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Sunday, August 7, 2016

ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने पांचवें दीक्षांत समारोह का आयोजन

-प्रेमबाबू शर्मा

अत्याधुनिक, बहुआयामी शिक्षण संस्थान ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने दिल्ली के सिरी फोर्ट आॅडिटोरियम में अपना पांचवां दीक्षांत समारोह आयोजित किया। जिसमें वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1500 छात्रों, अभिभावकों और फेकल्टी सदस्यों को संबोधित किया। समारोह में बायोकाॅन की चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार शाॅ की मौजूदगी ग्रैजुएट करने वाले उन छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत थी जिन्हें ये छात्र अपना रोल माॅडल मानते हैं और उनकी उपलब्धियों से अभिभूत हैं। 

इस मौके पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बायोकाॅन लिमिटेड की सीएमडी सुश्री किरण मजूमदार शाॅ ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों को पूरे जोशो-खरोश के साथ चुनौतियों को अवसर में बदलने की जरूरत है और हर किसी की संपन्नता और समृद्धि के लिए उन्हें मानवीय कठिनाइयों से निपटने में मददगार होना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमेशा याद रखें कि ‘दृढ़निश्चय‘ ही सफलता का मूलमंत्र है और ‘विफलता’ अस्थायी है लेकिन ‘काम का परित्याग’ स्थायी होता है।”

ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के चांसलर नवीन जिंदल ने वित्त मंत्री और सुश्री शाॅ का आभार व्यक्त किया। ग्रैजुएट करने वाले छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए जिंदल ने कहा, “सन 2009 में अपनी शुरुआत से अब तक हम लंबा सफर तय कर चुके हैं। आज जेजीयू भारत की एक असाधारण प्राइवेट यूनिवर्सिटी के रूपप में पहचान बना चुकी है जहां हाई क्वालिटी के रिसर्च किए जाते हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उच्चतर शिक्षा की क्वालिटी ही देश के आर्थिक विकास और मानव विकास में अहम योगदान करती है। उन्होंने बताया कि जब किसी देश के विश्वविद्यालयों में छात्रों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि होती है तो उस देश की आर्थिक तरक्की भी तेजी से होती है और इसका सकारात्मक असर सामाजिक विकास पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा, “जेजीयू में हम ऐसी विश्व स्तरीय शोध एवं शिक्षा विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं जो सामाजिक रूप से लाभदायी हो और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक भी।” 

उन्होंने घोषणा की कि यूनिवर्सिटी ने अगले शैक्षणिक सत्र से जिंदल स्कूल आॅफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा है। जिंदल ने कहा, “जेजीयू के कुछ स्कूलों के लिए हमारा रणनीतिक लक्ष्य अगले 5 से 10 वर्षों में शीर्ष 200 विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों में शुमार होने का है।”
ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संस्थापक वाइस चांसलर प्रोफेसर (डाॅ.) सी राजकुमार ने भारतीय विश्वविद्यालयों में शोध उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन के अभाव पर चिंता जताई और कहा कि इसी वजह से देश के विश्वविद्यालय विकसित देशों के विश्वविद्यालयों से काफी पीछे हैं। उन्होंने बताया कि बहुत कम भारतीय विश्वविद्यालय विश्व की यूनिवर्सिटी के साथ गहरी संस्थागत भागीदारी को बढ़ावा देने की मुख्य रणनीति के तौर पर अंतरराष्ट्रीयकरण में यकीन रखते हैं। देश के ज्यादातर विश्वविद्यालय शिक्षण, शोध और छात्रों के अनुभव बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का लाभ नहीं उठा पाते हैं। 

उन्होंने महिला शिक्षकों की अहम भूमिका के लिए जेजीयू की प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हमारे पांच स्कूलों में 47 प्रतिशत महिला शिक्षिकाएं ही हैं जबकि जेजीयू की नेतृत्व स्थिति में 38 प्रतिशत महिलाएं हैं जो हमारी महिला शिक्षकों की प्रोन्नति से ही बनी हैं।” 

प्रोफेसर कुमार ने अंतरराष्ट्रीयकरण के बारे में चर्चा करते हुए कहा, “हमें गर्व है कि हमारे 80 प्रतिशत से अधिक शिक्षक विश्व के प्रमुख विश्वविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की योग्यता प्राप्त हैं और लगभग 20 प्रतिशत हमारे पूर्णकालिक शिक्षक अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं। इतने कम समय में इस तरह की खासियत रखना हमारे विश्वविद्यालय के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।” 
 
विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों का बखान करते हुए प्रोफेसर कुमार ने कहा, “इसी साल मार्च में जेजीयू सर्वोच्च रेटिंग ‘ए’ ग्रेड दी गई थी, जो नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल द्वारा दी गई पहले चक्र की मान्यता है। जेजीयू हरियाणा की पहली और एकमात्र प्राइवेट यूनिवर्सिटी है जिसे ‘ए’ ग्रेड मिला है। हालांकि हम अपनी इतनी उपलब्धियों पर ही नहीं इतराने के प्रति भी सतर्क हैं।” 

प्रोफेसर कुमार ने छात्रों की उपलब्धियों की तारीफ करते हुए कहा, “विश्वविद्यालय के लिए अपने छात्रों को ग्रैजुएट होते देखना और प्रोफेशनल दुनिया में पहचान बनाने के लिए उन्हें पूरी तरह से तैयार करना एक गौरवशाली क्षण होता है।”

दीक्षांत समारोह में जानी-मानी हस्तियों की उपस्थिति से यह एक भव्य समारोह रहा। इसमें यूनिवर्सिटी के पांचों स्कूलों के छात्र और शिक्षक मौजूद थे। यहां ग्रैजुएट करने वाले छात्रों, उनके शिक्षकों और अभिभावकों के चेहरों पर गर्व और उल्लास का भाव देखने लायक था।

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