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Sunday, May 26, 2013

मुकेश, रफी, किशोर, लता व आशा की सुरीली आवाज गूँज उठी


द्वारका कला संगम की तीसरी वर्षगाँठ के अवसर पर, हिमालया अपार्टमेंट, सैक्टर-22 में “दिल ने फिर याद किया” नामक रंगारंग कार्यक्रम आयोजित हुआ। म्यूज़िकल कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग बीसगायक/ गायिकाओं ने मुकेश, रफी, किशोर, लता व आशा की सुरीली आवाज में हिन्दी फिल्मी गीतों की मानो जैसे झड़ी से ही लगा दी।

इस महफिल को खुशगँवार बनाने में संस्था के अध्यक्ष कर्नल राम रंग अनेजा ने “ऐ दिल अब कहीं ना जा”, श्रीमति प्रोमिला मलिक व दीपक मलिक ने “अँखियों के झरोखों से” व “ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी ये बरसात की रात”, सुश्री नित्या स्वरूप ने “मेरा नाम चिन-चिन चूँ”, संस्था के महासचिव श्री प्रताप धुनटा ने “चाँद सी मेहबूबा हो मेरी”, सुश्री कमलेश सोनी ने “ना मिलता गम तो बर्बादी के”, सुश्री अनुसूया दुबे ने “दिल में आना रे”, श्री प्रदीप शर्मा ने“हमने तुमको प्यार किया है इतना, कौन करेगा इतना”, श्री दलीप खन्ना ने “दोस्त-दोस्त ना रहा, प्यार-प्यार ना रहा”, “पुकारता चला हूँ मैं, गली-गली बहार की” श्री आर. के. जैन ने “दिल लगा कर हम ये समझे, ज़िंदगी क्या चीज है”, श्री वेंकट ने “बंदा परवर, थाम लो जिगर” व “लाखों हैं निगाह में, ज़िंदगी की राह में”, श्री सुभाष चन्द्रा सरीन ने “दिल का भँवर करे पुकार, प्यार का राग सुनो, प्यार का राग सुनो रे, हूँ ...हूँ”, “याद ना जाए बीते दिनों की”, सुश्री आशा वार्श्नेय व श्री दुर्गेश ने “अहसान तेरा होगा मुझ पर”, श्रीमति परमिंदर चड्ढा ने “सब कुछ लूटा के होश में आए तो क्या हुआ”, श्री रमेश व सुश्री शोभा भटनागर ने “आपकी नजरों ने समझा, प्यार के काबिल मुझे”, श्री तेजसिंह ने “वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है, वो कल भी आसपास थी, वो आज भी करीब है”, श्री अशोक कामरा ने “जीवन से भरी तेरी आंखे, मजबूर करें जीने के लिए, सागर भी तरसते रहते हैं तेरे रूप का रस पीने के लिए”, सुश्री संगीता महेश्वरी ने “झुमका गिरा रे, बरेली की बारात में” तथा अंत में “चलते-चलते मेरे ये गीत याद रखना, कभी अलविदा ना कहना- कभी अलविदा ना कहना” गीतों भरी महफिल में मशहूर गायक मुकेश,रफी, किशोर, लता व आशा की सुरीली आवाज गूँज उठी।

 मंच संचालन डॉक्टर शील धुनटा ने किया। इस रंगीन गीतों भरी शाम में सैंकड़ों संगीत प्रेमियों ने शिरकत की।

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