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Tuesday, June 30, 2015

स्वर्गीय साहिबसिंह वर्मा की 8 वीं पुण्यतिथि पर ग्राम जन-चेतना अभियान चलाने का संकल्प लिया: दयानंद वत्स


स्वर्गीय श्री साहिबसिंह वर्मा
आदर्श ग्रामीण समाज के तत्वावधान में आज समाज के उपाध्यक्ष दयानंद वत्स की अध्यक्षता में उत्तर पश्चिम दिल्ली के बरवाला गांव में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री साहिबसिंह वर्मा की 8वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें कृतज्ञ ग्रामीणों की और से भावभीनी श्रद्वांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री वत्स ने कहा कि स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा एक दूरदर्शी नेता थे जिनके प्रयासों से गांवों और ग्रामीण जनता के सम्यक विकास का सपना क्रियान्वित किया जा रहा था। उनके सपनों को पूरा करने के लिए आदर्श ग्रामीण समाज ने समूचे दिल्ली देहात में ग्राम जन चेतना अभियान चलाने का संकल्प लिया है। इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम बेटी बचाओं बेटी पढाओ कार्यक्रम के लिए जन- जागरुकता अभियान तेज किया जाएगा। गावों में सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत अभावग्रस्त ग्रामीण छात्र- छात्राओं को उनकी पढाई जारी रखने के लिए आर्थिक संसाधन मुहैया कराए जांएगें और दिल्ली देहात की जहरीली होती जा रही आबोहवा को साफ-सुथरा बनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण और पोैघारोपण कार्यक्रम को गांव-गांव तक पंहुचाया जाएगा। गाांवों में बुनियादी सुविधाओं यथा स्वच्छ पेयजल वितरण, मजबूत एवं सर्वसुलभ परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए युद्वस्तर पर प्रयास किए जांएगे।

दयानंद वत्स
श्री वत्स ने स्वर्गीय श्री साहिब सिंह वर्मा की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश से हर साल उनकी जयंती पर ग्रामोन्मुखी पत्रकारिता में अपना योगदान देने वाले पत्रकारों एवं प्रतिभावान ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को सम्मानित करने का भी निर्णय लिया है। दिल्ली देहात के गावों में कार्यरत ग्रामीण सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामविकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले अधिकारियों को भी आदर्श ग्रामीण समाज पुरस्कृत करेगा। प्रथम स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा स्मृति सम्मान अर्पण समारोह उनकी जयंती पर आदर्श ग्रामीण समाज द्वारा आयोजित किया जाएगा।

नंबर वन पर आ गया प्रवीण भारद्वाज का ‘डिजायर्स’

चन्द्रकांत शर्मा

इंसान की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती। वो चाहे कला या संगीत से जुड़े लोग ही क्यों न हों। बुलंदियां छूने के बाद भी ‘डिजायर्स’ बाकी रह जाती हैं, जिसके लिए संघर्ष चलता रहता है। करीब आठ सौ फिल्मी गीतों के रचयिता, संगीतकार व निर्माता प्रवीण भारद्वाज ने 2002 से लेकर 2008 तक अर्श पर रहने का दौर देखा। बतौर गीतकार सौ से ज्यादा फिल्मों से जुड़े रहे और लगभग तीस फिल्मों का म्यूजि़क कंपोज़ कर चुके प्रवीण ने करोड़ों श्रोताओं को संगीत की रूहानी खुशबू से जोड़े रखा, पर अचानक परिदृष्य बदला और इन बदले हालातों में कुछ नए गीतकार उभरते चले आए। हालांकि ऐसा भी नहीं था कि प्रवीण की कलम थम गई हो। कलम चलती रही, पर वक्त के साथ-साथ उन्होंने भी दिशा बदली और संगीतकार के रूप में खुद को ढालते-ढालते निर्माता भी बन गए।

बदलाव के इस दौर में कुछ अनोखे काम भी सामने निकलकर आते हैं। प्रवीण भारद्वाज ने सोचा भी नहीं था कि उनकी प्रोफेशनल लाइफ में कुछ अनोखा होने जा रहा है। अचानक एक लहर आई और प्रवीण का हुनर सीमाओं के दायरे तोड़ता हुआ दुनिया भर में पहुंच गया। इसे प्रवीण का सांगीतिक जौहर भी कह सकते हैं, जो अनायास ही हो गया। आज उनका एक रोमांटिक गीत 'डिजायर्स-मौहब्बत में क्या मिलेगा' म्यूजि़क रेटिंग चार्ट में नंबर वन पर आ गया है। सिर्फ तीन दिनों में इस गीत ने विश्व के करोड़ों श्रोताओं को दिखा दिया कि जब दिल से जुड़े शब्द संगीत की महक लेते हुए कानों तक पहुंचते हैं, तो ऐसा सुकून मिलता है, मानों नायाब चीज़ हासिल हो गई हो।

नायाब यानी अनोखा ही तो है प्रवीण का लिखा सिंगल नंबर डिजायर्स और इच्छाओं के इसी समंदर से कुछ खास मोती भी निकले हैं। हमारा कहने का मतलब ये है कि डिजायर्स के जरिए ही प्रवीण के चाहने वालों को यह पता चला कि वो सुरीला गाते भी हैं। बता दें कि प्रवीण ने इस गीत को न सिर्फ लिखा है, बल्कि गाया और संगीत से सजाया भी है। रैड रिबन द्वारा रिलीज़ यह सिंगल गीत ढाई सौ से भी ज्यादा पॉपुलर साइट्स पर डाउनलोड हो चुका है। बतौर निर्माता कुछ फिल्में बनाने के बाद प्रवीण अब म्यूजि़क कंपोजर के रूप में भी सक्रियता बनाए हुए हैं। गीतकार से संगीतकार कैसे हो गए! इस सवाल पर वह कहते हैं कि एक गीतकार को संगीत से जुड़े माहौल में रहना पड़ता है। सिंगर्स को शब्दों के बारे में बताते और समझाते हुए गीतकार इतना पॉलिश हो जाता है कि संगीत की बारीकियां समझ में आने लगती हैं और फिर संगीत रचने में समय नहीं लगता। बतौर संगीतकार प्रवीण फिल्म 'ये है लाॅलीपाॅप, प्रकाश इलेक्ट्रॉनिक्स, तेरी बेवफाइयां, इश्क है नया नया' और आने वाली करीब 12 फिल्मों से जुड़े हैं। उम्मीद है इन फिल्मों के गीत भी ‘डिजायर्स’ की तरह कुछ अनोखा कर दिखाने की इच्छाएं पूरी करेंगे।

1 जुलाई को डिजिटल इंडिया अभियान की शुरुआत से ही भारत का नया इतिहास लिखा जायेगा

एस.एस.डोगरा

आज पुरे भारत वर्ष में देश का बच्चा-बच्चा जेब में मोबाइल लेकर घूमता दिखाई दे जाता है क्या कभी इस पर विचार किया गया है कि इसका श्रेय किसे जाता है जी हाँ भारत रत्न देश के पूर्व प्रधानमन्त्री स्वर्गीय राजीव गाँधी को ही जाता है. अस्सी के दशक में तत्काल प्रधानमंत्री पद पर कार्यरत स्वर्गीय राजीव गाँधी जी कंप्यूटर को लाने की अलख जगाई थी तो बहुसंख्या में आलोचकों ने तरह तरह की नकारत्मक विचार प्रकट कर खूब टांग खिचाई की थी. लेकिन उस समय की गई पहल की बदौलत ही करोड़ों युवाओं को देश विदेश में रोजगार भी मिला और शोहरत भी.

इसी कड़ी में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है और एक महत्त्वकांक्षी “डिजिटल इंडिया” अभियान के तहत भारत वर्ष को 21वीं शदी में विश्व स्तर देश को सुचना प्रोधिगिकी के क्षेत्र में अग्रिण स्थान में पहुचाने में बहुमूल्य योगदान का परिचय दिया है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अमेरिकी दौरे के दौरान मैडिसन स्क्वायर में भाषण देते हुए कहा था कि अमेरिका सहित संसार के कई देश कहा करते थे कि भारत सपेरों का देश है और वह आधुनिक सभ्यता से बहुत पीछे है, परंतु अब हम कंप्यूटर के ‘माउस’ से सारी दुनिया को नचाते हैं। सारी दुनिया भारत के आईटी उद्योग की अभूतपूर्व सफलता का लोहा मानती है। उन्ही मजबूत इरादों को पूरा करने के लिए कल यानि १ जुलाई से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक जुलाई को डिजिटल इंडिया अभियान की शुरुआत करेंगे।

डिजिटल इंडिया अभियान का उद्देश्य:

सूत्रों के मुताबिक डिजिटल इंडिया के तहत तीन कार्य हो रहे हैं। पहला, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जिसके तहत पंचायतों को नेट से जोड़ना और एक कॉमन सर्विस सेंटर बनाना। दूसरा, हर व्यक्ति की डिजिटल आईडी बनाना। इसके लिए मोबाइल नंबर, बैंक एकाउंट और आधार नंबर को जोड़ा जाएगा। और तीसरा है लोगों के बीच डिजिटल लिटरेसी को बढ़ाना, जिससे कि नागरिक इंटरनेट प्रयोग करना और ई-मेल आदि पर कार्य कर पाएं।

इन्ही उद्देश्यों को मजबूत स्तंभों का अमली जमा पहनाने हेतु एक सप्ताह तक चलने वाले डिजिटल इंडिया सप्ताह अभियान राजधानी के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में देश और दुनिया के प्रमुख उद्योगपतियों की मौजूदगी में शुरूआत की जा रही है। इसमें सभी राज्यों के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया से जुड़े कुछ कार्यक्रमों और मोबाइल ऐप्प भी लांच करेंगे।सूत्रों से पता चला है कि इसमें भाग लेने वाले उद्योगपतियों में टाटा समूह के साइरस पी मिस्त्री, रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी, भारती इंटरप्राइजेज के सुनिल मित्तल, आदित्य बिड़ला समूह के कुमार मंगलम बिड़ला, रिलायंस धीरूभाई अंबानी समूह के अनिल अंबानी,स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज के अनिल अग्रवाल, डेल्टा इलेक्ट्रोनिक्स के पिंग चेंग, विप्रो के अजीम प्रेमजी, हीरो समूह के पवन मुंजाल, निडेक कारपोरेशन के मिकिओ कातायामा शामिल है। इसी कार्यक्रम में माइक्रोसॉफ्ट,गूगल और फेसबुक के प्रतिनिधियों के भी आने की संभावना है।

एम्स का ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट सिस्टम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान का हिस्सा बन गया है। प्रारंभिक तौर पर इस नेटवर्क से अब तक देश के चार बड़े अस्पताल जुड़ चुके हैं, जिसमें दिल्ली के तीन अस्पताल हैं। इनमें एम्स के अलावा आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल का स्पोट्र्स इंजरी सेंटर शामिल है। एम्स के तर्ज पर इन दोनों अस्पतालों में इलाज के लिए मरीज ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट ले सकेंगे।इस डिजिटल इंडिया अभियान से धीरे-धीरे देश भर के अस्पताल जोड़े जाएंगे। इससे किसी भी अस्पताल में इलाज के लिए डॉक्टरों से समय लेना आसान हो जाएगा। बकायदा एक जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका विधिवत शुरुआत करने वाले हैं। आधार कार्ड के जरिये अप्वाइंटमेंट लेना आसान होगा। डॉक्टरों का कहना है कि एक जुलाई को दिल्ली में केंद्र सरकार एक बड़े समारोह में इस परियोजना को लांच करने वाली है। इससे अब तक एम्स, आरएमएल, सफदरजंग अस्पताल का स्पोट्र्स इंजरी सेंटर और निम्हांस जुड़ चुका है। भारत सरकार द्वारा "डिजिटल भारत" की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में मुफ्त "डिजिटल लोकर" सेवा का प्रारंभ किया गया है| यह देश में ई-सेवाओं के विस्तार और लोगों के लिए सरकारी सेवाओं को आसान बनाने की दिशा बहुत उपयोगी सिद्ध होगा |


डिजिटल इंडिया अभियान के दौरान डिजिटल लॉकर और ई-बस्ता भी लॉन्च किया जायेगा.

आखिर डिजिटल लाकर क्या है:
यह एक ऐसा स्थान है, जहाँ हम अपने किसी भी डॉक्यूमेंट जैसे पहचान पत्र, पेन कार्ड, डिग्री, इत्यादि को अपलोड करके सुरक्षित रख सकते है | इसके अलावा यदि कोई सरकारी विभाग हमें कोई डॉक्यूमेंट (जैसे ड्राइविंग लाइसेंस) जारी करता है तो वह भी यहाँ सुरक्षित रूप से उपलब्ध रहेगा |

डिजिटल लॉकर के लाभ:
*किसी भी संस्थान या सरकारी विभाग में विभ्भिन कार्यों के लिए अपने डॉक्यूमेंट की भौतिक कॉपी देने की आवश्यकता से निजात |
*अपने ओरिजिनल डॉक्यूमेंट को जाँच के लिए देने का झंझट समाप्त |
*डॉक्यूमेंट की फोटो कॉपी लेने और उसे विभ्भिन विभागों और संस्थाओं को भेजने से छुटकारा |
*किसी भी सरकारी विभाग द्वारा जारी दस्तावेज जैसे पेन कार्ड, वोटर कार्ड तक इन्टरनेट पर कहीं भी से पहुँच |
*सरकारी विभागों को भौतिक दस्तावेजों के सँभालने और सत्यापित करने के झंझट से मुक्ति और इससे सरकारी कार्यों में तेजी |
*डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा |
*किसी भी कंपनी या संस्थान द्वारा डॉक्यूमेंट मांगे जाने पर, भौतिक डॉक्यूमेंट की जगह इस डिजिटल लॉकर में रखे डॉक्यूमेंट का लिंक उनको ईमेल पर शेयर करना |
*किसी भी डॉक्यूमेंट की स्कैन कॉपी को इस लॉकर में अपलोड करके सहेजना |
*अपने डॉक्यूमेंट, उनको जारी करने वाले विभाग की जानकारी, उनको उपयोग करने वालों की जानकारी इत्यादि आसानी से जान सकते है |

क्या है ई-बस्ता
अब देश के सभी राज्य के शिक्षा बोर्ड की किताब को छात्र कहीं से भी घर बैठे न सिर्फ पढ़ पाएंगे बल्कि फ्री में डाउनलोड भी कर सकेंगे। ई-बस्ता पोर्टल में सभी राज्यों के एजुकेशन बोर्ड अपनी पूरी टैक्स्टबुक ऑन लाइन रखेंगे। केंद्रीय शिक्षा बोर्ड की भी किताबें इसमें होगी। इससे छात्रों के न सिर्फ बस्ते का वजन हल्का होगा बल्कि वे मोबाइल, टेबलेट या कंप्यूटर पर डाउनलोड कर किताब पढ़ सकेंगे। सूत्रों के मुताबिक उक्त पोर्टल ई-बस्ता सरकार डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत कल 1 जुलाई को मनाए जाने वाले डिजिटल वीक के दौरान लॉन्च करेगी। इस वीक के दौरान कम्युनिकेशन और आईटी मंत्रालय ई-बस्ता के अतिरिक्त स्कॉलरशिप पोर्टल, ई-हॉस्पिटल, ई-प्रिज़न, डिजिटाइज्ड इंडिया आदि करीब एक दर्जन पोर्टल की शुरुआत करेगा। अभी प्रायोगिक तौर पर कुछ पोर्टल कार्य कर रहे हैं।डिजिटल इंडिया कैंपेन में इंटरनेट की धीमी गति को बढ़ाने के लिए सरकार ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क को बढ़ा रही है।

2.5 लाख पंचायतों को इससे जोड़ने व कार्य की गति को बढ़ाने के लिए अब भारत नेट के जरिए स्टेट को भागीदारी के लिए कहा है जिसके तहत राज्य पंचायतों को भी जोड़ा जाएगा।

Monday, June 29, 2015

Dr Jitendra Singh inaugurates IAS Academy's new block at Mussoorie

Dr Jitendra Singh
Addressing the IAS and other Civil Services trainees at Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration (LBSNAA) here today, Union Minister of State (Independent Charge) Development of North-Eastern Region (DoNER), MoS PMO, Personnel, Public Grievances,Pensions, Atomic Energy and Space, Dr Jitendra Singh said that bureaucrats are the key to good governance and have a vital role to play in achieving the Modi government’s goal of “maximum governance, minimum government”.

He was speaking after inaugurating the Academy's new block "Aadharshila" .

Dwelling on the history of civil services in India, Dr Jitendra Singh observed that it has been a long journey since the times when the British introduced the Indian Imperial Service or Indian Civil Service (ICS) over a century and a half ago and said, the brief and responsibilities of a civil servant of British India and that of independent India are basically apart from each other. Citing an example, he said, during British Raj, a civil servant was expected to collect revenue for the empire and that is why he was known as “Collector” but in independent India, he is expected to generate revenue for public welfare and that is why he is often referred as “District Development Commissioner”.

Similarly, during British Raj, a Collector was supposed to assert the writ of empire on the masses, whereas in independent India, he is supposed to act as a bridge between people’s aspirations and the decision making political establishment,he added 

Over the last 65 years of independence, Dr Jitendra Singh said, the task of a civil servant has become more demanding and the level of expectations has also gone high. At the same time, there is a constant scrutiny from public and media, which may sometimes add to the stress in the working of a civil servant, he said but hastened to add that the Modi government is committed to give a conducive and work-friendly environment for the officers. In this context, he referred to regular Yoga sessions started by Department of Personnel & Training (DOPT) from 1st April this year for civil servants across the country. He also referred to Prime Minister’s emphasis on digitalization and e-governance to facilitate easy governance and reduce the potential for delay or corruption.

Referring to the relationship between bureaucracy and political establishment, Dr Jitendra Singh said, it has to be symbiotic and not contradictory, so that the two vital pillars of democracy can supplement each other’s role without acting at cross purposes. Acts of omission or commission begin to take place only when there are dubious intentions or a dubious nexus, he cautioned.

Dr. Jitendra Singh also referred to some of the current issues, including lack of faculty at the Academy and DoPT's decision to revise the syllabus and pattern of Civil Services exam. He said, all these steps are intended to make the IAS officers better suited to serve the contemporary India's requirements.

Director LBSNAA Rajeev Kapoor and Senior Deputy Directors Roli Singh, Jaspreet Talwar, M.H. Khan and Ravi Shankar also spoke on the occasion.

मृत्यु एक अटल सच्चाई !

आर.डी. भारद्वाज "नूरपुरी"

ऋषि वेद व्यास वैदिक काल के महान ऋषियों-मुनियों और संत महात्माओं में से एक थे। वेद व्यास जी महाभारत ग्रंथ के रचयिता तो थे ही, साथ ही साथ वह उस काल की बहुत सी घटनाओं के साक्षी भी रहे जिन्होंने बाद में युग परिवर्तन किया, धर्म की स्थापना भी की ! मुनि वेद व्यास जी धार्मिक ग्रंथों एवं वेदों के एक महान ज्ञाता थे और एक महान विद्वान भी थे, उनकी विध्वता द्वारा ही महाभारत जैसे उच्चकोटि के ग्रंथ की रचना संभव हो पाई। यही नहीं, उन्होंने ने ही अट्ठारह पुराणों की भी रचना की थी । पौराणिक युग की महान विभूति तथा साहित्य-दर्शन के प्रणेता वेद व्यास जी का जन्म आज से लगभग 5250 वर्ष पूर्व हुआ था।

ऋषि वेद व्यास जी के विषय में पौराणिक ग्रंथों में अनेक तथ्य प्राप्त होते हैं, कुछ विद्वान तो उन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी मानते हैं । उनकी माता का नाम सत्यवती और उनके पिता ऋषि पराशर थे । सत्यवती, मत्स्यगंधा नाम से भी प्रसिद्ध हुई थी । सत्यवती के पिता दाशराज एक नाविक का काम करते थे, और इसके साथ - २ ही वह यमुना नदी से मछलियाँ पकड़ कर उन्हें बेच कर अपने परिवार का भरण-पोषण किया करते थे। सत्यवती बचपन से ही अपने पिता के साथ उनके इस काम में सहयोग देती थी। कहते हैं कि नदी से अनेक वर्षों तक लगातार मछली पकड़ने और बेचने के काम करने की वजह से सत्यवती के शरीर से मछली की दुर्गन्ध आती थी, और इसके कारण ही उनका नाम मत्स्यगंधा भी पड़ गया था। ऋषि पराशर से उनकी पहली मुलाकात उनको नदी पार करवाने के सिलसिले में ही हुई थी । ऋषि पराशर सत्यवती के रूप, यौवन और सौंदर्य पर इस कदर मोहित हो गए थे कि उन्होंने वहीँ पर सत्यवती से प्रेम प्रसंग का इज़हार कर दिया और उनसे मधुर सम्बन्ध बना लिए । इसके बाद ऋषि मुनि व ब्रह्मज्ञानी पराशर ने अपनी योग विद्या के बल से सत्यवती के शरीर से आने वाली मछली की दुर्गन्ध को सुगन्ध में परिवर्तित कर दिया। 

ऋषि वेद व्यास जी बचपन से ही वेद वेदांगों में पारंगत हो गए थे और उन्होंने अपनी माता सत्यवती से यह कहकर अलविदा ले ली, कि आप जब भी कभी मुझे स्मरण करेंगी, मैं आपकी सेवा में उपस्थित हो जाऊँगा, यह कह कर वह बालक वेद व्यास तपस्या करने के लिये चले गए। व्यास जी सांवले रंग के थे जिस कारण इन्हें कृष्ण भी कहा गया है। यह भी सुनने में आता है कि पहले वेद चार नहीं, बल्कि एक ही बहुत बड़ा ग्रन्थ था । और इतने बड़े ग्रन्थ को हर कोई पढ़ने और अध्ययन करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था । फिर कुछ और साधु-सन्तों व महात्माओं ने व्यास जी की विद्वत्ता और विवेकशीलता को देखते हुए इनको इस इतने बड़े ग्रन्थ को किसी बढ़िया तरीके से श्रेणीबद्व करने के लिए निवेदन किया था, तब व्यास जी ने इस विशाल ग्रन्थ को चार भागों में विस्तार और विभाजन करके इसको चार ग्रंथो ( ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद ) में बाँट दिया था, और उनके इसी महान कार्य को सफलता पूर्वक अन्जाम देने के कारण बाद में वेद व्यास के नाम से विख्यात हुए । महाभारत को हिन्दु धर्म में पाँचवां ग्रन्थ माना गया है । कुछ विद्वान तो उन्हें भगवान विष्णु के अवतार के रूप में भी मानते हैं । 

वेद व्यास जी महान महाभारत ग्रंथ के रचियता तो थे ही, साथ ही साथ वह महाभारत की विभिन्न घटनाओं के प्रत्यक्षदर्शी ओर साक्षी भी थे । वेद व्यास जी योग शक्तिसम्पन्न और त्रिकालदर्शी ऋषि थे । बाद में जब सत्यवती ने राजा शान्तनु से शादी की, तो उनको दो पुत्र प्राप्त हुए - जिनके नाम थे - चित्रांगद और विचित्रवीर्य। बड़ा बेटा चित्रांगद तो युद्ध भूमि में मारा गया और छोटा बेटा विचित्रवीर्य संतानहीन ही मर गया । तब अपने कुल की रक्षा के लिए और वंश को आगे बढ़ाने के लिए सत्यवती ने, अपने बड़े बेटे भीष्म को भेजकर, अपने दूसरे पुत्र वेद व्यास को बुलवाया, और इस तरह अपनी माता के आग्रह पर विचित्रवीर्य की दोनों रानियों (अम्बिका और अम्बालिका) को उन्होंने नियोग के नियम का सहारा लेकर, दो पुत्रों की प्राप्ति करवाई, जो धृतराष्ट्र तथा पाण्डु कहलाये, और तीसरे दासी पुत्र विदुर थे, जो कि बहुत बड़े विद्वान और राजनीति और धर्म शास्त्र में निपुण थे । यही नहीं, वेद व्यास जी ने महाभारत के युद्ध के दौरान धृतराष्ट्र के आग्रह करने पर संजय को दिव्य दृष्टि भी प्रदान कर की, जिसकी सहायता से वह महाभारत का युद्ध-दर्शन कर पाए और राजा धृ्तराष्ट्र को उसका वर्णन एक प्रत्यक्ष दर्शी की तरह सुना सके ।

क्योंकि दाशराज जी की इकलोती बेटी सत्यवती की शादी उस वक़्त के सबसे ताकतवर राजे शांतनु से हो चुकी थी और वह अपने ज़माने के सबसे समृद्ध और विशाल साम्राज्य - हस्तिनापुर की पटरानी बन चुकी थीं, तो दाशराज अपनी दुनियां में बेहद खुश थे और उनको महसूस हो रहा था कि अब तो बस ज़िन्दगी गुलज़ार है । वैसे भी दशराज जी एक अत्यन्त ही महत्वकांक्षी किस्म के व्यक्ति थे, यही तो एक बहुत बड़ा कारण था कि जब राजा शांतनु ने उनके समक्ष सत्यवती के साथ विवाह का प्रस्ताव रखा, और दोनों परिवारों के बीच इतनी बड़ी असमानता होने के बावजूद भी दाशराज ने अपनी तरफ़ से यह शर्त रख दी कि पहले आप यह वचन दो कि उनके बाद सत्यवती का पुत्र ही उनका उत्तराधिकारी बनेगा | कहते हैं कि एक बार वेद व्यास जी अपने नहिहाल अपने नाना, दाशराज जी को मिलने गए हुए थे, तो दाशराज जी ने अपने नाती वेद व्यास जी के सामने अपनी एक इच्छा प्रकट की - दरअसल, दाशराज जी का मानना था कि यह दुनियां बड़ी सुन्दर है, उनको यहाँ पर किसी किस्म का भी कोई कष्ट नहीं है, सब तरह की सुख सुविधाएं उनके पास उपलब्ध हैं, इस लिए वे चाहते थे कि वे कई हजार वर्षों तक जीवित रहें और मृत्यु उनके नज़दीक भी न फटक सके ।

वेद व्यास जी ने उनको समझाने की बहुत कोशिश की कि उनकी यह इच्छा पूर्ण होना संभव नहीं है, क्योंकि परमपिता परमात्मा ने सृष्टि बनाते समय यह भी एक अटल नियम बनाया है कि जिस भी प्राणी का जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु भी निश्चित है । यहाँ तक कि भगवान राम, गुरु विशिष्ट जी, ऋषि बाल्मीकि जी, ऋषि यमदग्नि जी, वामन जी, ऋषि विश्वामित्र जी या फिर भगत प्रह्लाद जी - न जाने कितने बड़े - 2 संत महात्मा, ऋषि-मुनि, तपस्वी, पीर, पैगम्बर भी इस पृथ्वी पर आए, लेकिन इन सब में से कोई भी हमेशा के लिए नहीं आये थे । उनको भी अपनी लिखी हुई उम्र भोगने के बाद इस पृथ्वीलोक को त्यागकर मृत्यु लोक जाना ही पड़ा था। ब्रहमा जी की बनाई हुई सृष्टि तो मात्र एक नाटक ही है और इस नाटक का यह शाश्वत नियम है, कि जिस भी जीव का जन्म होता है, उसका अपनी जीवन लीला समाप्त करके मृत्यु लोक को प्राप्त होना भी उतना ही अनिवार्य है । लेकिन व्यास जी के नाना दाशराज जी तो कोई बात मानने को तैयार ही नहीं थे। दाशराज जी तो बार - 2 एक ही बात बोले जा रहे थे, कि उनका नाती वेद व्यास एक बहुत बड़ा ऋषि-मुनि है, वेदों ग्रथों का विद्वान है, एक बहुत बड़ा तपस्वी है, उसके पास तो बहुत बड़ी - 2 अपार और अचूक शक्तियाँ भी हैं, तो इन सबके होते हुए वेद व्यास के लिए अपने नाना के लिए यह कार्य करना बहुत ही आसान काम है । दूसरी तरफ वेद व्यास जी के लाख समझने पर भी जब उनके नाना अपनी ज़िद पर टिके रहे, तो आखिर में व्यास जी ने उनको कहा कि मैं आपके लिए बस इतना ही कर सकता हूँ कि आप मेरे साथ चलिए, मैं आपको सृष्टि रचयिता परमपिता ब्रह्मा जी के पास ले जाऊँगा, आप खुद ही उनके सामने अपनी इच्छा रख देना और फिर जो वह कहेंगे, वही आप मान लेना । 

तो इस तरह वेद व्यास जी उनको ब्रह्मा जी के पास ले गए । वहाँ पहुँचने के बाद व्यास जी ने उनका परिचय करवाया और ब्रह्मा जी से निवेदन किया कि आप इनकी बिनती सुन लीजिये और अगर हो सके तो इस पर कोई सकारात्मक कार्यवाई भी करें । दाशराज जी की बात सुनकर ब्रह्मा जी ने उनको समझाने का भी प्रयत्न किया कि आपकी यह इच्छा विधि के विधान के बिलकुल विपरीत है, अथवा यह कदापि स्वीकार्य नहीं है। लेकिन दाशराज जी कहाँ मानने वाले थे ? जब उन्होंने अपनी जिद नहीं छोड़ी, तो ब्रह्मा जी ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि आपकी यह माँग तो वैसे भी मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि मेरा कार्य तो सभी प्रकार के जीवों की उत्पति करना ही हैं, किसी के प्राण लेना मेरे अधिकार में नहीं है । अतः आप विष्णु जी के पास चले जाइए और उनके सामने ही अपनी विनती रखिये । 

उसके बाद, वेद व्यास जी अपने नाना को विष्णु जी के पास ले गए और वहाँ जाकर भी उन्होंने अपने नाना की समस्या विष्णु जी के समक्ष रखी । विष्णु जी भी उनकी यह अजीबो-गरीब ख्वाहिश सुनकर हैरान रह गए और बोले कि - जब से यह सृष्टि की रचना हुई है, इस पृथ्वी पर हज़ारों - लाखों साधु संत, ऋषि-मुनि और तपस्वी आये है, और उनमें से किसी ने भी आजतक ऐसी कोई ख्वाहिश नहीं रखी। परमपिता परमात्मा द्वारा दिए गए उनके स्वासों की पूँजी जब समाप्त हो गई, तो वे सभी प्राणी इस पृथ्वी लोक को त्याग कर मृत्यु लोक चले गए । कोई भी यहाँ हमेशा रहने के लिए नहीं ठहरा । अपना - २ समय आने पर सभी लोग मृत्यु को प्राप्त हो गए। यही इन्सानी जिंदगी की एक अत्यन्त कड़वी और अटल सच्चाई है और इसे आपको भी मानना पड़ेगा, क्योंकि समस्त सृष्टि का यही नियम है । जब फिर भी वेद व्यास के नाना नहीं माने, तो विष्णु जी ने वेद व्यास जी का लिहाज करते हुए उनको कह दिया, "इससे ज्यादा मैं आपके लिए कुछ नहीं कर सकता, वैसे भी मेरा काम तो सभी प्राणियों का जब तक जीवन है, उनको अन्न जल उपलब्ध करवाना है, जीवन लीला पूरी होने के बाद उनके प्राण हरना तो महेश जी, अर्थात शिव जी के अधिकार क्षेत्र में है । आप उनके पास चले जाइए और वही आपको बताएँगे कि आपकी इच्छा पूर्ति हो सकती है या नहीं !"

इसके बाद भी जब दाशराज जी अपनी इच्छा पर टिके रहे तो वेद व्यास जी उनको शिव जी के पास ले गये । वहाँ जाकर भी वेद व्यास जी ने महेश जी के सामने अपने नाना की अभिलाषा पेश की । पहले तो शिव जी भी उनकी यह हास्यास्पद सी इच्छा सुनकर परेशान हो गए और फिर उन्होंने भी दाशराज को अपने तरीके से समझाने का पुरज़ोर यत्न किया। लेकिन दाशराज थे कि बस अपनी जिद पर एक हठी बालक की तरह जैसे के वैसे ही बने रहे । तब शिव जी ने कहा, "देखो ! इसके लिए तो हमने यमराज को नियुक्त्त किया हुआ है, वही आपको बताएँगे, कि आपकी असल में स्वासों की पूँजी है कितनी?" यह कहकर उन्होंने यमराज को याद किया और यमराज तुरन्त उपस्थित हो गए। शिव जी ने यमराज को दाशराज जी की उम्र के बारे में पूछा और कहा कि यह भी बताओ कि इनकी मृत्यु कब, कहाँ और कैसे होनी, ब्रह्मा जी ने लिखी है ? सुनकर यमराज ने अपने सेवक / सहायक चित्रगुप्त को याद किया और उससे माँगी गई पूरी जानकारी देने के लिए कहा । सुनकर चित्रगुप्त अपनी वही-खाते ले आए और देखकर बोले, "प्रभु ! दाशराज की मृत्यु तो बस होने ही वाली है और इनकी मृत्यु के बारे में परमपिता ब्रह्मा जी ने लिखा है कि दाशराज जी जब खुद चलकर यमराज के पास आएँगे, तो इनकी मृत्यु हो जाएगी !" अपनी मृत्यु के बारे में सम्पूर्ण सत्य और जगह के बारे में जानने पर, दाशराज जी सुन्न हो गए, उनकी बुद्धि, विवेक, सब तरह के छल, चालाकी होशियारी समाप्त हो गई और वह वहाँ खड़े - २ कभी अपने नाती वेद व्यास जी को देखते, और कभी शिव जी को, कभी यमराज को और कभी उनके सहायक चित्रगुप्त को देखते, जिन्होंने अभी - २ उनकी मृत्यु के बारे में विस्तार से बताया था । उनको समझ नहीं आ रहा था कि अब अगली चाल वह क्या चलें और उसके बारे में किस से कहें । और फिर अचानक उनका सिर चकराने लग गया और वह बेहोश होकर वहीँ गिर गए और मृत्यु लोक को प्राप्त हो गए ।

तो इस प्रकार ब्रह्मा जी किसी भी प्राणी के जन्म से पहले ही उसकी पूरी जिन्दगी की घटनाएँ तो लिख ही देते हैं, साथ ही साथ उस प्राणी की मृत्यु कब, कहाँ और कैसे आनी है, इसका पूर्ण सत्य भी उस प्राणी के जन्म के पहले ही लिख दिया जाता है और उसमें किसी भी तरह का कोई भी हेर फेर नहीं हो सकता । और फिर, मौत का फरिश्ता यमराज किसी किस्म की कोई रिशवत भी तो नहीं लेते । यहाँ तक क़ि प्राणी खुद ही चलकर अपनी मृत्यु वाली जगह पर, सही वक़्त आने पर पहुँच जाता है, या फिर यह भी कह सकते हैं कि मृत्यु प्राणी को उसके घटित होने वाले स्थान पर अपने आप ही खींच लाती है और फिर बाकी का कार्य तो यमराज स्वमं ही कर देते हैं, जैसा कि दाशराज जी बारे में सिद्ध हो गया ।

Media workshop for students


For more detail about Media workshop, please visit @newsroom www.dwarkaparichay.com

Sunday, June 28, 2015

Prime Minister Calls upon Farmers to Raise the Level of Pulses Production in the Country

The Prime Minister called upon farmers to raise the level of pulses production in the country, to help make India self-sufficient in pulses. Invoking former Prime Minister Shri Lal Bahadur Shastri’s call “Jai Jawan, Jai Kisan,” Shri Narendra Modi asked every farmer to try and grow pulses on a part of his land. He also mentioned steps being taken by the Union Government for the pulses sector. He said pulses were an important part of the diet of the common man. The Prime Minister was speaking after laying the Foundation Stone of the Indian Agricultural Research Institute today at Barhi in Jharkhand. 

Shri Modi also said that the need of the hour was a second green revolution, without any delay, in eastern India. He said that the Union Government was therefore committed to the development of this region. The Prime Minister further said that animal husbandry and fisheries were equally important for the agriculture sector. He further added that the Government has decided to pay special attention to the dairy sector in Jharkhand.

The Union Agriculture Minister, Shri Radha Mohan Singh while welcoming the Prime Minister Shri Narendra Modi at the foundation laying ceremony of the IARI in Jharkhand, said that it was the need of hour to set up a second IARI in Jharkhand on the lines of IARI, Pusa, New Delhi. The Union Minister said that the Institute at Jharkhand will help in meeting the challenges in the field of agriculture in the State in a scientific manner.

The Institute would help in developing this Economic Zone in a scientific manner. The Minister added that the announcement of setting up of a second IARI in the country was made in the General Budget of the year 2014-2015 and he thanked the Prime Minister that the setting up of such an Institute was made possible under his leadership and guidance.

Soon after this announcement in the Budge-2014-2015, the Ministry of Agriculture and the State Government of Jharkhand went into action to identify the land for the second IARI and this activity was completed within a year’s time. And that is how, the Minister added that this laying of Foundation Stone for IARI was possible.

नाईजीरियन प्रतिनिधिमंडल ने किया एनजीओ का दौरा


पश्चिम विहार में स्थित नवीन फाउंडेशन और ज्ञान एजुकेशनल ट्र्स्ट के कार्यालय में आज एक नाईजिरियन प्रतिनिधिमंडल ने दौरा किया। शिक्षा और आईटी क्षेत्र के नाइजीरियन स्टूडेंटस ने समाजसेवा में जुटी इन संस्थाओ की कार्यशैली को देखा और जानकारी ली। 

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यो ने गरीब व बेसहारा लोगो के लिए नवीन फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए संस्था के अध्यक्ष नवीन मेहता व पदादिकारियो को बधाई दी। इस प्रतिनिधिमंडल ने संस्था द्वारा चलाए जा रहे कंप्यूटर सेंटर व सिलाई कढाई केंद्र को भी देखा। साथ ही उन्होने नवीन फाउंडेशन को उनके देश में आकर जानकारी बांटने का निमंत्रण दिया।

आदाब अर्ज़ है -रईस सिद्दीक़ी


रमज़ान और रोज़ा पर कुछ शायरों की नज़्मों और ग़ज़लों से चुनीदा शेर।


देख को उसको फिर दानिस्ता देख लिया
एक लग़ज़िश ने सारा रोज़ा तोड़ दिया

दानिस्ता: जानबूझ कर ,लग़ज़िश : लड़खड़ाना/ग़लती
--रईस सिद्दीक़ी



ख़्वाहिशों को दिल में बंद करने का महीना आगया है
मुबारक हो मोमिनों, रमज़ान का महीना आगया है

मोमिन :ईमान वाला , नेक बंदा
--सदरा करीम
शाहिद से कह रहे हो कि रोज़े रक्खा करो
हर माह जिसका गुज़रा है रमज़ान की तरह

--सरफ़राज़ शाहिद
चलो रब को राज़ी करलो
गुनाहों से तौबा करलो
नेकियों से दामन भरलो
चलो रब को राज़ी करलो

--उज़्मा अहमद
कितने पुरनूर हैं रोज़ादारों के चेहरे
दिन-रात वो रब से बस नूर कमाते हैं
नूर:पाक चमक , पुरनूर: नूर से भरपूर

--वसी अब्बास
रोज़ा- ख़ोरी पर मिरी, दुनिया को हैरानी नहीं
रोज़ा यूँ रक्खा नहीं, बिजली नहीं , पानी नहीं

--ख़ालिद इरफ़ान
ये ग़ुरबत, फ़ाक़ों का इक सिलसिला
हमें तो ये रोज़ा हज़ारी लगे
ग़ुरबत:ग़रीबी ,रोज़ा हज़ारी:एक हज़ार रोज़े

--ज़फर कमाली
रोज़ा- ख़ोरी पर मिरी, दुनिया को हैरानी नहीं
रोज़ा यूँ रक्खा नहीं, बिजली नहीं , पानी नहीं
भूक और शायर का चूँकि चोली दामन का है साथ
मुझसे बढ़के जानता है कौन रोज़े की सिफ़ात
पंद्रह घंटे का रोज़ा हर जवान-ओ-पीर का
शाम करना, सुब्ह का लाना है जू-ए-शीर का


सिफ़ात : विशेषतायें ,पीर: बूढ़ा
जू-ए-शीर:दूध की नहर निकालना, असंभव काम कर दिखाना
-ख़ालिद इरफ़ान
ख़ैर-ओ-बरकत बढ़ी माहे रमज़ान में
रब की रहमत हुई, माहे रमज़ान में
एक नेकी के बदले में, सत्तर मिले
लाटरी लग गई, माहे रमज़ान में
फिर गुनाहों से तौबा का मौक़ा मिला
रूह रौशन हुई, माहे रमज़ान में
न्याज़ ,जो जिसने माँगा, ख़ुदा ने दिया
सब की क़िस्मत खुली, माहे रमज़ान में

--न्याज़


एक्टर बनना मेरी प्राथमिकता नहीं थी : टाइगर श्रॉफ

चन्द्रकांत शर्मा 

टाइगर श्रॉफ की 'हीरोपंती' के बाद अब तक कोई दूसरी फिल्म नहीं आई है। लेकिन आजकल वह अपने फैंस के बीच धमाकेदार रूप में मौजूद हैं। हालिया टी-सीरीज के रिलीज म्यूजिक एलबम 'जिंदगी आ रहा हूं' के टाइटल सान्ग के वीडियो में वह अपने डांस का प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं। पेश है, इसी वीडियो एलबम के सिलसिले में टाइगर श्रॉफ से हुई बातचीत के प्रमुख अंश :-

एलबम 'जिंदगी आ रहा हूं' में काम करने की वजह क्या रही?
इस वीडियो एलबम के पीछे भी मेरी डेब्यू फिल्म 'हीरोपंती' की कामयाबी ही है। दरअसल, 'हीरोपंती' में काम करने के बाद मुझे बच्चों एवं टीनएजर का भरपूर प्यार मिला। उनके प्यार को मैं सूद समेत वापस करना चाहता था। यह तभी संभव था, जब कोई ऐसा प्रोजेक्ट मिले, जिसके जरिये मैं अपना कर्ज उतार सकूं। चूंकि, 'हीरोपंती' में बच्चों और युवाओं ने मुझे खासा प्रोत्साहित किया, जो जीवन को सेलिब्रेट करते हैं, जिंदगी में सकारात्मकता फैलाते हैं, इसलिए मैंने यह बात कोरियोग्राफर अहमद खान से शेयर की। अहमद हमारे साथ काम करने के लिए तैयार हो गए। फिर टी-सीरीज को भी हमारा आइडिया पसंद आया और उसी का नतीजा है 'जिंदगी आ रहा हूं मैं'। यह वीडियो युवाओं के सपनों और जीवन को समर्पित है।

यह आइडिया किसका था और इससे कैसे जुड़े?
यह आइडिया मेरा था। इसी वजह से पहले यह जहां केवल एक आइडिया था, वहीं बाद में सबके सहयोग से संपूर्ण वीडियो के तौर पर सामने आया। पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम ने इस वीडियो में अपनी आवाज दी है। बैकग्राउंड स्कोर अमाल मलिक ने दिया है, जबकि गीत मनोज मुंतशिर ने लिखा है। वीडियो में मैं अपनी डांस टीम के साथ हूं, जो एक्रोबेट्स की प्रैक्टिस करते हैं। वैसे, यह गाना बट पर बेस्ड है। हमारी कोशिश रही कि आजाद संगीत की संस्कृति एक बार फिर लौटे। अहम बात यह है कि इस वीडियो में मेरे साथ आतिफ असलम ने भी डांस किया है। आतिफ ने इससे पहले कभी ऐसा नहीं किया है, क्योंकि उनके पास कोरियोग्राफी सीखने के लिए समय ही नहीं था।

आप यह जताने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं कि आपकी रुचि डांस में ही है?
इस बात से मुझे इंकार नहीं है कि डांस मुझे बहुत प्रिय है और मशहूर पॉप गायक माइकल जैक्सन मेरे आदर्श हैं। यही वजह है कि मैं बड़े पर्दे पर माइकल जैक्सन का किरदार निभाना चाहता हूं। यह मेरा सपना है कि मैं माइकल जैक्सन की जिंदगी पर आधारित किसी फिल्म में मुख्य भूमिका निभाऊं। लंबे समय से मैं ऐसा करने की सोच रहा हूं। इसके लिए मैंने जैक्सन पर काफी शोध भी किया है। अगर मुझे कोई ऐसा प्रस्ताव मिलता है, तो मुझे उनके जैसा शरीर पाने के लिए अपना वजन कम करना होगा, उनके जैसे हाव-भाव लाने होंगे। यह फिल्म करना मेरे लिए सबसे ज्यादा खुशी की बात होगी।

आपको एक्शन सीन ज्यादा पसंद हैं?
जी हां, निश्चित रूप से मारधाड़ वाले दृश्य मेरी विशेषता हैं, लेकिन मेरे लिए पूरी फिल्म की शूटिंग बराबर महत्व रखती है। मुझे फिल्म के नृत्य, मारधाड़ और संवेदनशील हर तरह के दृश्यों में कड़ी मेहनत करनी होती है, क्योंकि मुझे पता था कि इतना सारा टैलेंट दिखाने का बेहतर मौका बार-बार नहीं मिलता है। इसलिए मैं अपनी ओर से कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहता। सच कहूं, तो मैं अपनी डेब्यू फिल्म 'हीरोपंती' के जरिये दर्शकों पर वही छाप छोड़ना चाहता था, जो मेरे पिता ने अपनी फिल्म 'हीरो' में छोड़ी थी।

क्या आपका एक्टिंग में आना तय था?
नहीं, एक्टर बनना मेरी पहली प्राथमिकता नहीं थी। मैं खेलकूद के बीच रहकर ही बड़ा हुआ हूं, इसलिए एक्टर बनना मुझे पसंद नहीं था। लेकिन, इसके बावजूद कहीं-न-कहीं मुझे लगता था कि आखिरकार मैं एक्टर ही बनूंगा।

अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में बताएं?
कोरियोग्राफर और फिल्ममेकर अहमद खान जल्द ही मुझे अपनी फिल्म में डायरेक्ट करते दिखेंगे। इस फिल्म में दर्शकों को बहुत सारा कांटेपररी एक्शन और डांस सीक्वेंस देखने को मिलेगा। 'हीरोपंती' के साथ ही मैंने साजिद नाडियावाला के साथ तीन फिल्मों की डील की थी। उस डील के तहत दूसरी फिल्म 'बागी' बहुत जल्द फ्लोर पर जाने वाली है। इस फिल्म का निर्देशन एक बार फिर शब्बीर खान ही करेंगे। यह एक एक्शन फिल्म होगी, जबकि इसमें डांस का भी भरपूर तड़का दिखेगा। साथ ही प्रोड्यूसर एकता कपूर की रेमो डिसूजा के डायरेक्शन में फिल्म 'फ्लाइंग सिक्ख' में सुपरहीरो के तौर पर नजर आऊंगा। इस फिल्म में मेरे अपोजिट श्रीलंकाई ब्यूटी और बॉलिवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस हैं। 'फ्लाइंग सिक्ख' में मैं सरदार की भूमिका, जबकि जैकलीन भरतनाट्यम डांसर की भूमिका में होंगी। फिल्म में मेरे खास स्टंट्स भी होंगे।

आप एक बहुत अच्छे फुटबॉल खिलाड़ी हैं, लेकिन उसे छोड़ क्यों दिया?
मैंने फुटबॉल छोड़ी नहीं है। अभी भी खेलता हूं, लेकिन खेलना अब कम हो गया है। भारत में क्रिकेट और दूसरे खेलों के मुकाबले फुटबॉल का कोई स्कोप नहीं है। जब ये बात मेरी समझ में आई, तो मैंने अभिनय को अपना करिअर बना लिया।

अपनी फिटनेस को लेकर भी आप बहुत सजग होंगे?
फिटनेस तो बचपन से ही मेरी जिंदगी का हिस्सा रही है। मैंने मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ली है। एथलीट भी हूं। इसके अलावा जिम्नास्टिक भी करता हूं, जिससे मेरा शरीर लचीला रहता है। इन सबको मिलाकर ही मेरी जिंदगी बनती है और इन सबको अपनी जिंदगी में बनाए रखने के लिए फिट रहना पहली जरूरत है। जब से फिल्मों में करिअर तलाशना शुरू कर दिया था, तब से इन सब में डांस भी जुड़ गया है।

अपनी डाइट के बारे में कुछ बताएं?
मुझे वैसे तो शाकाहार ज्यादा पसंद है, लेकिन अपनी सेहत की जरूरतों को देखते हुए मैं नॉनवेज को भी अपनी डाइट का हिस्सा बनाता हूं। मैं अपने खाने में प्रोटीन को बनाए रखने के लिए दालें और अनाज का इस्तेमाल करता हूं। स्मोकिंग और ड्रिंक से दूर रहता हूं। सुबह नाश्ते में अंडे की सफेदी का ऑमलेट और ओटमील खाता हूं। स्नैक्स में ड्राईफ्रूट आदि लेता हूं। लंच में ब्राउन राइस के साथ चिकन और उबली हुई सब्जियां खाता हूं। शाम को प्रोटीन शेक लेता हूं। उसके बाद जिम्नास्टिक करता हूं और रात के खाने में फिश और ब्रोकली की सब्जी लेता हूं।

Happy Birthday- Jaspal Rana


Saturday, June 27, 2015

“ देश के सम्मान के साथ हमारा सम्मान जुडा हुआ है “ –शिक्षाविद् अशोक लव


“ देश केवल ज़मीन का टुकड़ा नहीं है, यह हमारी आत्मा में बसा भाव है. इसके साथ ऐसा अपनत्व होता है कि इसके लिए प्राण तक न्यौछावर करने में सैनिक हिचकिचाते नहीं हैं. हम जहाँ भी, जिस रूप में भी कार्य कर रहे हैं हमें ऐसे कोई भी कार्य नहीं करने चाहिए जिससे देश का अहित हो, देश के सम्मान को ठेस न पहुँचे.”- वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद् अशोक लव ने एपीजे स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, द्वारका,नई दिल्ली के एम.बी.ए. के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा. ‘ सत्र 2015-17 विद्यार्थियों के साथ संवाद ‘ के अंतर्गत यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था. 

इससे पूर्व संस्थान के निर्देशक डॉ. आलोक सकलानी ने अशोक लव का स्वागत करते हुए कह कि अशोक लव बहुमुखी प्रतिभा संपन्न हैं. वे कवि हैं, लेखक हैं, शिक्षाविद् और समाजसेवी हैं. उनकी 125 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके साहित्य पर पी.एच.डी. और एम.फिल. हिया हैं. वे तीस वर्षों तक अध्यापन से संबद्ध रहे हैं. 

अशोक लव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन मनुष्य के भावी जीवन का आधार होता है. यह फिसलन भरा होता है. इस पर बढ़ते हुए टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों से गुज़ारना पड़ता है. अनेक प्रलोभन अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इन सबके मध्य अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित रखना चाहिए. साधनहीन एकलव्य ने अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित रकह और निरंतर अभ्यास से श्रेष्ठ धनुर्धर बना. एकलव्य मैनेजमेंट का विद्यार्थी नहीं था. उसने जीवन से प्रबंधन सीखा, मैनेजमेंट सीखा. मैनेजमेंट का अर्थ ही जीवन को सुव्यवस्थित ढंग से जीना है. अपने कार्यों का सुप्रबंधन करना है.

उन्होंने कहा कि देश हमारे लिए सर्वोपरि है. इसके सम्मान के साथ हमारा सम्मान जुडा हुआ है. जब देस पराधीन था तो देश के प्रत्येक नागरिक पर पराधीनता का कलंक लगा हुआ था. हमें इसे स्मरण रखना चाहिए. भारत महान देश है. इसके संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं किया गया. ऐसी योजनाएँ नहीं बनाई गईं जिनसे देश विश्व के विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आता. आप विद्यार्थी जीवन के पश्चात समर्पित भाव से कार्य करके देश को उच्च शिखरों तक ले जाएँ. अपने सामने सदैव देश को रखें. 

अशोक लव ने अपने अमेरिकी प्रवास के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वहाँ भारतीयों का बहुत सम्मान है. भारतीय परिश्रमी और प्रतिभावान हैं. आई.टी. क्षेत्र में कार्यरत इंजीनियर, डॉक्टर, व्यवसायी सबके समर्पित भाव से कार्य करने के कारण ऐसा हुआ है. उनके सम्मान का अर्थ है भारत का सम्मान. वहाँ बसे भारतीय हर साँस के साथ भारत को जीते हैं. हम यहाँ भारत में रह रहे हैं. हमारा कर्तव्य हो जाता है कि हम अपने कार्यों से देश और भारतीय संस्कृति की गरिमा को बढ़ाएँ. आज शिक्षा का स्वरूप बदल गया है. केवल साइंस या कामर्स ही नहीं अपितु आर्ट्स विषयों के साथ भी उच्च पदों पर पहुँचा जा सकता है. एम.बी.ए. बहुत महत्त्वपूर्ण विषय बन गया है. आई.टी. हो, चिकित्सा हो, डिफेंस हो आज सब एम.बी.ए. अवश्य करते हैं. आप इसे गंभीरता से लें, मन लगाकर खूब पढ़ें. आपकी उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ ! साहित्यकार अशोक लव ने विशेष अनुरोध पर अपनी कुछ कविताएँ भी सुनाईं. संस्थान की ओर से डॉ.आलोक सकलानी ने उन्हें सम्मानित किया.

The five Cs of five a day in selecting fruits and vegetables


It is currently recommended that one should eat 5 or more servings of variety of fruits and vegetables daily to prevent cancer and heart disease. Fruits and vegetables contain vitamins, minerals, phytochemicals, and antioxidants and are low in calories. Those with the most color – dark green, red, yellow and orange – have the most nutrients. Carrot, Celery, Cantaloupe, Cucumber and Corn are the five "Cs" which can be incorporated in the five a day diet. One should mix all seven colors and six tastes when choosing fruits and vegetables.

The USDA new Food Plate recommends filling half your plate with fruits and vegetables.

Fruits, vegetables and grain products that contain fiber, particularly soluble fiber, may help reduce the risk of coronary heart disease. Fiber-containing grains, fruits and vegetables also reduce the risk of some cancers, said Padma Shri, Dr. B C Roy National Awardee & DST National Science Communication Awardee, Dr KK Aggarwal, President Heart Care Foundation of India and Honorary Secretary General IMA.

A serving size is: one medium-size fruit, 1/2 cup raw or cooked fruits or vegetables, 180 ml fruit or vegetable juice, 1/2 cup cooked or canned legumes (beans and peas), 1 cup raw leafy vegetables, 1/4 cup dried fruit.

Five servings mean 2 fruits and 3 vegetables; 7 servings means 3 fruits and 4 vegetables and 9 servings means 4 fruits and 5 vegetables.

Tips for safe eating
*Snack with raw vegetables instead of potato chips.
*Add fruits in breakfast.
*Prefer fresh fruit juice instead of a usual coffee, tea or soda.
*Wash fruits and vegetables with water and scrub with a dish brush when appropriate.
*Throw away the outer leaves of leafy vegetables, such as lettuce and cabbage.
*Peel and cook when appropriate, although some nutrients and fiber may be lost when produce is peeled.
*Avoid fruits and vegetables that look brownish, slimy or dried out. These are signs that the product has been held at an improper temperature.
*Wash chopping boards with hot water, soap and a scrub brush to remove food particles.
*Wash hands with warm water and soap for at least 20 seconds before and after handling food, especially fresh whole fruits and vegetables and raw meat, poultry and fish. Clean under fingernails, too.

पंजाबी बाग के लाजपत राय दशहरा स्टेडियम एवं क्रीड़ा स्थल बना अवैध पार्किंग,बच्चों को खेलने की जगह का टोटा


अशोक कुमार निर्भय 

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के राजस्व को सरे आम वर्षों से अभी तक करोड़ों का चुना पंजाबी बाग स्थित लाला लाजपत राय दशहरा स्टेडियम एवं क्रीड़ा स्थल को निजी टूर ऑपरेटरों की बसों और लिंगया इंस्टिट्यूट की बसों ने अवैध पार्किंग बना कर कब्ज़ा कर लिया है। ऐसा बिलकुल नहीं है की इस अवैध बसों को पार्किंग में तब्दील करने की जानकारी यहाँ के राजौरी गार्डन पश्चिमी ज़ोन निगम उपायुक्त,स्थानीय पुलिस के डिवीज़न और बीट अफसरों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर जोनल ट्रैफिक निरीक्षक यहाँ आँख बंद करके निकलते हैं क्योंकि ट्रैफिक ट्रेंनिंग पार्क ठीक इसीलाला लाजपत राय दशहरा स्टेडियम एवं क्रीड़ा स्थल के सामने है। 

अब बात करते हैं की यहाँ के निगम पार्षद की तो पहले बाहुबली निगम पार्षद अकाली नेता सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा थे अब उनकी धर्म पत्नी श्रीमती सतविंदर कौर सिरसा हैं उन्हें भी इस सारे खेल की जानकारी है किन्तु बस टूर ऑपरेटरों और निजी संस्थानों के मालिकों से उनके गहरे और अच्छे सम्बन्ध हैं इसी के चलते यहाँ कोई निगम अधिकारी फटकता तक नहीं है। कायदे से यहाँ खेल होने चाहिए किन्तु यहां खेलों की बजाय या तो शादियां होती हैं या फिर बसों की अवैध पार्किंग। निगम सूत्र से मिली प्राप्त जानकारी के अनुसार यहाँ के लाइसेंसिंग और आर पी सैल के इन्पेक्टर,स्थानीय बीट अफसर,ट्रैफिक पुलिस के जेड ओ को एकमुश्त रकम इन बसों के मालिकों से हर महीने पहुंचती है। तभी सभी विभाग एक- दूसरे की जिम्मेदारी बता कर पल्ला झाड़ लेते हैं और पार्किंग बनी यह सरकारी भूमि पर बसें इसी प्रकार वर्षों से राजस्व को चुना लगा रही हैं। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का सतर्कता विभाग सोया है जो निगम की राजस्व वाली कमाई अब काली कमाई में तब्दील होकर अफसरों की जेबों तक पहुँच रही है। गौरतलब है की पुलिस आयुक्त बी एस बस्सी साहब और ट्रैफिक पुलिस के विशेष आयुक्त मुक्तेश चन्दर जी भी अवैध पार्किंगों पर नकेल कसने की बात कई बार कह चुके हैं,दिल्ली में अवैध पार्किंग की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही आए दिन क्राइम के नए-नए मामले भी सामने आ रहे हैं। लेकिन यहाँ की स्थानीय जिला ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय सर्किल ट्रैफिक निरीक्षक को आपने अफसरों की बात ना सुनायी देती है और ना ही यह सरकारी भूमि पर बनी अवैध पार्किंग दिखयी देती है। निगम सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इनमे से कई निजी टूर ऑपरेटर ऐसे हैं जिनका मोतीनगर मेन सड़क पर फुथपाथ और सर्विस रोड पर अवैध पार्किंग बना कर शत प्रतिशत कब्ज़ा है लेकिन पश्चिमी जिला ट्रैफिक पुलिस ने मानों इन अवैध पार्किंगों पर कुछ कार्रवाई नहीं करने की कसम खा रखी है। गौरतलब है कि ट्रैफिक स्पेशल कमिश्नर मुक्तेेश चंदर ने कई बार कहा कि लोग पार्किंग में किसी भी गड़बड़ी की शिकायत तुरंत करें। ट्रैफिक पुलिस ने अपना व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया है। 

ये नंबर है 99-1064-1064 इस नंबर पर शिकायत, अवैध पार्किंग की तस्वीरें और वीडियो भी भेजा जा सकता है। अवैध पार्किंग की समस्या का मुद्दा काफी बढ़ रहा है। पार्किंग एरिया में लोगों की हत्या की कई घटनाएं सामने आई हैं। लेकिन खुद उनके सर्किल ट्रैफिक निरीक्षक उनके आदेशों की धज्जियां उड़कर सरकारी भूमि पर पार्किंग बना खड़ी गाड़ियों को जब्त नहीं कर रहे ताकि जुर्माना वसूल कर राजस्व बढ़ाया जा सके। 

Huna –Mystic Power of the Ancients

Geeta

The word HUNA means secret in Hawaiian. It refers to a body of knowledge that has its origins in antiquity. In many ways it is a mystery school. The body of information we call HUNA was not openly discussed and it was appararently never written down. The techniques were passed from initiate to initiate for thousands of generations. The initiates were called KAHUNA [keeper of secrets]. KAHUNA possess the divine power to perform miracles but they also possessed an incredible esoteric knowledge.

HUNA is a system of mind, body, spirit integration and healing. In HUNA psychology there are three selves in one man. The three selves of HUNA are the lower self, the middle self, the higher self. They are so called because of their psychical locations. The lower-self is located in that area of body known as "SOLAR PLEXUS''. The middle-self is located in the head and the higher-self is situated at about five feet above the head.

The Lower-self is equated to subconscious mind, middle self is commonly referred to conscious mind, whereas Higher-self is used for super conscious minds. The Middle-self is our awakened conscious mind that is part of us which we are mostly aware and by which we reason, think and make decisions. The Lower-self is the sea of feeling and emotions. The Lower-self can be commanded and instructed to do things by middle self.

The Higher-self is the spiritual part of man being the most enlighten part of his nature. It is located five feet above the body and connected to right side of head by means of a silver cord. The Higher-self is so close to us actually longs to help us through our difficulties. It has power to solve them in a very definite manner, if only we would seek its help. It is a curious fact that high self never intervene in one's affair unless its help is specifically asked for.

You have to learn to communicate with your Higher-self and a new life of unlimited happiness, love and accomplishment can be yours. The three selves are connected by means of an invisible cord which KAHUNA called AKA-CORD.

Nothing alive exits without life force energy when someone died he stopped breathing. Hence breath or "Mana" becomes the symbol of life force energy.

KAHUNA reorganizes the vital importance of PRANIC energy in performing miracles. The PRANA is the substance with which we want to accomplish some objectives for us. The PRANA is breathed in by the conscious Middle-self and is sent up to Higher-self. The Middle-self takes the PRANA then the Lower-self converts it and Higher-self uses it.



HUNA RITUAL OUTLINED: Click for Huna Video

*Sit comfortably with closed eyes. Take 7 or 8 deep breaths. Completely aware of vital prana entering your body
*Now visualise the absorbed prana being converting into a very high voltage silver white ball in your solar plexus.
*Now see a tremendous flow of white light surging up out of your solar plexus. Like an active volcano erupting thousands of volts of shattering spiritual electricity.
*As this light shoots out of your head see it widen into a ball of about four or five feet diameter.
*You are now making contact with Higher-self.
*Now without hesitation see within this circle of light that you seek as being already accomplished. *Believe that it is already yours.
*Now feel totally and completely that your goal is already accomplished. Believe that it is already on its way to you.
*Now thank your Higher-self for accomplishing your will.
*You should aim to perform the ritual every day until your goal is completely achieved.
*Do not despair if nothing happened after a few weeks .Your higher self will never let you down. *Trust in it completely. It will answer your dreams.

Happy Birthday- P.T. Usha


Friday, June 26, 2015

टीनू आनंद और जरीना वहाब के साथ अभिनव कुमार की हुनर दारी!


चंदन शर्मा

अभिनेता निर्देशक टीनू आनंद और जरीना वहाब शरदचंद्रा प्रस्तुत और वेदर फिल्म्स की नई फिल्म ‘जी लेने दो एक पल ’की शूटिंग पर नए उभरते हुए कलाकार अभिनव कुमार के साथ काम करते हुए बहुत इमोशनल हो गए जबकि गाँव के सीधे सादे किसान के बेटे का किरदार कर रहे अभिनव कुमार रोजलीन खान और सुखबीर लाम्बा और अंजन श्रीवास्तव के साथ फिल्माए हुए सीन में यह एहसास कराते हैं.कि एड्स से निजात पाने के लिए लोगों में चेतना जगाने की बहुत जरुरत है.

कहानीकार और निर्देशक संजीव राय से जब इस फिल्म और संबद्ध सीन को लेकर चर्चा हुई. तो उन्होंने बताया‘दरअसल फिल्म के नायक शेखर बनाम अभिनव कुमार जब टीनू आनंद यानि मुखिया जी के भतीजे विरजेश हिरजी,जो कि मुम्बई में रहते हैं,और फिल्मों में देश विदेश से आई फिल्मों में हीरोइन बनने का मंसूबा लेकर आने वाली लड़कियों को प्रमोट करते हैं के घर एक रात रुक जाते हैं, वहाँ आई अति उत्साही नवयौवना रोजलीन खान उसकी मर्दानगी को चैलेंज करती है और हमबिस्तर होने को प्रभोक करती है इसी घटनाक्रम में पत्निव्रता अभिनव एड्स का शिकार हो जाता है गाँव मैं आकर वह जन सामान्य में इस बात का एहसास कराता है कि एड्स के शिकार लोगों से नफरत नहीं प्यार से पेश आएं और लोगों में जागरूकता लाएं’ अभिनव कुमार इससे पहले मशहूर निर्माता निर्देशक.अनिल शर्मा कृत फिल्म ‘अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’ में बाॅबी देओल के फ्रेंड की भूमिका निभा चुके हैं .

Television biggies have a blast at Disney Pixar's Oscar hopeful 'Inside Out' special screening!!


Pembabu Sharma​

One of the most anticipated films of the year, Disney Pixars next animation Oscar hopeful Inside Out recently got a standing ovation at Cannes and is due for release in India this Friday. It has already opened to rave reviews and a splendid box office abroad, and is gearing up for its India release this Friday.

Television stars thronged the special screening of Inside Out recently at a Mumbai suburban preview theatre and were seen absolutely loving and enjoying the fun family entertainer!!

Rithvik Dhanjani, Asha Negi, Akshay Oberoi, Meiyan Chang, Rakesh Bapat among st others were seen completely having a ball at the special screening!!

Bollywood Dhamaka by DMS AAROHI Singers on 28th June


World De Addiction Day observed by Shri Gyan Gangotri


श्री ज्ञान गंगोत्री विकास संस्था (पंजीकृत एन.जी.ओ.) द्वारा 26.06.2015 को विश्व  नशा मुक्ति दिवस के अन्तर्गत कार्यक्रम का आयोजन डी.डी.ए. पार्क, सेक्टर-5, द्वारका में किया गया। इस कार्यक्रम में सुबह-सुबह भारी संख्या में नागरिकों ने उपस्थित होकर नुक्क्ड़ नाटक द्वारा नशे के प्रति जागरूकता लाकर इससे मुक्ति पाने के लिये विभिन्न प्रकार के सुझाव दिये। 

कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि गुलाब सिंह यादव, विधायक पालम विधान सभा, सुश्री भावना गौड़, विधायक पालम विधान सभा ने दूरभाष द्वारा संस्था के कार्यक्रम विश्व नशा मुक्ति दिवस 2015 की बधाई दी और कहा कि भविष्य में हम संस्था के साथ है। समाज सेवी श्री बी.के.मिश्रा एवं प्रो. जी.डी.दिवाकर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज के हर वर्ग के लोग नशे का सेवन कर रहे है। जिससे छोटे-छोटे बच्चे ज्यादा प्रभावित हो रहे है। 

कार्यक्रम का आयोजन श्री ज्ञान गंगोत्री विकास संस्था एवं मद्य निषेध निदेशालय, दिल्ली सरकार के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। इसके पहले संस्था ने एन.टी.पी.सी., ओ.एन.जी.सी., पेट्रोनेट एल.एन.जी., आई.जी.एल., सी.सी.एल., एच.पी.सी.एल., आई.ओ.सी.एल., एन.डी.एम.सी. तथा एम.एम.टी.सी., से संस्था अनुदान के लिये निवेदन किया था। इस उपरान्त सभी विभाग के पदाधिकारियों ने अवगत कराया कि हम अपना सी.एस.आर. का फन्ड़ स्वच्छ भारत अभियान में लगा रहे है। दुरभाग्य है इस भारत सरकार कि जमीन पर कहीं कोई काम नहीं दिख रहा है। और हकीकत कुछ और ही है फिर भी मैं भारत सरकार के महारत्न, नौरत्न कम्पनियों के पदाधिकारियों को धन्यवाद देता हूँ कि भविष्य में कभी न कभी संस्था को सहयोग देंगे। 

इस कार्यक्रम में द्वारका उपनगरी के नागरिक एवं क्षेत्र के हजारों लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक महासचिव भाई बी.के.सिंह ने बताया कि आज मैं बहुत खुश हूँ कि मेरे प्रयास और सामाजिक सहयोग से संस्था द्वारा 15000 हजार से ज्यादा लोगों को नशा मुक्त होंने का सकंल्प दिलाया जा चुका है। मैं संपादकीय मीडिया के सभी पदाधिकारी को धन्यवाद देता हूँ कि आप लोगों ने विश्व नशामुक्ति दिवस पर आयोजित खबर को प्राथमिकता दी है। जिसका असर नशा सेवन करने वाले नागरिकों पर पडा है। आज इस कार्यक्रम में संस्था की तरफ से 15 समाजसेवी लोगों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। जो लोग संस्था के साथ किसी न किसी रूप में जुडे़ है और अच्छे काम के लिये सहयोग कर रहे है। कार्यक्रम में लघु नाटक का आयोजन में भाग लेने वाले कलाकार नीतु, उर्मीला, कमला, प्रीति, अंजली, मोनिका द्वारा मंचन किया गया। किया गया जिसे देखकर डी.डी.ए. पार्क में उपस्थित हजारों लोग भाव विभोर हो गये और उनकी आखों में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यक्रम में उपस्थित संस्था की सलाहकार गुड्डी शर्मा, डाॅ. मीरा कुमारी, पूनम राणा, ज्ञान देव, प्रीन्स कुमार, सूरज कुमार एवं सभी नागरिकों ने मिलकर इस आयोजन का सर्मथन किया और कार्यक्रम को सफल बनाया। मंच का संचालन संस्था की मानद् महासचिव रानी सिंह द्वारा किया गया।

World International Day against Drug Abuse observed at India Gate, New Delhi


A World International Day against Drug Abuse event on 26th June, 2015 at India Gate, new Delhi has been organised by Ms. Sunita Godara, Asian marathon Campion, the event was a collaborative venture of * Narcotics Control Board, Ministry of Home Affairs, Government of India * NISD, Ministry of Social Justice & Empowerment, Government of India & * Directorate of Prohibition, WCD, Govt. Of NCT of Delhi & Health Fitness Trust. 

SAHAJ SAMBHAV & team (Mrs. Rekha Jhingan, Mrs. Neelam, Mrs. Ritu, Mrs. Shanu, Mrs. Manjula & Team) had participated in the event on this day. Mrs. Rekha Jhingan General Secretary, Sahaj Sambhav, says that we should come forward for to have a drug free society because these drug abuse is a route of all the evils are killing in the society these days.

Citizen's reporter
Rekha Jhingan
General Secretary
SAHAJ SAMBHAV

Self defense training camp jointly organized by Dwarka Hello Moms & Delhi Police




Visit again for more detail & photo.

Sanjay-Soniya Sinha Happy Marraige Anniversary


Bollywood Actess Amisha Patel learns western dance from Sandip Soparrkar

Abhishek Dubey(Report & Photo from Mumbai)

Amisha Patel is a very talented and graceful actress who has tasted the charm of being on the peak of success in her career. The actress has out shined many in the industry with her beauty and acting skills, which she flaunts off very simply. She has mesmerised everyone with her acting and dancing skills time and again in her films.

For a while now she has been learning Latin and Ballroom dances at her friend and bollywood renowned choreographer Sandip Soparrkar's institute. She is a trained bharatnatyum dancer which is a known fact but now she is putting up some new dance moves to her repertoire. She has been tirelessly training in dances like Salsa, Jive, Cha-Cha-Cha, Samba, Tango and Waltz. This is also a great opportunity for Sandip Soparrkar's students to shake a leg with the gorgeous actress. They will enjoy her dancing company and for sure be the luckiest one to get some important tips from her.

Confirming the news Amisha Patel Said, "Sandip is the best in sexy international forms of dance, especially latino styles of dancing. He is super fun to work with and makes every class that I take with him a sheer delight no matter how hard the class is."

Sandip Soparrkar said, “Among all the stars that I have taught Amisha Patel is truly a class apart. She is so dedicated to dance that her love for the art is addictive. Best part about Amisha is that she pays loads of attention to techniques and to teach a student who is technically very refined is a sheer pleasure. I hope soon we all Amisha Patel fans can see her in a dance based film."

Sandip has choreographed for films including 7 Khoon Maaf, Mangal Pandey and Kites among others, and has popularised Bollywood dance on international platform, apart from choreographing for Icons like Britney Spears and Madonna. He has trained many bollywood stars like Hrithik Roshan, Priyanka Chopra, Kajol, Aishwarya Rai Bachchan and more and now Amisha Patel is another star who he can proudly say is his student.

Thursday, June 25, 2015

डीजेए ने की ‘‘पत्रकार सुरक्षा अधिनियम’’ की मांग -जंतर मंतर पर दिया धरना, पत्रकारों पर हमलों का किया विरोध

दिल्ली पत्रकार संघ (डीजेए) ने केंद्र सरकार से पत्रकार सुरक्षा अधिनियम बनाने की मांग की है। देश भर में पत्रकारों पर हो रहे जानलेवा हमलों के खिलाफ बृहस्पतिवार को जंतर मंतर पर डीजेए की अगुवाई में आयोजित धरने में इस तरह की घटनाओं की कड़ी निंदा की गई । वक्ताओं ने एकजुटता के साथ कहा कि देश के किसी भी हिस्से में पत्रकार पर हुआ हमला लोकतंत्र के चैथे स्तम्भ को कुचलने की मंशा से किया जाता है जिसे सहन नहीं किया जाएगा। धरने के उपरांत डीजेए के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गष्हमंत्री श्री राजनाथ सिंह को अपनी मांगो के संदर्भ में ज्ञापन सौंपा।

धरने को संबोधित करते हुए डीजेए के महासचिव श्री आनंद राणा ने कहा कि आज तमाम प्रभावशाली ताकतें पत्रकारों को सच लिखने और कहने से रोकने के लिए अपराध करने से भी नहीं चूक रही है। हाल ही में यूपी और मध्यप्रदेश के दो पत्रकारों को जिंदा जलाकर मारने की घटनाएं इसका ज्वलंत उदाहरण है। उन्होंने कहा पत्रकारों के लिए आज का समय आपातकाल की तरह है। श्री राणा का कहना था कि ऐसी घटनाओं पर केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों की चुप्पी और दोषी लोगों को बचाने का प्रयास यह साबित करता है कि सत्ता तंत्र सच्चाई को दबाने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर सहयोग करता है। उन्होंने कहा कि जब तक पत्रकारों के हित में सुरक्षा अधिनियम नही बनाया जाएगा तब तक अपराधिक ताकतों को रोक पाना आसान नही होगा। डीजेए के अध्यक्ष श्री अनिल पांडे ने कहा मौजूदा माहौल में पत्रकार साथियों को एकता बनाए रखने की जरूरत है।

एनयूजे के पूर्व अध्यक्ष श्री राजेन्द्र प्रभु, डा नंदकिशोर त्रिखा, श्री के एन गुप्ता, पूर्व महासचिव श्री रासविहारी ने कहा कि पत्रकारो पर हुए हमलो की सीबीआई जांच कराई जाए। आज विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता पर हो रहा कुठाराघात निंदनीय है इसे रोके जाने की जरूरत है। उनका कहना था कि जब कोई पत्रकार किसी घोटाले को उजागर करने का कार्य करता है तो मामले में लिप्त लोग इसे ब्लेकमेलिंग का रूप देने की कोशिश करते है यह सरासर गलत है। इस मौके पर डीजेए के पूर्व अध्यक्ष श्री मनोज वर्मा, श्री मनोज मिश्र, श्री मनोहर सिंह, श्री अशोक किंकर, सीमा किरण, खालिद अनवर, राकेश शुक्ला, फजले गुफरान, प्रतिभा शुक्ला, एस.एस.डोगरा और श्री दधिबल यादव सहित सैंकड़ो पत्रकार उपस्थित थे।

(Photo: Sujan Singh)

Fashionista 2015 audition in Ahmedabad on 28th June


Fashionista 2015 Ahmedabad Audition is on 28th June 2015, EPSILON the HOTEL
Address: Opp. Kothawala Flats, Nr. Deepak Petrol Pump, Ellisbridge, Ashram Road, Ahmedabad-380006.
Time : 11.00 am to 6.00 pm 

Do not miss the chance be there for the audition its free for every Male, Female & Child artist .

Get selected from the audition and be there for the Semifinals in Mumbai .
For detail contact : Krunal : +91-9376832181
or email us : info@enigmaemc.com

BTW opened its 13th branch in Dwarka


BTW is known for all time tasty foodie. Now, Sub city residents can also enjoy the delicious range of food from BTW. After the grand success of several outlets located in Rishi Nagar, Rani Bagh, Sarita Vihar, Jasola, District Centre, Janakpuri, Mangalam, Sector-3, Rohini, Sector-13, Sonepat, Alipur Road, Narela, G3S, Sector-11, Rohini, TDI Mall, Kundli, Karol Bagh, Gurudwara Road, Sant Nagar, Rani Bagh, NSP, Pitampura, Kamla Nagar, Aggarsen Chowk. Yet another outlet is being opened in Dwarka Sector-10 Main market. So, if you like the delicious foodie then visit Dwarka outlet at the following address:
Shop No. G2 & G3, Wadhwa Plaza III,
PLot No-18, Sector-10, Dwarka, New Delhi

पूरी दिल्ली में धूम मचाने के बाद बिट्टू टिक्की वाला ब्राण्ड अब द्वारका में भी आ गया है. जी हाँ, “हम हर वादे निभाते हैं” की तर्ज पर लोगों के दिल जितने वाली स्वादिष्ट स्नैक्स के लिए मशहूर दुकान ने अपने विभिन्न स्थानों पर स्थापित 12 आउटलेट के बाद सेक्टर-10 द्वारका में आज विधिवत रूप से भव्य उद्घाटन के साथ ही एशिया की सबसे बड़ी उपनगरी में प्रवेश कर लिया है. गौरतलब है कि ऋषि नगर, रानी बाग , सरिता विहार, जसोला, डिस्ट्रिक्ट सेण्टर जनकपुरी, मंगलम सेक्टर-3, रोहिणी, सेक्टर-१३,सोनीपत, अलीपुर रोड, नरेला सेक्टर-11 रोहिणी, टी डी आई मॉल कुण्डली, करोल बाग, गुरुद्वारा रोड, संत नगर, रानी बाग, एन एस पी पीतमपुरा, कमला नगर, अग्रसेन चौक, की के अपार सफलता के बाद एक और आउटलेट खुलने से BTW की शोहरत में चार चाँद लग गए हैं. इस ब्राण्ड के संस्थापक श्री सती राम यादव की अथक लगन, व्यवहार, तथा अपने ग्राहकों को उम्दा क्वालिटी देने वाली शैली ने नित नए मुकाम हासिल किए हैं.

यदि आप भी अच्छे खाने के शौक़ीन हैं तो बिट्टू टिक्की वाला द्वारका में आपका इंतजार कर रहा है. 

Click to see Interview of  Mr.J.N.Kushwaha-CEO, BTW



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