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Monday, September 12, 2016

दर्शकों के दिलों पर राज करने आ रहे हैं बंटी-बबली

-सिंगर पंकज पुनेठा (पी टू) से खास बातचीत-
-चन्द्रकांत शर्मा—

सन् 2005 में फिल्म आई थी ‘बंटी और बबली’, जिसमें फिल्म अभिनेता अभिषेक बच्चन व रानी मुखर्जी ने मुख्य भूमिका निभाई थी और यह फिल्म बाॅक्स आॅफिस पर हिट साबित हुई। अब सन् 2016 यानि कि करीब 11 वर्ष बाद एक बार फिर बंटी व बबली धमाल मचाने आ रहे हैं। परन्तु इस बार कॉन्सेप्ट को लेकर आ रहे हैं सिंगर पी टू यानि पंकज पुनेठा। पी टू अपनी नई म्यूजिक एलबम बंटी-बबली को लेकर काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि इस बार उनकी एलबम बंटी-बबली का गाना सुनने के बाद श्रोताओं में पहले वाले बंटी-बबली की यादें ताजा हो जाएंगी। हाल ही में सिंगर पी टू से मुम्बई में खुलकर बातचीत हुई। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश:

अपनी नई एलबम बंटी-बबली के बारे में बताएं?
मेरी नई म्यूजिक एलबम बंटी—बबली है। इसमें आपको चुलबुले, मस्त—मलंग व ठगी जैसी किरदार देखने को मिलेंगे। यह एक डांस नंबर है। इसमें आपको हिन्दी व हरियाणवी दोनों तरह का रैप सुनने को मिलेगा जोकि आजकल काफी ट्रेंड में है। गाने को मुम्बई के मीत ब्रदर्स स्टूडियों में रिकॉर्ड किया गया है। इस एलबम की प्रोड्यूसर व लिरिसिस्ट सुशील बेरवाल के साथ बहुत क्रिएटिवली इस एलबम को बनाया गया है। हम पहले से अपने इंस्टीच्यूट वृंदा इंस्टीच्यूट आॅफ कल्चरल आर्ट फरीदाबाद में डायरेक्टर के तौर पर एक टीम की तरह काम कर रहे हैं। बहुत जल्द ही इसका वीडियों भी दर्शकों के सामने होगा।

अपने म्यूजिकल करियर की शुरूआत के बारे में बताएं?
वैसे तो मैं बचपन से ही म्यूजिक में हूं और हरिद्वार जैसी जगह जहां मैं पला—बढ़ा हूं, वहां सुबह—शाम हमेशा ही संगीत का माहौल होता है। मगर जब तक समझ नहीं थी कि संगीत में क्या करना है, कैसे करना है, तब तक सब साधारण ही चल रहा था लेकिन जबसे इसकी तलब लगी तो फिर ऐसी लगी कि आज इण्डस्ट्री के नामचीन लोगों के साथ मिलकर इस एलबम की तैयारी कर ली।

आपने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा कहां से ली?
जबसे यह समझ आया कि संगीत कोई शौक नहीं, साधना है। तब से ही उस साधना को सार्थक बनाने के लिए मैं गुरू की तलाश में था और मैंने अपने गुरू मीराशी बूरा जी से क्लासिकल संगीत सीखा।

आप गिटार भी अच्छा बजा लेते हैं। इसके साथ कौन-कौन से म्यूजिक इंस्ट्रीयूमेंट प्ले कर लेते हैं?
हां, संगीत से जुड़ा हर पहलू मेरे लिए उतना ही मायने रखता है, जितना कि गाना गाना। फिर चाहे म्यूजिक बनाना हो, धुन कम्पोज करनी हो या इंस्ट्रीयूमेंट बजाना हो। अभी मैं सात—आठ इंस्ट्रीयूमेंट गिटार, पियानो, तबला, वायलिन, हारमोनियम व ड्रम सेट प्ले कर लेता हूं। इसके अलावा और भी ज्यादा सीखने की मेरी इच्छा है।

सिंगिंग में किस सिंगर से इंस्पायर हैं आप?
मेरी संगीत की तलब को सच्चे मायने में हवा हिमेश रेशमिया जी के संगीत ने दी। वैसे तो संगीत में कलाकारों की बराबरी नहीं की जा सकती। एक से एक बढ़कर एक गायक है इण्डस्ट्री में लेकिन जिन दिनों मैं संगीत को करियर बनाने की सोचता था। उन दिनों हिमेश रेशमिया जी की एलबम तेरा सुरूर और आशिक बनाया काफी ऊंचाई पर थी।

आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में बताएं?
आने वाले समय में हमारी कोशिश यह रहेगी कि जितने अंदाज लोगों को पसंद हैं, हम उतने अंदाज के गाने निकालेंगे। फिर वो चाहे पार्टी नंबर हो, डांस नंबर्स हो या फिर सॉफ्ट रोमांटिक हो। हम बखूबी श्रोताओं की पसंद को पूरा करने की कोशिश करेंगे।

आजकल जो गाने आ रहे हैं, उनमें डबल मीनिंग शब्दों का ज्यादा प्रयोग किया जा रहा है। आपके गानों में किस तरह के शब्दों का प्रयोग किया जाएगा?
हमारा गाना बंटी-बबली भी आप सुनेंगे तो आपको इसमें कहीं भी डबल मीनिंग शब्द नहीं मिलेंगे। हालांकि यह गाना पार्टी नम्बर है परन्तु गाने की लिरिक्स बहुत अच्छी है। आगे भी हम लोग अच्छी लिरिक्स पर ही गाने बनाएंगे। मेरा मानना यह है कि अगर आपके गानों की लिरिक्स व म्यूजिक अच्छा है तो श्रोताओं को वो जरूर पसंद आएगा। हमारे गानों में आपको चुलबुलापन तो सुनाई पड़ेगा परन्तु डबल मीनिंग शब्द नहीं मिलेंगे।

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