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Wednesday, December 30, 2015

आउट हुआ शिवाय का फर्स्ट लुक

प्रेमबाबू शर्मा​
फिल्म ‘शिवाय’ का फर्स्ट शेड्यूल पूरा हो चुका है। अजय देवगन की फिल्म का फर्स्ट लुक भी आउट हो चुका है। बता दें कि अजय देवगन न सिर्फ इस फिल्म में मुख्य किरदार में हैं, बल्कि फिल्म के डायरेक्टर और प्रोडूयसर भी हैं। उनकी ये फिल्म अगली दीवाली पर रिलीज़ होगी। इस फिल्म में अजय देवगन सुपर हीरो टाइप रोल कर रहे हैं जो फिल्म की हीरोइन साएशा सैगल की मदद करता है।

दो लफ्जों की कहानी 4 मार्च को रिलीज़ होगी ​


प्रेमबाबू शर्मा​

बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म सिंघम में नज़र आनेवाली एक्ट्रेस काजल अग्रवाल बहुत जल्द बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में रिएंट्री करेंगी, दीपक तिजोरी की फिल्म दो लफ्जों की कहानी केसाथ। साउथ की ये मोस्ट ब्यूटीफुल एक्ट्रेस इस फिल्म में पहली बार मिस्टर चार्ल्स यानी कि रणदीप हुड्डा के साथ सिल्वर स्क्रीन शेयर करती नज़र आएंगी। बता दें कि इस फिल्म मेंरणदीप हुड्डा बॉक्सर का किरदार निभाते नज़र आएंगे, जो फिल्म में एक अंधी लड़की के प्यार में पागल हो जाते हैं और उस लड़की का किरदार काजल निभा रही हैं। सूत्रों से मिलीजानकारी के अनुसार ये फिल्म 4 मार्च 2016 को रिलीज़ होगी.

Tuesday, December 29, 2015

बच्चों के लिए फिल्म बनाना चाहते हैं तिग्मांशु धूलिया

प्रेमबाबू शर्मा​

हाल ही में 'स्माइल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल फॉर चिल्ड्रन एंड युथ' के एडवाइजरी अधिकारी बने तिग्मांशु धूलिया बच्चों पर आधरित और बच्चों के लिए फिल्म बनाना चाहते हैं। हमारे देश में 90 फीसदी लोगों की तनख्वा आज भी 10000 से कम है। उन लोगों के लिए एक फिल्म के खातिर 250 से 300 रुपए खर्च करना बजट से बाहर हो जाता है।भारत में फिल्मों की कामयाबी उनके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को देखर तय की जाती है। फिल्मों को केवल फिल्म फेस्टिवलों में प्रदर्शित करने से केवल तारीफ़ हासिल होती है लेकिन वो फिल्म लोगों तक पहुचने में चूक जाती है। इन सब बातों पर नज़र रखते हुए 'स्माइल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल फॉर चिल्ड्रन एंड युथ' ने सामाजिक संदेशों वाली 50 इंडिपेंडेंट फीचर फ़िल्में, शार्ट फ़िल्म और डोक्युमेंटरी फिल्म को बच्चों के लिए प्रदर्शित करने का फैसला लिया है।

इस बारे में बताते हुए तिग्मांशु धूलिया ने कहा है, 'यह बहुत दुःख की बात है की आज भी बच्चों के लिए जो फ़िल्में बनती है उनकी टिकटें काफी महंगी रहती हैं जिनके कारण फिल्म टारगेट ऑडियंस तक नहीं पहुंच पाती है। बच्चों को मीनिंगफुल सिनेमा पसंद है लेकिन टिक्कों के दाम ज्यादा रहने से वो फिल्में नहीं देख पाते हैं। मै कुछ ऐसी फ़िल्में बनाना चाहता हूँ जिसका बच्चें लाभ उठा सकें और वो उनके बजट में भी हो ".

Shanti Gyan International School celebrated Christmas

Students of Shanti Gyan International School, New Delhi celebrated Christmas festival. Mr. Sanjeev Singh from USA and Dr.Rishi Khurana were the guests on the occasion. Students presented the skit on the birth of Jesus and sung Christmas Carols.

Dance performance on Medley of Christmas songs was the attraction of the day. The Santa distributed muffins and sweets to all the children.

Dr. Rishi Khurana, Principal of Shanti Gyan International School informed Dwarka Parichay that students from all over India are joining our day boarding school, so we have to give due importance to cultural celebrations of various States. Our school facilitate students as training ground for life. The child learns the foremost values of love, trust and truth. from parents and later realizes the values of courage, ambition and discrimination from the larger society, So on this foundation to prepare the child for life.

नयेे वर्ष के संकल्प पर क्या सोचते बिग मैजिक टीवी स्टार

प्रेमबाबू शर्मा

अनूप सोनी - (क्राईम फाईल और बिग मैजिक होस्ट)ने प्रेमबाबू शर्मा को बताया मैंने अभी जी सरजी में काम शुरू किया है। यह बिग मैजिक पर एक काॅमेडी व्यंग्य है। नया वर्ष जल्द ही आने वाला है, इसलिए नये साल पर मेरा रिजाॅल्यूशन मेरे काॅमिक कौशल को निखारना और आगामी वर्ष में इस विधा में और गहराई तक जाना रहेगा।

गौरव गेरा - मैं नये वर्ष में किसी भी प्रकार के रिलाॅल्यूशन लेने में विश्वास नहीं करता। हालांकि, चुटकी और शाॅपकीपा का खुद का दिमाग है और उन्होंने पहले ही अपने रिजाॅल्यूशन के बारे में योजना बनाना आरंभ कर दिया है। चुटकी इस वर्ष छुट्टियों पर जाने की योजना बना रही है। उसकी गोवा से शुरूआत कर अपने आसपास कुछ फिरंगियों से घिरे रहने की योजना है। जबकि शाॅपकीपा 2016 में शीर्ष कुक बनने की योजना बना रहा है।

वरुण बडोला - नये साल पर मेरा संकल्प अपने सपनों को पूरा करने और ऐसे काम करने पर फोकस करना रहेगा जिन्हें समय की कमी या फिर अन्य कारणों की वजह से करने में मुझे झिझक होती थी। मेरी संगीत में काफी रुचि है और मैं इसे काफी समय दूंगा। मुझे बाइक्स चलाना भी पसंद है, और मैं आने वाले वर्ष में इसे एक गंभीर शौक बनाने की योजना के लिए काफी उत्साहित हूं।

कविता कौशिक - मेरे लिये, वास्तव में परिवार से ज्यादा महत्वपूर्ण और कुछ नहीं है और इस वर्ष मैंने ज्यादा से ज्यादा समय अपने परिवार के साथ बताने की योजना बनाई है। कई बार पूरे साल काम की प्रतिबद्धताओं के कारण, उनके लिए समय निकाल पाना कठिन हो जाता है लेकिन मुझे आशा है कि इस साल मैं इसे बदलूंगी।

Happy Birthday- Shyam Jaju


कमल माड्ल सी0 सै0 स्कूल में ‘अनुभूति‘ का मंचन


कमल माड्ल सी0 सै0 स्कूल, मोहन गार्डन, नई दिल्ली ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर विद्यालय के प्रागंण में वार्षिकोत्सव व पारितोषिक वितरण समारोह ‘अनुभूति‘ का आयोजन कर दर्शकों को प्रकृति की गोद में कुछ क्षण व्यतीत करने का अहसास प्रदान किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मोनिका भारद्वाज, आई.पी.एस. अतिरिक्त उप-आयुक्त, दिल्ली पुलिस व विशिष्ट अतिथि ओमवती मलिक, सहायक पुलिस आयुक्त ने चेयरमैन वी.पी. टंडन, प्रधानाचार्या श्रीमती वंदना, वाइस चेयरमैन हर्ष टंडन व श्रीमती आकांक्षा के आमंत्राण पर मंगलदीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। 

इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों द्वारा पुष्प-गुच्छो व स्मृति-चिन्हों के साथ गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया गया। संगीत की धुन पर थिरकते बाल कलाकारों ने ‘गणेश स्तुति‘ के माध्यम से दर्शकों को आध्यात्मिक रंगों से सराबोर कर दिया। योग के आसन की विभिन्न मुद्राओं में भावी योग गुरूओं ने भावी स्वस्थ व स्वच्छ भारत की परिकल्पना को बल दिया। शैक्षिक सत्रा 2014-15 के शैक्षिक व सह - शैक्षिक क्रियाकलापों व उपलब्धियों का विवरण हर्ष टंडन ने अपने सम्बोधन में प्रस्तुत किया। विद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘संकल्प -2014-15‘ का विमोचन मुख्य अतिथि ने अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ किया। 

इस अवसर पर शैक्षिक व सहशैक्षिक क्रियाकलापों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रा/छात्राओं को भी सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने अपने सम्बोधन में इस प्रकार के कार्यक्रमों के महत्व व सार्थकता का उल्लेख करते हुए बच्चों के अनुशासित व सफल जीवन के लिए अभिभावकों की भूमिका को रेखांकित किया। 

कार्यक्रम के विशेष आकर्षण ‘अनुभूति‘ के माध्यम से अभिनेताओं ने प्रकृति के पाँचों तत्वों को मंच पर अपने अभिनय से सजीव कर दर्शकों को प्रकृति के संरक्षण का सन्देश दिया। विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती वन्दना ने अपने संक्षिप्त सम्बोधन में इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए गणमान्य अतिथियों , अभिभावकों , विद्यालय परिवार व बच्चों के प्रति आभार प्रकट किया व भविष्य में भी इसी प्रकार के सहयोग की अपेक्षा की। 

कमल माड्ल सी0 सै0 स्कूल के वार्षिकोत्सव में वी.पी.टंडन, वन्दना टंडन, हर्ष टंडन व आकांक्षा टंडन की उपस्थिति में मुख्य अतिथि डी.सी.पी. मोनिका भारद्वाज वार्षिक पत्रिका का विमोचन करते हुए। कमल माड्ल सी0 सै0 स्कूल के वार्षिकोत्सव में वी.पी.टंडन, वन्दना टंडन, हर्ष टंडन व आकांक्षा टंडन की उपस्थिति में मुख्य अतिथि डी.सी.पी. मोनिका भारद्वाज बच्चों को पुरस्कृत करते हुए।

कमल माड्ल सी. सै. स्कूल, मोहन गार्डन, नई दिल्ली में वार्षिकोत्सव कार्यक्रमों की श्रृंखला के दूसरे दिन प्राइमरी वर्ग ने अपने रंगारंग कार्यक्रम ‘धरोहर‘ के माध्यम से दर्शको को भारतीय संस्कृति में झांकने का अवसर प्रदान किया। मुख्य अतिथि नरेश बाल्यान, एम. एल ए. ने मंत्रोंच्चारण के बीच मंगलदीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। विद्यालय के चेयरमैन वी.पी.टंडन व प्रधानाचार्या वन्दना टंडन ने गणमान्य अतिथियों का फूलों से स्वागत करते हुए स्मृति-चिन्ह प्रदान किए। 

कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति ‘सरस्वती वंदना‘ में लय-ताल पर नृत्य करते बाल कलाकारों ने माँ सरस्वती की सुन्दर झांकी प्रस्तुत की। भारतीय संस्कृत के अभिन्न अंग योग के कठिन आसनो को सहजता के साथ करते हुए बच्चों ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। 

कार्यक्रम में सबसे अधिक वाहवाही लघु नाटिका ‘माता-पिता -जीवन्त देवी-देवता‘ ने लूटी। लघु नाटिका ने वर्तमान में अभिभावकों व बच्चों के रिश्तों में आई कटुता व इसके निवारण को प्रभावी ढंग से रखा। इस अवसर पर शैक्षिक व सहशैक्षिक क्रिया-कलापों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रा/छात्राओं को गणमान्य अतिथियों ने सम्मानित किया। 

शैक्षिक-निदेशिका श्रीमती आकांक्षा ने विद्यालय द्वारा शैक्षिण-सत्रा -2014-15 में अर्जित उपल्बधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए भावी योजनाओं व लक्ष्यों का उल्लेख किया। मुख्य अतिथि ने अपने संक्षिप्त सम्बोधन में विद्यालय प्रबंधन समिति को अल्प समय में विद्यालय को शीर्ष पर ले जाने के लिए बधाई दी संगीतमय प्रस्तुति ‘भगवान कृष्ण‘ में कलाकारों ने अपनी-भाव भंगिमाओं, नृत्य व अभिनय से दर्शकों का मनमोह लिया। कार्यक्रम के अन्त में विद्यालय के वाइसचेयरमैन हर्ष टंडन ने अतिथियों, अभिभावकों, विद्यालय परिवार व बच्चों के अविस्मरणीय सहयोग के लिए आभार प्रकट किया।

Happy Birthday- Rajesh Khanna


Monday, December 28, 2015

‘‘सिया के राम‘‘ में रामायण बिल्कुल अलग दृष्टिकोण से दिखाया गया: मदिराक्षी


छोटे परदे पर अब तक रामायण कई बार दिखाया जा चुका है। लेकिन स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले शो ‘‘सिया के राम‘‘ में रामायण बिल्कुल अलग दृष्टिकोण से दिखाया जाएगा। इस बार माता सीता के नजरिये को उजागर किया जाएगा। ‘‘सिया के राम’ में सीता की महत्वपूर्ण भूमिका में बिल्कुल नया चेहरा मदिराक्षी नजर आने वाली हैं। उन्होंने अब तक केवल एक दक्षिण की फिल्म की है। मदिराक्षी ने इस शो के बारे में प्रेमबाबू शर्मा से की बातचीत

‘‘सिया के राम‘‘ टीवी पर आये रामायण के दूसरे संस्करणों से कितना अलग है?
सीता और राम की कहानी हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। पूरी दुनिया की सभ्यताओं को इसने प्रभावित किया है। कर्त्तव्य, सम्मान और पारिवारिक जिम्मेदारियों का इस शो का संदेश आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है। हालांकि इस कहानी के सारे संस्करण राम के नजरिये से हैं और राम सीता की इस कहानी में सीता के दृष्टिकोण को शायद ही कहीं जगह मिली हो। लेकिन पहली बार कहानी सीता के नजरिये से कही गयी है जो इसके पहले सुनी नहीं गयी। कहानी सीता को एक मजबूत और स्वतंत्र महिला के रूप में दिखायेगी। सीता समानता और शिक्षा में विास रखती है और उनका अपना विचार है।
क्या शो का फोकस सिर्फ सीता के किरदार पर रहेगा?
सीता यहां राम की सच्ची अर्धागिनी और एक मजबूत इरादों व सोच वाली महिला के रूप में दिखायी देंगी। उनका किरदार आज की हर महिला के लिये प्रासंगिक होगा। यह शो सीता के दृष्टिकोण से कही जा रही एक आदर्श दम्पति सीता और राम के रिश्ते की कहानी है। कहानी जितनी राम की है उतनी ही सीता की भी है। सबसे जरूरी कि शो में ऐसे बहुत से उदाहरण आएंगे जो आज के समाज में भी प्रासंगिक हैं।

सीता की भूमिका के लिये तैयारी किस तरह की ?
हम रामोजी फिल्मसिटी हैदराबाद में शूटिंग कर रहे हैं जो लंबे समय से मेरा अपना शहर है। सीता की भूमिका निभाना आसान नहीं है। अपनी भाषा से लेकर अपने हावभाव तक मुझे बहुत कुछ ध्यान में रखना पड़ता है। मैं अपना फोकस हाई रखने के लिये मेडिटेशन भी कर रही हूं। मैं सीता पर बहुत सी किताबें पढ़ रही हूं और उन पर अपनी रिसर्च भी कर रही हूं। यह शो मुझे अपनी जड़ों से जोड़ रहा है और मुझे इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिये।

लोग टीवी से फिल्मों की तरफ आते हैं और आप फिल्मों से टीवी की तरफ आयीं? क्या यह सही फैसला है?

‘‘सिया के राम’ अब तक का मेरा सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। स्टार प्लस और ट्राएंगल फिल्म कंपनी के साथ शुरुआत करना किसी के लिये भी सपना हो सकता है और मैं खुश हूं कि उन्होंने मुझे चुना। मैं खुशकिस्मत रही हूं कि मुझे ऐसी शुरुआत मिली जो सबको नहीं मिलती। एक कलाकार के तौर पर आपको ऐसे प्रोजेक्ट चाहिये होते हैं जो आपको कई स्तरों पर चुनौती दे सकें। फिल्में हों या टीवी, मैं अच्छा काम करना चाहती हूं और दुनिया को अपनी प्रतिभा दिखाना चाहती हूं। इसके लिये सिया के राम से बेहतर मंच नहीं हो सकता।
इस भूमिका को निभाने की चुनौतियां क्या हैं?
सबसे बड़ी चुनौती तो सीता की तरह होना है। वह एक आदर्श महिला, अपने मां बाप की एक आदर्श बेटी और आदर्श पत्नी थीं। सीता जैसे होने के लिये और उसे समझने के लिये मैं काफी मेहनत कर रही हूं, जिससे किरदार में वास्तविकता झलके।

ऐसा क्यों लगता है कि सीता आज की महिलाओं के लिये प्रासंगिक हैं?
आज जब लोग महिला सशक्तीकरण, लड़कियों की शिक्षा और समानता की बात कर रहे हैं तो हमें पीछे जाकर यह देखने की जरूरत है कि ये मूल्य हमेशा से हमारे समाज का हिस्सा रहे हैं। जहां ज्यादातर लोग सीता को भद्र महिला के रूप में जानते हैं। कम ही जानते हैं कि वह वाकई किस तरह की थीं। सीता शिक्षा में विास करती थीं और हमेशा अपने विचार रखती थीं। वह अपने विचारों पर अडिग थीं और समानता के पक्ष में थीं जैसे कि आज की ज्यादातर स्वतंत्र और प्रगतिशील महिलाएं होती हैं। आज की महिला के लिये पूरा आसमान उसका है। वे काम कर रही हैं और अपनी जिंदगी का लुत्फ ले रही हैं। सीता आज के समय में भी प्रासंगिक हैं और हम सीता की प्रेरक कहानी को आज की महिलाओं के सामने पेश कर उनका सम्मान करना चाहते हैं। आज की महिलाएं सिया के राम से कई स्तरों पर जुड़ाव महसूस करेंगी।

आदाब अर्ज़ है --सियासत


आदाब अर्ज़ है--रईस सिद्दीक़ी

अक्सर सियासतदां / राजनेता अपनी सियासी बात को प्रभावशाली बनाने के लिए उर्दू शेर-ओ-शायरी का प्रयोग करते हैं। लेकिन शायरों को सियासतदानों / राजनेताओं से किया शिकायत है, क्या दर्द है और वो उनसे किया अपेक्षा करते हैं, यह जानना बहुत दिलचस्प होगा। आज हम ऐसे ही कुछ शायरों के चुनींदा शेर पेश कर रहे हैं जो सियासत और सियासतदानों से मुख़ातिब हैं।


न मंदिर से रग़बत , न मस्जिद से उलफ़त
इबादत की बातें हैं , सियासत की बातें
रग़बत-लगाव , उलफ़त -प्रेम
--रईस सिद्दीक़ी

अपनी उर्दू तो मोहब्बत की ज़बान थी प्यारे
अब सियासत ने उसे जोड़ दिया मज़हब से
सियासत -राजनीति
---राजेंदर पाल सिंह सदा अम्बालवी

जाने कब इसमें हमें आग लगानी पड़ जाये
हम सियासत के जनाज़े को ,चिता कहते हैं
--खालिद इरफ़ान

तुम्हारी मेज़ चांदी की , तुम्हारे जाम सोने के
यहाँ जुम्मन के घर में आज भी फूटी रकाबी है
--अदम गोंडवी

ऐसे -वैसे कैसे- कैसे हो गए
कैसे -कैसे ऐसे-वैसे हो गये
--ख़लिश
खेलना जब उनको तूफानों से आता ही न था
फिर वो हमारी कश्ती के नाखुदा क्यों बन गए ?
नाखुदा-मल्लाह
-- अफ़सर मेरठी
इस नए दौर में देखें हैं वो रहज़न हमने
जो बहारों को गुलसिताँ से चुरा ले जाएँ
रहज़न -लुटेरा, गुलसिताँ -बाग़
--सबा अफ़ग़ानी
ज़रा इतना तो फ़रमा दे कि मंज़िल की तमन्ना में भटकते हम फिरेंगे, ऐ अमीरे -कारवाँ , कब तक ?
अमीरे -कारवाँ- -कारवां का लीडर
--फ़ना कानपुरी
ये शाख काटी , वो शाख काटी , इसे उजाड़ा , उसे उजाड़ा
यही है शेवा जो बाग़बाँ का ,तो हम गुलसिताँ से जा रहे हैं

शेवा -रीति -नीति , बाग़बां -माली / लीडर ,शाख=टहनी
--नफ़ीस संडेलवी
क़ौम का ग़म लेकर दिल का ये आलम हुआ
याद भी आती नहीं अपनी परेशानी मुझे
--ब्रिज नारायण चकबस्त लखनवी
नशेमन के लुट जाने का ग़म होता, तो क्या ग़म था यहां तो बेचने वालों ने , गुलशन ही बेच डाला है
नशेमन -घर / घोंसला , गुलशन -बाग़
--बेकल उत्साही

बफ़ैज़े -मसलेहत, ऐसा भी होता है ज़माने में
कि रहज़न को अमीरे -कारवां कहना पड़ता है
बफ़ैज़े -मसलेहत-दुनियादारी के कारण , अमीरे -कारवां-लीडर
--जगन्नाथ आज़ाद
ये इन्क़िलाबे -दौरे -ज़माना तो देखिये
मंज़िल पे वो पहुंचे, जो शरीके-सफ़र न थे
इन्क़िलाबे-दौरे-ज़माना =समय की विडम्बना
शरीके -सफ़र= सफ़र में शामिल
--जोश मलिहाबादी
जितना मल्लाह का डर है मुझको
उतना तूफ़ान का डर नहीं है
मल्लाह==खेवनहार /अगुआकार
--ज़फ़र इक़बाल
रोने वालों की हंसी को, पहले वापस लाइये
शौक़ से फिर जश्ने -आज़ादी मनाते जाइये
--अर्श मलसियानी

अब बर्क़ , नशेमन को मेरे फूंक दे , लेकिन
गुलशन की तबाही मुझे मंज़ूर नहीं है
बर्क़ -बिजली , नशेमन-घर ,घोंसला
--हफ़ीज़ जालंधरी
न मंदिर से रग़बत , न मस्जिद से उलफ़त
इबादत की बातें हैं , सियासत की बातें
रग़बत-लगाव , उलफ़त -प्रेम
--रईस सिद्दीक़ी

Shahnaz Husain unveiled La Fiesta Magazine 2016 CalendarNew Delhi


India beauty icon Ms Shahnaz Husain unveiled La Fiesta Magazine 2016 Calendar. In picture (from left to right) : Designer Shilpa Raina, Shahnaz Husain and Amit Kumar, Chief Editor La Fiesta Magazine in new delhi

Sunday, December 27, 2015

Fancy Dress Competition organized by Mother's Pride


Mother's Pride Vivek Vihar, the most loved pre-school of Delhi NCR organised a Fancy Dress Competition as part of their stage exposure activity. The idea behind the entire event was to enhance the confidence and give the students of age 2-3 yrs an exposure to the stage and help them face the world confidently. 

The students were dressed up as various characters like Barbie doll, Dinosaur and shape fairy; various social affairs like beti bachao beti padhao, blood donation, dengue, save earth and many more were taken up by these little wonders which played a major role in sensitizing the adults.

Mother's Pride offers its children a conducive environment to develop their social, emotional and cognitive aspects of personality. It also provide its children with a congenial atmosphere to uncover and polish their hidden talent.Children get the opportunity to overcome their social fears and become more confident and independent to face the world ahead of them.

Overall, it was a great event wherein children enjoyed thoroughly and created magic all around. The parents were mesmerized seeing their young ones performing with full zeal and enthusiasm.
Photo by Arpit and Seema Gupta

डब्ल्यूआईएफ़एस जागरूकता अभियान का शुभारंभ

प्रेमबाबू शर्मा​

श्री जे पी नड्डा, माननीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा, "यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि युवा ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ा जाए। और इसे केवल तभी हासिल किया जा सकता है जब किशोरों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से देश के भविष्य के लिए अच्छी तरह से तैयार किया जाए।" उन्होंने यह बात स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) कार्यक्रम के तहत साप्ताहिक आयरन और फोलिक एसिड कार्यक्रम (डब्ल्यूआईएफ़एस) के मीडिया अभियान के शुभारंभ के अवसर पर कही। उन्होंने यह भी कहा कि हर सप्ताह लाखों किशोरों में से प्रत्येक को एक आइएफ़ए टैबलेट प्रदान करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।

राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ठोस कार्रवाई किए जाने वाले प्राथमिक क्षेत्रों में से एक किशोरों के बीच पोषण है। मंत्री ने कहा कि हमारा मंत्रालय इस कार्यक्रम के तहत प्रदान की जाने वाली सेवाओं को लगातार मजबूत बना रहा है और समुदायों अर्थात मातापिता, अध्यापक और किशोर उम्र वालों को समर्थन प्रदान कर रहा है क्योंकि खून की कमी यानी एनीमिया को हराने के लिए इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उक्त समारोह में यूनिसेफ़ की सद्भावना राजदूत सुश्री प्रियंका चोपड़ा भी मौजूद थी जो हर सप्ताह एक आइएफ़ए टैबलेट लेने के लिए किशोर उम्र वालों को प्रोत्साहित करने के द्वारा डब्ल्यूआईएफ़एस अभियान का समर्थन कर रही हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सुश्री प्रियंका चोपड़ा द्वारा मीडिया अभियान के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़ने से इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जागरुकता पैदा करने में मदद मिलेगी।

अपना अनुभव साझा करते हुए सुश्री प्रियंका चोपड़ा ने कहा कि हर सप्ताह आयरन की गोली लेने की वजह से मेरा स्वास्थ्य बेहतर बना और उसके ही प्रभाव से आज भी सेहतमंद हूं। उन्होंने आगे कहा, "मुझे यकीन है कि हम अपने ठोस प्रयासों के माध्यम से किशोरों के बीच खून की कमी यानी एनीमिया की व्यापकता को कम करने में सक्षम होंगे।"

व्यक्ति के आहार में आइएफए के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री बीपी शर्मा, सचिव (स्वास्थ्य) ने कहा, "आयरन के साथ भोजन की पूरकता के लिए मंत्रालय द्वारा अन्य विभागों के साथ साझेदारी की जा रही है।" उन्होंने आगे कहा कि एनीमिया के बारे में किशोरों के बीच जागरूकता कम है और मीडिया उनके बीच स्वास्थ्य का संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

श्री लुई जार्ज आर्सेनॉल्ट, भारत में यूनिसेफ़ के प्रतिनिधि ने डब्ल्यूआईएफ़एस कार्यक्रम की सराहना की और आसान और कुशल पोषण द्वारा "जागरूकता" और "रोकथाम" के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किशोरों के बीच एनीमिया के बारे में जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया।

डब्ल्यूआईएफ़एस कार्यक्रम को स्कूल जाने वाले किशोर लड़कों और लड़कियों के बीच शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है; इसके अलावा, स्कूल नहीं जाने वाली या छोड़ देने वाली लड़कियों (विवाहित और अविवाहित दोनों) के लिए भी इसे लागू किया जा रहा है। डब्ल्यूआईएफ़एस रणनीति में, डब्ल्यूआईएफ़एस के वितरण के लिए एक "निश्चित दिन'' दृष्टिकोण को शामिल किया गया है। यह अनुशंसा की गई है कि सोमवार के दिन सभी स्कूल इस कार्यक्रम का आयोजन करेंगे, और अनुपस्थित छात्रों के किसी और दिन को निर्धारित किया जा सकता है। आइएफए सप्लिमेंटेशन उच्च अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, आइएफए गोलियों के पर्यवेक्षित उपभोग अनुशंसा की गई है। यह कार्यक्रम किशोरों और सामुदायिक सदस्यों के बीच डब्ल्यूआईएफ़एस के महत्व को बढ़ाने के लिए फ़्रंटलाइन कार्यकर्ताओं जैसे कि एडब्ल्यूडब्ल्यू,आशा और अध्यापकों द्वारा आइएफ़ए गोलियों के उपभोग को भी प्रोत्साहित और प्रदान करता है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड पूरकता कार्यक्रम के लिए नोडल मंत्रालय है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय आइएफ़ए सप्लिमेंट और डीवर्मिंग टैबलेट की आपूर्ति के लिए संसाधनों के आवंटनों, जागरुकता के लिए संसाधन सामग्री विकसित करने, निगरानी तंत्र स्थापित करने और कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करने सहित नीति निर्माण, तकनीकी समर्थन, डब्ल्यूआईएफ़एस कार्यक्रम की वार्षिक योजना के लिए जिम्मेदार है।

किशोरों के लिए डब्ल्यूआईएफ़एस कार्यक्रम के तहत, लक्षित समूहों को आइएफए की खुराक साप्ताहिक आधार पर निःशुल्क वितरित की जाती है। आइएफए की खुराक के अलावा, उसी लक्षित समूह को डीवर्मिंग के लिए अल्बेन्डेज़ोल की गोलियां वर्ष में दो बार प्रदान की जाती हैं।

इस अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्ति थे- डॉ. (प्रोफेसर) जगदीश प्रसाद, डीजीएचएस, श्री सी.के. मिश्रा, एएस एंड एमडी (एनएचएम), के बी अग्रवाल, अपर सचिव, और डॉ. राकेश कुमार, संयुक्त सचिव (आरसीएच, आईईसी)।

अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म में नज़र आएँगी तापसी पन्नू

प्रेमबाबू शर्मा​

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ की चाहत हर नए पुराने कालकार , निर्माताओं निर्देशकों में रहती है। वहीँ अमिताभ बच्चन भी नए कलकारों साथ काम करने को उत्सुकः रहते हैं। खबर यह है की तापसी पन्नू को अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिल गया है जिन्होंने फिल्म अक्षय कुमार की फिल्म 'बेबी' में छोटा ही सही लेकिन दमदार किरदार निभाया था।

इस फिल्म में तापसी एक स्वतंत्र ख्यालों में रहने वाली युवा लड़की का किरदार निभाने वाली हैं। निर्देशक सुजीत सरकार अमिताभ के साथ सोशल सोशल थ्रिलर फिल्म बनाने जा रहे हैं उसमे तीन अदाकाराएं होंगी जिनमें से तापसी पहली अदाकारा के रूप में चुन लिया गया है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बंगाली फिल्म निर्माता अनिरुद्ध रॉय चौधरी की बॉलीवुड में बतौर निर्देशक पहली फिल्म होगी। हालांकि फिल्म का टाइटल अब तक तय नहीं किया गया है। फिल्म पूरी तरह दिल्ली में शूट की जाने वाली है जिसकी शूटिंग अगले साल के फरवरी महीने में शुरू होगी।

शूजित सरकार से जुड़े सूत्र ने फिल्म में तापसी की एंट्री को कंफर्म करते हुए बताया है 'तापसी ने फिल्म के लिए एक महीने पहले ही हामी भर दी थी लेकिन तापसी ने अबतक इस फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं पढ़ी है। फिल्म में मिले अपने किरदार को पाकर तापसी काफी खुश हैं। अमिताभ बच्चन ने तो फिल्म का सब्जेक्ट देखकर पहली ही हामी भर दी थी। अनिरुद्ध इस फिल्म के स्क्रिप्ट पर पिछले ढाई साल से काम कर रहे हैं और उन्हें अब भी 2 अदाकाराओं तलाश है।

Stop Spreading Wrong Information !

R.D. Bhardwaj “Noorpuri”

Modern age is the age of science and high speed technology which is making fast paces in almost every sphere of life. You simply can’t imagine a field where computer technology is not carving a niche. These days, there is a mobile application called WhatsApp which is being extensively used to exchange interesting / informative and many other sorts of messages aimed at infotainment and also for marketing some goods and services. The messages are made in text form, audio and video etc. It is also a matter of concern that people often exchange such audio / video and text message without verifying correctness / factual position of such messages. It is also observed that sometimes, such messages are composed to boost somebody’s lost / bad image and sometimes, it is also aimed at spreading wrong information about some great personality or an event or incidence. That is why sometimes, we receive some messages which malign some great person based on concocted information. A few days ago, I received a small video which is aimed at providing some information on two famous personalities i.e. about Dr. B.R. Ambedkar and Jawahar Lal Nehru.

About Dr. Ambedkar, this message say that he was not Ambedkar, rather he was a Mahar. This video further says that Ambedkar was the name of his Brahmin teacher who advised Dr. Ambedkar to add this surname to his name in case he wants to study. This is totally wrong and malicious campaign aimed at maligning Dr. Ambedkar. No doubt, Dr. Ambedkar was a Mahar by caste, but Ambedkar was his Gotra and in our country, it is a tradition or a custom to add name of your Gotra or caste or some other surname to your name. His father was Ramji Malo ji Ambedkar and he was serving as Subedar in Mahar regiment (Indian Army). It is also not correct to believe that Dr. Ambedkar could have adopted the surname of a Brahmin teacher, as he was a constant victim of caste system and often totally against it. It is also pertinent to mention here that it were primarily Brahmins who opposed him vehemently asserting that Dalits don’t have the right to education. And it was also with great difficulty that Dr. Ambedkar admitted in school and that too, with so many conditions which were not applicable to the upper caste students. Many a time he had to suffer a lot due to this totally bad and malicious caste system which is totally based on wrong footings, as it supports some sections of society to make big progress and prosperity, but at the same time, puts a lot of hindrances in the ways of other poorer sections of society called Scheduled castes and scheduled tribes. Initially, it also did not give Dalits the right to education and right to property as well. In fact, they were made totally subservient to all other three castes of society with the sole purpose and intention of blocking their ways to rise in life and thereby make progress and prosperity.

Then how could Dr. Ambedkar have adopted the surname of some Brahmin? It is certainly unbelievable to think such a scenario taking place. Even though he was born in a low caste family, but by the virtue of his hard work, perseverance, and struggle made throughout his life, he got himself hugely educated and he remained a brilliant student throughout his life. He was one of the seven most well-read and hugely qualified personalities of the world of his times. No other leader of India was as highly qualified as Dr. Ambedkar was MA (Economics), Ph.D., Bar at Law, M.Sc., D.Sc., L.L.D., D.Litt. (Osmania University). Doctor of Law Barrister-at-Law (Gray's Inn, London), Highest law qualification in England at that time) and he often used to say that “education is longer than life.” Dr. Ambedkar who fought for civil rights struggle for abolishing caste system and declaring untouchability a crime, and it was sheerly by the virtue of high academic and scholastic qualifications that he was selected and made Chairman of the Constitution Drafting Committee (CDC). As the caste system was so deeply rooted in our society at that time and many other members of this committee did not want to work under the Chairmanship of Dr. Ambedkar, they told the then Prime Minister either to change the chairman of this committee or they intend to resign; as they were not feeling comfortable working under Dr. Ambedkar. As there was no other such a highly qualified and capable leader to shoulder such a gigantic responsibility of drafting the constitution for a country (which was diverse in many manners), and many such upper caste leaders and members of the CDC resigned.

It is not that such deep rooted prejudices and wrong notions based on caste, colour creed, gender, religion and region are prevalent in Indian society only, they often used to surface in other advanced countries as well. Recently, when Barack Obama was elected president of USA around six years ago, even he had to face stiff competition due to his black colour. Not only during his campaigning alone, people insulted him even after he was elected and took over as 44th President of USA. One such incidence was reported in newspapers just after three/four months of his taking over the charge as president of USA. The report goes like this – that an English white man was travelling in an aeroplane and a young girl in the age of around 14 or 15 was sitting in the seat next to him. Just out of curiosity, the white man who was having some notions about his superiority over the people of other castes, creed and colour, started a conversation with the black girl and he said, “Hallow ! I am so and so and working in a big company as its Vice President, can we talk for a while………” The black girl responded with humility and said, “Yes please, you may go ahead ….” Initially the white man asked some preliminary questions to that girl asking about her name, class in which she studies, her hobbies and interests etc. but suddenly he posed a serious question to her and that too in a derogatory manner. He said, “You know, Barack Obama has become president of USA, the biggest and most powerful nation of the world, but don’t you think that he is not capable of becoming president of USA?”

The young girl was really surprised and she replied, “Please note that Mr. Obama has been elected president of USA under the well-defined process of law and he has not been nominated.“ But the Whiteman again posed a teasing question, “I know that, but lakhs of the people feel that a black man should not be chosen or elected president of the most powerful country………..” This made the black girl somewhat offended and she put a counter question to him, “Why, perhaps you are not aware that there is a constitutional process to elect a leader to steer the country as it president, and Mr. Obama has been duly elected president through that process and the entire world is witness to it….. and nobody should have any grudge after that.” However, the Whiteman again hurled another query, “Even then, a black man is after all, a black man, he or she is simply not that much capable of running the country as big as America. Black people lack intelligence of that level………” On hearing his comments on intelligence of black people, the young girl really got furious and she said, “You think, only white people are intelligent or wise and shrewd enough to run a big country as USA, perhaps you are not aware that God has made all people equal, to discriminate some person on basis of his caste, colour, creed, sex, religion or region, is really bad and if someone still boasts of his intelligence by the virtue of his white or fair skin only, he is very badly prejudiced and he lacks intelligence of justice and rationality. By the way, in case you feel that only white people are more intelligent, can you answer my simple question?” The big Whiteman was quite snobbish / proud of his colour and the high post he was holding in a big company, crossed the age of fifty, whereas, this little girls is barely 14 or 15, and thus, she may not be able to pose him some difficult question, and thus, he said, “Yes, you may ask me any question which is lurking on in your mind………”

The black girl thought for a while and then asked him, “You might be knowing well that cow, horse, goat, elephant, camel, deer, hare, rabbit and buffalo etc., all these animals eat grass, big or small, some sort of vegetation only, but why do shit differently, I mean ….. cows and buffaloes excrete flat shit, horses’ and elephants’ shit is big dry pellets. While goat and sheep shits are small dry pellets, and still some small animals like hare and rabbit etc. whose shits are smaller pellets whereas, some other animals shits are big dry pellets…….. tell me - why it is so?” Now the Whiteman was really puzzled and bamboozled, he was really perplexed to hear such a troubling question from a small school girl whom he had presumed to be half-dumb? As he was trying to rummage his brain to answer that question, the black girl put another question to him, “Can you tell me as to why some animals like hare, rabbit, sheep and goat excrete round shaped small pellets, while wombats excrete square shaped pellets? And mind it, don’t talk to me unless you have some satisfactory answers to my questions. And Whiteman was simply speechless, displayed a blank face, as was simply not aware of what to say what to avoid. For the rest of the journey, the white man just shamefully kept clinging to his seat and yearning to end his journey.

Here, I am reminded of another incidence which occurred to the world famous heavy weight boxer, Muhammed Ali. Like Dr. B.R. Ambedkar here in India, Mohammed Ali too faced many incidents of discrimination, mental agony and exploitation which primarily came over his life due to his black colour. Muhammad Ali was born in a Christian family as Cassius Clay in Kentucky, USA, in 1942. But due to his black skin he was being not looked upon nicely and he faced many upheavals in his life. The white people often posed their so called superiority over him and caused him a lot of mental agony and tension. Fed up the constant nagging and bad behaviour in society, he too decided to convert to Islam and thus, became Muhammad Ali. As he was very health conscious and a fitness freak, he developed fondness for boxing and became Olympic gold medalist in 1960 and the world heavyweight boxing champion in 1964. His great height of 6’3” was an added advantage to him. He visited many countries and won so many boxing titles and championships. During the course of sports events, he won many rewards, trophies and name, fame and the goddess of wealth also showered her blessings on him; nevertheless, freak incidents of discrimination due to his black colour did not end even then.

Once, there was a merry occasion in his family (his marriage anniversary) and his kids wanted him to take them to some big hotel and have a sumptuous dinner there. He tried to persuade his children that he will go to market and bring for them whatever they wanted to eat, they will cook the same at home and the entire family can relish good food, but his children just did not listen to his pleadings. They wanted a good treat in a big hotel. At last, they went to big hotel and as they sat down around a table hoping that some attendant will come to them to take their food order, instead, but contrary to their expectations, many people present there started looking at them in a weird manner. Then Muhammad Ali gestured to an attendant of the hotel to come to their table, that person informed him that no food shall be served to them, as only white people are welcome there. Muhammad Ali tried to reason with him that hotels are meant for eating out and any person can go there so as long as he has money in his pocket to pay the bill. But the manager of the hotel who was also standing nearby, remarked, “If some dog becomes rich, it does not mean that he has become equal to a horse.” The language of the manager was already rude, and he again shouted at Muhammad Ali by saying, “Moreover, mind it Mr. Ali ! Dogs and blacks are not allowed there.” The derogatory remarks of the manager of the hotel infuriated the boxing champion and thus, from hot words, they started blows and beating each other.

Soon, the hotel authorities called the police and charged Muhammed Ali of beating them and causing some damage to the hotel property. The police arrived within a short while and enquired about the whole incidence. On persistent demand of the hotel people, the Police arrested Muhammad Ali and took him to police station. When Mr. Ali explained the real reason of the fight, i.e. refusal of the attendant to serve food to them and also insulting them by calling them names on basis of his caste and colour etc., which was also legally banned there, he was let off with a warning that he can’t compel hotel people to serve them food or anything else, in case they don’t want to.

Happy Birthday- Salman Khan


Saturday, December 26, 2015

CHRISTMAS AND ‘WORLD BROTHERHOOD DAY’ CELEBRATED BY WBO


PremBabu Sharma

World Brotherhood Organisation is an international, voluntary, non-political, non-profitable organisation dedicated to promote religious harmony, world Peace and universal brotherhood by spreading love, cooperation and brotherhood amongst different religions throughout the world. To achieve the above objectives `World Brotherhood Organisation` was formed in 1999 by Late SardarRaunaq Singh. The unique approach of WBO underlines the noble thought of `Sarva-Dharma-Sambhava` i.e. the equality of all religions and feeling of respect for all, `Anekta Mein Ekta` (unity in Diversity).

2015 was full of various charitable activities organized by WBO. Mass Marriage Reception was arranged, in which marriage of poor girls of different religions was organized and various household items were given to enable them to start their new life. Blood Donation Camps, camp for distributing clothing to needy people was also part of our activities.From this year, 2015.We have also started giving scholarship to poor & needy college students. WBO is striving to spread its wings in U.K., U.S.A., Canada andin other parts of the Country.

The celebration of World Brotherhood Day, Christmas Day & New Year is the most important function of our Organization, which was celebrated on 20th December, 2015 at Marwah Lotto Farm, DeraMandi Village, Near Chhattarpur Temple, Chhattarpur, New Delhi. 

This was a day picnic in which Ambassadors and High Commissioners of various countries, including Ms.Jana Travvnickova & Mr. Otto Traynicek from Embassy of Czech Republic representatives from Palestine Embassy, Ms.Fozia Fayyaz from Pakistan, Actors Zubair Sanam Khan and AmitaNangia along with other distinguished guests, bureaucrats joined. A Tug of War between Indian and Foreigners wasthe highlight of the programme, besides Cultural Program, Fancy Dress/Painting Competition Tambola etc.

झूमका गिरा रे बरेली के बाजार में कहने वाली साधना चली गईं


प्रेमबाबू शर्मा

अजी रूठ कर अब कहां जाईयेगा.....झूमका गिरा रे बरेली के बाजार में कहने वाली अभिनेत्री साधना शिवदासानी अब नहीं रही! उनकी उम्र 73 साल थी। मुँह के कैंसर के बाद से वे काफी दिनों से बीमार थीं। उनकी कैंसर सर्जरी भी हुई थी। साधना शिवदासानी ने साठ और सत्तर के दशक कई फिल्‍मों में काम किया। साधना ने अपने करियर की शुरुआत 15 साल की उम्र में 1955 में आई राज कपूर की फिल्‍म ‘श्री420’ से की थी। इसके बाद उन्‍होंने आरजू, वो कौन थी, मेरे मेहबूब, असली-नकली, हम दोनों, मेरा साया, एक फूल दो माली, लव इन शिमला, वो कौन थी और ‘वक्‍त’ समेत करीब 35 फिल्मों में काम किया। करीना कपूर की मां और बीते ज़माने की अदाकारा बबिता साधना की चचेरी बहन हैं।
2 सितंबर 1941 को कराची में जन्मी साधना ने मशहूर निर्देशक आर के नैयर से शादी की थी। बोलती सी आँखों वाली साधना को हिंदी फ़िल्मी दुनिया की पहली ‘फैशन आईकन’ माना जाता है। अपनी ख़ास अदा से अपने चाहने वालों को उन्होंने दीवाना बना दिया था। उनका हेयर स्टाइल भी उस ज़माने में खासा लोकप्रिय हुआ था, जो ‘साधना कट’ के नाम से मशहूर हुआ। उस दौर में फैशनेबल महिलाओं में ‘साधना कट’ बालों की जबरदस्त धूम रही। उनके हेयरस्टाइल के पीछे भी एक रोचक कहानी है। साधना सिंधी थिएटर में काफी बढ़ चढ़कर भाग लेती थी।
1958 में उनका चयन एक ऑडिशन के जरिए उस वक्त की मशहूर सिंधी अभिनेत्री शीला रमानी की छोटी बहन के लिए किया गया। इस सिंधी फिल्म का नाम ‘अबाना’ था जो सुपरहिट रही और इसके बाद ही हिंदी सिनेमा के दरवाज़े उनके लिए खुल गए। इस वक्त साधना की उम्र 16 साल भी नहीं थी जब निर्माता-निर्देशक शशधर मुखर्जी ने उन्हें ‘लव इन शिमला’ के लिए साइन किया और उनके लुक को थोड़ा बदलने के लिए साधना को ब्यूटी पार्लर ले जाया गया। निर्देशक आरके नारायण चाहते थे कि साधना का चौड़ा माथा थोड़ा सा ढंक जाए! इसलिए उन्होंने हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और ‘ब्रेकफास्ट एट टिफनी’ की नायिका ऑड्रे हेपबर्न का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनके माथे पर जिस तरह फ्रिंज हैं, वैसी ही कुछ लटें इनके माथे पर भी ला दो। क्योंकि, साधना को ‘ऑड्रे’ के बारे जानकारी नहीं थी! किसी के पूछने पर उन्होंने कहा कि ये ‘साधना कट’ है। इस तरह पूरे देश में ‘साधना कट’ की दिवानगी शुरू हो गई।

Indian Prime Minister’s surprise visit to Pakistan

MADHU AGRAWAL
Guinness Record Holder for letters in Newspapers

Indian Prime Minister Narender Modi has surprised all through his diplomatic master-stroke when he made a surprise and unplanned visit to Lahore (Pakistan) on his way-back to India on 25.12.2015 from his tour to Russia and Afghanistan. At a time when countries like US always seem to be pressurising India and Pakistan for stepping further-and-further for ‘normalcy’, it was indeed a big jump by Indian Prime Minister rather than taking small-small steps as desired by global hyper-power.

There was a time when India had a welcome tradition of political unanimity at least on foreign affairs. Congress Prime Minister PV Narsimharao once even entrusted the then Opposition Leader Atal Bihari Vajpayee to head an Indian delegation at important UN Human Rights Commission Conference at Geneva in the year 1993. But unfortunately the very same Congress is now doubting Narender Modi’s surprise visit to Lahore having been arranged by an Indian industrialist close to Pakistani Prime Minister Nawaj Shariff.

However surprise Lahore-visit by Indian Prime Minister Narender Modi should be the very final Indian step towards normalcy with Pakistan, and no further action towards ‘normalcy’ with Pakistan should be there on part of India till Pakistan now hands over Hafiz Saeed and Dawood Ibrahim to India.

मीनाक्षी परिवार ने मनाया गरीब बच्चों के साथ क्रिशमिस डे


अशोक कुमार निर्भय

दिल्ली के शकूर बस्ती स्लम इलाके में ठण्ड और गरीबी से जूझते बच्चों के मुह पर उस वक्त मुस्कुराहट आ गई जब हर वर्ष की ही तरह मीनाक्षी मल्होत्रा अपने हाथो में उनके लिए गिफ्ट और क्रिशमिस केक लेकर उनके घरो में पहुची। मीनाक्षी मल्होत्रा गैर सरकारी संघठन मीनाक्षी परिवार चलाती है और पिछले पांच वर्ष से वह इन झुग्गिओ के बच्चों के बीच खुशिया बाँट रही है ।इन्हें इसी में सकून मिलता है जहाँ लोग अपने घरो में त्यौहारो में मग्न होते है वही मीनाक्षी मल्होत्रा को इन बच्चों की याद यहाँ खीच लाती है और वह दीवाली ,होली,ईद,या क्रिशमिस कोई भी मोका नहीं छोड़ती इन बच्चों के बीच रहकर खुशिया बाटने और खुद खुश रहना का. इस बार भी मीनाक्षी परिवार के तले मीनाक्षी मल्होत्रा ने बच्चों के लिए डांस कम्पीटीशन और मोज मस्ती के लिए स्लम इलाके में डीजे लगवाया जिसपर बच्चों ने मनपसन्द गानो पर जमकर मोज मस्ती की वही इन बच्चों में से अच्छे प्रदर्शन के लिए कुछ को शील्ड और इनाम भी दिए गए। और कई समाज सेवियों और लोगो द्वारा इलाके के बच्चों में खाना भी वितरित किया गया इस मोके पर गरीब बच्चों के लिए सामाज सेवी अमित बूढ़ पुर अलीपुर गाँव दिल्ली से जावेद कंप्यूटर मार्किट वजीर पुर ,यश मेडिकल स्टोर, गगन बाइक पॉइंट मंगोल पूरी व् कई रोहिणी के समाज सेवको ने झुग्गियो मे बच्चों के लिए सहयोग किया और क्रिस मिस केक कटा गया।

इस मोके पर मीनाक्षी मल्होत्रा ने घर में बच्चों को काम करवाने और प्रताड़ित करने वाले शराबी और गैर जिम्मेदार लोगो से कहा की वह इस बात का कड़ा विरोध करती है।उन्होंने कहाँ की बच्चों से उनका बचपन न छीने खासकर लड़कियो पर होते अत्याचारो की भी उन्होंने जमकर भृत्ष्णा की और कहा की अगर उनके पास अगर कोई शिकायत आई तो वह पूरी तरह से कार्यवाही करवाएगी ताकि बच्चों का जीवन बर्बाद न हो क्योंकि वैसे ही यह अभावो में जीते है उसपर परिवार की डांट फटकार यह बच्चे इस देश का भविष्य है इन्हें खुश रहने दे और इनकी प्रतिभा को निखरने दे सरकार ने कई योजना बनाई है उनका भी लाभ उठाए और शिक्षा की और उन्हें आगे जाने दे।क्योंकि यही तो देश का सुनेहरा कल है जिसे आज ही सुरक्षित करना जरुरी है।और आप और हम जब मिलकर करेगे तो जरूर एक सभ्य शिक्षित समाज निर्माण हो सकेगा।

Friday, December 25, 2015

युवाओं को कौशल विकास के लिए किया जाएगा जागरूक


प्रेमबाबू शर्मा​

युवाओं का कौशल विकास कर उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर देने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा चलाए गए कौशल विकास योजनाओं को प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके तहत देशभर में अभियान चलाकर उन योजनाओं की जानकारी युवाओं तक पहुंचाई जाएगी। इस बारे में मोदी यंग इंडिया के अध्यक्ष ठाकुर धर्मवीर सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री ने युवाओं के विकास के लिए जिन योजनाओं को शुरू किया है उसके बारे में अधिकतर युवाओं के पास जानकारी ही नहीं है। पिछले कुछ समय से इस योजना के तहत हजारों लोगों को जोड़ा गया हैं। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि युवाओं में कौशल विकास किया जाए। 

इसके तहत 10वीं-12वीं पास युवाओं को विशेष कोर्स करवाएं जाएंगे। जिससे उनके काम करने के पुराने ढंग में सुधार हो सके और वह स्वयं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सके और दूसरे को भी रोजगार दें। वहीं इस मौके पर संस्था के संरक्षक एल के लक्की ने कहा कि देश में अभी तक डेढ़ लाख युवाओं को जोड़ा जा चुका है। हमारी कोशिश है कि यह संख्या और बढ़ाई जाए। इसकी शुरूआत दिल्ली से की जाएगी। इस मौके पर मनोज कुमार व राजू चंदेल ने कहा कि पीएम द्वारा शुरू की गई कौशल विकास योजना से युवाओं को नई गति मिलेगी। संस्था की राष्टï्रीय महिला अध्यक्ष रश्मी मजूमदार ने कहा की संस्था द्वारा किया जा रहा कार्य युवाओं की तरक्की का द्वार खोलेगा।

Shahnaz Husain in Siri Fort Auditorium in New Delhi

Rajah Muzaffar Ali Indian filmmaker, a fashion designer, with Mrs Shahnaz Husain beauty icon
and her daughter Nelofar Currimbhoy in a function in Siri Fort Auditorium in New Delhi

Happy Birthday- Nagma


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