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Wednesday, December 1, 2010

माधुरी दीक्षित की वापिसी छोटे परदे पर

प्रेमबाबू शर्मा 

धक धक गर्ल के नाम से लोकप्रिय अभिनेत्री माधुरी दीक्षित को  फिल्म ‘तेजाब’ के बाद मे जो लोकप्रियता मिली उसके बाद तो उनका ही जलवा रहा, जबकि उस दौर मे उनके समानांतर श्रीदेवी भी थी। माधुरी दीक्षित ने राजा, अंजाम, हम आपके है कौन, लज्जा, अंजाम, पुकार, दयावान....जैसी अनेकों में अपने अभिनय के रंग बिखेरे। हिंदी फिल्मों के आकर्षक अभिनेत्रियों  में शुमार माधुरी दीक्षित को फिल्मी पृष्ठभूमि परिवार से विरासत में नही मिली, इनके बावजूद उन्होंने अपनी अभिनय प्रतिभा को निखारा-संवारा और धीरे - धीरे वे 80 और 90  के दशक की लोकप्रिय अभिनेत्रिओं की सूची में शामिल हो गई। 

युवा वर्ग की चहेती माधुरी के फिल्मी कॅरिअर  की शुरूआत फिल्म ‘अबोध’ से भले ही हुई। लेकिन इसके बाद बनी और इससे पूर्व 1985 में रीलिज अवारा बाप से माधुरी का परचम बालीवुड मे लहराया। 1986 में उनकी दो फिल्मे अबोध और स्वाति रीलिज हुई , लेकिन ये फिल्में  खास प्रभाव नही दिखा पायी। माधुरी कहती है कि ‘यह वो दौर था जब मुझे अपने टैंलेट को दिखाने के लिए फिल्मों की जरूरत थी, लेकिन बाद में लोगों ने मेरे काम को पंसद किया । किसी भी कलाकार को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए कोई मंच तो चाहिए ही था ’  मोहरा , उतर दक्षिण और हिफाजत फिल्में फले ही 87 में आयी लेकिन तब तक माधुरी का जादू लोगों में चढने लगा था।  सही मायने में 88 दौरं उनके लिए लक्की साबित हुआ, क्योंकि इस साल मे रीलिज उनकी फिल्म तेजाब की अपार लोकप्रियता और उसका गीत ‘ एक दो तीन . लोगों की पंसद बना। फिल्म माधुरी और  सह-अभिनेता अनिल कपूर के लिए अत्यंत सफल साबित हई।  जबकि इसी फिल्म से लंबे अंतराल के बाद बालीवुड में दस्तक देने वाले किरण कुमार भी लोगों की पंसद बने । तेजाब की मोहनी के किरदार में माधुरी  के अभिनय की बेहद सराहना हुई। 

माधुरी बताती है कि हर इंसान में एक दौर ऐसा आता है ज वह बुंलदियों को छूने लगता है और तेजाब के बाद तो मेरी किस्तम ही बदल गयी थी । हांलाकि इसी साल में आयी मेरी फिल्में दयावान, खतरों के खिलाडी  को भी पंसद किया । माधुरी ने तेजाब के बाद तो बहुत ही कम अवधि में अनेक फिल्मों में अपने अभिनय का परचम लहराया। अनिल कपूर, जैकी श्राप, संजय कपूर , शाहरूख खान, अक्षय कुमार जैसे सुप्रसिद्ध व सफल अभिनेताओं  के साथ उनकी भले ही जोडी बनी किन्तु अनिल कपूर के उनकी रोमांटिक जोडियां बेहद पसंद की गई। 1989 - 90 में बनी फिल्म दिल, किशन कन्हैंया, राम लखन, त्रिदेव, इज्जतदार, जीवन  एकसघर्ष, खिलाफ, महासंग्रांम, प्यार का देवता, सैलाव, थानेदार, वर्दी, इलाका, कानून अपना अपना, मुजरिम,   माधुरी के कॅरिअर  की उल्लेखनीय फिल्म रही। जिसमें उन्होंने अपने कॅरिअर  की सबसे यादगार भूमिका निभायी। देखते-ही-देखते माधुरी सफलता की बुलंदियों पर पहुंच गई। हम आपके है कौन, मृत्युदंड, पुकार में किये माधुरी के काम आज भी पंसद किया जाता है। माधुरी इस बात को स्वीकारती है मैने अपने बीस साल के करिअर में हर रंग को जीने का प्रयास किया था। वक्त बीतता गया और सन् 2000 में उभरती नयी हीरोईन और माधुरी की लगतार फलाप फिल्में आरजू, लज्जा, देवदास, गज दामिनी... के बाद से माधुरी दीक्षित की छवि धूमिल होने लगी। अपनी गिरती लोकप्रियता के मद्देनजर माधुरी चुनींदा  फिल्में ही करने लगें। बाद में विवाह कर घर बसा लिया। हालांकि विवाह के बाद उन्होने एक फिल्म आजा नच ले में काम किया लेकिन फिल्म बुरी तरह से फलाप रही । माधुरी अपनी फिल्म को अपनी बेहतरीन फिल्मों में गिनते हुए कहती है कि कहानी अच्छी दमदार रोल के बावजूद फिल्म फलाप रही का कारण उनकी समझ नही आता। लेकिन वे इस बात को जरूर स्वीकारती है कि लोगों को मेरा काम पंसद नही आया या फिर फिल्म उनके मूड की नही थी।
फिल्मी कॅरिअर  से परे माधुरी  ने छोटे पर्दे पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज करायी। सोनी चैनल के ‘कही ना कही कोई है’ धारावाहिक से भी जुडने को मौका मिला और अब एक बार फिर से सोनी टीवी के ही एक रियल्टी शो झलक दिखला जा की जज बन कर आ रही है। माधुरी अपने इस नये शो झलक से जुड स्वयं को गौरन्वित महसूस कर रही है और कहती है कि ‘उन्हें बचपन से डांस बहुत पंसद है । वह कत्थक डांसर हैं, फिल्मों का लंबा अनुभव उनके पास है इसलिए उन्हें  लगता है वह शो झलक ...के प्रतिभागियों के साथ में सही न्याय कर सकती है।  क्या आप दुबारास से फिल्मों में काम करेगी ? हाँ  , वशर्ते अच्छी कहानी और दमदार रोल हो। साथ ही सफाई देती है कि इस बीच उनको फिल्मों के प्रस्ताव तो मिले, किन्तु किन्ही कारणो से बात नही बन पायी।

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