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Thursday, November 24, 2011

इन्सान की अनुभूति किसी भी कला की जन्मदाता है।


 प्रेमबाबू शर्मा 

प्रेम एक ऐसा कांटा है जिसमे पराया दर्द ही मिलता है, पर जब यह मिलता है तो इससे फूलो की खुशबू झरती है। यह कविता नही, चित्रो के कुछ नमूने है, जिन्हे अपनी कल्पना और रंगो के माध्यम से कलाकार विजेन्द्र शर्मा ने कैनवास पर उकेरा है। जिनकी उंगलियों में कमाल का जादू है, जब वे रंग और बर्श से कैनवास पर चित्र उकेरते है तो उसमें पूरी तरह डूब जाते है। यही वजह है की उनकी कृति वास्तविकता के काफी करीब और संजीव प्रतीत होती है। विजेन्द्र शर्मा कैनवास पर जीवन, मृत्यु, सधंर्ष, अध्यात्म और प्रकृति को ही चित्रित नही करते, बल्कि सामाजिक कुरीतियो और भष्ट्राचार को उकेर कर सामाजिक दायित्व का भी निर्वाह करते है, इनकी कला के प्रशंसको में बिरला अम्बानी ग्रुप, अभिनेता अमिताभ बच्चन के अलावा भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा0 ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्रमुख है, डा.कलाम जब भारत के राष्ट्रपति थे तब इन्होने अपना स्वंय का पोट्रेट विजेन्द्र शर्मा से बनवाया था।

दिल्ली में जन्मे और दिल्ली कालेज आफ आर्टस से स्नातक और गोल्ड मेडलिस्ट विजेन्द्र के लिए यह गौरव की बात है। विजेन्द्र कहते है कि यहाँ तक पहुचने के लिए मुझे बहुत संधर्ष करना पड़ा, शुरुआत में किताबों आदि का कवर डिजाईन किया उसके बाद महाभारत, रामायण, विक्रम बेताल जैसे चर्चित सीरियल के लिए पेटिंग बनाई, विजेन्द्र की पहली एकल प्रदर्शनी दिल्ली की श्रीधारणी आर्ट गैलरी में लगी। इसके बाद इन्होनें कभी पीछे मुड़कर नही देखा। देश और विदेशो में कई शोज हो चुके है। इस कला यात्रा के दौरान उन्हे कई पुरस्कार और सम्मानो के नवाजा गया जिसमे साहित्य कला परिषद सम्मान, आल इण्डिया पुलिस मीट सम्मान, पं0 रविशंकर अवार्ड आदि प्रमुख है। कलाकार विजेन्द्र शर्मा का मानना है कि इन्सान की अनुभूति किसी भी कला की जन्मदाता है। चित्रकला के माध्यम से इन्सान अपनी सवेदंनाओ की अभिव्यक्ति करता है, दिल्ली में जल्द ही प्रदर्शित होने वाली इस प्रदर्शनी में कलाकार विजेन्द्र शर्मा ने अपने देश के समाज और अध्यात्म को प्रभावशाली विषय बनाकर कैनवास पर विभिन्न रंगो से आकार देने की कोशिश की है

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