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Sunday, January 24, 2016

खुशियों की विरासत


गीता 

एक व्यक्ति का प्यारा सा सुख शन्ति से युक्त एक छोटा सा घरोंदा था जिसे उसने बड़ी मेहनत और प्रयासों से बनाया था । अपने छोटे से संसार में वह राज़ी ख़ुशी अपना जीवन काट रहा था की एक दिन अचानक गाँव में बाढ़ आ जाने के कारण उसके बूढ़े माता -पिता उसके पास रहने के लिए आ गए ।

कुछ दिनों के बाद ही उसके घर की शांति भंग हो गई, सभी सुख बिखर गये, उसके घर का सारा हिसाब किताब गड़बड़ा गया | अपने ऊपर आई उस विपदा से तंग आकर उस व्यक्ति ने एक संत की शरण ली ।

अत्यंत खिन्न और दुखी मन से उसने उस संत को कहा " मैं जीवन में आई इस विपदा से इतना टूट चूका हूँ की अब जीवन का बोझ नहीं उठा सकता । ऐसी विकट परिस्थिति में आप ही कोई उपाय बताएं "

उस संत ने उसे समझाने का बहुत प्रयास किया लेकिन वह व्यक्ति अपनी बात पर अडा रहा की "आप आशीर्वाद देंगें तो सब ठीक हो जायेगा "

तब संत ने भी एक तरकीब सोची उसने उस व्यक्ति को कहा "जाओ में तुमें आशीर्वाद देता हूँ की यदि केवल 1 0 दिनों के लिए तुम अपने घर पर 1 0 मुर्गियां रख लोगो तो तुम्हारे घर की सभी सुख शन्ति लौट आएगी |"

उस व्यक्ति को उपाय कुछ अजीबोगरीब तो लगा लेकिन उसने सोचा की संत के प्रताप से कहीं वे मुर्गियां सोने के अंडे न देने लगे । इसलिए वह अति उत्साहित होकर बाज़ार से 10 मुर्गियां खरीद कर घर ले गया ।

10 दिनों के बाद वह व्यक्ति मुहं लटकाकर संत के पास आया और संत के कुछ बोलने से पहले ही कहने लगा "महाराज यह आपने मुझसे किस जन्म का बैर निकाला है , मैं पहले ही अपने माता -पिता के बोझ से दबा हुआ था | फिर आपने 1 0 मुर्गियों का बोझ और डाल दिया | पहले से ही मुझे धन का आभाव था अब मुर्गियों के दाने पानी की चिंता भी करो और ऊपर से उनके चलते पुरे घर में गंदगी फैली रहती है वह अलग | यानी मेरा दुःख अब पहले से चार गुना बड गया है | "

संत ने निश्चिंतता से कहा "हे भद्र पुरुष , उपाय में जरुर कोई कमी रह गई होगी , अतः अब अति शीघ्र लक्ष्य प्राप्ति के लिए उपाय की प्रबलता को बडाना होगा । ऐसा करो अभी घर जाते समय तुम 2 खरगोश, 2 बकरियां और 2 गाय घर लेते जाना । इससे तुम्हारी समस्या जड़ से मिट जाएगी और ठीक 1 0 दिनों बाद तुम खुशी से उछलते हुए मुझे दिल से धन्यवाद करने आओगे ।

संत के वचनों पर विश्वास करते हुए उस व्यक्ति ने ऐसा ही किया लेकिन 4 दिनों के बाद ही रोते बिलखते हुए संत के पास आया और कहा " महाराज यदि आप मुझे आशीर्वाद नहीं देना चाहते हैं तो सीधे मना कर दीजिये , कम से कम मेरा जीवन तो और नर्क मत बनाइये । मैं पहले ही क्या कम दुखी था अब तो मेरा घर चिड़ियाघर बन गया है । "'

संत ने पुनः असीम धैर्य और शांति से कहा "" वत्स लगता है यह उपाय तुम्हारे ऊपर काम नही किया ऐसा करो मुर्गियों, खरगोशों , बकरियों और गायों को वापस उन्ही की जगह पर छोड़ आओ "

उस व्यक्ति ने ऐसा की किया और कुछ ही दिनों के बाद उसी संत के पास शांत भाव से मुस्कराता हुआ आया और उन्हें हार्दिक धन्यवाद देकर बोला "महाराज ! आपकी कृपा से सब कुछ कुशल मंगल है | अब घर में बहुत शांति है । "

तब संत ने हँसते हुए कहा "पुत्र ! जब तुम मेरे पास पहली बार आये थे तब भी यही परिस्थिति थी जो आज है लेकिन तुम्हें अब वह दुःख नहीं रहा , क्योकि तुमने जीवन में उससे भी बड़ी और विकट परिस्तिथि झेल ली है|"

यही जीवन जीने का भी सूत्र है जो हमें हर विकट परिस्थिति में संतुलित रहने की कला सिखाता है । किसी भी आभाव या विपरीत परस्थिति को सबसे पहले सुधारने या बदलने की भरसक कोशिश करनी चाहिए | यदि स्थिति को नहीं बदल सकते तो सदेव स्मरण रखना चाहिए की ईश्वर ने किसी -न-किसी से तो बेहतर उसे दिया ही है ।

एक कवि ने अत्यंत मर्मिक अभिव्यक्ति में लिखा है की ......." मैं ईश्वर के आगे रोता था की मेरे पास पहनने को जूते नहीं हैं , पर तभी तक जब तक उस व्यक्ति से नही मिला था जिसके पास जूते पहनने के लिए पाँव ही नही थे । ''

क्या अभी भी हमें ईश्वर का धन्यवाद करने के लिए प्रतीक्षा करनी होगी उस क्षण की जब हमारे लबों पर कोई भी शिकायत नहीं होगी ? ..........

हे प्रभु , मुझे शक्ति देना
उन परिस्थितियों को स्वीकार करने की ,
जिन्हें बदला नहीं जा सकता है । ।
मुझे बल देना उन परिस्थितियों को बदलने का,
जिन्हें बदला जा सकता है
और मुझे विवेक देना
कि मैं उन दोनों परिस्थितियों को पहचान सकूँ । ।


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