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Friday, October 28, 2011

माता अंजना का पुत्र हनुमान से वियोग...!!`



प्रेमबाबू

सहारावन पर प्रसारित धारावाहिक जय जय जय बजरंग बली की वर्तमान कहानी में श्री हनुमान, बाली और तारा के साथ किष्किन्धा पहुंचते हैं और सुग्रीव को ये जानकर आश्चर्य होता है कि अंजना और केसरी के सिवाय वो तारा और बाली को अपना अभिभावक कहते हैं । इधर अंजना हनुमान के वियोग में संतप्त है ।


इस बीच सुग्रीव, बाली से हनुमान के इस प्रकार के व्यवहार पर प्रश्न करते हैं उन्हें हनुमान की शपथ और अभिशाप के विषय में जानकर आश्चर्य होता है । इस बीच रावण अपनी मॉं कैकयी से जानने के लिए व्याकुल है कि उसकी दूसरी योजना क्या है? इस बीच रावण का प्रतिबिम्ब रावण से कहता है कि लंका में वो जब तक उपस्थित है तब तक रावण अपनी तपस्या पूरी कर सकता है । इधर शोकाकुल अंजना महल में हनुमान को इधर उधर ढूंढती हैं, इस पर केसरी और कुंजर उन्हें होश दिलाते हैं कि मारूति तो किष्किन्धा में उपस्थित हैं, अंजना फूट पडती हैं । किष्किन्धा के लोग ये जानते हैं कि किस प्रकार हनुमान अपने माता पिता द्वारा त्याग दिये गये हैं और उस शाप की असलियत क्या है? उन्हें संदेह होता है कि हो न हो, ये केसरी की नयी चाल है जिसके द्वारा वा किष्किन्धा को हडपना चाहते हैं । हनुमान किष्किन्धा वासियों को अपनी माता की शपथ के विषय में बताते हुए दुःख का इजहार करते है और गॉंव वासियों को विश्वास दिलाते हैं कि वो अपने भविष्य के युवराज के दर्शन शीघ्र ही करेंगे। हनुमान के इस वचन को सुनकर तारा आश्चर्य चकित हो जाती है ।

क्या मॉं अंजना अपने प्रिय पुत्र हनुमान के वियोग में जीवन भर रह पायेंगी?
‘किश्किन्धा के युवराज’ को लाने का वचन हनुमान कैसे पूर्ण कर पायेंगे?

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