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Wednesday, February 3, 2016

माँ बेटी को समर्पित स्टेज शो "तू ही रे " का धमाकेदार समापन ।

सागर शर्मा

बेटी भार नहीं आभार है,बेटी कुदरत की करुण पुकार है
बेटी है तो कल है , बेटी है तो हर पल है ।
बेटी नहीं तो सब गुमशुम हैं ।
आओ बेटी के सम्मान में दुनिया दुनिया अलख जगाएं
बेटी बचाएं बेटे पढ़ाएं ॥ 

कुछ इसी सन्देश को लेकर मंच पर आगाज़ करने उतरी बेहद ख़ास अंदाज़ वाली और जोशीली टीवी पत्रकार , एंकर अनुराधा दास जिनका साथ दिया मेरठ के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यट के युवा लेक्चरर एवं पत्रकार सिकेँन शेखर ने ।

बेटी की पुकार "तू ही रे " के विषय पर आधारित माँ बेटी के रिश्ते पर आधारित इस अलग तरह के शो का आयोजन निवेदिता फाउंडेशन और इलीट इंडिया फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से माँ बेटी के सम्मान में आयोजित किया । जिसमे मुख्यत इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया की माँ और बेटी के बिना किसी भी समाज की कल्पना बेमानी होगी । जैसे माँ अपने त्याग की बदौलत घर परिवार ,समाज और देश के लिए अपना अर्वस्व कुर्बान कर देती है वहीँ बेटियां भी प्यार और त्याग की मिसाल के तौर पर जानी जाती हैं । लेकिन आज के इस कार्यक्रम का केंद्र वो माँ और बेटियां रही जिन्होंने कदम से कदम मिला कर एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा और इस मंच से एक दूसरे से ये वायदा लिया की हर कदम पर एक दूसरे की संगी साथी के रूप में सदैव खड़ी मिलेंगी । 

लेकिन कुछ ऐसी बेटियां जो समाज में आने से पहले ही मार दी जाती हैं । जिन्हे पैदा होने से पूर्व ही या तो गर्भ में खत्म कर दिया जाता है या फिर पैदा होने के बाद दरकिनार कर दिया जाता है । ऐसी बेटियों के लिए यह शो आज मील का पत्थर साबित होगा क्योकि यह अकेला इस प्रकार का शो माना जा रहा है जिसमे कुछ अलग प्रकार से अजन्मी बेटियों के अंतर्मन की व्यथा को समाज में रखा । जिसमे पदार्पण ग्रुप के कलाकारों ने पेश किये नाटक से यही विषय उठाया की जन्म से पूर्व अगर बेटियों की ह्त्या यूँ ही जारी रही तो एक दिन ना बेटी होगी न बहु,ना बहन होगी न भाभी ,ना बीवी होगी और ना माँ । औरत के समाज से विलुप्त होने की कल्पना मात्र से दिल दिमाग सिहर उठता है तो आप कल्पना कीजिये जिन लोगो ने इस नाट्य रूपांतरन को शो में न आकर मिस किया उन्हें कितना अफ़सोस हो रहा होगा । 

शो की शुरुआत एक बेहद ममर्स्पर्शी गीत बेटी की पुकार से परदे पर हुई । शुरआत से ही दर्शको में उत्साह और शो के प्रति ललक साफ़ देखी जा सकती थी । बेटी की माँ की कोख से वो मर्मस्पर्शी अपील को सुनकर दर्शको में सन्नाटा पसर गया । विशेष अतिथि , जज और दर्शको में से कई लोगों को आँशु पोंछते साफ देखा जा सकता था ।"

 बेटी ये कोख से बोल रही माँ कर दे तू मुझपे ये उपकार । मत मार मुझे जीवन दे दे मुझको भी देखन दे ये संसार " जी हाँ इसी अंतर्मन को झकझोर देने वाले गीत ने माहोल को बेहद ग़मगीन बना दिया ।

ऐसे में शो में गीत संगीत के दो महारथी इंडियन आइडियल के पूर्व प्रतियोगी सुमित चौहान और कोयल जैसी आवाज़ वाली प्रिया दास ने अपने गीतों से माहोल में हल्कापन बनाये रखा । सुमित चौहान के गीत "आपके हसीन रुख पर आज नया जो नूर है " को जहाँ तालियों की गड़गडाहट मिली वहीँ प्रिया की खूबसूरत प्रस्तुति " बातें तू ये कभी ना भूलना, तेरी खातिर कोई जी रहा" ने दर्शको में मस्ती का माहोल बना दिया ।

वहीँ कार्यक्रम की मुख्यधारा शो में प्रतियोगी के रूप भाग ले रही माँ बेटियों के इर्दगिर्द ही घूमती रही । पहले बेटियों का देशी विदेशी परिधानों में रेम्प पर कैटवाक लिए आना कहीं से भी किसी अंतर्राष्ट्रीय ब्यूटी कॉन्टेस्ट की ब्यूटी क्वीन से ये खूबसूरत बेटियां कम नहीं लग थी । शो के कॉन्सेप्ट में चार चाँद उस वक्त लग गए जब माँ बेटियां बाहों में बाहें डाले रेम्प पर उतरी। मानो पूरा परी लोक मुक्तधारा ऑडिटोरियम के मंच पर उतर आया !

माँ बेटियों ने जज पैनल में मौजूद महिला वकील भावना बजाज, फैशन डिजायनर अर्चना तोमर ,डीआईडी सुपर मॉम की पूर्व प्रतियोगी और नृत्यांगना शिप्रा शर्मा और छू ले आसमान एनजीओ मुरादाबाद से आई वर्षा चौहान के सवालो का जवाब देकर जजो का ही नहीं सभी दर्शको का दिल जीत लिया । जिसकी गवाही ऑडिटोरियम में तालियों की गड़गडाहट दे रही थी । हर माँ ने अपनी बेटी के महत्व का बखान कर जज पैनल और दर्शको का दिल जीत लिया । वहीँ बेटियों ने अपने चिरपरिचित अंदाज में माँ पर मंच से ही खूब प्यार लुटाया जिसके लिए बेटियां जानी जाती हैं । 

जज भावना बजाज, अर्चना तोमर , शिप्रा शर्मा और वर्षा चौहान ने सर्वसम्मति से सभी माँ बेटियों को बराबर अंक देकर सभी को विजेता घोषित किया । पैनल के मुताबिक़ आज ऐसे माहोल में कोई माँ बेटी दूसरी माँ बेटी से कमतर नहीं आंकी जाए । क्योकि हर माँ बेटी आज इस मंच से एक दूसरे के लिए ही नहीं समाज के लिए यह सन्देश छोड़ कर जा रहीं हैं की बेटी को जन्म दें बेटी को मारें नहीं ।

लेखिका और समाजसेविका पूनम मटिया अपनी खूबसूरत बेटी तरंग ,रश्मि सचदेवा अपनी परी बिटिया आस्था , नीतू नागर अपनी बेटी नन्ही परी , फरीदाबाद की सामाजिक कार्यकर्ता गीता अपनी बिटिया विधी और मेकओवर आर्टिस्ट संध्या मदान अपनी फूल सी कली चार्वी संग मंच पर समाज के लिए सवाल छोड़ गई की जब हम माँ बेटियां माँ बेटी के पावन रिश्ते को साथक बना सकती हैं तो माँ बाप दादा दादी क्यों न रिश्ते को समझते हुए अपनी अजन्मी बेटी की पुकार सुने ?

इससे पहले विशिष्ट अतिथियों जिनमे वरिष्ठ वकील, संत और सामाजिक विचारक श्री राजबीर सिंह ढाका और श्री राजीव गर्ग के कर कमलो दवारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की औचारिक शुरुवात हुई जिसके उपरान्त बेटी की पुकार पर आधारित एक लघु नाटिका शो का मंचन बेहद अहम हिस्सा रहा ।

निवेदिता फाउंडेशन और इलीट इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस शो में देश के कोने कोने से लोग सहयोग करने इस मंच पर एक साथ मौजदू दिखे जिनमे पेजथ्री सेलिब्रेटी सलोनी सिंह ,डिवाइन प्रोडक्टन कम्पनी से गोपाल पंडित, दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकाश विभाग में सहायक निदेशक मनोज चंद्रा, हरियाणवी फिल्म एक्टर वीर दहिया, नोएडा के समाज सेवक योगेश शर्मा, ब्लेसिंग इंडिया फॉउन्डेशन की फाउंडर सुमन रेखा कपूर , ने इस प्रयास को खूब सराहा ।

निवेदिता फाउंडेशन की सचिव नीलिमा ठाकुर कहती है कि इस आयोजन के ज़रिए माँ बेटी के बीच के पावन रिश्ते के मर्म को लघु नाटिका बेटी की पुकार " तू ही रे " के जरिये इस मंच से समाज के लोगो के मानसिक पटल पर उकेरने का प्रयास थी जिसमे सभी के सहयोग से कामयाबी मिली ! इस मंच से समाज में एक संदेश देने की कोशिश की गई कि माँ और बेटी दोनो ही समाज का अभिन्न अंग हैं ! माँ के बिना समाज की कल्पना जैसे नहीँ की जा सकती वैसे ही एक बेटी के बिना हम समाज में प्रेम की नींव नहीँ डाल सकते ! दोनो ही त्याग और प्रेम की जीवंत मिसाल के रूप में खुद को संजोये हुए हैं !

वहीं इलीट इंडिया फाउंडेशन के फाउंडर नरेश मदान कहते हैं कि "तू ही रे" एक ऐसी सोच को लेकर पैदा हुआ जिसमे औरत के विभिन्न रूपो को समाज मे रखा जाए | इस प्रयास की शुरआत माँ और बेटी के रिश्ते से बेहतर नही हो सकती थी | भ्रूण हत्या ,बालिका वधु ,दहेज हत्या,ऑनर किलिंग और बलात्कार जैसी जघन्य अपराधों ने जहाँ माँ बेटी दोनो के लिए असहाय हालात पैदा कर दिए ! इन्हीं हालातों को बदलने का संदेश देने की कोशिश में "तू ही रे" को मंच पर उतारा गया ! इलिट इंडिया फाउंडेशन के फाउंडर नरेश मदान और निवेदिता फाउंडेशन की चीफ नीलिमा ठाकुर ने अपनी टीम के सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया ।

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