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Tuesday, May 31, 2016

“If you have the ability & willingness then you can achieve any goal” Says Lt. Gen. Seth


(S.S.Dogra)

Asian Academy of Film & Television made a history with the edition of 90th Festival of Short Digital Films at Marwah Studio, Noida. Lt. Gen. K.M.Seth (former Governor of Madhya Pradesh, Tripura & Chatisgarh) was the chief guest of this film festival. While addressing the audiences Lt. Gen. Seth says “If you have the ability & willingness then you can achieve the goal”.

Mr. Sandeep Marwah-Founder of Film City & AAFT also claims that we have created a history with the 90th edition of Festival of Short Digital Films at Marwah Studio, It’s also a world record in the field of Media & film making institute.

Sher Singh Directed by Trilok Singh, First Little Step by Ekant Valecha, Aakhir Kyun by Anjali Kiran, Mujhe Jeeno Do & Feel by Mukul Verma were showcased to more than three students & dignitaries. Dr. Mohita Sharma-Specialist Eye Surgeon-Triputi Eye Centre, Mr. Nirmal Vaid Senior Journalist, Film Maker & Art Promoter in India & abroad, Mr. Adesh Sharma-Famous Cinematographer (Alumini of AAFT-First Batch), Social & Political figure Mr. Anil Mittal, Station Director Mr.Sushil Bharti-Radio Noida, Renowned Painter Beenu Gupta, Dr. Amit Kaur- graced the event with their presence.

In the main exhibition hall, a solo painting exhibition of Beenu Gupta was inaugurated with the traditional Indian style by lighting the lamp. According to Ms. Gupta there are 27 paintings are based on nature & Lord Krishna displayed in this exhibition. This exhibition will remain open publicly till 29th May, 2016.

The book “Shri Shiva Prarthana” of Dr.Amit Kaur-Co-Author, Scientist & CSR Head, Apeejay Stya University unveiled by Media Guru Sandeep Marwah along with Mr. Adesh Sharma, Mr.Anil Mittal, Film Maker- Mr. Nirmal Vaid, famous Painter Beenu Gupta, Mr.S.S.Dogra-Senior Journalist & Editor of Dwarka Parichay Newspaper in the Marwah studio itself. In the end of the event, Mr. Kalyan Sarkar paid the vote of thanks.

जम्प रोप एसोसिएशन दिल्ली ने किया प्रशिक्षकों के साथ मीटिंग का आयोजन


अशोक कुमार निर्भय
नेशनल स्कूल गेम्स में पदक जीतने के बाद खिलाडियों के उत्साह को बढ़ाने के लिए जम्प रोप एसोसिएशन दिल्ली (रजि.) के महासचिव निर्देश शर्मा की अध्यक्षता में आज " दा जिम हट " वेस्ट पंजाबी बाग के सामने प्रशिक्षिकों के साथ मीटिंग का आयोजन किया गया। इस मीटिंग में जिला स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं और अभी चल रहे समर कैम्प की जानकारी ली गयी। इस मीटिंग में प्रशिक्षकों को टेक्निकल जानकारी के साथ साथ जम्प रोप एसोसिएशन दिल्ली (रजि.) द्वारा इस खेल को आगे बढ़ाने और प्रचार प्रसार के लिए भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। इस मौके जम्प रोप प्रशिक्षिकों को सम्बोधित करते हुए जम्प रोप एसोसिएशन दिल्ली (रजि.) के महासचिव एवं नेशनल टेक्निकल प्रमुख निर्देश शर्मा ने दिल्ली स्टेट प्रतियोगिता और प्रशिक्षकों ट्रेनिंग कैम्प विस्तृत जानकारी प्रदान की उन्होंने जिला स्तर पर कई कमेटी बनाई जिसमें डेमोस्ट्रेशन ग्रुप तैयार करने को कहा गया। 

इस मीटिंग में सभी प्रशिक्षकों को जिम्मेदारी तय की गयी की कैसे उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए खेल से जुडी हर जानकारी का संयोजन करना है। इस मौके पर उपस्थित प्रशिक्षकों ने अपने अनुभव और परेशनियों को महासचिव एवं नेशनल टेक्निकल प्रमुख निर्देश शर्मा के सामने रखा जिसपर उन्होंने कहा कि अगर जिला कमेटी कोई समाधान नहीं करती तो आप मुझसे सीधे संपर्क कर सकते हैं आपकी हर परेशानी समाधान किया जायेगा। जंपरोप के अंतरष्ट्रीय खिलाडी एवं प्रशिक्षक विवेक,देवेश अलावा दिनेश नवाल,रामकुमार,मुकुल सोनवाल,रवि पासवान,नेहा त्यागी,आरती भट्ट,प्रियंका सिंह एवं अन्य सभी प्रशिक्षकों ने खेल का संवर्धन और विकास में अपनी प्रतिबद्धतता दोहराई। इस मौके पर पूर्वराष्ट्रीय खिलाडी अशोक कुमार निर्भय ने मीडिया सलाहकार सदस्य की जिम्मेदारी सौपें जाने के बाद कहा कि खेल जीवन में जीने की कला सीखते हैं। खेल के माध्यम से स्वस्थ रहा जा सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर ताइक्वांडो खेलना बहुत अच्छा अनुभव था। लेकिन खिलाडी और कोच के रूप में वह अलग जिम्मेदारी थी। आज समय के साथ बदलाव आया है। आज मुझे जम्प रोप एसोसिएशन दिल्ली (रजि.) के मीडिया एवं सलाहकार प्रमुख की रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गयी है। जम्प रोप का प्रचार प्रसार के साथ साथ इस खेल का संवर्धन और विकास मेरी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा बना है। जिसको निभाने प्रयास मैं भविष्य में करूँगा। मैं महासचिव एवं नेशनल टेक्निकल प्रमुख निर्देश शर्मा का आभार प्रकट करता हूँ जिन्होंने मुझमें विश्वास जताया है।

COLORS’ flagship show Balika Vadhu enters Limca Book of Records


Prembabu Sharma
After entertaining viewers through the heartening journey of Anandi and Nandini over the course of 8 years, COLORS’ flagship show Balika Vadhu has added another feather to its cap. The show has been welcomed into the Limca Books of Records as the longest running daily fiction soap (Hindi). Tracing the life of young bride Anandi and then gradually including the journey of her daughter Nandini, the show has achieved the milestone of airing more than 2000 episodes for audiences.

Commenting on this landmark achievement, Manisha Sharma, Programming Head – COLORS, says, “The eight-year-long journey that COLORS has mapped with Balika Vadhu has been very enriching. The show’s meaningful content, endearing storyline and inspirational characters have created a strong impact on the minds of the viewers. As the show enters the Limca Book of Records and achieves this brand-new milestone, we would like to graciously thank our viewers for their everlasting support in making Balika Vadhu an industry-wide benchmark.”

Sunjoy Waddhwa, CMD, Sphereorigins says, “We are very honoured and delighted that Balika Vadhu has created a record for being the Longest Running Daily Soap and is featured in the ‘Limca Book of Records’. This wouldn’t have been possible without the constant love and support of the audience. I take this opportunity to thank the loyal audience of Balika Vadhu. This is another feather on the cap for us and will motivate and boost us to take the show to another level.”

Currently, the show progresses, Balika Vadhu is now gearing up for an interesting love triangle between Dr. Nandini (Mahhi Vij), Dr. Amit (Avinash Sachdev) and Krish (Ruslaan Mumtaz). While on one hand, Dr. Amit has proposed marriage to Nandini, on the other hand, Krish has also confessed his feelings towards her. And as theShekhawat family gears up for Dr. Amit and Nandini’s impending wedding, Krish has decided to partake in the wedding preparations in order to make Nandini confess her love for him. Nandini who is confused about her feelings, finds herself stuck in a dilemma wherein she has been forced to choose between two men – Dr. Amit and Krish - who mean the world to her. Who will Nandini marry? Krish or Dr. Amit?

सुपर-ब्रेन योगा

               
गीता  झा 

मानव मस्तिष्क ईश्वर की सर्वोत्तम आश्चर्यजनक रचनाओं में से एक है । लगभग दो किलोग्राम के वजन वाले मानव मस्तिष्क में असीमित क्षमताएं निहित हैं । मस्तिष्क में लगभग बारह अरब कोशिकाएं हैं और प्रत्येक कोशिका के पांच लाख अंतरसंबंध हैं । इस प्रकार संभव है की मस्तिष्क की कोशिकाओं के अन्तर्सम्बन्ध ब्रह्माण्ड में उपस्थित परमाणुओं की संख्या से भी अधिक हों । वैज्ञानिकों के अनुसार अभी तक मस्तिष्क के केवल 8 % भाग को ही समझा और उपयोग में लाया जा सका है शेष 92 % भाग जानकारी के आभाव में निष्क्रिय अवस्था में अनुपयोगी पड़ा रहता है । अब तक अविष्कृत किसी भी सुपर-कंप्यूटर को मात देने वाला मानव -मस्तिष्क २० अरब पेज की जानकरी आपने में स्टोर करके रख सकता है ।

साधारण अवस्था में मस्तिष्क का जो 92 % भाग निष्क्रय अवस्था में रहता है उसकी क्षमता को जागृत करना और उपयोग में लाना तो दूर की बात है मस्तिष्क का 8 % भाग जो प्रयोग में लाया जाता उसका भी हम लोग दुरुपयोग कर चिंता, अवसाद, मतिभ्रम , स्मरणशक्ति का ह्राष ,एकाग्रता की कमी , ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर ,अल्झाइमर, पार्किंसन का शिकार बनते रहते हैं ।

हल्दी, नीम, तुलसी, बासमती चावल सहित योग के कुछ विशिष्ट पोस्चर का पेटेंट करवाने के बाद पश्चिम जगत ने एक बार पुनः एक प्राचीन भारतीय व्यायाम को हाइजैक कर सुपर-ब्रेन योगा के नाम से अपने मल्टी -मिलियन डॉलर के योगा -मार्किट में प्रचारित किया है । सुपर ब्रेन योगा में हाथों को क्रॉस कर कानों को पकड़ कर उठक - बैठक लगाईं जाती है । कान पकड़ कर उठक -बैठक लगवाने की यह प्रक्रिया प्राचीन काल से भारत में शरारती या एकग्रता की कमी वाले विद्यार्थियों को दंड स्वरुप करवाई जाती थी , जिसका एक मात्र मकसद मस्तिष्क को संतुलित रख स्मरण शक्ति और एकाग्रता को बढ़ाना था ।
तमिलनाडू में प्राचीन काल से मंदिरों में गणेश के समक्ष कान पकड़ कर थोप्पुकरणम् {Thoppukaranam }, किया जाता रहा है | ऊपरी तौर पर लगता है की शायद यह अपनी गलतियों की माफ़ी मांगने के लिए किया जाता है लेकिन परोक्ष रूप से इसे स्मृति बढ़ाने और भावनात्मक -अस्थिरता दूर करने के लिए किया जाता रहा है ।

थोप्पुकरणम् के पीछे का विज्ञान
न्यूरो- साइंस के अनुसार मानव मस्तिष्क दो भागों या गोलार्द्धों में विभाजित रहता है । मस्तिष्क का दायां हिस्सा शरीर के बाएं हिस्से को नियंत्रित करता है और मस्तिष्क का बायां हिस्सा शरीर के दाएं हिस्से को नियंत्रित करता है । मस्तिष्क का बायां हिस्सा वाणी, विवेक, विश्लेषण , तर्क, बुद्धि इत्यादि से सम्बंधित है वहीं दायां हिस्सा समझ , अंतर्ज्ञान, अनुभव , अनुभूति , भावना से समबन्धित होता है । मस्तिष्क का दायां हिस्सा इड़ा और बायां हिस्सा पिंगला नाड़ी से सम्बद्ध है । शरीर और मन के सुचारू क्रियान्वन के लिए यह जरुरी है की हमारे मस्तिष्क के दोनों गोलाद्धों में सामंजस्य बना रहे ।

जब जब मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध संतुलित अवस्था में होते है तब तब मस्तिष्क से अल्फा तरंगें बहुलता से निकलती हैं , यह अल्फा तरगें ७-१२ साइकिल /सेकंड की होती हैं । इन तरंगों से हमारा शरीर शिथिल हो जाता है और मस्तिष्क तरंगें पृथ्वी के चुम्बकीय स्पंदन शुमान -अनुनाद {Schumann resonance }जिसकी आवृति ७-१/२ साइकिल/सेकंड है के बराबर हो जाती है । मस्तिष्क से निकलने वाले अल्फा तरंगें मस्तिष्क को सृजनात्मकता और अंतर्ज्ञान के प्रादुर्भाव के लिए आवश्यक वातावरण -प्रदान करती हैं । इस समय मस्तिष्क जानकारी ग्रहण करने या प्रसारित करने के लिए अत्यंत क्रियाशील हो जाता है और धीरे धीरे मस्तिष्क के सभी प्रणालियों में सामंजस्य आने लगता है | इस सामंजस्य से शरीर-मन की व्याधियां दूर होने लग जाती हैं । वैज्ञानिक भी यह तथ्य प्रमाणित कर चुके हैं कि आइंस्टीन के मस्तिष्क से अधिकतर समय अल्फा तरगें बहुलता से निकलती थी इसलिए वे एक महानतम अन्वेषक बन सके थे ।

इसके साथ ही कान के निचले भाग [ear -lobe] में मस्तिष्क के ऍक्यूप्रेशर बिंदू होते हैं जो कान पकड़ने से एक्टिव हो जाते हैं । जिससे स्मरण शक्ति का विकास होता है। इसके नियमित अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है और भावात्मक अस्थिरता दूर होती है ।

थोप्पुकरणम् करने की सही विधि :
मुं ह को बंद कर जीभ को मोड़कर ऊपर के तालु से लगाकर माइल्ड -खेचरी मुद्रा लगाएं । { tongue is rolled up to touch the upper soft palate }

अपने दायें कान को बाएं हाथ की उँगलियों से ऐसे पकडे की हाथ का अंगूठा बाहर की तरफ रहे , इसी प्रकार अपने दायें हाथ की उंगलिओं से बाएं कान को पकडे ।

इसके बाद साधरण दंड-बैठक लगाएं { do squatting or normal sit-up exercise }। केवल एक बात का ध्यान रखें की नीचे बैठते समय सांस अंदर लें और खड़े होते समय सांस बाहर छोड़े । सांस लेना और छोडना तथा नीचे बैठना और खड़े होने दोनों में रिदम् या सामंजस्य होना चाहिए ।

शुरुवात में 5-10 स्क्वैट्स करने के बाद धीरे धीर बढा कर 30-35 स्क्वैट्स प्रतिदिन करें ।

थोप्पुकरणम् से शारीरक और मानसिक लाभ :

*मस्तिष्क में रक्त प्रवाह में वृद्धि होती है । जिससे मस्तिष्क रिचार्ज होता है ।
*एकाग्रता और स्मरणशक्ति काफी बढ़ जाती है ।
*सोचने , समझने की ताकत बढ़ती है ।
*यह मुद्रा ऑटिज्म , एसपर्जर सिंड्रोम , लर्निंग डिसेबिलिटी , बिहेवियर प्रॉब्लम के साथ साथ अल्ज़ाइमर और *पार्किंसन में भी मदद करती है ।
*चिंता , अवसाद , तनाव , खिन्नता इत्यादि दूर होते हैं ।
*हाइपर -एक्टिव बच्चों के मस्तिष्क को यह मुद्रा शांत और फोकस करती है ।
*यह शरीर को लचीला बनाने के साथ शारीरिक संतुलन को कायम रखता है ।
*इससे लोअर बैक पैन के साथ साथ आर्थराइटिस ,गठिया , वेरीकोस वेन के कारण होने वाले गुटनों या पैरों के दर्द से निजात मिलती है ।
*इसके नियमित अभ्यास से वजन भी कम होता है | डाइजेशन सम्बन्धी विकार दूर होते हैं ।

आध्यात्मिक लाभ :

थोप्पुकरणम् में अर्ध खेचरी मुद्रा लगाने से शरीर में एक तरह कर इंटरनल-लॉक लग जाता है जिससे ऊर्जा का ह्रास कम हो जाता है ।

थोप्पुकरणम् में सर्वाधिक प्रभाव मूलाधार चक्र पर पड़ता है सम्भवता इसलिए दक्षिण भारत में लोग गणेश के सन्मुख यह मुद्रा करते हैं क्योंकि गणेश जी मूलाधार चक्र के अधिपति माने जाते हैं ।

मूलाधार में उच्च आध्यात्मिक अनुभूतियों के प्रगटीकरण की क्षमताएं निहित होती है । इस मुद्रा से मूलाधार में स्थित सुप्त शक्ति जागृत होती है और ऊर्ध्वगमन करती है ।

मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्धों के संतुलन से इड़ा पिंगल सामान और संतुलित होती हैं और सुषुम्ना का जागरण होता है । यह मुद्रा कुण्डलिनी शक्ति जागरण में भी सहायक है ।

इस मुद्रा के अभ्यास से आज्ञाचक्र की सक्रियता बढ़ती है जिससे पीनल ग्रंथि का क्षेत्र क्रियाशील होता है जो बौद्धिक, भावनात्मक, तार्किक और अंतर्ज्ञान जैसी सुषुप्त क्षमताओं को विकसित करता है ।

मस्तिष्क से निकलने वाली अल्फा तरंगें मस्तिष्क की क्रियाशीलता उच्चतम स्तर तक बढ़ा सकती है ।

सावधानियां:

*थोप्पुकर णम् करते समय सुविधा जनक कपडे पहने और हवादार और स्वच्छ स्थान पर ही करें ।
*महिलाएं प्रेगनेंसी या माहवारी में इसे न करें ।
*इसके लिए सुबह या शाम का समय उपयुक्त है , खाली पेट रह कर करने की कोशिश करें ।
*धीरे धीरे अपनी शक्ति अनुसार स्क्वैटिंग की गिनती को बढ़ाएं । एक बार में ३०-३५ स्क्वैटिंग से अधिक न करें।
*पेट, लिवर,किडनी या ह्रदय के रोग में करने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लें । किसी भी प्रकार की सर्जरी हो चुकी हो तो भी डॉक्टर से पहले सलाह लें ।
*थोप्पुकरणम् करते समय किसी भी प्रकार की असुविधा हो जैसे चक्कर आना, सर दर्द होना या किसी भी अंग में तकलीफ होना तो उसे उसी समय बंद कर दें ।

Pacific Mall announces ‘Planet Pacific’Educational and Exciting Summer Camp for Children


Ashok Kumar Nirbhay

A huge decorated spaceship (32 ft x32 ft) with a cosmic themed classroom inside marked the unveiling of Delhi’s premium shopping, entertainment and leisure destination Pacific Mall, Tagore Garden’s exciting ‘Planet Pacific’ Kids Summer Festival. The four week festival marking the onset of the holiday season was kick-started with an exclusive preview for 45 differently abled kids from the Capital’s “Chahat Special School.” Pacific Mall which hosts more than 130 National and International brands under one roof is expecting15% growth in footfalls during the ongoing festival. 

The popular Summer Workshops conducted annually by Pacific Mall are completely free and parents can register their children to participate in any of the 12 activities listed in the summer program. The ‘Pacific Space Ship’ will take kids on a fun-filled, educational and exciting journey giving the children an opportunity to indulge in a variety of activities like Art and Craft workshops, Theatre Workshop, Hobby Classes like Ice-cream making, Science-Cosmic Classroom, Table Etiquettes, Dance Classes, Paper Crafts, Painting, Fancy Dress Competitions, Fashion Shows etc. Classes will be conducted in six batches from 12.00 noon – 8.00 pm daily. Each timeslot of the ‘Planet Pacific’ summer camp will have a different theme to enable kids to participate in and experience a range of interesting activities and topics. Parents can choose to book weekly or the entire workshops for a particular theme. Unveiling the “Planet Pacific’ Summer Camp, Mr. Abhishek Bansal, Executive Director, Pacific Mall said: “Every parent endeavours to provide their children with the best of opportunities that will help them evolve and become more confident and assertive in life. Our Summer Camp is popular with parents and kids alike because it gives them an opportunity to have learning and fun while enjoying their summer holidays. The different activities have been tailored to aid learning, talent development, interactive and communication skills. Additionally, such summer events allow us to maximise footfall in our Malls which in turn can aid sales by upto10%.” “Chahat Special School” is one of New Delhi's premier institutes providing comprehensive education, vocational training and work opportunities to young people who are differently challenged. Present at the workshop Jaswinder, Principal from Chahat expressed, “We are very grateful to Pacific Mall for providing this opportunity to our kids. We are constantly looking for opportunities and avenues in an attempt to make world beautiful for special kids. These kids are as active, energetic, full of life and eager to interact with everyone, all that is required is a bit of understanding and support from the society” Pacific Mall has been successfully conducting free Summer Camps for Kids for the past 5 years and is very popular among both parents and children alike giving the children an access to a wide range of carefully selected activities to keep them entertained and stimulated during the summer holidays. 

Last year around 2800 kids attended the Summer Camp at the Mall. if you know Pacific Mall is the premium shopping, entertainment and leisure destination hosting more than 130 National and International Brands in the country. The Mall is a part of Pacific India, country’s reputed business group with presence in real estate, hospitality and education verticals Situated at Tagore Garden with 5.5 lakh sq. ft of total area, shopping never goes out of fashion at Pacific Mall, as it is a shopping, entertainment and leisure extravaganza 365 days a year! Pacific is a renowned landmark of India's shopping capital and it showcases a huge infrastructure combined with state of the art facility and customer friendly service in order to give a world class experience and provide better space and visibility for the retailers and free flow for shoppers.

​​विभिन्न किरदारों में एक्सपेरिमेंट करना अच्छा लगता है- जया भट्टाचार्य

प्रेमबाबू शर्मा

छोटे परदे का जाना-पहचाना नाम है जया भट्टाचार्य । जया अब तक कई शोज कर चुके हैं, जिनमें उन्होंने हमेशा अलग-अलग किरदार ही निभाये हैं।

टीवी शो,क्योंकि सास भी कभी बहू थी, बनूं मैं तेरी दुल्हन, पलछिन, कसम से, केसर, करम अपना अपना, क्योंकि सास भी कभी बहू थी, बनूं मैं तेरी दुल्हन, पलछिन, कसम से, केसर, करम अपना अपना आदि मिलाकर करीब तीस से ज्यादा धारावाहिक और एक दर्जन फिल्मों में अपने अभिनय के जौहर दिखा चुकी है।

आजकल जय एंड टीवी के शो गंगा व कलर शो ‘थपकी प्यार की’ के अलावा डी डी के किसान चैनल पर प्रसारित धारावाहिक ‘‘शिक्षा’ से जुड़ी हैं। इन सीरियल में उनकी भूमिका तथा उनके करियर से जुड़े सवालों के साथ बातचीत हुई प्रेमबाबू शर्मा से।

करीब तीन दर्जन शोज में काम करने के बाद भी आप क्योंकि सास.. के किरदार पायल से अभी तक पीछा नहीं छुड़ा पाई?
कोई भूमिका ऐसी होती है जिसके बारे में आपको पहले से पता नहीं होता कि उसे दर्शक किस तरह लेंगे। पायल एक निगेटिव रोल था जिसके लिये मुझे उन दिनों सैकड़ों गालियों का सामना करना पड़ा लेकिन वही उस रोल की सफलता थी।

निगेटिव रोल निभाने से पहले आपके दिमाग में क्या था?
दरअसल यह एक पहले बहुत छोटी सी भूमिका थी लेकिन बाद में इस विस्तार दे दिया गया। शुरू में मैंने जरा भी नहीं सोचा था कि यह रोल घर घर पहुंच जाएगा। जहां तक रोल की नकारात्मकता की बात की जाये तो इसे निभाते हुये मेरी डांस की ट्रेनिंग काफी काम आई। क्योंकि बात करते हुये भवें मटकाना या कमर मटकाना यह सब मैं इसलिये कर पाई क्योंकि मैं डांस जानती थी। बाद में पायल का रोल इतना टाइप कास्ट हो गया कि सालों मुझे उसी तरह के रोल ऑफर होते रहे। उन दिनों मैंने करीब चालीस सीरियल्स नकारे थे।

किसी रोल को निभाने से पहले घर से आप कितनी तैयारी करके सेट पर जाती हैं?
जरा भी नहीं क्योंकि मैं मैंर्टड एक्टर नहीं हूं और न ही मैंने एक्टिंग कहीं से सीखी है। मैं सेट पर बिल्कुल न्यूट्रल होकर जाती हूं, वहां जो मुझे करने के लिये कहा जाता है वही मैं करती हूं। एक बार मैंने ट्राई करने की कोशिश की थी। वह एक फिल्म थी जिसमें काफी दिग्गज अभिनेता थे जिन्हें सीन में मुझे डांटना था। मैं मुंबई से लखनऊ तक उस सीन के सवांद रटते हुये गई थी लेकिन सीन मैं मैंने इतनी बुरी अभिव्यक्ति दी कि बाद में मैं घर भाग गई। उसके बाद से मैं हर चीज सेट पर ही करती हूं। 

मौजूदा धारावाहिक ‘‘शिक्षा’ के बारे में क्या कहना है?
इस सीरियल का पूरा नाम ‘‘शिक्षा-एक मजबूत आधारशिला’ है। सिद्धार्थ नागर ने यह कॉन्सेप्ट महज दो दिन में लिखा और एग्जीक्यूट किया। दरअसल किसान चैनल पर यह सब्जेक्ट पांच दिन के भीतर जमा करना था। हम सब बैठकर सोच रहे थे, तीन दिन तक किसी के दिमाग में कुछ नहीं आया लेकिन चैथे दिन सिद्धार्थ के दिमाग में आया उन्होंने हमें सुनाया और फिर इसे लिखकर जमा कर दिया।

शो का कॉन्सेप्ट क्या है?
इसका मेन कॉन्सेप्ट यह है कि शिक्षा का तात्पर्य क ख ग से नहीं है बल्कि इसका तात्पर्य नॉलेज से है। आपको जितनी नॉलेज होगी जीवन में आप उतना ही आगे बढ़ेंगे। हम बहुत सारी चीजें इसलिये भी नहीं कर पाते क्योंकि हमें उसकी नॉलेज नहीं होती। इस शो के तहत एक गांव को वह सारी बातें बताई जा रही हैं वह सारी शिक्षा दी जा रही है जिसकी उनके जीवन में जरूरत है। फिल्म का मुख्य किरदार एक लड़की सारिका ढिल्लन है जो शहर जाकर एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर फिर वापस गांव आती है और वह यहां आकर न सिर्फ गांव वालों को वहां के जमींदार के कर्ज से मुक्ति दिलवाती है बल्कि उन्हें खेती करने के आधुनिक तरीकों से भी परिचित करवाती है।

आप शो में कौन सी भूमिका निभा रही हैं?
मैं सारिका की मां बनी हूं जो हमेशा उसके साथ रहते हुये हर अच्छे काम में उसका साथ देती है।
इसके अलावा आपका एंड टीवी के शो गंगा व कलर शो ‘थपकी प्यार की’ में भी आप काम कर रही है ?
जी हाॅ। इन दिनों कलर टीवी शो ‘थपकी प्यार की’में वसुधंरा नामक किरदार को निभा रही हॅू जबकि गंगा में सुधा का रोल है,यह शो विधवाओं के जीवन पर आधारित है।

सुना है आपकी एक्टिंग के अलावा प्रोडक्शन में भी दिलचस्पी है?
एक हद तक, मैं पिछले सात साल से सिद्धार्थ नागर जिन्हें मैं अपना भाई मानती हूं के साथ उनके सीरियल्स के अलावा प्रोडक्शन में भी उनका हाथ बंटाती हूं। इससे मुझे इतना पता चला कि आज मैं स्पॉट ब्वॉय से एडी तक सबकी रिस्पेट करती हूं।

सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र द्वारा स्कूली बच्चों की कार्यशाला आयोजित


प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी कला तथा संस्कृति के प्रति जागरूकता विषय पर 9 वर्ष से लेकर 13 वर्ष तक के स्कूली बच्चों की गर्मियों की छुट्टियों में 18 मई से 28 तक द्वारका स्थित सी सी आर टी सेक्टर-7 में ग्रीष्मकालीन कार्यशाला का आयोजन किया गया. सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र के उपनिदेशक डॉ. चेतन सिंह ने द्वारका परिचय को बताया कि उक्त कार्यशाला में स्कूली बच्चों को थियेटर, ऐस्थेटिक्स इन फोटोग्राफी, क्रिएटिव पपेट्री, क्रिएटिविटी थ्रू डांसेस, लोक नृत्य, भारतीय भाषाओँ के गीत सीखना, जीवन कौशल, कहानी कहने की कला, परम्परागत शिल्प, सुलेखन आदि का प्रशिक्षण दिया गया. 

इस कार्यशाला में विभिन्न प्रदेशों से लगभग 25 अनुभवी शिक्षकों/आर्टिस्टों ने दिल्ली के विभिन्न भागों से आए लगभग तीन सौ बच्चों को उपरोक्त कथित उपयोगी विधाओं को सिखाया. इस कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले सभी बच्चों को प्रतिभागी प्रमाण पत्र से पुरुस्कृत भी किया गया.

J. M. International School Dwarka





स्प्लैश वाटर पार्क अब रोहतक में भी शुरू


(द्वारका परिचय फ़ीचर डेस्क)

पुरे देश में धूम मचाने के बाद, 20 मई को स्प्लैश वाटर पार्क अब रोहतक में भी शुरू हो गया. सूत्रों के मुताबिक रोहतक में इस नए स्प्लैश वाटर पार्क का भव्य उद्घाटन सुश्री कविता जैन- शहरी स्थानीय निकाय, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण मंत्री, हरियाणा सरकार, रोहतक के विधायक मनीष ग्रोवर, इस सुअवसर पर हरियाणा प्रदेश के भाजपा उपाध्यक्ष राजीव जैन, स्प्लैश वाटर पार्क के निदेशक सतीश राज देशवाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.

सुखपुरा चौक से जींद बाईपास की और तैयार हुए स्प्लैश वाटर वर्ल्ड सुबह 10 बजे के करीब एंट्री शुरू होने के बाद अपने परिवार के साथ आए बच्चों ने झूलों का बखूबी आनन्द लिया। बच्चों ने अपने परिजनों के साथ फ्री फाल, स्ट्राइकिंग कार, टोरा-टोरा, ड्रेगन, मोनो रेल, जॉइंट व्हील, केटरपिल्लर, मछली झूले का आनन्द लिया। इन झूलों का आनन्द लेने के बाद आगन्तुकों ने पेंडुलम, बॉडी स्लाइड,किड्स पूल, वेव पूल, स्विमिंग पूल में मस्ती करते हुए रेन डांस किया । स्प्लैश वाटर वर्ल्ड में पहुंचे हितेश, संदीप, तरुण, पूजा, अनीता,साक्षी ने झूलों की तारीफ करते हुए कहा कि हमने पहली बार स्प्लैश वाटर वर्ल्ड का रुख किया था। इससे पहले गर्मियों में मौज मस्ती करने के लिए हमे दिल्ली या बाहर जाना पड़ता था। लेकिन अब घर के नजदीक ऐसी जगह न केवल समय बचाएगी, अपितु मस्ती करने का ज्यादा समय देगी।

क्यों चुप हो ?


मधुरिता

संसार कार्यकारिणी के कार्य का विश्लेषण कर सकते है और कार्य परिणाम भी सकारात्मक व नकारात्मक दृश्यमान होते है | शिकायत भी कर सकते है ,हम उनके पास गुहार भी लगा सकते है |

परमात्मा की शासन प्रणाली बड़ी ही विचित्रता लिए हुए है- वो तो समझ से भी बाहर है | इसे हम अपनी आँखों से देख नहीं सकते उनकी सत्ता का केवल अनुभव मात्र कर सकते है |

यह विषय अति विचारणीय है जो चेतन तत्व है सभी प्रणियों में समान रूप से विद्यमान है | ठीक उसी तरह जिस तरह बिजली का (करंट ) सभी उपकरणों में समान रूप से कार्य करता व चलायमान होता है | इसके कार्य का आकलन आसानी से हो जाता है परन्तु हमारे अंदर जो चेतनता है, उसको समझने के लिए हमें विचार करना होगा |

कुछ आवाजे टेप करना है तो टेपरिकॉर्डर का दो बटन दबाना पड़ता है , सुनना है तो एक बटन दबाया जाता है | मन का बटन नहीं दबेगा ह्रदय नहीं पिघलेगा तब तक भक्ति भाव नहीं आता है (अथार्त वो दिव्य शक्ति का संचार नहीं होता जिससे हम उस चेतन को समझ सकें) |

इसी तरह सिक्के के दो पहलू ही प्रचलित है , जब की सिक्के का तीसरा पहलू किनारे का है (जो चेतन का दर्शन कराने वाला है ), जिस पर खड़े हो कर हेड टेल व बीच में का भी भाग आसानी से देखा जा सकता है (वह है ब्रह्मानन्द,परमानंद, ईश्वर, अल्लाह,गॉड) |

ईश्वर यदि चुप होता तो जड़ से चेतन सभी निष्क्रिय जान पड़ते व् भाव शून्य सृष्टी होती | जिसने भी संसय व दद्वंद रहित हो कर इस रहस्य को समझने का प्रत्यत्न किया उसे अवश्य दर्शन भी हुए और सत् चित् आनंद उसे मिला |

कृपा का भंडार सर्वथा खुला है |

Monday, May 30, 2016

ई-काॅमर्स बाजार में होमपंच

प्रेमबाबू शर्मा

होम एंड किचन एप्लायंसेज के क्षेत्र में देश के पहले एक्सक्लूसिव आॅनलाइन मेगास्टोर होमपंचडाॅटकाॅम ने अपनी मौजूदगी का अहसास कराना शुरू कर दिया है। ग्राहकों की जरूरतें पूरी करने के लिए अपने विशिष्ट ब्रांड संचालित बिजनेस माॅडल के साथ होमपंच उपकरणों की विशाल रेंज पर मौजूदा डील्स के साथ ही बेहतरीन सर्विस को लेकर भी ग्राहकों को आश्वस्त करता है।

यह ब्रांड्स, कस्टमर्स और डीलर्स तीनों की जरूरतों का बराबर ख्याल रखता है। ग्राहक अपने रोजमर्रा की चीजों के लिए 500 से भी ज्यादा ब्रांड्स के उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण चुन सकते हैं। होमपंच दिल्ली-एनसीआर में स्थित है जिसके पास टेक्नोलाॅजी और कैटेगरी मैनेजमेंट में दक्षता रखने वाले 25 प्रोफेशनल्स की मजबूत टीम है। फिलहाल होमपंच 4000 से भी ज्यादा भारतीय शहरों में आॅर्डर हासिल करता है।
होमपंच ग्राहकों को सभी प्रमुख ब्रांड्स के उत्पादों का वर्गीकरण बिना किसी भेदभाव के मुहैया कराता है। यह ग्राहकों और ब्रांड्स के बीच सीधी बातचीत करवाता है और ग्राहकों को वेबसाइट से उत्पाद खरीदने पर ब्रांड वारंटी दिलाता है न कि विक्रेता की ओर से वारंटी। होमपंच का यूनिक प्राइसिंग माॅडल ग्राहकों के लिए एक ही कीमत उपलब्ध कराता है और किसी तरह की मल्टीपल प्राइसिंग आॅफरिंग नहीं होती जैसा कि बाजार में आम बात है।

इस बारे में होमपंचडाॅटकाॅम के सीईओ श्री सचिन गोयल ने कहा, ‘‘होमपंच सही अर्थों में ग्राहकों, ब्रांड्स और रिटेलर्स सभी के लिए फायदे का सौदा है। होम एंड किचन एप्लायंसेज की आॅनलाइन सर्च और खरीदारी का तरीका होमपंच ने बदलकर रख दिया है और सेग्मंेट में आॅनलाइन शाॅपिंग के क्षेत्र में खलबली मचा दी है। हम उत्पादों की श्रेणियों और उसके ग्राहकों के बेहतरीन विभाजन के जरिए हम होम एंड किचन एप्लायंसेज से जुड़े हर व्यक्ति के लिए खास समाधान मुहैया कराते हैं। होम एंड किचन एप्लायंसेज सेग्मंेट में सभी ब्रांड्स के लिए हम बराबर के अवसर पैदा कर रहे हैं जिसका कई ब्रांड्स ने स्वागत किया है क्योंकि ग्राहकों और रिटेलर्स के लिए उनकी आॅनलाइन आॅफरिंग को बेहतरीन अवसर मिल रहा है। हमारे खास बिजनेस माॅडल में ग्राहक उनके घर पर डिलीवर किए गए विभिन्न वैरायटी के सही उत्पादों की बेहद उचित कीमत चुकाते हैं। हमारा लक्ष्य बहुत ही कम समय में अपने प्लेटफाॅर्म की पहुंच 1000 से ज्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स तक करना है ताकि वे भारतीय उपभोक्ताओं तक बहुत ही आसान और कम लागत में पहुंच सकें।‘‘

Fortis Hospital Noida celebrates victory Tobacco induced Cancer on "World No Tobacco Day"

विश्व तंबाकूरोधी दिवस मनाया
प्रेमबाबू शर्मा


फोर्टिस हाॅस्पिटल, नोएडा ने विष्व तंबाकूरोधी दिवस के मौके पर तंबाकू के सेवन से हुए कैंसर को मात देने वाले दो मरीजों को मीडिया के सम्मुख पेश किया। इस काॅन्फ्रेंस का नेतृत्व डाॅ. गगन सैनी, वरिष्ठ सलाहकार, रेडिएशन आॅन्कोलाॅजी विभाग, कैंसर थेरेपी सेंटर, फोर्टिस हाॅस्पिटल, नोएडा ने किया। 

66 साल के अजब सिंह कई वर्षों से धूम्रपान करते थे। गर्दन के दाएं हिस्से में सूजन व गले के कैंसर से पीड़ित थे। मरीज की सर्जरी की गई जिसके बाद कीमोथेरेपी के साथ इमेज गाइडेड रेडियोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी की गई। देखभाल और उचित उपचार की मदद से वह इस बीमारी से पार पाने में सफल रहे।

45 साल के शैलेंद्र मणि काफी अधिक मात्रा में गुटखा (तंबाकू) चबाते थे, वह मंुह में छाले के साथ डाॅ. सैनी के पास आए थे। उन्हें भी सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी और इमेज गाइडेड रेडियोथेरेपी से गुजरना पड़ा। मरीज पिछले दो वर्षों से भी अधिक समय से बीमारी से बाहर आ चुके हैं।

डाॅ. गगन सैनी, वरिष्ठ सलाहकार, रेडिएषन आॅन्कोलाॅजी विभाग, कैंसर थेरेपी सेंटर, फोर्टिस हाॅस्पिटल, नोएडा ने कहा, तंबाकू से कैंसर होता है। आम तौर पर हमारे देष में तंबाकू का उपयोग या तो बीड़ी या गुटखा के रूप में होता है। हमारे देश की 15 वर्ष से अधिक उम्र की एक-तिहाई आबादी तंबाकू का इस्तेमाल करती है और इस बात में कोई आश्चर्य नहीं है कि तंबाकू की वजह से हमारे देष में हर साल दस लाख से अधिक मौतें होती हैं। मेरे दोनों मरीजों में गंभीर रूप से तंबाकू का इस्तेमाल करने की वजह से ये लक्षण पाए गए। हालांकि ये दोनों मामले सिर और गले के कैंसर थे लेकिन तंबाकू (धूम्रपान और धूम्ररहित) की वजह से फेफड़े का, खाने की नली का और पेट का भी कैंसर होता है। सिर और गले के कैंसर के उपचार के पीछे सिद्धांत रेडिएषन थेरेपी या सर्जरी (चुनिंदा मामलों में कीमो के साथ) के साथ लोको-रीजनल कैंसर का समाधान करने का है। विभिन्न अध्ययनों से यह बात साफ हुई है कि इन बीमारियों के उचित उपचार से बेहतर परिणाम सामने आते हैं।’’

श्री गगन सहगल, जोनल निदेशक, फोर्टिस हाॅस्पिटल, नोएडा ने कहा, ’’भारत में बड़े पैमाने पर तंबाकू के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से सेहत के खराब होने के परिणाम दिखाई दे रहे हैं। अनुमान है कि तंबाकू के उपभोग की वजह से पूरी दुनिया में करीब साठ लाख मौतें होती हैं। इन आंकड़ों में न सिर्फ प्राथमिक बल्कि द्वितीयक उपयोगकर्ता भी शामिल होते हैं जो किसी माध्यम से तंबाकू का प्रयोग करते हैं। यह चैंकाने वाला तथ्य है।’’

भारत में तंबाकू का उपभोग आधे पुरुषों और करीब एक चैथाई महिलाओं में कैंसर का कारण बनता है। इसके अलावा यह कार्डियोवैस्क्यूलर बीमारियों और गंभीर ष्वसन संबंधी बीमारियों और सेहत को होने वाले अन्य प्रकार के नुकसानों का भी एक कारक है। अत्यधिक गुटखे के इस्तेमाल से भूख मरने, नींद में गड़बड़ी, एकाग्रता में कमी और अन्य समस्याओं की वजह बनता है।

भारत में गरीबों की सेहत में सुधार के एक प्रयास के अंतर्गत तंबाकू के प्रयोग को नियंत्रित करने के प्रभावी प्रयोग किए जाने चाहिए। ऐसा कर पाने में असफल रहने के परिणामस्वरूप बीमारियों-संक्रामक एवं गैर-संक्रामक का बोझ बढ़ सकता है। विष्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि वर्ष 2020 तक भारत में तंबाकू की वजह से होने वाली मौतों की संख्या 15 लाख के आंकड़े को भी पार कर सकती है।

‘‘मां के रूप में मेरे अनुभव ने बच्चों के प्रति मेरा नजरिया बदल दिया‘‘- शिल्पा शेट्टी

प्रेमबाबू शर्मा

जल्दी ही अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी सोनी एन्टरटेनमेंट टेलीविजन के आगामी रियलिटी शो ‘इंडियाज सुपर डांसर’ में नजर आयेंगी। इस शो में 5-13 वर्ष की उम्र के बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच उपलब्ध होगा।

खबर की पुष्टि करते हुए शिल्पा ने कहा, ‘‘सोनी एन्टरटेनमेंट टेलीविजन पर इंडियाज सुपर डांसर में हम भविष्य के डांसर्स की तलाश कर रहे हैं। डांस मेरा जुनून है और मुझे बच्चों से प्यार है। इसलिये यह शो मेरे मन के अनुकूल है। मौजूदा दौर के बच्चों की प्रतिभा बेमिसाल है। बच्चों की मासूमियत आपका मनोरंजन करती है और साथ ही हमेशा उनसे कुछ सीखने को भी मिलता है।‘‘

यह बताते हुए कि मातृत्व से उन्हें बच्चों के साथ व्यवहार करने की कला सीखने में मदद मिली है, शिल्पा ने आगे कहा कि, ‘‘मेरा एक बेटा है, जिसकी उम्र अभी 4 साल है। मां के रूप में मेरे अनुभवों ने बच्चों के प्रति मेरा नजरिया बदल दिया है। उनके इरादे बेहद सच्चे होते हैं और उनके आस-पास रहकर अच्छा लगता है। मैं इंडियाज सुपर डांसर में आने को लेकर बेहद उत्सुक हूं और मुझे पूरा भरोसा है कि लोग इसे पसंद करेंगे।‘‘

शिल्पा ने हाल ही में एक प्रमोशनल शूटिंग में शाॅट दिया है और जल्द ही प्रतिभाओं की खोज में देश भर की यात्रा पर निकलेंगी। शिल्प सेट्टी को बच्चों के इस डांस रियलिटी शो में जज की भूमिका में देखना उनके प्रशंसकों के लिए सचमुच एक सुखद अनुभव होगा। जज करने की उनकी अद्भुत कुशलता देखने के लिए सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन से जुड़ें।

प्रियांशु लीड रोल निभायेगें ‘बड़े भैय्या की दुल्हनियां‘ में

प्रेमबाबू शर्मा

अभिनेता प्रियांशु,सोनी एन्टरटेनमेंट टेलीविजन के फिक्शन शो ‘बड़े भैय्या की दुल्हनियां‘ में मुख्य भूमिका निभाते नजर आयेंगे। यह शो एक फैमिली ड्रामा है। यह 14 लोगों के एक परिवार की कहानी है, जो अपने बड़े भय्या ऊर्फ प्रियांशु जोरा के लिये परफेक्ट दुल्हनियां की तलाश कर रहे हैं।

इस शो के बारे में प्रियांशु ने कहा, ‘‘सोनी एन्टरटेनमेंट टेलीविजन की नई सिरीज बड़े भैय्या की दुल्हनियां का हिस्सा बनकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। यह बेहद प्यारा काॅन्सेप्ट है और मुझे पूरा भरोसा है कि हर कोई इससे जुड़ाव महसूस करेगा। मैं कुछ ऐसा करना चाहता था, जिसमें मुझे न सिर्फ परफाॅर्म करना पड़ें, बल्कि मुझे कुछ सीखने को भी मिले। यह प्रोजेक्ट मेरे लिये बिल्कुल सही है। मुझे पूरा भरोसा है कि यह एक अनोखा सफर होने वाला है।‘‘

प्रियांशु शो में एक युवा, जिम्मेदार और मेहनती लड़के अभिषेक का किरदार निभाते नजर आयेंगे, जिसका ताल्लुक एक बड़े परिवार से है। उनका किरदार उनके डेब्यू शो में निभाई गई भूमिका से बिल्कुल विपरीत है। इस बारे में विस्तार से बताते हुये प्रियांशु ने कहा, ‘‘मेरे पहले शो में मेरा किरदार एक आलसी शख्स का था। वह अभिषेक की तरह कभी भी बेहद जिम्मेदार नहीं था। वास्तव में अभिषेक अपने परिवार में एकमात्र मेहनती इंसान है, जबकि सभी लोग आलसी हैं। यह कर्म की तरह है। मैंने अपने पहले शो में काम नहीं किया था और मैं अब सारे काम कर रहा हूं।‘‘

Happy Birthday- Paresh Rawal


Sunday, May 29, 2016

Dempo SC Back Into Hero I-League After A Thumping Win


Shoubhik Mukhopadhyay
I-League Media

Dempo SC took the final match of the Second Division League 2015-16 against Minerva Academy FC by the scruff of the neck owing to the first-half brace by Milagres Gonsalves and a goal by Felix Chidi. Following this stupendous win today, the Goan outfit cemented the coveted berth in the Hero I-League 2016-17.

Dempo SC started all guns blazing in front of the top brass of the club's management and they needed only 9 minutes to get their nose in front when Milagres Gonsalves headed a long ball unleashed by Mandar Rao Desai from the top of the box. 4 minutes later, Felix Chidi doubled the lead following a scintillating solo run, leaving the opponent defenders aghast.

Following the back-to-back strikes by Dempo SC, Minerva Academy FC players were left completely clueless and in the 15th minute, they made their first positive attack from the left flank. 3 minutes later, Mandar Rao Desai sneaked past Kamalpreet Singh from the left flank but his over-ambitious effort went abegging.

Manvir Singh and Sajandeep Singh tried their best to penetrate the Dempo SC defence but the tame effort from the top of the box was easily collected by Laxmikant Kattimani.

Just after the half-hour mark, Felix Chidi ran past Amandeep Singh and released a loopy ball, which was converted by Milagres Gonsalves with much ease to send the Dempo SC dugout in a delirium.

Dempo SC, who were enjoying the lion's share of ball possession, were very close to scoring their fourth goal at the stroke of the first half but Mandar's grounded shot missed the net by a whisker.

On the resumption, Surinder Singh introduced Nitesh Chhikara at the expense of Kamalpreet Singh to shape up the defence. Nitesh combined well with Sehijpal Singh from the right but his long ball was snatched by the safe hands of Kattimani.

With time waning, Dempo SC pressed hard to maintain the lead. Surinder Singh left no stone unturned to make a dramatic come back into the match. Krishna Pandit and Dilliram Sanyasi were deployed to instill more vigour in the attacking third but they could hardly leave any impression today.

Manvir Singh came very close to opening the goal mouth for the visitors in the 76th minute but his powerful header sailed wide of the woodwork. 2 minutes later, Simranjeet Singh hammered it from 25-yards but it missed the target by a few yards.

With 8 minutes to the final whistle, Felix Chidi almost completed his brace but Arshdeep Singh threw himself to thwart the Nigerian from increasing the gap further. In the 86th minute, Minerva Academy FC had their share of joy when Amandeep Singh found the back of the net from the top of the box, thanks to a heavy deflection by Shallum Pires.

Sunando Dhar, CEO, I-League, who presented the champions trophy to Dempo SC congratulated the team on their success, "Dempo SC are one of the leading sides of Indian Football and it's good to see them back in Hero I-League."

Supervisor required for a Group Housing Society


A Group Housing Society in Sector 18, Dwarka urgently requires a young and energetic person to take care / supervise / manage all maintenance work of the Society immediately. Suitable candidate having at least graduation degree in any field, may apply to the Society giving details of his name , date of birth, educational qualification, experience in the relevant field, address and contact details of his Mobile / Phone no. and / or e-mail ID etc. at the following address.

President / Secretary,
New Rashtriya Apartments,
Plot No. 15, Sector 18-A,
Dwarka, New Delhi - 110 078.

Salary negotiable, but it shall not be a constraint for the well deserving candidate.
Mobile Nos. - President - 9818778246 , Secretary - 9818897441

अमिताभ, विद्या, नवाज़ ने 'तीन' के लिए कुछ नया सीखा


प्रेमबाबू शर्मा

अमिताभ बच्चन, विद्या बालन और नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी अपनी आने वाली फ़िल्म 'तीन' में कुछ नया करते नज़र आएंगे. रिभु दासगुप्ता के निर्देशन में बनी फ़िल्म 'तीन' में, जहांअमिताभ बच्चन ने स्कूटर चलाया और फुटबॉल खेला, वहीं विद्या बालन ने भी अकेले ड्राइविंग की है. 10 जून को रिलीज़ हो रही इस सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म में अमिताभ बच्चन एक ऐसेदादा के किरदार में नज़र आने वाले हैं, जो स्कूटर से अपनी लापता पोती की खोज कर रहा है.

स्कूटर चलाने के अपने अनुभव के बारे में अमिताभ ने कहा, ''स्कूटर और बाइक मैंने कम ही चलाई हैं. लेकिन जब मुझे पता चला कि इस फ़िल्म में मुझे स्कूटर चलाना है, तो मैंने कहा कि'जलसा' में एक स्कूटर भेज दो, जिस पर मैं प्रैक्टिस कर सकूं''. वो कहते हैं कि बैलेंस के मामले में स्कूटर, बाइक की तुलना में ज़्यादा चुनौतिपूर्ण है. इसके अलावा बिग बी इस फ़िल्म मेंफुटबॉल खेलते भी दिखाई देंगे.

वहीं विद्या बालन इस फ़िल्म में पुलिस अफ़सर की भूमिका में नज़र आने वाली हैं और वो कोलकाता की सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाते दिखाई देंगी. अपने इस अनुभव के बारे में विद्या कहतीहैं, ''वैसे तो मैंने ड्राइविंग की है, लेकिन यह पहली बार है जब मैंने अकेले ड्राइविंग की है.'' विद्या इंस्ट्रक्टर के बारे में कहती हैं, ''मुझे ड्राइविंग सुजॉय घोष ने सिखाई है.''

यह फ़िल्म कोलकाता की पृष्ठभूमि में बनी है. फ़िल्म में काम करने वाले अधिकतर कलाकार और क्रू मेम्बेर्स की बंगाली पर अच्छी पकड़ भी है. ऐसे में इस बंगाली माहौल ने नवाज़ुद्दीनसिद्दीक़ी को भी बांग्ला सिखा ही दिया. फ़िल्म से जुड़े एक क़रीबी सूत्र का कहना है कि सुजॉय, रिभु, बिग बी और विद्या के लिए कोलकाता, दूसरे घर की तरह है. ऐसे में ये सभी अपनीबातचीत में बंगाली कहावतों और लोकोक्तियों का जमकर इस्तेमाल करते थे.

इस तरह से नवाज़, दिन के ख़त्म होने तक एक नया वाक्य सीख ही जाते थे. विद्या बालन और अमिताभ बच्चन जैसे 'शिक्षक' पाकर नवाज़ ख़ुश हैं. फ़िल्म में नवाज़ चर्च के पादरी की भूमिका में हैं.

Vandana International School, Sector-10, Dwarka


स्टारर्स भी कर रहे स्ट्रगल

प्रेमबाबू शर्मा

अपने जमाने की मशहूर अदाकारा राखी ने बाद में फिल्मों में बतौर चरित्र अभिनेत्री काम किया। विद्या सिन्हा ने भी कई फिल्मों और धारावाहिकों में चरित्र अभिनय किया। मशहूर कलाकार भारत भूषण ने फिल्मों का निर्माण किया जिसके चलते वो आर्थिक तंगी में आ गए और स्वयं के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए उन्होंने कई फिल्मों में चरित्र अभिनय किया। जितेंद्र ने कुछ फिल्मों में चरित्र अभिनय किया। मौसमी चटर्जी, रेखा, विनोद खन्ना, कामिनी कौशल, अमृता सिंह, डिंपल कपाड़िया ने भी बड़े परदे पर बतौर चरित्र अभिनय काम किया।

बालीवुड की सिल्वर स्क्रिन ने अनेकों कलाकारों को लोकप्रिय बनाया और ना जाने कितनों अलविदा कह दिया। मुमंई में नाम कमाने के बाद भी ऐसे बहुत से सितारे है आज उनके पास काम नही है,लेकिन उन्हें पैसे के साथ ग्लैमर और पॉपुलरिटी चाहिए, और अपने चाहने वालों की नजरों में और दिलों में रहना है इसके लिए परदे पर दिखते रहना उनकी जरूरत के साथ मजबूरी भी है क्योंकि जहां काम मिलना बंद हो जाता है वहीं उनसे उनकी लोकप्रियता और उनका ग्लैमर भी छिने जाने का डर भी उन्हें सताने लगता है।
यही कारण है कि बहुत सारे कलाकार अब एक्टिंग की दुनिया में दूसरी पारी की शुरुआत कर चुके हैं या तो करने का मौका तलाश रहे हैं। कुछ कलाकार समय के साथ समझौता करते हुए बतौर चरित्र अभिनेता काम कर रहे हैं।

अमिताभ बच्चन का लाल ‘बादशाह’ के बाद करियर समाप्त सा हो गया था,एक बढती उम्र और काम की कमी के चलते उनको भी कमजोर अर्थिक स्थिति से गुजरना पड़ा था। जब उन्होंने एबीसीएल कंपनी खोली और बाद में बुरी तरह से फ्लाफ होने के बाद में उनकी अर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी...फिल्मों का ना मिलना और लोगों के बीच अपनी पहचान बरकारर रहने के लिए उनको दूसरी पारी में जो काम मिला उससे ही सतुष्ट रहना पडा...भला हो कि उनको ‘ कौन बनेगा करोड़ पति’ जैसा लोकप्रिय शो मिल गया और उनकी यह पारी पूरी तरह से सार्थक रहीं। अमिताभ ने दूसरी पारी में पीकू,पा, मोहब्बते, वजीर, भूतनाथ,रिर्टन, ब्लैक, आरक्षण, चीनी कम, सरकार... जैसी अनेकों फिल्मों काम किया,जिसमें कुछ फिल्में सफल तो कुछ असमान्य रहीं।

करिश्मा कपूर, संजय कपूर से अलग होने के बाद काम की तलाश में जुट गई हैं और जल्दी से जल्दी अपनी नई पारी शुरू करने में लगी हैं। करिश्मा कपूर की हल्की कॉमेडी फिल्मों में काम करने की इच्छा थी,
लेकिन ‘डेंजरेस इश्क’ से उनकी वापसी हुई,किन्तु अफसोस यह फिल्म बाक्स ऑफिस पर दर्शकों का दिल जीतने में असफल रही।

अभिनेत्री ने यह बातें मुम्बई में गोदरेज नेचर्स बास्केट स्टोर के उद्घाटन के मौके पर कही। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें मिठाइयां बहुत पसंद हैं।फिलहाल करिश्मा अपने वर्चस्व को बचाने के लिए एक लोकप्रिय रेडियो स्टेशन पर फैशन पर आधारित शो प्रस्तुत कर रही हैं। इसके अलावा वह वर्ष 1982 में आई फिल्म ‘सत्ते पे सत्ता’ के रिमेक में भी नजर आएंगी। 

रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘‘सत्या’ में भीखू हात्रे के किरदार से करियर की शुरुआत करने वाले मनोज बाजपेयी भी इन दिनों खाली हैं और काम की तलाश कर रहे हैं। ‘‘सत्या’ में उनकी अदाकारी देखकर ऐसा लगा था कि वे थमने वालों में से नहीं हैं। लेकिन एकल या सोलो भूमिकाएं निभाने की ख्वाहिश में शायद वे पिछड़ते चले गए। इस समय मनोज भी काम की कमी से ही जूझ रहे हैं। वैसे मनोज बाजपेयी एक बेहतरीन कलाकर हैं। एक बेहतरीन कलाकार के लिए भी यदि बॉलीवुड में कोई काम नहीं है, तो इसे हिंदी सिनेमा का दुर्भाग्य ही कहेंगे।

सोनम कपूर की गिनती बॉलीवुड की मोस्ट स्टाइलिश एक्ट्रेस में होती है फिर भी उनके पास भी फिल्मों की अभाव है। साल की शुरुआत में सोनम फिल्म ‘‘नीरजा‘‘ में नजर आई थी। इनके साथ मलाइका अरोड़ा खान, महिमा चैधरी, लारा दत्ता, रवीना टंडन, मनीषा कोईराला, दीप्ती नवल, माधुरी दीक्षित, कुंद्रा, विवेक ओबेरॉय, अविनाश वाधवान, आदित्य पंचोली, रजा मुराद, शक्ती कपूर, तब्बू, रितेश देशमुख, आशुतोष राणा, अरमान कोहली, काजोल, दीया मिर्जा, असीन, तुषार कपूर, ट्विंकल खन्ना, रिंकी खन्ना, सोनाली बेंद्रे, नगमा, उर्मिला मांतोडकर, सनी देओल, बॉबी देओल, अजरुन रामपाल, शाहीद कपूर, प्रिटी जिंटा, जैकलीन फर्नान्डिस, सुमिता सेन, सेलिना जेटली, उदय चोपड़ा, विवेक ओबरॉय, शमिता शेट्टी, बिपाशा बसु, अमिषा पटेल, रणबीर शौरी, के के मेनन, नीतू चंद्रा, कोइना मित्रा, मुग्धा गोडसे, कोंकणा सेन शर्मा आदि कई ऐसे कलाकार हैं जो इन दिनों खाली खाली से हैं और काम की तलाश कर रहे हैं।

मासूम से चेहरे वाली अमृता राव राजश्री प्रोडेक्शन कि फिल्म ‘विवाह’ के दमदार अभिय के बाद भी उनका करियर जम नही पाया और बड़े परदे से उतरकर आजकल छोटे परदे पर ‘टीवी शो ‘मेरी आवाज ही पहचान है’ में अभिनय करती दिखाई दे रही हैं, ताकि अपने अभिनय के करियर को बरकरार रख सकें। शिल्पा शिरोडकर बड़े परदे से हटकर अब छोटे परदे पर एक मुठठी आसमान और ‘सिलसिला प्यार का’ में मां का किरदार निभा रही हैं।

राहुल रॉय ने तो अपने इंटरव्यू में कहा भी था कि ‘वो अच्छी स्क्रिप्ट की तलाश में हैं, स्क्रिप्ट हाथ लगते ही काम शुरू कर देंगे।’

इनमें से कुछ सितारे तो अपना होम प्रोडक्शन खोलकर फिल्में बना रहे हैं तो कुछ खुद की होम प्रोडक्शन में ही काम कर रहे हैं, तो कुछ ने साउथ और दूसरी भाषाओं की फिल्मों की तरफ अपना रुख कर लिया है। इमरान कहते हैं कि वो अपनी भूमिकाओं को लेकर चूजी हैं लेकिन साल 2015 में ‘‘कट्टी बट्टी‘‘ में दिखे थे। लेकिन फिलहाल कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। प्रिटी जिंटा लगभग सालभर पहले एक डांस रियलिटी शो में निर्णायक की भूमिका में दिखाई दी थीं और अब काम की तलाश में लगी हुई हैं। फिल्मों में मुख्य किरदार निभाने वाले बहुत सारे कलाकार अब बतौर चरित्र अभिनेता सिनेमा के परदे पर दिखाई दे रहे हैं। दरअसल सिनेमा की चकाचैंध रह रहकर सभी को अपनी ओर खींचती है। इसीलिए जहां कई सितारे अपनी आर्थिक तंगी के चलते काम की तलाश कर रहे हैं, तो वहीं कई सितारे अपनी पुरानी पहचान वापस पाने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं। जिन्हें परदे पर कोई काम नहीं मिल पा रहा है उन्होंने सिनेमा से जुड़े दूसरे काम शुरू कर दिए हैं। कोई मेकअप वैन को किराए देने का काम कर रहा है तो कोई कलाकारों को सुरक्षा दिलवा रहा है। कुछ ने तो अपने घर को शूटिंग के लिए किराए पर देना शुरू कर दिया है तो अमिषा पटेल, नीलम आदि कुछ कलाकार ज्वेलरी डिजाइनर बन गए हैं तो कुछ सितारे दूसरों के कपड़े डिजाइन कर रहे हैं। क्योंकि जिस तरह आम लोगों अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए पैसों की जरूरत होती है वैसे ही सितारों को भी धन की आवश्यकता होती है ताकि वो अपने जीवन की जरूरतों को पूरा कर सके और इसीलिए अपने अनुभव और पहचान का लाभ उठाते हुए काम कर रहे हैं। वैसे भी काम जब पूरी ईमानदारी और दिल से किया जाए तो सफलता मिलती ही है। 

वैसे देखा जाए तो क्या बड़े और क्या छोटे सभी कलाकार अपने अस्तित्व को बनाए रखने व अपनी आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए संघर्ष करते रहते हैं। इसीलिए शाहरुख खान भी कहते हैं कि ‘‘अब तो जो निभा चुका हूं, उससे अलग और बेहतर किरदार की तलाश कर रहा हूं जो मेरे अंदर के कलाकार को संतुष्ट कर सके।‘‘

Inviting stories for the #SunoMaaKiKahaani contest


In the spirit of celebrating Mother’s day, Ministry of Women and Child Development, Government of India has organized a Contest inviting stories about mothers.

The concept of this campaign is to promote the idea of children sharing anecdotes/ stories about their mother who has defied gender stereotypes, raised her voice against gender discrimination and championed the cause of gender equality and empowerment.

Submit your entries at link

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Saturday, May 28, 2016

Indian Education Congress 2016 organised by FRANCHISING INDIA held at Vivanta Taj


(Report:  S.S.DOGRA)

27th May, 2016. Two days conference bringing together industry veterans to interact and draw attention to best practices and promote innovation to capture consumer interest that will help grow the Indian Education Sector was held under the banner of Indian Education Congress 2016 at Vivanta ByTaj, Surajkund.

In the said Congress top Universities, institutions, Educationists & eminent speakers participated. After welcome note by Ms. Ritu Marya-Editor-in Chief, Franchise India Holdings Ltd., and inaugural lamp, various panel discussion were organized like “Educational Policy & Business Leadership, In With the growth: Can Success in Education Be Scaled Up?, Creating Schools That Work for Kids, The new age disruptors of education, Skilling India, Building a Culture of Research at “Educational Institutions”, Digitisation of Education, Building Social Business Model in Education – The Right way etc.


In the Education congress prominent Educationists & eminent speakers participated like - Mr. Amit Gupta, President – Director & Secretary, Global Knowledge Network Society & Chairman-Education Committee, PHDCCI; Prof. B.P.Khandelwal – Board & Working Committee Member, The DPS Society, Mr. AnandSudarshan, Founder & Director, Sylvant Advisors Pvt. Ltd.; Prof. Dr. M M Pant, Former Vice Chancellor, Indira Gandhi National Open University (IGNOU); Mrs.LataVaidyanathan, Director, TERI Prakriti School; Dr.Bindu Rana, MD&CEO, Millennium Education Management Pvt. Ltd.; Mr. SiddhantBhansali, Startup Mentor and Evangelist, 91springboard; 


Ms. Ashita Marya, Chief Executive Officer, Franchise India Ltd.; Ms. Shalini Nambiar, Principal-GEMS International School & Vice President- GEMS Education; Mr.Suchindra Kumar, Director-Strategy & Performance Improvement Advisory, EY; Dr. Chanderdeep Tandon, Ph.D, Director –Amity Institute of Biotechnology- Amity University Campus; Mr.Vineet Gupta, Founder & Trustee, Ashoka University; Mr. Ajay Batra, Director, Benett University; Dr. Jatinder Singh, Senior Secretary-CSR, Innovation, Education & Skill Development, PHDCCI; Mr. Rajat Sharma, Co-Founder, Digitalklass etc.

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