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Wednesday, August 31, 2016

GLOBAL ROAD SAFETY BODY EXPRESSES CONCERN AT GROWING TRAFFIC CONGESTION IN NCR ESPECIALLY DURING RAINS

International Road Federation (IRF), a Geneva based global body working for better and safer roads worldwide has expressed concern at growing frequent traffic gridlock in the National Capital Region (NCR) including Delhi, Gurgaon and Noida Delhi in the recent days especially during ongoing monsoons ,which has made daily commuting longer and more gruelling for people living in NCR.

Mr K .K Kapila, Chairman,
International Road Federation (IRF)
“Due to traffic congestion, NCR residents are spending more work hours on roads, this is resulting into a non-productive activity for most people as when they get stuck in traffic jams, they reach their workplace late or reach back home late. This is also making travelling increasing costly and frustrating resulting in more road rage and accidents “said Mr K .K Kapila, Chairman, International Road Federation (IRF)

“The reasons for the increase in driving are varied and complex, they include, among others, growth in the size of the population and workforce, growth in motor vehicle ownership and affordability of use, growth in commuting to work alone, lack of transit availability because of urban sprawl, and changing patterns of land use, ongoing haphazard metro rail construction work in entire National Capital Region (NCR), indiscriminate frequent digging by various civic agencies, poor drainage system on roads as well as overground metro rail ”said Mr Kapila

“To check increasing traffic jams both short term and long term policies are needed in Delhi and NCR Some of these include having good public transport system, proper maintenance of current roads and fly overs with proper road laying basics for keeping roads free of potholes, cave-ins, proper drainage system and improving safety. We need to plan better by building utility channels on both sides of the road for water pipelines, telecom cables, water supply pipelines, power cables and sewer connections. This will help in avoiding Frequent digging as concrete roads are not meant for relaying in bits and pieces” said Mr K.K.Kapila.

“Major cause for frequent cave-ins on almost all stretches of roads in the capital is repeated digging carried out for laying underground utility pipes and cables by various agencies including DJB, telecom companies, MCD and PWD. In this case, cavities remain open in the earth. With water seeping in, the road gets weak and eventually gives way,’’ said Mr Kapila.

“The other major reason for cave-in is the rotting drainage and sewer system, which dates back to the British times. the sewer barrels in most parts of capital including NDMC area needs to be restored immediately to avert a bigger disaster in the future. The drainage system is equally old. Poor maintenance of underground master drains, sewer and water pipelines cause more damage. ‘‘Maintenance of all such pipelines is vital. Construction of Utility channels along the roads can help avoid these problems in a big way” said Mr Kapila.

“We should provide more reasons for putting less cars on the roads. The only effective long-term solutions are to improve alternative modes – walking, cycling and particularly high quality public transport system with Wi-fi and other modern day facilities . an Intelligent Transport System (ITS), which guides motorists towards uncongested roads and ease traffic snarls ”added Mr Kapila.

ग्लैमर, सेक्स और एक्शन यानी वॉरियर सावित्री

-प्रेमबाबू शर्मा

एक तो आस्था से जुड़ी किसी कथा को आधुनिक रूप देने का अपराध, दूसरे उसे बुरी तरह पेश करने का तरीका। लिहाजा लोगों में निर्देशक परम गिल की फिल्म ‘वॉरियर सावित्री’ से लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के एवज में भारत में बैन कर दिया गया है तथा लोगबाग फिल्म के खिलाफ जगह जगह निर्देशक के पुतले जलाने पर तुले हैं।

कहानी पर गौर करें तो राजस्थान के अच्छे घराने की बेटी सावित्री यानि निहारिका रायजादा अपने साथ बचपन में हुये हादसे के बाद बाकायदा जूडो कराटे और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेती है। बड़ी होने पर वो एक एनआरआई लड़के रजत बरमेचा यानि सत्या से प्यार करने लगती है। लेकिन उनके पारिवारिक ज्योतिषी का कहना है कि अगर सावित्री ने सत्या से शादी की तो वो एक सप्ताह बाद ही मर जायेगा। बावजूद इसके सावित्री सत्या से शादी कर अमेरिका चली जाती है जहां सत्या के अंधे पिता गुलशन ग्रोवर का एक कॅसिनो था जिसे ब्याज पर पैसे देने वाला डॉन टिम मैन उनका कॅसिनो इसलिये जला देता हैं क्योंकि वे उससे लिया पैसा उसे वक्त पर वापिस नहीं दे पाये थे। अब टिम की निगाह कॅसिनो की जमीन पर है जो सत्या के नाम है। इसलिये वो सत्या पर हमले करवाता है जिसे सावित्री बार बार नाकाम कर देती है। 

एक बार सावित्री को साक्षात यमराज ओमपुरी दिखाई देते हैं जो बताते हैं कि वे सत्या को लेने आये हैं। इसके बाद सावित्री और यमराज के बीच जिरह चलती हैं जिसमें जीत सावित्री की होती है।बेशक विषय यूनिक था लेकिन निर्देशक उसे ही तरह हैंडल नहीं कर पाया। लिहाजा कथा, पटकथा तथा संवाद सभी कुछ कमजोर साबित हुआ। दरअसल निर्देशक सही तरीके से एक भी किरदार को रजिस्टर्ड नहीं कर पाता। सावित्री हर वक्त स्वीमिंग सूट में या फिर सत्या के साथ किसिंग सीन इतने धड़ल्लेे से देती रहती है कि आज की आधुनिक नायिकायें भी शरमा जाये। यमराज सूट बूट और टाई में क्यों रहते हैं समझ से बाहर है। गुलशन ग्रोवर को अंधा क्यों बताया। इसके अलावा फिल्म में काफी बड़े टेक्निशियर्स हैं कैमरामैन कबीर लाल, की फोटोगाफी हैं। 

निर्देशक ने भारतीय आस्था से जुड़ी कहानी का चुनाव किया, ऊपर से उसे फुहड़ तरीके से दिखाने की कोशिश की लिहाजा दर्शकों का भड़कना जायज है। म्यूजिक भी स्वंय निर्देशक ने ही दिया है। फिल्म की लीड अभिनेत्री निहारिका रायजादा जो एनआरआई है। बावजूद उसकी हिंदी बहुत साफ है वो फिगर वाईज भी खूबसूरत है। इसके अलावा एक्शन सीन्स में वो काफी प्रभावशाली रही है। रजत बरमेचा शक्ल से ही सुस्त किस्म का एक्टर लगा जिसे देखकर ऐसा लगता हैं जैसे उसे बंदूक दिखाकर एक्टिंग करवाई जा रही हो। विदेशी मॉडल लूसी पिंडर काफी खूबसूरत और सेक्सी लगी। विलन द मोंक और मनी जोहन ठीक ठाक काम कर गये। इनके अलावा गुलशन ग्रोवर, करमवीर चैधरी तथा आदित्य राज कपूर आदि सहयोगी कलाकारों ने भी अच्छा सहयोग दिया लेकिन यमराज के रूप में ओमपुरी को वेस्ट किया गया है। ग्लैमरस, सेक्सी तथा एक्शन फिल्में देखने वाले दर्शकों के लिये फिल्म में काफी कुछ है।

Happy Birthday- Anuradha Govind


Painting for Dwarka Ramlila 2016


Tuesday, August 30, 2016

Unnat Bharat Social Welfare Society organised The Heroes Award


देश की राजधानी दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में विभिन्न क्षेत्रों के कई नामचीन हस्तियों को “द हीरो” अवार्ड से नवाजा गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्जवलित किया गया । एक गैर सरकारी संस्थान उन्नत भारत सोशल वेलफेयर सोसायटी और नेत्रम आई फाउंडेश के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय जॉली, पूमन आजाद(प्रवक्ता बीजेपी),शांत कुमार जाटव(बीजेपी),बीजेपी नेता विनोद कुमार बिन्नी,बीजेपी के अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री संजय निर्मल और कोरियन प्रोफेसर किम सहित कई गणमाण्य लोगों ने हिस्सा लिया।



कार्यक्रम का विषय था “नेतृत्व और उसका समाज पर प्रभाव ”।समारोह में सभी अतिथियों ने लीडरशिप पर अपने-अपने विचार रखे और सही लीडरशिप की परिभाषा से लोगों को अवगत कराया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विजय जॉली ने कहा की “सही मायने में वही लीडर है जिसमें कुशल नेतृत्व क्षमता के साथ-साथ सच्चे लीडर सृजन करने की भी क्षमता हो”।




मुख्य अतिथियों के संबोधन के बाद समाज के हर क्षेत्रों से चुने गए लोगों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। चिकित्सा जगत से जुड़े डॉ.एस के ठाकुर,डॉ असफ इकबाल,डॉ अंजली नागपाल,डॉ. रोहित गर्ग,डॉ. सुनील मल्होत्रा,डॉ अंचल गुप्ता,डॉ धर्मेंद्र सिंह,डॉ. जय प्रकाश राय,डॉ. यू डी त्रिपाठी,डॉ. सुमित दुबे,डॉ.मीतू खोसला,डॉ.नन्द कुमार को,साथ ही पत्रकारिता के क्षेत्र में श्री उपेन्द्र चौधरी, श्री रमेश ठाकुर और निवेदिता मिश्रा को, आईटी के क्षेत्र से ज्ञानेश कुमार को ,समाजिक कार्य के क्षेत्र में सलमा फ्रांसिस और मुद्रा शाही के साथ-साथ कला के क्षेत्र में दिव्यांग कलाकार प्रदीप कुमार को उन्नत भारत सोशल वेलफेयर सोसायटी ने विशेष रूप से सम्मानित किया। 

पिछले कई वर्षों से उन्नत भारत सोशल वेलफेयर सोसायटी ने समाज के हर उस क्षेत्र में काम किया है जहां सरकारी तंत्र की निगाहें नहीं पहुंची।संस्था के अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा का कहना है कि वैसे व्यक्ति जिन्होंने देश और समाज के लिए अपना योगदान दिया है और पहचान नहीं मिली उन्हें एक मंच पर ला कर सम्मानित करें। सभागार में उपस्थित गणमाण्य लोगों ने उन्नत भारत सोशल वेलफेयर सोसायटी द्वारा किये गए उत्क़ृष्ट कार्यों की सराहना की।

Smile to Succeed


Commander VK Jaitly

Three MBA qualified girls were appearing for an interview. There was only one vacancy. All the three girls had almost same level of grades in their academics and from the same level of colleges. They were almost neck to neck in their interview too while demonstrating their communication skills, positive bent of mind, eagerness to learn and perform. But finally one girl got selected. What was special about her compared to the other two girls? She had a comparatively wheatish complexion but cheerful face. She had a compelling smile on her face throughout the interview process. That gave a confident look to her personality. And made others also smile while interacting with her. Smiling gave the competitive edge to this girl.

I am sure, any employer would like to have his/her team full of vibrancy, cheerfulness and bubbling to take up new challenges. Given a choice, nobody likes serious, grim looking dull people in the team even if they are doing a very serious job. A surgeon does a very serious job daily while operating his patients but the seriousness on his/her face is scaring for the patient. While a jovial, smiling face of the surgeon gives additional confidence to the patient to be operated upon and to his relatives also.

Smile is an asset that God has given us in abundance. It costs nothing but does wonders when you spread it around. Just remember your days at school or college. I am sure you felt much more comfortable in the class of a teacher who was cheerful and jovial with the students while teaching. And in all likelihood, you could ask any question to him/her to clear your doubts compared to a teacher who carried the image of a terror and never smiled in the class.

This reminds me of my days in the Navy during our under trainee period. We had a senior officer who was always nagging us and kept on awarding punishments on the slightest pretext. Nobody ever saw him in a relaxed mood, smiling or talking in a jovial tone. One day, a classmate of ours entered the class and announced: ‘Hey guys, Ravan was laughing today.’ And the whole class went into a riot of laughter. That day, during the lunch time also in the dining hall, this was the talk of the town: ‘Ravan laughed today.’ ‘When?’ ‘Where?’ ‘What for?’ were the whispering going on with chuckling faces of all of us.

In fact, some people have a wrong notion that by having a serious look on their face, the 8:20 look, they are trying to demonstrate the traits of ‘Task Oriented Leadership’. According to me it is just a myth. How can you be ‘Task Oriented’ without being ‘People Oriented’? If you love to accomplish your task, if you love your organization to go to great heights, you got to love your people. You got to be ‘People Oriented’ and that you can do only with a smiling face, a 10:10 face.

The moment you enter your office, start spreading smiles from the main gate onwards and give a smile to everyone you come across. This smile from the leader early in the morning is a great energy booster for the employees to give their best. They will also try to be in a cheerful mood while interacting among themselves or while interacting with the customers. Remember, smile is contagious and spreads in all directions. It removes the stress that does crop up at times. It re-enforces your self-confidence and also helps in building confidence in your teams.

I know of one grocery store at Noida who used to do more business than the other three grocery stores put together. It was just because of his polite, highly respectful tone with a smiling face. Even when he was taking orders on telephone, you could see him having a smile on his face. You guessed it right, smile does travel on phone lines too. The person on the other side can make out about your mood based on the tone in which you speak. So you do succeed in your business too when you smile whole heartedly. Let us not be miser when we give smiles to others. It is free. No costs. But bountiful of benefits.

Remember that service with a smile is always important irrespective of the business you are in. To every customer you greet, your sincere facial expression should say, “I’m so glad to see you!” A gracious smiling welcome by you will reduce the customer’s fear of the unknown. It will build trust and make your customer feel good about doing business with you. A warm and sincere smile to the customer tells him/her that we are here to serve you, support you, help you and meet your requirements in the best possible manner. In fact, a smile can be the most significant part of a business transaction, be it B2C or B2B transaction. In retail business, it can even influence people’s perception about a brand and the customer’s satisfaction levels.

Many times, during our business/social dealings we come across some people with a lot of mischievous designs and they pounce upon you with full force with all the ammunition full of venom and hatred. Here too your matured smile with silence on your face can be a sure shot armour to protect yourself against such expected or unexpected attacks.

Smile works wonders in many more places than the best of logics and arguments that your mind can produce. It is said that it takes 72 muscles to frown while a smile requires only 14 muscles. So smiling is much easier provided these 14 muscles are put to use as frequently as possible. Those people who are not used to smiling can experience a lot of difficulty in smiling initially because of the rigidity of these 14 muscles. They have to make additional efforts to loosen these muscles and then give a charming smile to an audience.

A smile is a universally understood gesture that knows no limitations, It is understood in all languages and cultures. 

Let smiling become a part of your personality. It should just ooze out naturally. And your success rate at home, in business, at office or even in social circles will improve.

Keep Smiling; Keep Succeeding

बंद होगा टीवी शो ससुराल सिमर का


-प्रेमबाबू शर्मा

टीवीें पर सबसे ज्यादा चलने वाले शो ‘ससुराल सिमर का’ बंद होने वाला है। सुत्रों के हवाले से खबर है कि सीरियल ऐपीसोड की जरूरत से ज्यादा लंबाई और गिरती टीआरपी के चलते इसे बंद करने का फैसला किया गया है। बता दें कि यह सीरियल 25 अप्रैल, 2011 में ऑन एयर हुआ था और शो ने हाल ही में 1600 एपिसोड कम्प्लीट किए थे। सीरियल में तो इसके सभी कैरेक्टर्स अपनी उम्र से काफी बड़े शख्स का रोल प्ले कर रहे हैं जिसे अब दर्शकों पचा नहीं पा रहे हैं।

COLORS OF OURS - a group show Indian artists across India in AIFACS, Delhi


COLORS OF OURS - a group show of 12 Indian artists across India are displaying rich cultural heritage of India through their own style in All India Fine Arts and Crafts Society, Delhi during 2-8 September 2016.

One of the participating artist Seema Kashyap works in traditional madhubani style in a new way. She loves experiments in this ancient art. Her works touches new areas in madhubani style. One of her work displayed here is about Chinese culture in madhubani style. Laughing buddha, wind chym , bamboo plants have a new look in traditional Indian art. It tells about positivity. Now a days Indians have great love towards all these things. 

Indians have always accepted culture of different countries ; it is one of them. She says now a days all these things are very common in Indian families that inspired me to work on it. She says that Madhubani painting gives so much space to experiment . It is one of her new experiments in it. Without leaving the charm of this ancient art add something new to it is the most favourite to her.

Exhibition has variety of works in different forms and mediums. Harpal singh, K G lingadevadu are the other participating artists of the show.

Good wishes message for Dwarka Ramlila 2016 from Dr. M.C. Jain


Monday, August 29, 2016

11वीं दिल्ली राज्य रोप स्किपिंग चैम्पियनशिप 2016 का आयोजन


नई दिल्ली। जम्प रोप एसोसिएशन दिल्ली (रजि.) द्वारा 11वीं दिल्ली राज्य रोप स्किपिंग चैम्पियनशिप 2016 का आयोजन दिल्ली के जनकपुरी स्थित हैप्पी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में किया गया। इस चैम्पियनशिप का उद्घाटन उपनिदेशक शिक्षा (खेल) श्रीमती आशा अग्रवाल , जम्प रोप एसोसिएशन दिल्ली के अध्यक्ष भीमसेन वर्मा,रोप स्किपिंग फेडरेशन आॅफ इंडिया के महासचिव एवं अंतर्राष्ट्रीय स्किपर खिलाडी निर्देश शर्मा,हैप्पी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती आस्था घई वलिया ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। 

इस मौके पर पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी एवं अर्जुन अवार्ड विजेता उपनिदेशक शिक्षा (खेल) श्रीमती आशा अग्रवाल ने भाग लेने वाले खिलाडियों से कहा कि आप अपनी खेल भावना को लेकर अपना प्रदर्शन करेंगे तो परिणाम भी बेहतर होंगे। हम जिला स्तर से लेकर अंतर्राष्ट्रीय पर स्किपर तैयार कर रहे हैं जो भारत देश का नाम पुरे विश्व में रोशन कर सके। हमसे सरकारी स्तर पर जो भी इस खेल के विकास में जरुरी होगा हम करेंगे। उन्होंने कहा कि मेहनत।परिश्रम,मजबूत इरादों से हर मंजिल को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रोप स्किपिंग वजन घटाने के साथ-साथ शरीर को और अद्भुत फायदे देती है। 

दरअसल रोप स्किपिंग इतनी फायदेमंद है कि आपके पूरे शरीर पर एक साथ काम करती है और खिलाड़ी का स्टेमिना बढ़ जाता है। मैं आज राष्ट्रीय खेल दिवस आप सभी बधाई देती हूँ हॉकी जादूगर ध्यान चंद अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करती हूँ। आज बालिकाओं के प्रदर्शन को देखकर मैं अभिभूत हूँ कि भारत में यह खेल बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। दिल्ली जम्प रोप एसोसिएशन (रजि.) के जनसंपर्क अधिकारी (मीडिया) एवं प्रवक्ता अशोक कुमार निर्भय एवं आयोजन सचिव विवेक सोनी ने बताया कि इस प्रतियोगिता में 80 से अधिक स्कूलों के लगभग 1 हजार 500 खिलाडी हिस्सा ले रहे हैं। 

इस प्रतियोगिता में कुल 30 तकनीकी जजों का पैनल खिलाडियों की क्षमता और प्रतिभा का आंकलन करेगा। इस चैम्पियनशिप में सिंगल बाउंस,स्पीड सिप्रिंट,डबल अंडर,फ्री स्टाइल,स्पीड रिले,डबल डच स्पीड रिले, टीम फ्री स्टाइल वर्गों में प्रतिस्पर्धा हो रही हैं। इस चैम्पियनशिप के विजेता बच्चों को उपनिदेशक शिक्षा (खेल) श्रीमती आशा अग्रवाल , जम्प रोप एसोसिएशन दिल्ली के अध्यक्ष भीमसेन वर्मा,रोप स्किपिंग फेडरेशन आॅफ इंडिया के महासचिव एवं अंतर्राष्ट्रीय स्किपर खिलाडी निर्देश शर्मा,हैप्पी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती आस्था घई वलिया ने मेडल,प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और बच्चों का हौंसला बढ़ाया।

बेटी उत्सव में सम्मानित बेटियां - बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना


मोती नगर विकास मंच, अर डब्लू ए मोती नगर और मलिक म्यूजिक इवेन्ट के साथ श्री भरत धुप्पर (युथ भ ज पा ग्रुप), श्री अनिल मित्तल ( भ ज पा कक्ष संयोजक ), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के श्री श्याम जजु (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ) एवम दिल्ली प्रभारी श्री राजिंदर अध्यक्ष द्धारा बेटी उत्सव का आयोजन किया गया।

प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की योजना बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जागरूकता के लिए भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कुछ ऐसी बेटियों को सम्मानित किया जो की अलग अलग कार्य में छोटी सी उम्र में महारथ हासिल किया है। 

नैनिका गुप्ता जो की एक सबसे कम उम्र (तीन साल) की फोटोग्राफर है, उन्हें बेटी है अनमोल रतन अवार्ड 2016 से सम्मानित किया गया। कनाट पैलेस में इस्थित हनुमान मंदिर के महंत जी ने सभी सम्मानित बच्चीओं को आशीर्वाद दिया। अन्य सम्मानित समानित बच्चीओं में वान्या सिंग (सबसे चोटी कथक कलाकार), तृषा कपूर ( कलाकार एवम मॉडल ) और आदि को भी बेटी है अनमोल रतन अवार्ड से सम्मानित किया गया। 

इंडियन लाफ्टर चैलेंज के हास्य कलाकार राजीव मल्होत्रा ने हसा हसा कर समां बांद दिया। इसके साथ साथ अन्य कलाकारों ने नृत्य प्रदर्शित किये। इंडिया गोट टैलेंट के विनर रहे प्रिंस डांस ग्रुप ने अपनी परफॉरमेंस भी दिखाया। महशूर गायक श्री नरेंद्र चंचल ने सभी बेटियों को बधाई दी। 

Photo - Arpit Gupta & Seema Thakur

Vivekdeep celebrated Independence Day

Vivekdeep- the social outreach program of Sri Ramakrishna Sangha, Dwarka working tirelessly for the children of underprivileged class of our society proudly stepped into its third year and celebrated Indian Independence Day with all solemnity.

After hoisting of the flag and national anthem, two students spoke about the importance of the day. The audience was surprised by the patriotic fervor and enthusiasm of the speakers. Thereafter, the group song ‘aao bachcho tumhein dikhayen’ charged everybody with national pride. Then it was time to remember the martyrs who laid down their lives during freedom movement. It was done by reciting some of their famous quotes. A skit based on an incident from the life of Gautam Buddha beautifully presented how we should get rid of prejudice, forgive our enemies and move ahead. Not surprisingly, it was highly applauded. Then it was time for reciting two famous poems, firstly of Shri R. N. Tagore ‘Where the mind is without fear’ and then of Pt. M. L. Chaturvedi ‘Pushp ki abhilasha’. Two students, who have passed out of Vivekdeep, caught the attention of the audience in an engaging conversational manner. It was their reminiscence about their learnings at Vivekdeep and they expressed their resolve to carry them forward for years to come. 


The whole atmosphere was so charged with nationalism that one of our guests offered to sing the very famous ‘aye mere watan ke logon’ impromptu and left an emotional note reverberating. Then it was time for our President, Shri Rajib Roy to address the gathering. Shri Roy explained that the urge for freedom should be deep within us. He beautifully exemplified this statement by several incidents, where young boys and girls could overcome insurmountable problems only because of this urge. He also cited the need for all of us to break ourselves free of prejudices and attain freedom in true sense. Shri Roy hoped that Vivekdeep would continue spreading its message and transforming many lives for years together.

The celebration ended with the group song ‘sare jahan se achcha’ in which all the students enthusiastically participated. 


About Sri Ramakrishna Sangha
Sri Ramakrishna Sangha is a religious trust that was conceived five years back in 2003. The objectives of the trust are:
1. To impart and promote the study of the man- making, character- building and harmonizing ideas of Ramakrishna- Vivekananda under the guidance of Ramakrishna Math and Mission
2. To initiate and undertake educational, religious, social, cultural and spiritual activities for the benefit of people in the society at large
3. To work for the physical, mental, intellectual, moral, socio- economic, educational and cultural uplift of the Adivasis, scheduled caste, schedule tribes and other backward classes, and economically and physically handicapped people so as to make them responsible citizens of India
4. To undertake schemes for providing opportunities for community participation, development of leadership qualities, etc.
5. To inculcate ideas of national integration and harmony among youth and people in general and also by observing special days
6. To establish, maintain, carry on and/ or assist libraries, students homes, vocational training institutions, dispensaries and to institute rural development and welfare activities and activities of like nature

For further information please contact:

Arun Dey
Founder and Managing Trustee,
Sri Ramakrishna Sangha
+91 9810180077

LOCAL GOVERNANCE NEED TO SEEK COMMUNITY HELP

Vijay K. Saluja

Sectors 22, 23 of Dwarka-a sub-city ,located in the South-West Delhi district of NCR Delhi are at the southern-most end of this sprawling colony, developed by Delhi Development Authority. As learnt,it is one of the largest residential areas in Asia & is expected to have `zero-tolerance` policy towards common misuses of land including encroachment etc.

The sectors have well-laid out wide roads with footpaths on most of the roads & as well greenery-trees & shrubs. Besides, it boasts of very well-appointed schools with nice buildings & infrastructure i/c social & two well designed malls-one in each sector.

Perhaps, this could have been the reason to attract well educated, connected/placed owners & tenants to its various high-rise apartments These are gated communities. Various RWA`s looking after the management & maintenance of their precincts are doing reasonably good job. But the happy story just ends at the gates of each society premises?!

STATE OF INFRASTRUCTURE
Outside the gates, the sector`s infrastructure/civic services are not in the desired state of maintenance? Potholed roads, broken footpaths with missing tiles etc ,their state aggravated by the agencies laying optical fibres using trenchless technology, & drains/ pipelines etc, scattered garbage alongside/on the footpaths, pets- poo on roads/footpaths & ill-maintained dividers/greenery barring a few, non working traffic lights[quite a number], meets the eye, wherever one goes!

MALLS
The position is really grave in the two malls? Here,it appears ,it is free for all??There is no concept of any enforcement of laid down rules & regulations for running the shops within the allotted areas, parking of vehicles, proper use of the well provided basements, prescribed putting up of proper signages, use of public spaces, maintenance of complex i/c the toilets etc etc?!!

Why is it happening? Why the concerned authorities are not checking?Why the Traders Associations are not doing their prescribed duties?In case, the office bearers/civic-officials, want to do their assigned jobs of doing proper management of the area/complex, then what are their constraints?

CIVIC ORGANISATIONS
These are some of the questions which comes to mind..DDA, MCD,Police, Traffic Police DJB, BSES are some of the main civic authorities ,responsible for ensuring management of sector 22 ,23, like any other sectors/colonies.But, why despite the posting/ presence of the officials of all these agencies, the mayhem continues !! ?Why no proper supervision, why no overseeing/co-ordination,why no proper guidance to its staff by the concerned officers at various levels of each departments??

Besides these, there are elected representatives of the area-Corporators, MLAs, MP who have the ethical/moral responsibilty to discharge their expected functions ie to ensure proper development/ upkeep & the redressal of various grievances of the residents/traders living/operating in these sectors.

PARKING
What is the use of elite schools in this area if the management do not take up cudgels to take up with the authorities ,to make area properly maintained/ better. Though,their large presence in these two sectors have exacerbated the parking & traffic problems in this residential area. If there is ingress & egress of so many vehicles in this area, what is preventing the authorities from planning & constructing multi-storeyed parking. Besides providing much needed facility, these can be big source of earning REVENUE for the concerned authorities-DDA, SMCD.

ROLE OF COMMUNITY
The role of community is very imperative in supplementing the efforts of the municipal authorities. Sizable percentage of the residents in Sectors 22-23, are retirees from prominent positions from the public & private sectors. They are, educated, experienced, well aware , healthy, willing community group, to eagerly lend their voluntary services to the civic authorities.

SUKH DUKH KAY SAATHI
There are many community groups, who are doing their bit to improve their neighbourhood. One such voluntary group of senior citizens of sectors 22-23, known as `SUKH DUKH KAY SAATHI` is doing extremely good jobs in many needed areas viz helping/associating with the horticulture-staff in maintaining some prominent gardens/green spaces in Sector 22-23.,tree-plantations,garbage management, taking up vigorously issues of civic concerns of these two sectors in particular, with the respective local authorities The sustainable efforts of the Executive Committee & members of SUKH DUKH KAY SAATHI & other community-groups which includes some ladies-groups, have reaped/is reaping good dividends?!

SECRET OF SUCCESS?
Some of the parks are really well maintained & get awash with greenery/trees of many varieties & bloom with flowers of all types at DIFFERENT times of the year. The secret of success of this civil-society Group, to my mind, is first of all, the right attitude of most of the members, the cohesiveness, drive & passion of the key EC members & a spirit of contributing to the society/area in which they live. This has been brought about by the members in a sustained manner, over the time , by meeting regularly in the morning for walks, celebrating birthdays of the members on alternate Sundays in the park itself where cake cutting, handing over of bouquets to the BIRTHDAY-BOYS , poetry reading & refreshments are the orders of the Birthday- Mornings. On that occasion, some family –members esp of the Birthday-Boys also join in. Photographic sessions also are also on during these celebrations. This effort & exercise in bon-homie has strengthened/is strengthening the bond amongst its members & the membership has increased to about 200!The Group also celebrates various festivals & important occasions like Independence Day ,Republic Day besides organizing painting competitions for children of the horticulture staff, labour camps located near by.All activities are being done from the contributions by the members!

TRAINING OF CIVIC OFFICIALS
There example needs emulation by other residents for upkeep of the services of their respective areas-garbage management,water supply,drainage,sewerage malls, roads, footpaths, road signages, parking etc etc of their sectors. The concerned staff of the civic bodies need to be trained properly & their skills updated from time to time esp in areas of seeking help from community, working for/with the community, `Role of Values & Ethics for Good Governance/Management` as is being done in most of the other countries viz UK Switzerland,Sweden,Singapore, Japan, Malaysia.The local authorities & the local bodies need to amiably & aggressively seek the help of local community to complement & supplement their own official` efforts.

Positive results are bound to follow,if done on sustainable basis.

Writer is-
Senior Fellow[urban studies]
Institute of Social Sciences,New Delhi www.issin.org
Director-Giraffe Heroes India Program www.giraffe.org
Ex-Chief Engineer[civil], New Delhi Municipal Council


भारत में सात अक्टूबर को रिलीज होगी ‘क्वीन ऑफ काटवे’


-प्रेमबाबू शर्मा

फिल्मकार मीरा नायर की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराही गई फिल्म ‘क्वीन ऑफ काटवे’ भारत के सिनेमाघरों में सात अक्टूबर को रिलीज होगी। डिज्नी की इस फिल्म का प्रीमियर सितंबर में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में किया जाएगा।

सच्ची घटनाओं पर आधारित है  -‘क्वीन ऑफ काटवे’ युगांडा के ग्रामीण इलाके की एक साधारण लड़की की प्रेरित करने वाली सच्ची घटनाओं पर आधारित है. पहली बार शतरंज के खेल से परिचय होने पर उसकी दुनिया बदल जाती है.

फिल्म अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में रिलीज होगी -अपने परिवार और समुदाय के सहयोग से उसके अंदर अंतरराष्ट्रीय शतरंज चैंपियन बनने के अपने सपने को पूरा करने का आत्मविश्वास पैदा होता है. फिल्म अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में रिलीज होगी. फिल्म में डेविड ओयेलोवो और मैडिना नालवांगा भी नजर आएंगे.

कालेज रैगिंग पर आधारित हैं ‘अकीरा’

-प्रेमबाबू शर्मा

अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने बताया कि कॉलेज के दिनों में वह रैगिंग का सामना कर चुकीं हैं। आने वाली फिल्म ‘अकीरा’ में रैगिंग का विषय लिया गया है। सोनाक्षी ने यहां कहा, “फिल्म (‘अकीरा’) में रैगिंग के मुद्दे को लिया गया है । मैं इससे एसएनडीटी वूमेंस यूनिवर्सिटी के कालेज में गुजर चुकी हूं, यह लड़कियों का कॉलेज था लेकिन रैगिंग उनके दोस्त बनाने का तरीका था । उन्होंने कहा, “आज, जिन लोगों ने मेरी रैगिंग की या मैंने जिनकी की, वे सभी दोस्त हैं । 

अकीरा’ में सोनाक्षी का किरदार जोधपुर से मुंबई आएगी, जहां वह कॉलेज में दाखिला लेती हैं, और गुंडों से उनका झगड़ा हो जाता है.फिल्म में कश्यप खलनायक की भूमिका में हैं। वहीं उनका कहना है कि उन्होंने अच्छा काम किया है।सोनाक्षी ने कहा, “अनुराग शानदार खलनायक हैं। फॉक्स स्टार स्टूडियोज द्वारा प्रस्तुत ‘अकीरा’ एआर. मुरुगदोस द्वारा निर्देशित है।

Sunday, August 28, 2016

हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद भारत रत्न के सच्चे हक़दार हैं। (राष्ट्रीय खेल दिवस)

(एस. एस. डोगरा )

जी, क्या आपको मालूम है? भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस किस दिन मनाया जाता है? जी हाँ, प्रतेयक वर्ष 29 अगस्त के दिन भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है. इसके मनाने के पीछे एक दिलचस्प घटना यह है कि 1905 को हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी का जन्म उत्तर प्रदेश की पवित्र स्थली इलाहाबाद में हुआ था। भारत सरकार ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस को समर्पित कर इसे राष्ट्रीय खेल दिवस मनाने की मान्यता दी. इस महान खिलाड़ी ने 1928, 1932 व 1936 के ओलिम्पिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जिताने में प्रमुख भूमिका अदा की। गौरतलब है कि उन्होने 1928 से 1946 के अपने खेल केरियर में अपनी हॉकी की जादूगरी दिखाते हुए 1000 से भी अधिक गोल दागे। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आज तक कोई भारतीय खिलाड़ी इतने लंबे समय तक नहीं खेल पाया है। हालांकि सचिन उनका पीछे करने में अन्य खिलाड़ियों में सबसे आगे हैं।

राष्ट्रीय खेल दिवस यानि 29 अगस्त को इस महान खिलाड़ी को श्रद्धांजलीपूर्वक प्रतेयक वर्ष कुछ चुनिन्दा उम्दा खिलाड़ियों को महामहिम भारत के राष्ट्रपति द्वारा “राजीव गांधी खेल रत्न, अर्जुनअवार्ड, द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इंगलेंड की राजधानी लंदन में एक स्टेशन का नाम उन्ही को समर्पित है। उनके बारे में क्रिकेट के सर्वकालीन आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज सर ब्रेडमेन का कहना था कि वे हॉकी में ऐसे गोल करते हैं जैसे कि क्रिकेट में रन बनाने के समान। बर्लिन ओलिम्पिक के दौरान उनके खेल कौशल से प्रभावित होकर विश्वविख्यात शासक हिटलर ने उन्हे जर्मनी की नागरिकता व कर्नल पद को गौरवपूर्ण रूप से देने का आग्रह किया था। परंतु भारत के इस महान सपूत ने अपने देश का मान रखते हुए हिटलर की पेशकश को ठुकरा दिया। लेकिन उनके देश के प्रति समर्पण व उम्दा खेल कौशल के बावजूद भी भारत सरकार व खेल मंत्रालय उन्हे भारत रत्न से सम्मान्नित करने में शर्म महसूस करती है। उनके सुपुत्र श्री अशोक ध्यानचंद से बातचीत हुई तो उनका यही संदेश था कि आज पूरे देश में उनके जन्मोत्सव को इतने सम्मान से मनाया जाता है, यह समस्त खेल प्रेमियों के लिए गर्व का विषय है। खुद अशोक जी अपने को बड़ा सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हे ऐसे महान खिलाड़ी का सुपुत्र होने के साथ-साथ हॉकी के लिए 1975 में हॉकी का विश्व खिताब जीतने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । घर में बाबू जी के नाम से मशहूर ध्यानचंद जी के पोते गौरव भी हॉकी प्रतिभाओं को आगे लाने में देश-विदेशों में हॉकी अकादमी चलाने में प्रयासरत है। उन्होने मुझे व्यक्तिगत रूप से कुछ बाबूजी के विलक्षण छायाचित्र भेजें है। शायद आज के दिन हमें ऐसे महान सपूत को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनकी प्रेरणा से कुछ युवाओं को खेलों में प्रोतोसाहन देने के लिए अथक प्रयास करने चाहिए।

भले ही वे 3 दिसंबर 1979 को स्वर्ग वासी हो गए परंतु आज भी हर गली,मोहल्ले, खेल के मैदानों में इस हॉकी के जादूगर ध्यानचंद का नाम अजर व अमर है। खेलों में विशेष रूचि रखने वाले हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री माननीय नरेंदर मोदी जी इस विषय में जरुर कुछ सकरात्मक कदम उठाकर इस महान खिलाडी को भारत रत्न जैसे गौरवशाली सम्मान से सम्मानित कर पुरे देश के सभी खेलप्रेमियों को नायाब तोहफा देंगे. वैसे भी हॉकी के जादूगर ध्यानचंद सच में भारत रत्न जैसे गौरव के सच्चे हक़दार भी है.

द्वारका श्री रामलीला का भूमि पूजन विधिवत पूजा अर्चना व् हवन से हुआ



द्वारका श्री रामलीला का भूमि पूजन सेक्टर-10 में विधिवत पूजा अर्चना व् हवन से संपन्न हुआ. द्वारका श्री रामलीला सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. अशोक यादव तथा महासचिव राजीव सोलंकी ने बताया कि उक्त रामलीला का आरम्भ सन २०११ में हुआ था. इस रामलीला आयोजन में क्षेत्रीय मटियाला के विधायक राजेश गहलोट का विशेष योगदान है जो स्वंम रामलीला कमेटी के मुख्य सरंक्षक भी हैं. 


भूमि पूजन के आयोजन के सुअवसर पर कृष्ण गहलोत, सुरेश सोलंकी, प्रवेश सेहरावत, सुखविंदर कौर, नीलम शर्मा, अशोक शर्मा, सुशील कुमार, रेजिमोन, दीपक, राजेश अग्रवाल, बी.एस. यादव, संजय अग्रवाल सहित समस्त रामलीला कमिटी, सामाजिक व् क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित थे.


इसके अलावा भूमि पूजन पर दिल्ली इंटरनेशनल स्कूल के स्कूली बच्चों ने संस्कृत अध्यापिका सुश्री नीलम शर्मा के नेतृत्व में रामायण के चरित्रों पर आधारित एक पेंटिंग प्रदर्शिनी भी लगाई जिसे उपस्थित जनसमूह सराहा.


राजेश गहलोत ने इस मौके पर घोषणा आगामी रामलीला मंचन को व्यवस्थित रूप से संचालन के लिए विभिन्न कमेटी के सदस्यों की जिम्मेदारियां भी सौपी. द्वारका श्री रामलीला सोसाइटी के मिडिया सलाहकार एस.एस.डोगरा एवं संजय के अनुसार इस बार रामलीला का मंचन 1 अक्टूबर से शुरू होगा तथा समापन 12 अक्तूबर को होगा.

पिछले वर्ष की भांति इस बार भी रामलीला के दौरान धार्मिक गुरुओं, राजनैतिक हस्तियों, टीवी व् बोलीवुड कलाकारों, राष्ट्रीय व् अंतरार्ष्ट्रीय खिलाडियों, मिडिया कर्मियों, समाज सेवियों,स्कूली बच्चों व् प्रधानाचार्यों,, आदि को सार्वजानिक रूप से सम्मानित भी किया जायेगा.

Necessity of Organic Farming

MADHU AGRAWAL
(Guinness Record Holder for letters in Newspapers)

It is unfortunate that while most advanced countries like United States of America (USA) are fast realizing importance of products produced through organic farming, India which was pioneer in this field in our golden ancient past, is fast losing products produced from organic farming. In countries like USA, food-grains produced from organic farming and fertilizers made from dung are sold as premium items. Even fabric woven from cotton produced by organic farming is sold as premium products with even dyes and chemicals used for processing being manufactured from products produced through organic farming. Garments and other textile-products made from fabric woven and processed by organic cotton and dyes/chemicals are taken as good for skin to avoid skin-related diseases.

Indian government should encourage organic farming through motivation and compulsions. It should be compulsory for rich owners of big farm-houses to have major portion of their farm-houses being utilized for organic farming. Government should allow cows and buffaloes at big bungalows and farm-houses so that people’s craze for dogs may convert towards cows and buffaloes.

Bhumi Pujan of Dwarka Ramlila on 28th August 2016


Saturday, August 27, 2016

It was a black day for the whole literary fraternity


(S.S. Dogra)

New Delhi: 27th August,2016, Cafe De Art Gallery, Connaught Place. It was a black day for the whole literary fraternity because the Book written by Dr. Kaynat Kazi on well known Hindi author Krishna Sobti namely “कृष्णा सोबती का साहित्य और समाज” could not released due to Krishna Sobti’s threaten. Actually, Dr. Kaynat Kazi arranged a Book release & Photo Exhibition (Sabrang) programme in the Gallery. The Photo Exhibition was presided over by Dr. Sachchinand Joshi ji-Member Secretary-Indira Gandhi National Art Centre, Govt. of India. Senior Journalist Sh.Vijay Kranti ji (Consultant Editor-DD News) was also graced this photo exhibition as Chief Guest & Sh. Anant Vijay(Senior TV Journalist & Columnist) as Special Guest. Dr. Kaynat Kazi is a versatile Media personality having a quality of brilliant Photographer & writer. Her photographs showcased in the gallery on different life style were appreciated by all dignitaries & visitors. Sh. Sushil Bharti ji-Filmmaker & Station Director of Radio Noida anchor the whole event efficiently. 

But it was really an unfortunate day in Literary world because her book on famous Hindi writer Krishna Sobti could not released due to some personalize issue.

Sh. Vijay Kranti ji who was the Chief Guest of the said book release & Photo Exhibition boldly expressed the following comments his personal Facebook Page today.

KRISHNA SOBTI INTELLECTUAL TERRORISM AGAINST A MUSLIM WOMAN WRITER

I attended the function to inaugurate Dr. Ms. Kaynat Kazi's photo exhibition today at CAFE DE ART in Connaught Place She was so terrorised by Ms. Krishna Sobti Ji's threats that she pushed the book launch out of the event's agenda. Interestingly Sobti is neither the author nor publisher of the book. This book is just based on Dr. Kaynat Kazi's PhD on literature of Krishna Sobti.

Let us not forget that Krishna Sobti is the same author who first criticized Sahitya Akadmi for manipulating literary awards but later accepted it. Then she once again invited national lime light by returning this award on the issue of intolerance.

And now she herself is publicly demonstrating her intellectual intolerance by threatening the lady author of severe legal consequences if she got her book launched by intellectuals whom she does not like for her personal political reasons.

Sobti ji is same author who did not raise voice against live burning of 6000 Sikhs by Congress goons in 1984. She practically supported harassment and hounding of Sulman Rusdie and Nasleema Tasreen by government and jehadi Mullahs by keeping mum. What a shameless conduct of intellectual terrorism by this lady against an innocent Hindi woman writer!!! Dear Sobti ji, I respect you for your good literature. I wish you were an equally good human being. At least, please don't behave like a communist terrorist.

Even, Sh.Sachichinand Joshi ji & Sh.Anant Vijay were also unhappy on this non-release of book issue. All media person, friends, family, relatives of Dr. Kaynat were also amazed & annoyed to see such humiliating situation. It was really very sad incident for the whole literary world.

Thanks for your VISITs

 
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