivation
· Know what you want to do and what you want to achieve, be it a long-term or a short-term goal. Make sure they are achievable. Write them down and post it on your wall where you can see it every morning. Make it a habit to read them out loud. Visualize them and share them with your friends.
· Get yourself an accountability partner / coach.
· Share your dreams, plans and goals with your coach, create a realistic action plan and then get busy.
· Create a to-do list and do the stuff you've been avoiding, first.
· Consciously avoid making excuses.
When you feel an excuse climbing up onto your tongue... give yourself an uppercut.
· Have something to look forward to when you wake up each morning. Think of the happy and good things that are going to happen on that day. Doing this will surely set your mood and mindset for the rest of the day.
· Discover the best way to motivate yourself. Different people have different personalities and preferences. You just have to experiment and find out what gets you into action. You can get out and breathe some fresh air. You can play your favourite music as you do your early morning routine. You can think of a person that inspires you the most or probably a movie you have seen.
· Think less, do more.
Thinking and planning is great... but we should not over-think.
· Before going to bed, think of the great things that happened during the day. Never ponder on bad things as these will only keep you awake the whole night. Good sleep leads to good outlook the following morning. It will also keep you from waking up in a bad mood.
· Stop looking for easy and start doing effective.
· Visualize the result once the job is done. Just imagine the wonderful feeling you will have once your goals are achieved. Push yourself harder and focus on the positive results of what you are trying to reach. Nothing can beat the feeling of pride, satisfaction, and relief

Remember... if nothing changes (attitudes, decisions, behaviours), nothing changes (reality).

Saturday, February 25, 2017

मासिक हवन एवं प्रवचन - कामधेनु गोधाम


Advocate Satish Chandra Jha-National President Purvanchal Janta Party (Secular)




View full video @link: https://youtu.be/wAYqNTKN52Q

Our Managing Editor S.S.Dogra In an exclusive interview with Advocate Satish Chandra Jha-National President Purvanchal Janta Party (Secular) talking about his party manifesto & preparation about the upcoming election.

स्वास्थ्य बालों के लिए पर्याप्त पानी पीजिए।

-जावेद हबीव

लम्बे आकर्षक, चमकदार तथा चमकीले बाल महिलाओं की खुबसूरती में चार चांद लगाते है। लेकिन शायद कुछ ही महिलाओं को यह जानकारी होगी स्वास्थ्यवर्धक, संतुलित तथा उचित समय पर आहार लेने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने सुबह -सायं एक गिलास ताजा दूध पीने तथा कुछ पल अपने साथ बिताने यानि सुबह की सैर से आप अपने मनपसन्द बाल प्राप्त कर सकती है।

देश के प्रतिष्ठित हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीव के अनुसार चेहरे पर मुस्कान तथा हंसमुख स्वभाव से बालों को पौष्टिकता मिलती है तथा जिंदादिल व्यक्तियों के बालों में प्राकृतिक रूप से चमक आ जाता है।

हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीव के अनुसार आम जनमानस में सामान्यतः यह भ्रम पाया जाता है कि अच्छे शैम्पू, कंडीशनर तथा मंहगें सैलून में बालों की देखभाल से बालों की सुन्दरता में चार चांद लग जाते है जबकि अधिकांश लोग बालों के स्वास्थ्य के बारे में साधारण जानकारी भी नहीं रखते है।

देश के प्रतिष्ठित हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीव के अनुसार हालांकि अच्छे उत्पाद तथा बालों की ट्रीटमेंट बालों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। लेकिन इनके उपयोग मात्र से ही बालों की देखभाल का काम पूरा नहीं हो जाता, बालों की देखभाल स्पा, सैलून तथा उत्पादों के उपयोग से अधिक है। अपने बालों की प्राकृतिक तथा जरूरतों को समझाने से बालों की सुन्दरता को निखारने में काफी मदद मिलती है, बालों के स्वास्थ्य में पानी की अहम भूमिका रहती है। दिन में महज एक या दो लीटर पानी पीने से ही बाल सुन्दर तथा आर्कषक नहीं बन जाते । बालों के स्वास्थ्य में पानी का उपयोग पीने तथा बालों को धोने दोनों प्रकार से किया जाता है। आप जो भी उत्पाद साबुन, शैम्पू आदि बालों पर लगाते है उसे हमेशा ताजे, स्वच्छ तथा ठण्डे पानी से धो डालिए। जब भी आप बालों को धो रहे हो तो पानी उचित प्रकार होना चाहिए तथा पानी पर्याप्त मात्रा में उपयोग में लाया जाना चाहिए। जब भी आप बालों का उत्पाद प्रयोग करते है तो यह सुनिश्चित कीजिए कि बालों को धोने के लिए पर्याप्त मात्रा मे ताजा स्वच्छ ठण्डा पानी उपलब्ध है। यदि आप बालों पर पानी के नियम को सही दृटिकोण से समझ ले तो आपके बालों को आधी समस्याऐं खत्म हो जाऐगी। इसका साधारण सा फार्मूला है कि बालों के स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीजिए तथा बालों को धोने के लिए पर्याप्त मात्रा में ताजे, ठण्डे तथा स्वच्छ पानी का उपयोग कीजिए।

बच्चों, बूढ़ों तथा जवान सभी लोगों की बालों की समस्याऐं लगभग एक जैसी ही होती है। बालों को अच्छी स्थिति में रखने के लिए अपने बालों की प्रकृति को समझना अत्यधिक आवश्यक है। आजकल युवाओं की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह बालों का फैशन बहुत ज्यादा करते है तथा बालों की यह तो कतई परवाह नहीं करते या फिर गलत तरीके से बालों का उपचार करते है। बालों का फैशन कतई गलत नहीं है लेकिन बालों की देखभाल भी उतनी ही जरूरी है जितना बालों का फैशन बालों में आर्द्रता बनाए रखना तथा उन्हें उचित प्राकृति में रखना सबसे जरूरी होता है। ज्यादातर युवाओं में यह गलत धारणा होती है कि प्रतिदिन कंडीशनकर तथा समय-समय पर स्पा ट्रीटमेंट से बालों की चमक बरकरार रहती है जबकि वास्तविकता यह हे कि बालों की प्रतिदिन कंडीशनिंग की जरूरत होती है। बालों की प्रीकंडीशनिंग भी बालों के स्वास्थ्य में मददगार साबित होती है। बालों की प्रीकंडीशनिंग के लिए धोने के 5 मिनट पहले बालों में तेल की मालिश कीजिए। बालों में मिश्रित तेल की बजाय बेसिक तेल का उपयोग कीजिए। बालों केा सामान्य हेयर शैम्पू से ही धोईए तथा किसी भी अन्य प्रकार के मंहगे शैम्पू की कतई जरूरत नहीं होती। बालों की नियमित तौर पर कटिंग करवाइए तथा सामान्यतः बालों की 8-10 हफते के बाद कटिंग करवा लेनी चाहिए। बालों में किसी भी प्रकार के रसायनिक पदार्थो का कतई उपयोग नहीं करना चाहिए। जब बालों के फैशन की बात आती है तो अधिकतर युवा कन्फयूजड होते है तथा सामन्यतः विद्यमान प्रचलन को ही अपना लेते है। युवाओं को अपने बालों की प्रकृति के अनुरूप टैªंड अपनाना चाहिए। बालों के प्रति हमेशा समझदारी बरतते हुए यह याद रखिए कि फैशन अल्पकालिक होता है जबकि आपके बाल स्थाई है। हमेशा बालों को संतुलित तरीके से नियमित कटाई करवाऐं। एक अच्छा हेयरकट आपकी सुन्दरता में निखार लाता है। कभी जरूरत से ज्यादा लम्बे बाल मत रखिए क्योंकि वह लम्बें बालों से स्टाईलिश दिखना मुश्किल होता है। अपने बालों को फैशनेबल बनाने के लिए किसी प्रोफैशनल हेयर एक्सपर्ट की जरूर मदद लीजिए। क्योंकि आपके बालों को बेहतर तरीके से समझ सकते है। सारांश में प्रीकंडीशनिंग रोजाना धुलाई तथा संतुलित स्टाईलिंग से आपके बाल आकर्षक लगेंगे जिससे आपके व्यक्तित्व में भी निखार आएगा। सुन्दर तथा आकर्षक बालों के लिए बालों को साफ रखना अत्याधिक आवश्यक होता है। आपके अपने बालों की प्रकृति के अनुरूप शैम्पू के प्रयोग से पर्याप्त मात्रा में ताजे जल से बालों को रोजाना धोना चाहिए। अधिक लोगों में यह गलत धारणा होती है कि शैम्पू के प्रयोग से बालों का झड़ना शुरू हो जाता है। 

देश के प्रतिष्ठित हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीव के अनुसार शैम्पू में कुछ रसायनिक पदार्थ होते है लेकिन वह तो नहाने वाले साबुन में भी होते है। अपनी खोपड़ी को अपने चेहरे की तरह साफ रखिए। साफ खोपड़ी से बालों के असमय सफेद होने तथा रूसी को रोका जा सकता है। यदि आपको बालों की रूसी के लिए एंटी डैंडरफ शैम्पू प्रयोग करना हो तो इसे सप्ताह में मात्र एक दिन ही कीजिए।

बालों को स्वास्थ्यवर्धक तरीके से बनाए रखना एक साईंस है तथा आपका हेयर डैªसर आपको बालों का डाक्टर तथा डिजाईनर है। वह आपके व्यक्तित्व त्वचा, आदि के अनुरूप बालों का स्टाईल बनाएगा। जो कि आपको सबसे ज्यादा अनुकुल होगा । बालों से प्राकृतिक तरीके से उगने के लिए 6-8 सप्ताह बाद बालों की कटिंग कर देनी चाहिए। ताकि मृत तथा क्षतिग्रस्त बालों को हटाया जा सके।

सर्वाधिकार प्राप्त सशक्त जीडीए का गठन समय की मांग।

S.P.Gupta, IAS (Retd.)
गुडगांव -गुडगांव डेवलपमेंट अथोरिटी के गठन का निर्णय प्रदेश सरकार ने शहर के विकास, लोगों की आवश्यकताओें व आकांक्षाओं को देखते हुए आखिरकार ले ही लिया। हरियाणा विधानसभा का सत्र 27 फरवरी से शुरु हो रहा है और पूरी संभावना है कि इस सत्र में जीडीए के गठन का बिल रखकर इसको पास कराने की कोशिश की जाएगी। यहां यह बताना जरुरी है कि जीडीए के गठन की मांग वर्ष 2005 -06 में उठनी शुरु हुई थी जब मैं गुडगांव में हुडा प्रशासक था। हुडा प्रशासक के तौर पर महसूस किया कि प्रशासक के पास वित्तिय सहित अन्य शक्तियां न के बराबर थी। हुडा प्रशासक के पास केवल दस लाख रुपये तक के काम कराने की शक्ति थी। इसी कारण लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता था। इस मुद्दे को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह हुडडा से बात की और बताया कि एक साधारण नगर परिषद/ नगर पालिका, नगर निगम के प्रशासक/ कमिश्नर अपने स्तर पर एक करोड रुपये के विकास कार्य करा सकता है लेकिन हुडा प्रशासक को केवल दस लाख की ही शक्ति थी। इस बात से सहमति जताते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री हुडडा ने एक करोड रुपये के काम कराने के अधिकार हुडा प्रशासक को प्रदान करने के निर्देश उस समय के मुख्य प्रशासक श्री एसएस ढिल्ली को दिए। लेकिन उन्होंने अपने अधिकार में हनन माना और केवल पचास लाख रुपये तक के काम कराने की शक्ति तो प्रदान करने के आदेश बार बार पैरवी करने के बाद देने पडे लेकिन इसके लिए तकनीक मंजूरी की शक्ति अपने पास चंडीगढ इस तर्क के साथ रख ली की इसके लिए गुडगांव में चीफ इंजीनियर का पद होना जरुरी है। ऐसे में स्थिति वही ढाक के तीन पात वाली वहीं रही। दोबारा से मुख्यमंत्री को अनुरोध किया गया तब चीफ इंजीनियर का पद यहां सृजित किया गया और इतने में मेरा यहां से तबादला हो गया और जो गुडगांव में विकास कराने का जुनून था वह अधूरा रह गया। यह बात मैंने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री श्री राव इंद्रजीत सिंह के समक्ष रखी और एक मजबूत अथोरिटी के गठन पर चर्चा की। श्री राव इंद्रजीत ने भी इस बात से सहमति जताई और इसके लिए मैं प्रयास करुंगा। यहीं से ही गुडगांव डेवलपमेंट अथोरिटी के गठन की मांग जोर पकडने लगी। मेरा यहां इस बात का उल्लेख करने का मकसद यही है कि सत्तापक्ष के मुख्य नेताओं सहित अन्य राजनेता , एनजीओ, आरडब्ल्यूए, विशेषज्ञ दूसरे संबंधित सभी पक्ष सहित गुडगांववासी चाहते हैें कि मजबूत जीडीए बने ताकि उनकी सामस्या का समाधान यहीं पर हो जाए लेकिन चंडीगढ में बैठे अधिकारी अपनी शक्तियों को छोडना नहीं चाहते इसलिए एक मजबूत अथोरिटी का गठन एक टेढी खीर बन रहा है।

गुडगांव एक इंटरनेशनल सिटी बन चुका है। यहां पर ढांचागत विकास होना बेहद जरुरी है। इसके लिए एक मजबूत अथोरिटी का गठन होना चाहिए। मैं स्वयं मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल से अनुरोध कर चुका हूं कि गुडगांव में एकाधिकार प्राप्त अथोरिटी बने। मुख्यमंत्री भी चाहते हैं कि यहां एक मजबूत अथोरिटी का गठन हो लेकिन मैंने जब अधिकारियोें से बात की तो उन्होंने यह कहा कि इसमें तो कानूनी अडचन है। जब मैंने उनसे अनुरोध किया कि इसमें कोई अडचन नहीं है और देश में जगह जगह अथेरिटी बनी हुई या बन रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि आप हिपा में कार्यरत होने के नाते वहां कानूनविदों एवं अन्य सभी संबंधित पक्षों ( स्टेक होल्डर ) से गहर मंथन करके सरकार को रिपोर्ट भेजें ताकि इस पर जल्दी से निर्णय लिया जा सके। इसके अनुरुप हिपा में बीते वर्ष सात जुलाई को गुडगांव डेवलपमेंट अथोरिटी के गठन को लेकर संगोष्ठी का आयोजन किया गया था जिसमें देश के कानूनविदों, शहरी विकास से जुडे विशेषज्ञों, प्रशासकों, उ़द्यमियों एवं व्यवसायियों , आरडब्ल्यूए, निगम पार्षदों, जिला पार्षदों , विभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों इत्यादि ने अपने सुझाव रखे और एक मजबूत अथोरिटी के गठन पर जोर दिया। हिपा द्वारा पूर्व मुख्य सचिव श्री एमजी गुप्ता की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने एक ड्राफट तैयार कर सरकार के पास भेजा। जिसमें मुख्यमंत्री को अथोरिटी का चेयरमैन व अतिरिक्त मुख्य सचिव के रैंक के अधिकारी को वाइस चेयरमैन की नियुक्ति सहित प्लानिंग, लाइसेंस, सीएलयू, पर्यावरण सहित सभी मंजूरी /कार्य गुडगांव में ही हो। इस ड्राफट के अनुसार समस्त गुडगांव जिले का क्षेत्र व केएमपी एक्सप्रेस वे के साथ लगते अधिसूचित भूभाग को गुडगांव डेवलपमेंट अथोरिटी के कार्यक्षेत्र में रखा गया। इसके अनुसार हर समस्या का समधान स्थानीय स्तर पर ही होगा और लोगों को किसी भी काम के लिए चंडीगढ नहीं जाना पडेगा। लेकिन जब सरकार के आला अधिकारियोें को इस बारे में जानकारी हुई तब से ही इन्होंने रोडे अटकाने शुरु कर दिए और मुख्यमंत्री को गुमराह किया कि इसका ड्राफट दोबारा बनाया जाए और इसके लिए एक आईएएस श्री उमाशंकर को ओएसडी भी लगा दिया गया। यघपि इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी क्योंकि हिपा कमेटी द्वारा बना गया ड्राफट एक बडा मजबूत, व्यवहारिक एवं समय की मांग के अनुसार विदेशों एवं देश की लगभग सभी डेवलपमेंट अथोरिटियों अध्ययन आधार पर बाद तैयार किया गया था। श्री उमाशंकर एक कर्मठ, ईमानदार आईएएस अधिकारी हैं उन्होंने बडी मेहनत कर संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद एक ड्राफट तैयार किया लेकिन आला अधिकारियों के हस्तक्षेप के कारण उस ड्राफट में दिखावे के तौर पर कुछ शक्तियां इस अथोरिटी को दी गई लेकिन अधिकांश शक्तियां वो शक्तियां ज्यों की त्यों चंडीगढ में उच्चाधिकारियों के पास रख दी हैं जिससे की इस नई अथोरिटी के गठन का कोई औचित्य नहीं बनता क्योंकि हुडा पहले ही है। जब सीएलयू, लाइसेंस, योजना को अंतिम रुप देने का कार्य चंडीगढ में होंगे तो लोगों को कोई राहत नहीं मिलेगी और ना ही विकास कार्यों में तेजी आएगी। गुडगांव डेवलपमेंट अथोरिटी का नाम मेट्रोपोलिटन अथोरिटी रखना न्याय संगत नहीं है क्योंकि इससे ग्रामीण क्षेत्र, केएमपी एक्सप्रेस पर प्रस्तावित विकास में बहुत बडा धक्का लगेगा।

मेरा गुडगांव की डेवलपमेंट से सदा ही लगाव रहा है और इसके लिए वर्षों से हमारी एनजीओ पीपुल्स वाइस के माध्यम से सशक्त एवं व्यवहारिक अथोरिटी के गठन के लिए प्रयासरत रहा हूं। क्योंकि यह मामला अभी विधानसभा के समक्ष कानून बनने के लिए आना है इसलिए मेरा हरियाणा सरकार से, गुडगांव जिला की सभी चारों विधानसभा के विधायकों सहित मेवात, फरीदाबाद, झज्जर, रोहतक, सोनीपत आदि जिलों के उन विधायकों को विधानसभा में अपनी आवाज बुलंद करना चाहिए जिनके विधानसभा क्षेत्रों से केएमपी एक्सप्रेस वे होकर गुजर रहा है। ताकि इस पिछडे हुए क्षेत्र को एक सशक्त एवं व्यवहारिक डेवलपमेंट अथोरिटी बन सके जिससे इस क्षेत्र का अंतर्राष्ट्रीय स्तर का सर्वांगीण विकास हो सके। जिससे हरियाणा प्रांत की संसार के मानचित्र पर एक अलग पहचान बन सके। अगर इसमें किसी तरह की देरी की गई या इसको हल्के में लिया गया तो गुडगांव क्षेत्र ही नहीं सारे प्रांत का दुर्भाग्य होगा।

सुझाव - 1 -गुडगांव मेट्रोपोलीटन डेवलपमेंट अथोरिटी की जगह गुडगांव डेवलपमेंट अथोरिटी नाम देना उचित होगा।
2 - पूरा गुडगांव जिला का क्षेत्र व केएमपी एक्सप्रेस वे का एरिया इसमें शामिल होना चाहिए।
3 - इस अथोरिटी का मुख्यमंत्री चेयरमैन हो तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति बतौर वाइस चेयरमैन या सीईओ होनी चाहिए न कि कमिश्नर / प्रिंसीपल सेक्रेटरी के अधिकारी की। क्योंकि अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी को सरकार की सारी शक्तिय दी जा सकती हैं जिससे कि सभी कार्यों की मंजूरी स्थानीय तौर पर हो जाएं । यहां पर कई अथोरिटीयां होने के कारण दूसरे विभागों के अधिकारियों के साथ समन्वय ( कोर्डिनेशन ) करने की बडी समस्या है जो केवल इस स्तर अधिकारी की नियुक्ति से ही ठीक ढंग से हो सकती है।
4 - प्लानिंग, लाइसेंस, सीएलयू, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट आदि सारी शक्तियां अथोरिटी के पास होनी चाहिए ताकि सभी कार्य स्थानीय स्तर पर यहीं हो सकें।
5 - इंवायरमेंट एंड फारेस्ट, फायर क्लीयेंस इत्यादि सभी मंजूरी की सभी शक्तियां अथोरिटी के पास ही हो।
6 - जो ड्राफट सरकार ने प्रकाशित किया है उसके अनुसार अथोरिटी की वित्तिय स्थिति पर प्रश्नचिंह लगा हुआ है। प्रेस की खबरों के अनुसार हुडा की सभी देनदारियां इस अथोरिटी के पास आ जाएगी तो फिर यह कैसे कार्य करेगी और यदि ये देनदारी सरकार भी ले ले तो तब भी विकास कार्य के लिए इसके पास पैसा कहां से आएगा इस बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है। हिपा गठित कमेटी द्वारा जो सुझाव बिक्री कर, आबकारी, स्टांप डयूटी सहित अन्य करों का कुछ हिस्सा अथोरिटी को मिले दिए गए वे बडे ही व्यवहारिक हैं और जब तक उनका प्रावधान नहीं किया जाएगा यह अथोरिटी फाइनेंशियली वाइबल नहीं हो पाएगी और इस प्रकार किसी प्रकार का विकास करना संभव न होगा।

ऐसे में गुडगांव को यदि वास्तव में इंटरनेशनल सिटी बनाना है तो यहां पर इंटरनेशनल स्तर का इंफ्रसस्ट्रक्चर देना होगा और जिसके लिए जो एक बगैर सशक्त एवं व्यवहारिक अथोरिटी के बिना संभव नहीं है। मैं आशा करता हूं कि जिस तरह से मुख्यमंत्रीे प्रांत का सर्वांगीण विकास करने के लिए दृढसंकल्प हैं और वे उसी तरह एक मजबूत अथोरिटी के गठन के पक्ष में हैं। ऐसे में सभी मंत्रियों, विधायकों, सांसदों, बुद्धिजीवियों अन्य संगठनों का कर्तव्य है कि वे एक मजबूत , सशक्त एवं व्यवहारिक डेवलपमेंट अथोरिटी के गठन हेतू सरकार को सहयोग दें तथा आवश्यक हो तो दवाब भी बनाए। यदि अब ऐसा नहीं हुआ तो देर हो जाएगी और गुडगांव वासियों को एक और नई दंतविहीन अथोरिटी का बोझ झेलना पडेगा।

लेखक - एसपी गुप्ता, पूर्व आईएएस और हिपा द्वारा बनाई गई जीडीए ड्राफट कमेटी के महासचिव रहे है।

Happy Birthday - Shahid Kapoor


Friday, February 24, 2017

सौर उर्जा आधुनिक युग की महती आवश्यकताः पूनम सूरी


डीएवी पब्लिक स्कूल पश्चिमी पटेल नगर दिल्ली का वार्षिकोत्सव वयुना आज स्कूल प्रबन्धक प्रोफेसर जी.आर साहनी की अध्यक्षता एवं विशिष्ठ अतिथि गांधीवादी विचारक एवं चिंतक शिक्षाविद् श्री दयानंद वत्स, राष्ट्रीय चेतना के कवि प्रो. सारस्वत मोहन मनीषी एवं प्राचार्या श्रीमती रश्मि गुप्ता के सान्निध्य में धूमधाम से मनाया गया। मुख्य अतिथि डीएवी कालेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पदमश्री श्री पूनम सूरी ने दीप प्रज्जवलित कर समारोह का शुभारम्भ किया।

इस अवसर पर श्री पूनम सूरी ने स्कूल में स्थापित सौर उर्जा संयंत्र का उदघाटन किया। अपने संबोधन में श्री सूरी ने कहा कि सौर उर्जा आज के आधुनिक युग की महती आवश्यकता है। भारत में सौर उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की अपार संभावनाऐं हैं। स्कूली विद्यार्थियों को सौर उर्जा के महत्व के बारे में जागरुक
बनाया जाना चाहिए ताकि उन्हें भी वैकल्पिक उर्जा के क्षेत्र में देश को आगे ले जाने की प्रेरणा मिल सके। इस अवसर पर बडी संख्या में डीएवी प्रबंधन समिति के अधिकारी और स्कूलों के प्रधानाचार्य भी उपस्थित थे।
छात्रों ने मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। प्राचार्या श्रीमती रश्मि गुप्ता ने स्कूल की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट पढी।

Shiv Bhajan by Madhurita


Click to see video @: http://youtu.be/PWsK4PHfaC8

महापर्व शिवरात्रि

प्रो उर्मिला पोरवाल सेठिया 
बैंगलोर

महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है।शिव जिनसे योग परंपरा की शुरुआत मानी जाती है को आदि (प्रथम) गुरु माना जाता है। परंपरा के अनुसार, इस रात को ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है जिससे मानव प्रणाली में ऊर्जा की एक शक्तिशाली प्राकृतिक लहर बहती है। इसे भौतिक और आध्यात्मिक रूप से लाभकारी माना जाता है इसलिए इस रात जागरण की सलाह भी दी गयी है जिसमें शास्त्रीय संगीत और नृत्य के विभिन्न रूप में प्रशिक्षित विभिन्न क्षेत्रों से कलाकारों पूरी रात प्रदर्शन करते हैं। शिवरात्रि को महिलाओं के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। विवाहित महिलाएँ अपने पति के सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं व अविवाहित महिलाओं भगवान शिव, जिन्हें आदर्श पति के रूप में माना जाता है जैसे पति के लिए प्रार्थना करती हैं। परंपरा अनुसार सभी त्योहार को मनाते अवश्य है परंतु उससे जुड़े प्रश्नों उत्तर भी खोजते रहते हैं उन्ही में से कुछ प्रश्नों के उत्तर आलेख के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

सर्वप्रथम मन में प्रश्न उठता है कि शिवरात्रि से क्या आशय है-शिवरात्रि वह रात्रि है जिसका शिवतत्त्व से घनिष्ठ संबंध है। भगवान शिव की अतिप्रिय रात्रि को शिव रात्रि कहा जाता है। शिव पुराण के ईशान संहिता में बताया गया है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में आदिदेव भगवान शिव करोडों सूर्यों के समान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए थे-

फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि।
शिवलिंगतयोद्भूत: कोटिसूर्यसमप्रभ:॥

इसलिए फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा जाता है। कई स्थानों पर यह भी माना जाता है कि शिवरात्रि भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती की पूजा का पावन दिन जिसमें उनके विवाह का उत्सव मनाया जाता हैं । इसी दिन भगवान शिव का विवाह हुआ था | तीनों भुवनों की अपार सुंदरी तथा शीलवती गौरां को अर्धांगिनी बनाने वाले शिव, प्रेतों व पिशाचों से घिरे रहते हैं। उनका रूप बड़ा अजीब है। शरीर पर मसानों की भस्म, गले में सर्पों का हार, कंठ में विष, जटाओं में जगत-तारिणी पावन गंगा तथा माथे में प्रलयंकर ज्वाला है। बैल को वाहन के रूप में स्वीकार करने वाले शिव अमंगल रूप होने पर भी भक्तों का मंगल करते हैं और श्री-संपत्ति प्रदान करते हैं। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों ने से महाशिवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

फिर प्रश्न उठता है कि शिवरात्रि या शिवचौदस नाम ही क्यों?
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की महादशा यानी आधी रात के वक़्त भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे, ऐसा ईशान संहिता में कहा गया है। इसीलिए सामान्य जनों के द्वारा पूजनीय रूप में भगवान शिव के प्राकट्य समय यानी आधी रात में जब चौदस हो उसी दिन यह व्रत किया जाता है। इसलिए इस आधार पर यह नाम रखा गया।

यह प्रश्न उठना भी स्वाभाविक है कि शिवलिंग क्या है?
वातावरण सहित घूमती धरती या सारे अनंत ब्रह्माण्ड का अक्स ही लिंग है। इसीलिए इसका आदि और अन्त भी देवताओं के लिए भी अज्ञात है, साधारण जनों की क्या बिसात। सौरमण्डल के ग्रहों के घूमने की कक्षा ही शिव तन पर लिपटे सांप हैं।

मुण्डकोपनिषद के कथानुसार सूर्य, चांद और अग्नि ही आपके तीन नेत्र हैं। बादलों के झुरमुट जटाएं, आकाश जल ही सिर पर स्थित गंगा और सारा ब्रह्माण्ड ही आपका शरीर है। शिव कभी गर्मी के आसमान (शून्य) की तरह कर्पूर गौर या चांदी की तरह दमकते, कभी सर्दी के आसमान की तरह मटमैले होने से राख भभूत लिपटे तन वाले हैं। यानी शिव सीधे-सीधे ब्रह्माण्ड या अनन्त प्रकृति की ही साक्षात मूर्ति हैं।

मानवीकरण में वायु प्राण, दस दिशाएँ, पंचमुख महादेव के दस कान, हृदय सारा विश्व, सूर्य नाभि या केन्द्र और अमृत यानी जलयुक्त कमण्डलु हाथ में रहता है।

लिंग शब्द का अर्थ चिह्न, निशानी या प्रतीक है। शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है। स्कन्द पुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है । धरती उसका पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा गया है।

शिवलिंग क्या है यह जानने के पश्चात यह भी जानना आवश्यक है कि शिवलिंग मंदिरों में बाहर क्यों होता है?
जनसाधारण के देवता होने से, सबके लिए सदा गम्य या पहुँच में रहे, ऐसा मानकर ही यह स्थान तय किया गया है। ये अकेले देव हैं जो गर्भगृह में भक्तों को दूर से ही दर्शन देते हैं। इन्हें तो बच्चे-बूढे-जवान जो भी जाए छूकर, गले मिलकर या फिर पैरों में पड़कर अपना दुखड़ा सुना हल्के हो सकते हैं। भोग लगाने अर्पण करने के लिए कुछ न हो तो पत्ता-फूल, या अंजलि भर जल चढ़ाकर भी खुश किया जा सकता है।

शिव-पूजा के रूप में हम शिव-लिंग की पूजा करते क्यों हैं। इसका क्या रहस्य है यह जानना भी विषय की आवश्यकता है शिव पुराण, लिंग पुराण एवं स्कंद पुराण में लिंगोत्पत्ति का विस्तार से वर्णन है- स्कंद पुराण में कथा है-वर्तमान श्वेत वाराहकल्प से जब देवताओं की सृष्टि समाप्त हो गई। युग के अंत में स्थावर जंगम सब सूख गए। पशु-पक्षी, मनुष्य, राक्षस, गंधर्व सब सूर्य के ताप से जल गए। सारी सृष्टि जल मग्न हो गई। सब दिशाओं में अंधेरा छा गया। ऐसे समय में ब्रह्माजी ने भगवान विराट को नारायण रूप से क्षीर सागर में शयन करते देखा। ब्रह्माजी ने नारायण को जगाया। भगवान नारायण ने ब्रह्माजी को बेटा कह कर पुकारा। ब्रह्माजी ने क्रोधित होकर पूछा-तुम हौन हो! मुझे बेटा कहने वाले ? में तो पितामह हूँ। भगवान विष्णु ने समझाया कि हमीं सृष्टि के कर्ताधर्ता हैं तुम्हें तो मेंने ही सृष्ट किया है। इस पर दोनों में वर्षों-वर्षों तक विवाद होता रहा, युद्ध होता रहा। इसी समय उनके सामने प्रचण्ड अग्नि का एक महा स्तंभ प्रकट हुआ जो ऊपर-नीचे अनादि और अनन्त था। दोनों ने इसे ही झगड़े का निर्णायक समझा। दोनों ने निर्णय किया-ब्रह्मा स्तंभ के ऊपरी हिस्से का पता लगाएं तथा विष्णु नीचे के भाग का। ब्रह्मा ने हंस का रूप धारण किया तथा विष्णु ने बाराह का रूप धारण किया। दोनों ने हजार वर्ष तक उस ज्योति-स्तंभ का अंत पा लेने की चेष्टा की, पर पार नहीं पा सके। अन्त में हार कर उस ज्योतिर्लिंग की दोनों ने प्रार्थना की, पूजा की। भगवान शिव प्रकट हुए तथा उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रह्मा, विष्णु एवं रुद्र तीनों की उत्पत्ति महेश्वर के अंश से ही होती है। तीनों अभेद हैं, तीनों समान हैं। इसीलिए शिव-पूजा के रूप में हम शिव-लिंग की पूजा करते हैं।

यह जानना भी बहुत आवश्यक है कि शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ता है?
रचना या निर्माण का पहला पग बोना, सींचना या उडेलना हैं। बीज बोने के लिए गर्मी का ताप और जल की नमी की एक साथ जरुरत होती है। अत: आदिदेव शिव पर जीवन की आदिमूर्ति या पहली रचना, जल चढ़ाना ही नहीं लगातार अभिषेक करना अधिक महत्त्वपूर्ण होता जाता है। सृष्टि स्थिति संहार लगातार, बार–बार होते ही रहना प्रकृति का नियम है। अभिषेक का बहता जल चलती, जीती-जागती दुनिया का प्रतीक है।

जल चढ़ाने के गूढ़ अर्थ को समझने के पश्चात यह भी जानना आवश्यक है कि बेल (बिल्व) पत्र का क्या महत्त्व होता है।
बेल (बिल्व) के पत्ते श्रीशिव को अत्यंत प्रिय हैं। शिव पुराण में एक शिकारी की कथा है। एक बार उसे जंगल में देर हो गयी, तब उसने एक बेल वृक्ष पर रात बिताने का निश्चय किया। जगे रहने के लिए उसने एक तरकीब सोची- वह सारी रात एक-एक कर पत्ता तोडकर नीचे फेंकता जाएगा। कथानुसार, बेलवृक्ष के ठीक नीचे एक शिवलिंग था। शिवलिंग पर प्रिय पत्तों का अर्पण होते देख, शिव प्रसन्न हो उठे। जबकि शिकारी को अपने शुभ कृत्य का आभास ही नहीं था। शिव ने उसे उसकी इच्छापूर्ति का आशीर्वाद दिया। यह कथा न केवल यह बताती है कि शिव को कितनी आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है, बल्कि यह भी कि इस दिन शिव पूजन में बेल पत्र का कितना महत्त्व है।बेल के तीन पत्र हमारे लोभ, मोह, अहंकार के प्रतीक हैं, जिन्हें विसर्जित कर देना ही श्रेयस्कर है।

भारत में शिवरात्रि अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग प्रकार से मनाई जाती है जिसके बारे में उल्लेख करना भी प्रासंगिक लगता है।
मध्य भारत में शिव अनुयायियों की एक बड़ी संख्या है। महाकालेश्वर मंदिर, (उज्जैन) सबसे सम्माननीय भगवान शिव का मंदिर है जहाँ हर वर्ष शिव भक्तों की एक बड़ी मण्डली महा शिवरात्रि के दिन पूजा-अर्चना के लिए आती है। जेओनरा,सिवनी के मठ मंदिर में व जबलपुर के तिलवाड़ा घाट नामक दो अन्य स्थानों पर यह त्योहार बहुत धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है ।

कश्मीर में कश्मीरी ब्राह्मणों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। यह शिव और पार्वती के विवाह के रूप में हर घर में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के उत्सव के 3-4 दिन पहले यह शुरू हो जाता है और उसके दो दिन बाद तक जारी रहता है।

दक्षिण भारत में महाशिवरात्रि आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के सभी मंदिरों में व्यापक रूप से मनाई जाती है।
बांग्लादेश में हिंदू महाशिवरात्रि मनाते हैं। वे भगवान शिव के दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने की उम्मीद में व्रत रखते हैं। कई बांग्लादेशी हिंदू इस खास दिन चंद्रनाथ धाम (चिटगांव) जाते हैं। बांग्लादेशी हिंदुओं की मान्यता है कि इस दिन व्रत व पूजा करने वाले स्त्री/पुरुष को अच्छा/अच्छी पति या पत्नी मिलती है। इस वजह से ये पर्व यहाँ खासा प्रसिद्ध है।

नेपाल में शिवरात्रि विशेष रूप से पशुपति नाथ मंदिरों में व्यापक रूप से मनायी जाती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर काठमांडू के पशुपतिनाथ के मन्दिर पर भक्तजनों की भीड़ लगती है। इस अवसर पर भारत समेत विश्व के विभिन्न स्थाननों से जोगी, एवम्‌ भक्तजन इस मन्दिर में आते हैं।

इस प्रकार पारंपरिक विभिन्नता होते हुए भी महाशिवरात्रि सभी प्रांतों में समान महत्व रखती है।इसलिए कहा गया है-

‘अहं शिवः शिवश्चार्य, त्वं चापि शिव एव हि।
सर्व शिवमयं ब्रह्म, शिवात्परं न किञचन।।

अर्थात मैं शिव, तू शिव सब कुछ शिव मय है। शिव से परे कुछ भी नहीं है। जो सृष्टि में है वही पिण्ड में है। इसीलिए कहा गया है- ‘यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे।’
गहनता पूर्वक विचार करे तो शिव का अर्थ ही होता है श्शुभ।श् और शंकर का अर्थ होता है, कल्याण करने वाले। इस आधार पर जीवन का मूल उद्देश्य है-शिवत्व की प्राप्ति। उपनिषद् का आदेश है -

श्शिवो भूत्वा शिवं यजेतश्

अर्थात शिव बनकर ही शिव की पूजा करें। निश्चित रूप से उन्हें प्रसन्न करने के लिए मनुष्य को शिव के अनुरूप ही बनना पड़ेगा।
अब प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि-हम शिव कैसे बनें एवं शिवत्व को कैसे प्राप्त करें ? इसी का उत्तर है यह ‘ऊँ नमः शिवाय’ का मंत्र। ‘ऊँ नमः शिवाय’ यह एक मंत्र ही नहीं महामंत्र है। यह महामंत्र इसलिए है क्यूंकि यह आत्मा का जागरण करता है। हमारी आध्यात्मिक यात्रा इससे सम्पन्न होती है। यह किसी कामना पूर्ति का मंत्र नहीं है। यह वह मंत्र है जो कामना को समाप्त कर सकता है, इच्छा को मिटा सकता है। एक मंत्र होता है कामना की पूर्ति करने वाला और एक मंत्र होता है कामना को मिटाने वाला। दोनों में बहुत बड़ा अन्तर होता है। कामना पूर्ति और इच्छा पूर्ति का स्तर बहुत नीचे रह जाता है। जब मनुष्य की ऊर्ध्व चेतना जागृत होती है तब उसे स्पष्ट ज्ञान हो जाता है कि संसार की सबसे बड़ी उपलब्धि वही है, जिससे कामना और इच्छा का अभाव हो सके।

उदाहरण स्वरूप विषय से संबंधित एक कहानी याद आती है- एक अत्यन्त गरीब के पास एक साधु आया। वह व्यक्ति गरीब तो था पर था संतोषी एवं भगवान का अटूट विश्वास रखने वाला। उसकी गरीबी को देखकर साधु ने करुणार्द्र होकर उसे मांगने के (कुछ भी) लिए कहा, लेकिन गरीब व्यक्ति ने कुछ भी नहीं मांगा। तो साधु बोला कि मैं किसी को देने की सोच लेता हूं उसे पूरा करना मेरा कर्तव्य समझता हूं। अतः मैं तुझे पारस दे देता हूं जिससे तुम अपनी गरीबी को दूर कर सकोगे। तब उस गरीब व्यक्ति ने निवेदन किया, ‘हे महाराज। मुझे इन सांसारिक सुखों की चाहना नहीं है। मुझे तो वह चाहिए जिसे पाकर आपने पारस को ठुकराया है जो पारस से भी ज्यादा कीमती है वह मुझे दो।’

स्पष्ट है जब व्यक्ति के अन्तर की चेतना जाग जाती है तब वह कामना पूर्ति के पीछे नहीं दौड़ता, बल्कि उस मंत्र की खोज करता है जो कामना को काट दे।‘ ऊँ नमः शिवाय’ इसीलिए महामंत्र है कि इससे इच्छा की पूर्ति नहीं होती अपितु इच्छा का स्रोत ही सूख जाता है। जहां सारी इच्छाएं समाप्त, सारी कामनाएं समाप्त, वहां व्यक्ति निष्काम हो जाता है। पूर्ण निष्काम भाव ही मनुष्य का प्रभु स्वरूप है। इस मंत्र से ऐहिक कामनाएं भी पूरी होती हैं किन्तु यह इसका मूल उद्देश्य नहीं है। इसकी संरचना आध्यात्म जागरण के लिए हुई है, कामनाओं की समाप्ति के लिए हुई है।

यह मंत्र महामंत्र इसलिए ही है कि इसके साथ कोई मांग जुड़ी हुई नहीं है। इसके साथ केवल जुड़ा है - आत्मा का जागरण, चैतन्य का जागरण, आत्मा के स्वरूप का उद्घाटन और आत्मा के आवरणों का विलय। जिस व्यक्ति को परमात्मा उपलब्ध हो गया, जिस व्यक्ति को आत्म जागरण उपलब्ध हो गया, समझो उसे सब कुछ उपलब्ध हो गया, कुछ भी शेष नहीं रहा। जहां इतनी बड़ी स्थिति होती है वहां सचमुच यह मंत्र महामंत्र बन जाता है।‘

‘‘ओम्’ शब्द पूर्ण शब्द है। ओम् में अ, उ, म तीन अक्षर हैं। इन तीन ध्वनियों के मेल से ‘ओम’ बनता है। इसका प्रथम अक्षर ‘अ’ सभी शब्दों का मूल है, चाहे शब्द किसी भी भाषा का हो। ‘अ’ जिव्हा मूल अर्थात् कण्ठ से उत्पन्न होता है। ‘म’ ओठों की अन्तिम ध्वनि है। ‘उ’ कण्ठ से प्रारम्भ होकर मुंह भर में लुढ़कता हुआ ओठों में प्रकट होता है। इस प्रकार ओम् शब्द के द्वारा शब्दोच्चारण की सम्पूर्ण क्रिया प्रकट हो जाती है। अतः हम कह सकते हैं कि कण्ठ से लेकर ओंठ तक जितनी भी प्रकार की ध्वनियां उत्पन्न हो सकती है, ओम में उन सभी ध्वनियों का समावेश है। फिर इन्ही ध्वनियों के मेल से शब्द बनते हैं। अतः ओम् शब्दों की समष्टि है।

अब महामंत्र के प्रथम भाग ‘ऊँ’ की उच्चारण के पश्चात् यह देखना है कि इस महामंत्र में ‘नमः शिवाय’ शब्दों का समावेश करने का क्या प्रयोजन है। नमः शब्द नमस्कार का ही छोटा रूप है। यह महामंत्र नमस्कार मंत्र भी है। प्रणव की अवधारणा में कि ‘मैं ब्रह्म हूं’ की साधना करते-करते साधक कहीं अहंकार का शिकार न हो जाए, इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ‘नमः शिवाय’ शब्दों के माध्यम से विनम्र समर्पण है। अहंकार एवं ममकार जब तक विलीन नहीं होते तब तक हमारी सीमा समाप्त नहीं हो सकती। सान्तता समाप्त हुए बिना अनन्तता की अनुभूति नहीं होती। अनन्त की अनुभूति के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है - अहंकार का और ममकार का विलय।

‘नमः शिवाय’ नमन है, समर्पण है-अपने पूरे व्यक्तित्व का समर्पण। इससे अहंकार विलीन हो जाता है। जहां नमन होता है वहां अहंकार टिक नहीं सकता। अहंकार निःशेष और सर्वथा समाप्त। शिव के प्रति नमन्, शिव के प्रति हमारा समर्पण, एकीभाव जैसे-जैसे बढ़ता है, भय की बात समाप्त होती चली जाती है। भय तब होता है जब हमें कोई आधार प्राप्त नहीं होता। आधार प्राप्त होने पर भय समाप्त हो जाता है। साधना के मार्ग में जब साधक अकेला होता है, तब न जाने उसमें कितने भय पैदा हो जाते हैं किन्तु जब ‘नमः शिवाय’ जैसे शक्तिशाली मंत्र का आधार लेकर चलता है तब उसके भय समाप्त हो जाते हैं। वह अनुभव करता है कि मैं अकेला नहीं हूँ, मेरे साथ शिव है।

एक वृतांत है-साधक के पास एक व्यक्ति ने कहा, ‘आप अकेले हैं, मैं कुछ देर आपका साथ देने के लिए आया हूँ। साधक ने कहा, ‘मैं अकेला कहां था ? तुम आए और मैं अकेला हो गया। मैं मेरे प्रभु के साथ था।’

इस प्रकार ‘नमः शिवाय’ शिव के प्रति नमन, शिव के प्रति समर्पण, शिव के साथ तादात्म्य है। यह अनुभूति अभय पैदा करती है।

एक बार रमण महर्षि से पूछा गया - ‘ज्ञानी कौन? उन्होंने ‘उत्तर दिया जो अभय को प्राप्त हो गया हो।’स्पश्ट है कि ‘नमः शिवाय’ अभय के द्वारा ज्ञान की ज्योति जलाता है। अतः मंत्र सृष्टा ऋषियों ने ‘ऊँ’ के साथ नमः शिवाय संयुक्त कर ‘ऊँ’ रूपी ब्रह्म को ‘शिव’ रूपी जगत के साथ मिलाया है।

निष्कर्षत:अध्यात्म की शैव-धारा में ‘ऊँ नमः शिवाय’ एक महामंत्र है। इस महामंत्र की सिद्धि जीवन की सिद्धि है। इस मंत्र की साधना से भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों उपलब्धियां प्राप्त होती है। आवश्यकता है उसे अपना कर अनुभव करने की। गुरु लोगों के मुखारविन्द से, स्वाध्याय एवं स्वानुभूति से जो निष्पत्तियां आई हैं, उन्हीं का निरूपण करने के पश्चात सारांश यही है कि- शिव ही र्स्वस्व हैं। ऐसे शिव को छोड़कर हम किसकी पूजा करें ! इनकी पूजा उनके गुणों के माध्यम से ही की जा सकती है इसलिए बस यही कामना है कि - हम सब इसी शिव में ही रमण करें। इसका ही ध्यान करें और अंत में इसी में ही लय हो जाएं। ऊँ नम: शिवाय ।।।।।

Happy Mahashivratri


Happy Birthday - Pooja Bhatt


Thursday, February 23, 2017

Graduation Ceremony for Nursery & KG held in MBS International School


Dwarka Parichay News Desk
23rd of February 2017: Springtide-the colorful festival of spring was held with the traditional lighting of lamp at MBS International School, Dwarka where the little MBSians of Nursery and KG put up a spectacular show of dances and skits in the school lawns.

The Graduation Ceremony of Kindergartens was witnessed for the success of students graduating from KG to class I, moving confidently in the direction of their dreams.

It was the conclusion of one chapter, yet the beginning of another. In the said ceremony, Ms. Vanika Kharbanda & Ms. Kanchan-Parents also shared their good experience with the school teachers & management. Mrs.Seema Ahuja-Director-Academics & Administration, Mr.Atul Wadhawan-Principal, Mrs.Vandana Khanna-HM Our Managing Editor S.S.Dogra was the Chief Guest of the Graduation Ceremony. In the end, , Ms. Sangeeta-Coordinator paid the vote of thanks. The whole ceremonial event was nicely anchored by Ms. Lakshmi.

View full album :- 

आईपीयूए ने 5 वीं पॉलीयूरेथेन एक्जीबिशन एंड कॉन्फ्रेंस इन इंडिया की घोषणा की

-प्रेमबाबू शर्मा
इंडियन पॉलीयूरेथेन एसोसिएशन (आईपीयूए) ने मार्च 8 से 10 मार्च तक इंडिया एक्सपो सेंटर, ग्रेटर नोएडा, नई दिल्ली में आयोजित किए जानेवाले पीयू टेक 2017 एग्जीबिशन एंड कॉन्फ्रेंस के 5 वें संस्करण की पेशकश की घोषणा मुकेश भुता,अध्यक्ष एक्सपैंडेड पॉलीमर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड ने प्रेसवार्ता के दौरान की।
तीन दिवसीय पीयू टेक एक्जीबिशन में 250 से अधिक प्रदर्शनकर्ता जो मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी और बाजारों के व्यापक विकास के लिए कच्चे माल के उत्पादकों, साजो-सामान के आपूर्तिकर्ताओं, उपभोक्ताओं और उद्योग मुहैया कराने के लिए मिलकर साधन प्रस्तुत करेंगे।

इस संस्करण का विषय है ‘फ्यूचरिस्टिक पॉलीयूरेथेन ’। जब पॉलीयूरेथेन की प्रति व्यक्ति खपत की बात आती है तो भारत को अभी भी बहुत छोटा आँका जाता है। जहाँ इन पदार्थों का इतिहास 75 वर्ष पुराना है, भारतीय उद्योग ने मात्र 40 वर्षों से इसका लाभ उठाना शुरू किया है। हालाँकि, देश का आर्थिक और सामाजिक वातावरण आज एक उज्ज्वल और भेदक भविष्य के विश्वास के साथ बेहद सकारात्मक वृद्धि के लिए तैयार है जो एक उद्यमी जनता के लिए लाभकारी रोजगार और जीविका प्रदान करता है। इस साल, भारत में और विदेशों में सभी हितधारकों इसमें शामिल हैं और अब तक का सबसे बड़ा और सबसे अच्छा आयोजन होने वाला है।

‘पॉलीयूरेथेन एक डिजाइनरों का पॉलीमर है और जहाँ तक प्रौद्योगिकीविदों के लिए विशिष्ट अंतिम उत्पादों को रासायनिक तरीके से डिजाइन और विकसित करना संभव बनाने का सवाल है, इसका कोई सानी नहीं है। पीयूटेक 2017 में हमारा उद्देश्य है उद्योग को जागरूक बनाना और पॉलीयूरेथेन के इस्तेमाल वाले अनुप्रयोगों को बढ़ाना और इस उद्योग के लिए टेक्नोलॉजी को सहज बनाना पीयूटेक इंडियन पॉलीयूरेथेन एसोसिएशन का एक प्रमुख आयोजन है जिसका मकसद है प्रधान रूप से समाज में पॉलीयूरेथेन के योगदान की समृद्ध पृष्ठभूमि की विशेषताओं को दर्शाना। इस त्रैवार्षिक कार्यक्रम दुनिया के इस हिस्से में सबसे बड़ा है, एकमात्र ऐसा आयोजन जिसका संचालन एक उद्योग के संघ द्वारा किया जाता है और इसके सृजन और क्रियान्वयन में विश्व के सभी प्रमुख व्यक्तित्व शामिल हैं। 2005 से हो रहे, पीयूटेक की अनूठी खासियत यह है कि यह भारत में उद्योग के द्वारा ही आयोजित उद्योग की प्रदर्शनी है।

इस संस्करण का विषय है ‘फ्यूचरिस्टिक पॉलीयूरेथेन ’। जब पॉलीयूरेथेन की प्रति व्यक्ति खपत की बात आती है तो भारत को अभी भी बहुत छोटा आँका जाता है। जहाँ इन पदार्थों का इतिहास 75 वर्ष पुराना है, भारतीय उद्योग ने मात्र 40 वर्षों से इसका लाभ उठाना शुरू किया है। हालाँकि, देश का आर्थिक और सामाजिक वातावरण आज एक उज्ज्वल और भेदक भविष्य के विश्वास के साथ बेहद सकारात्मक वृद्धि के लिए तैयार है जो एक उद्यमी जनता के लिए लाभकारी रोजगार और जीविका प्रदान करता है। इस साल, भारत में और विदेशों में सभी हितधारकों इसमें शामिल हैं और अब तक का सबसे बड़ा और सबसे अच्छा आयोजन होने वाला है।

भविष्य सुनहरे अवसरों के बीच अनिश्चितताओं से सजा हुआ है। पॉलीयूरेथेन चाँदी की किनारियाँ हैं। भविष्य की हमारी इमारतों को ऊर्जा के प्रति अधिक से अधिक सजग होने की आवश्यकता है। हमारी अधिक से अधिक गाड़ियों को हमें अक्षय तरीके से और कुशलता के साथ लंबी दूरी तक ले जाने की जरूरत है। हमारे अधिकतर जूतों और गद्दों में या तो बायो आधारित या अक्षय कच्चे माल का इस्तेमाल होना चाहिये।

इसके अलावा, इस कार्यक्रम को एक उद्यमी या एक प्रोसेसर या एक अच्छी तरह से स्थापित ग्राहक या यहाँ तक कि एक छात्र की जिज्ञासा का जवाब देने में सक्षम होने के लिए तैयार किया गया है। इस शो में भाग लेने के लिए प्राप्त हुई प्रतिक्रिया और पंजीकरणों ने पहले ही यह संकेत दे दिया है कि पॉलीयूरेथेन का अति-व्यापक वर्णक्रम ढेरों विचारों और समाधानों के साथ उपलब्ध होगा।

इस बार, आईपीयूए विशेष तौर पर अपने प्रयासों की एक कड़ी प्रस्तुत करेगा। वर्चुअल टेक सेंटर। अनुसंधान को इस उद्योग से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास। संघ ने इसकी आवश्यकता को महसूस किया और यह बेबाक कदम उठाया, जिसे इस शो में प्रदर्शित किया गया है। प्रक्रियाओं, प्रवृत्तियों और स्थिरता में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के बारे में जानने के लिए तकनीकी सत्र। इंडिया इंसुलेशन फोरम (आईआईएफ) और अभी हाल ही में शुरू किया गया स्प्रे फोम अलायन्स ऑफ इंडिया (एसएफएआई)। ये दो प्रयास खाद्य श्रृंखलाओं में और भवनों में ऊर्जा के नुकसान को घटाने के उद्देश्य से इस उद्योग और इसके पदार्थों में स्फूर्ति का संचार करेंगे।

Wednesday, February 22, 2017

AIKGA Two day Golden year spring festival on round the year gardening

The All India Kitchen Garden Association (AIKGA) which is celebrating its 50th anniversary this year is organising its annual two day Vegetable, Fruit and Flower show with the theme ‘Gardening through out the year‘ on March 4 & 5, 2017 at JCO Club, Defence Colony.

“This year AIKGA has shifted the focus and theme of the show on Eco-friendly gardening through out the year as this trend is becoming popular world wide for growing vegetables ,fruits and herbs round the year." said Ms Bella Gupta, Secretary, All India Kitchen Garden Association (AIKGA) .

“ During the show We will explore a full year in the vegetable garden, namely how to extend and smooth transition between each of the seasons. We will cover topics such as preparing for spring, selecting vegetable varieties, succession planting, organic methods and winter gardening. The calendar is still in winter, but the weather is teasing spring. With spring, those cool-weather vegetables that we love to consume can be grown in our gardens. Turnip greens, mustard, lettuce, spinach, kale, collard greens, broccoli and cabbage are topping this list of favorites.” Said Ms Gupta.

“Growing your own vegetables is both fun and rewarding. All you need is healthy soil and some seeds. But in recent past Kitchen gardening trends range from clean, healthy living with fewer chemicals and more organic food to “sound-scaping” with trees to buffer sirens and birds to bring song. Whatever you’re growing, wherever you’re growing it, the ability to garden year-round just makes this category so much more relevant. And access to healthy food, year-round, will be a game-changer. New technology makes growing 365 days a year easy, affordable and convenient,”said Ms Gupta.

“For instance, indoor gardening – growing under lights in soil, hydroponically or aquaponically (growing plants along with fish) – is becoming more common. From growing arugula (rocket salad leaves) to growing traditionally medicinal plants like tulsi, carom (ajwain), turmeric and vegetables helps one get clean fresh food with growing concept of, pick and plate every season. From herbal tea gardens on the window sill and healing herbs under lights to vitamin-packed microgreens on the kitchen counter, medicinal gardens are blooming indoors. Many Indians are taking to the eat-the-food-you-grow idea and that appears to be bringing world cuisines to mamma’s kitchens. This is being achieved by creating cosmopolitan kitchen Gardens -a progression from growing Indian staples like coriander, mint and green chillies. These modern gardeners are investing in seeds and potted herbs and plants not only during international travels but during visits to markets including like Food Bazar selling potted plants and local nurseries.” She added.

“ Year round Eco-gardening also includes concept of encouraging growth of birds and bee friendly plants, use of home grown compost and used tea fertilizers, use of discarded plastic bottles and containers, rain water harvesting, use of Aquaponics. Besides eco gardening, the festival will also focus on roof top farming ,which helps provide the decorative benefit, food, temperature control, hydrological benefits, architectural enhancement, recreational opportunities, and in large scale it may even have ecological benefits. The practice of cultivating food on the rooftop of buildings is becoming popular world wide” said Ms Gupta .

The other highlights of the spring festival will be Ikebana and Bonsai show, session on eco gardening, sale of garden related items, farm fresh vegetables, seeds and plants for summers. Various chapters of the association in Delhi and National Capital Region will be presenting whole range of nutrition food and related recipes to meet the needs of changing lifestyle.

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