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Tuesday, August 9, 2016

कार्टिलेज इंज्युरी की आधुनिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के दिल्ली कार्टिलेज क्लब का गठन

-प्रेमबाबू शर्मा

विभिन्न जोड़ों के महत्वपूर्ण एवं नाजुक हिस्से ‘‘कार्टिलेज’’ के इलाज को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली के आर्थोपेडिक एवं कार्टिलेज विशेषज्ञों ने दिल्ली कार्टिलेज क्लब की स्थापना की है। इंडियन कार्टिलेज सोसायटी के तत्वाधान में बना यह क्लब भारत में अपने तरह का पहला क्लब है जिसके जरिए कार्टिलेज में लगी चोटों की आधुनिक चिकित्सा के बारे में जागरूकता कायम की जायेगी तथा चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

‘‘कार्टिलेज पुनर्निर्माण से ज्वांइट संरक्षण’’ के मुख्य उद्देश्य के साथएक समारोह में दिल्ली कार्टिलेज क्लब (डीसीसी) का उद्घाटन हुआ। इस मौके पर 100 से अधिक आर्थोपेडिक एवं कार्टिलेज विषेशज्ञ मौजूद थे जिनमें ब्रिटेन के कार्टिलेज विषेशज्ञ प्रो. ए ए षेट्टी, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिश्ठ आर्थोपेडिक एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डाॅ. राजू वैश्य और इंडियन कार्टिलेज सोसायटी (आईसीएस) के अध्यक्ष डाॅ. दीपक गोयल प्रमुख हैं।

दिल्ली कार्टिलेज क्लब के षुभारंभ के मौके पर क्लब के संयोजक डाॅ. राजू वैष्य ने कहा कि क्षतिग्रस्त कार्टिलेज के इलाज की तकनीकों के सामान्य इस्तेमाल में कई तरह की बाधाएं मौजूद हैं। उन्होंने सरकार से इन बाधाओं को दूर करने की अपील की।

इंडियन कार्टिलेज सोसायटी (आईसीएस) के अध्यक्ष डाॅ. दीपक गोयल ने कहा, ‘‘विकसित होते ज्ञान तथा बेहतरीन परिणामों की बदौलत कार्टिलेज रिपेयर उपचार अब सुपरस्पेशियलिट्स के दायरे से निकल कर काफी तेजी से विस्तार ले रहा है और यह आर्थोपेडिक समुदाय के बीच लोकप्रिय हो रहा है।

ब्रिटेन के कार्टिलेज विषेशज्ञ प्रो. ए ए षेट्टी ने वैज्ञानिक पेपत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि कार्टिलेज में लगी चोट का उपचार बहुत कठिन होता है उन्होंने कहा कि एक बार अगर कार्टिलेज क्षतिग्रस्त हो जाए तो इसे ठीक करना मुश्किल होता है। कार्टिलेज में अगर कोई खराबी आ जाए तो वह खराबी बढ़ती जाती है और इसके कारण ओस्टियो आर्थराइटिस होने का खतरा होता है और बाद में जोड़ इतने खराब हो सकते हैं कि जोड़ों को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में क्षतिग्रस्त कार्टिलेज की मरम्मत करने तथा उसे पुनसर््थापित करने की जरूरत पड़ती है खास तौर पर युवाओं में।

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