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Thursday, May 05, 2016

Trishna Summit 2016-An Extravaganza held at N. K. Bagrodia Public School ,Dwarka


N.K.Bagrodia Public School, Dwarkahosted TrishnaSummit 2016 – A Students’ Conclave .The Annual Inter-School Fest was organized with a novel vision and perspective in a unique incarnation. It was aspectacular show held on 29thApril 2016with alot of zeal and gusto. It was celebrated withan array of activities at different levels from classes I to XII with an approach to provide a platform to students from different schoolsto showcase their acumen. The summit received an overwhelming response by the mass participation of750 students from35 prestigious schools from Dwarka as well as West Delhi .

Trishna has been an endeavour to tap the inner talents of students with a motto to cap the unhealthy cut throat competition. Trishna is a journey in the quest of knowledge for the mind and an attempt which gave a unique opportunity to students to explore their flair for creativity and innovation. The icon of Trishna is ‘Zorba -The Buddha’ whose feet are firmly rooted to ground yet whose hands can touch the stars, conveying the message ‘ Ifyou can dream it, you can do it’.

The Opening Ceremony was commenced with invocation of blessings from the Almighty and lighting of the lamp of knowledge. Theevent was inaugurated and declared open by the esteemed Chief Guest,Brigadier P.N. Ananthanarayanan ,Deputy Director General MGO Branch . The Ceremony was graced by a galaxy of luminaries includingDr. S.K. Bhattacharya, director of NKBPS group of schools , Mrs. SudhaAcharya, Principal ITL Public SchoolDwarka and Mrs. PriyankaBhatkoti , Principal Maxfort SchoolDwarka.The Head of the school Dr.(Mrs.) Rajee N Kumar greeted the distinguished Chief guest, esteemed invitees and the worthy observers of the different eventsby presenting them planktons and mementoes.

The Chief Guest addressed the gathering with his words of wisdom and complimented the entire Bagrodian fraternity for the commendable initiative. He also extended his good wishes to all the participants. This was followed by the enthralling welcome dance -Ganesh Vandana performed by the young danseuses.

The summit encompasseda gamut of activities like- Story Junction for class II , Visual Art-Traditional Rangoli Design using M-seal and waste materials for classes IV to VI, Treasure Hunt- Brain Gym for classes IX & X,Mind Sweeper for classes III to V, Math- O -Mania Quiz for classes VI to VIII,Youth Forum-A Talk Show for classes VI to X,Hindi-Ras Mudra for class VIII, Performing Arts- NukkadNatak for classes VI to VIII,Literary Conclave- English Turncoat for classes IX &X, E-nnovation for classes XI-XII , Tech C-C++ Wizard for XI & XII.The entire day was abuzz with multifarious activities garnered all praise and appreciation for theirunique concept.

The Closing Ceremony was embellished by the presence of the distinguished Guests of Honour,Shri. KishanMeena , ACPDwarka, Mr. AnandPrakash, ACPDwarka and invited guest Mrs. JayashreeNavani, Vice Principal NKBagrodia Global School . The School Principal extended her felicitations to the honourable guests in attendance. An electrifying dance performance based on Panchtatvapresented by the students added a vibrant touch to the closing ceremony. This was followed by the most exhilarating segment where the participants’ best talents were felicitated with gift hampers and certificates.

The Guests of Honourshared their views and appreciated the students for their praiseworthy efforts. The Principal also expressed her comments on Trishna Summit 2016 which turned out to be a grand success.

The summit was a unique amalgam of creativity, thinking and innovation .It established its mark in a graceful manner for providing an opportunity to the students to display their best abilities .It was culminated amidst much splendour and fanfare.

Congratulations to new RWA-CGHS-Organizations management


Kind Attn.
RWA-CGHS-Organizations Management,
Dwarka

We are updating latest information about office bearers/ management of your RWA-CGHS-Organizations in Dwarka. 

Please send the detail with photo/ group photo of your office bearers to e-mail : info@dwarkaparichay.com

You can also share problem & issues, events-celebration in your society for highlighting through Dwarka Parichay.

We wish all the best for a better future of your society.

Thanks & regards,

Dwarka Parichay Team

Happy Birthday- Mustakeem Riyaaz


मटियाला क्षेत्र की सारी कालोनियों एवं द्वारका के समस्त इलाकों का विकास होगा


आगामी 15 मई को होने वाले निगम उप चुनाव में मटियाला क्षेत्र वार्ड न. 136 के भाजपा प्रत्याशी अशोक शर्मा ने पद यात्राओं एवं जन संपर्क के दौरान स्थानीय निवासियों को सारी कालोनियों एवं द्वारका के समस्त इलाकों का विकास कराने का वादा किया. 

गौरतलब है कि इसी क्षेत्र के पूर्व विधायक राजेश गहलोत एवं पवन राठी निगम पार्षद (मधु विहार, वार्ड न. 148) ने भी अशोक शर्मा के साथ विभिन्न बी-ब्लाक, मन्साराम पार्क, सैनिक नगर ई व बी-ब्लाक, मन्साराम पार्क, आर.डी. अपार्टमेन्ट, सैक्टर-6 प्लाट न. 20, द्वारका, परिजात सोसायटी, सैक्टर-4, प्लाट न. 28, द्वारका, स्वामी दयानन्द अपार्टमेन्ट, सैक्टर-6, प्लाट न. 5 द्वारका, न्यू जय भारत सोसायटी,सैक्टर-4, प्लाट न. 5, द्वारका में घर-घर एवं सोसाइटी में जाकर व्यक्तिगत रूप से युवा, महिलाओं एवं बुजुरगों से संपर्क किया तथा आगामी चुनावों में अशोक शर्मा को भारी मतों से जिताने का संकल्प भी लिया.

Wednesday, May 04, 2016

टीवी पर काम करने का मजा ही अलग है-कृतिका सेंगर

 प्रेमबाबू शर्मा

‘क्योंकि सास भी कभी बहू’ टीवी शो से अपने अभिनय का सफर से शुरू करने वाली कृतिका सेंगर ने कसौटी जिंदगी की, क्या दिल में है, बुरा न मानो होली है, आहट, झांसी की रानी सहित करीब एक दर्जन धारावाहिक किये। कृतिका कहती है कि टीवी पर काम करने का मजा ही अलग है। निकेतन धीर से विवाह करने के बाद इन दिनों धारावाहिक ‘कसम- तेरे प्यार की’ में अपने रोल को लेकर सुर्खियों में है। हाल में उन से प्रेमबाबू शर्मा से मुलाकात हुई प्रस्तुत है,उसी के चुनिंदा अंशः

आप क्या पुनर्जन्म में विश्वास करती हैं?
इसके लिये मैं आपको एक रियल घटना बताती हूं। यह बहुत पर्सनल है पता नहीं मुझे शेयर करना चाहिये या नहीं। खैर घटना मेरी मम्मी से जुड़ी है दरअसल उन्हें तीन बार गर्भपात हुआ। यहां तक डॉक्टर ने भी कह दिया था कि अब वह मां नही बन पाएंगी। उन्हीं दिनों मेरे पापा की बुआ ने मरने से पहले कहा कि मैं दोबारा इस घर में आऊंगी और एक साल बाद मेरी पैदाइश हुई। आप यकीन करें कि मेरे दादा मरते तक मुझसे राखी बंधवाते रहें। मैं उन्हें ही नहीं बल्कि उनके सभी दोस्तों को भी राखी बांधती थी। ऐसा नहीं कि यह कोई नई बात है, इस तरह के हादसे बहुत लोगों के साथ घट चुके हैं इसलिये मैं मानती हूं कि पुनर्जन्म होता है।

इस शो के बारे में बताये ?
मेरा किरदार तनुश्री नामक युवती का है, जो मिडिल क्लास फैमिली में पली बढ़ी है। बचपन से ही इसकी मां ने इसे सिखाया है कि जिंदगी में प्यार जरूरी है चाहे वह भाई बहन का प्यार हो, मां बेटी का प्यार या फिर पति पत्नी का प्यार हो। तनुश्री रिषी से बहुत प्यार करती हैं क्योंकि बचपन में ही उन दोनों की शादी तय कर दी गई थी, लेकिन कुछ ऐसा होता है कि दोनों एक दूसरे से दूर हो जाते हैं। अब तनु उसे प्यार तो करती है, लेकिन ऐसा भी नहीं कि वह उसके प्यार में पागल है। बेशक वह रिषी का इंतजार कर रही है, लेकिन ऐसा नहीं है कि उसने खाना पीना छोड़ दिया है। दरअसल तनु एक समझदार और सुलझी हुई लड़की है।


यह एक सीधी सादी लव स्टोरी लग रही है क्योंकि इसमें कहीं भी एक्साइटमेंट नहीं दिखाई दे रहा है?
अभी नहीं, लेकिन आगे चलकर रिषी को तनु से एक बार फिर प्यार होगा, लेकिन उस वक्त उसके लिये सब कुछ सहज नहीं होगा। कहानी का यही टर्निग प्वाइंट है। हालांकि इससे पहले भी ट्विस्ट एंड टर्न्स हैं कुछ सप्रराइजेज भी हैं, लेकिन पहला मेन है।

यह धारावाहिक कैसे मिला?
मुझे बाला जी टेलीफिल्मस से क्रियेटिव का फोन आया और अगले दिन से इस शो की शूटिंग शुरू हो गई। दरअसल मेरी शुरुआत ही बाला जी से हुई थी मुझे ढूंढ़ने का श्रेय एकता को ही जाता है। मैंने उनके साथ सास भी कभी बहू थी, कसौटी जिंदगी की, क्या दिल में, किया है इसके अलावा एक रियलिटी शो भी कर चुकी हूं। उसके बाद कहीं जाकर झांसी की रानी किया।

एक्टर बनने का चस्का कैसे लगा?
मैंने तो कभी अभिनेत्री बनने का सोचा तक नहीं था। मैं कानपुर में एक ऐड एजेंसी में इंटर्न कर रही थी बतौर क्लाइंट सर्विसिंग। फिर वहां से मैं कैसे यहां तक आई और फिर यहीं की होकर रह गई और शादी भी मैंने यहीं की।

आप किस्मत को कितना मानती हैं?
बिल्कुल मुझे किस्मत और बड़ों के आशीर्वाद में बहुत ज्यादा विश्वास है। इसे आप किस्मत ही कहेंगे कि जिस लड़की ने कभी कल्पना तक नहीं की थी कि वह एक्ट्रेस बनेगी और देख लीजिये आज मैं छोटे परदे के व्यस्त कलाकारों में से एक हूं।

क्या आगे फिल्म करने के लिये तैयार हैं?
मैंने इस बारे में अभी तक सोचा ही नहीं कि कल अगर मुझे किसी फिल्म का ऑफर मिलता है तो मैं क्या करूंगी। फिलहाल तो इस शो के बारे में ही सोचना है।

आम के बौर व गुड़ के अँचार जैसा चैत

परिचय दास

भारतीय परंपरा में पहला मास है - चैत । भारतीय वर्ष का अंत वसंत में, आरंभ भी वसंत में । अंत फागुन में, आरंभ चैत में। प्रकृति में परिवर्तन को देखते-देखते भारतीय वर्ष का अंत और आरंभ। चैत में दिन और रात; दोनों सुन्दर हो जाते हैं । आजकल पारिस्थितिकी के कारण दिन थोड़े तल्ख़ होने लगे हैं , यह अपवाद जैसा है. खैर. सरसों में फूल, आम में बौर । अद्भुत राग-रंग। वृक्ष-वृक्ष में नव पल्लव, प्रकृति में हरीतिमा , पेड़ों में नयी पत्तियां । कोयल की बांसुरी। चैत यानी चित्रा नक्षत्र से निसृत । चित्रमय प्रकृति। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से वर्ष के आरंभ करने का एक वैज्ञानिक आधार है । इंगलैंड के ग्रीनविच नाम की जगह से तिथि बदलने की व्यवस्था 12 बजे रात से है , उस समय भारत में सबेरे का 5:30 बज रहा होता है । हमारे भारत में रात के अंधकार में नववर्ष का स्वागत नहीं होता बल्कि भारतीय परंपरा का नववर्ष सूरज की पहली किरण के स्वागत कर के मनाया जाता है ।

चैत में अनुराग है , कहीं-कहीं विरह है । राम के जन्म का सोहर है । सोहर सुहावनी है । सुगंधित महीना। सारे फल-फूलों की खूबसूरत गंध। मन में आलोड़न। कसक। नव संवत्सर। सब कुछ नया-नया।

चैत- समय चइती की बहार रहती है । चैत - केंद्रित लोक-गीत । लोकगीत के अलावा इसको अर्ध-शास्त्रीय गीत विधा में सम्मिलित किया जाता और उपशास्त्रीय बंदिश गायी जाती हैं । चैत के महीना में गए जाने वाले इस राग के विषय प्रेम, प्रकृति और होली, राम जनम आदि होती हैं । चैत श्री राम के जन्म का भी मास है , इस लिए गीत की हर पंक्ति के बाद अक्सर 'रामा' शब्द लगाया जाता है । संगीत के कई महफिलें केवल चैती , टप्पा और दादरा गाया जाता है । यह अक्सर राग वसंत या मिश्र वसंत में निबद्ध होता है । चैती , ठुमरी, दादरा, कजरी इत्यादि का गढ़ पूर्वी उत्तर प्रदेश और मुख्यरूप से बनारस है । पहले केवल इसी के समर्पित संगीत समारोह होते थे , जिसको चैता उत्सव कहा जाता था । आज यह संस्कृति लुप्त हो रही है , किन्तु चैती की लोकप्रियता संगीत प्रेमियों में बनी हुई है । बारहमासा में चैत का महीना गीत-संगीत के मास के रूप में चित्रित किया गया है ।

चैत प्रतिपदा से भारतीय नववर्ष के प्रारंभ के साथ बड़ा नवरात्र शुरू हो जाता है । शक्ति की आराधना के लिए ये नौ दिन महत्वपूर्ण माने जाते हैं । इस दौरान घर में जौ बोये जाते हैं । हालांकि, कम ही लोग यह जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है । अधिकांश लोग तो बिना जाने परंपरा का महज़ निर्वाह करते चले आ रहे हैं । जौ को पूर्ण फसल कहा जाता है । वसंत ऋतु की पहली फसल जौ होती है , जिसे शक्ति को अर्पित किया जाता है । मान्‍यता तो यह है कि जौ उगाने से भविष्य से संबंधित कुछ बातों का संकेत भी मिलता है । यदि जौ तेजी से बढ़ते हैं तो घर में सुख-समृद्धि तेजी से बढ़ती है , ऐसी लोकमान्यता है । यानी जौ समृद्धि के प्रतीक हैं ।

इस समय सूखी , वीरान शाखा पर नाजुक कोमल कोंपल आनी शुरू हो जाती हैं , यहीं से वसंत ऋतु अपने उत्सव के शबाब पर पहुंचती है ।

फागुन व चैत वसंत के उत्सव के महीने हैं । इसी चैत के मध्य में जब प्रकृति अपने शृंगार के सृजन की प्रक्रिया में होती है । लाल, पीले , गुलाबी, नारंगी, नीले, सफेद रंग के फूल खिलते हैं । पेड़ों पर नये पत्ते आते हैं और ऐसा लगता है जैसे समूची की समूची की सृष्टि ही नई-नवेली हो गयी है । ठीक इसी समय हमारी भौतिक दुनिया में भी नये का आगमन होता है । नये साल का यही समय है : नये के सृजन का , वंदन, पूजन और संकल्प का । जब सृष्टि नये का निर्माण करती , आह्वान करती है , तभी सांसारिक दुनिया में भी वह नवीनता की ओर कदम बढ़ाती है । इस दृष्टि से कई जगहों पर गुड़ी पड़वा के इस समय मनाये जाने के बहुत गहरे अर्थ हैं । पुराने के विदा होने व नये के स्वागत का संदेश देता यह पर्व है - प्रकृति का , सूरज का , जीवन, दर्शन और सृजन का । जीवन-चक्र का स्वीकार, सम्मान व अभिनंदन तथा उत्सव है - गुड़ी पड़वा व चैत ।

किसान इस को रबी के चक्र के अंत के तौर पर मनाते हैं । चैत में भी में सूर्य का अर्घ्य [ छठ का ] दिया जाता है । घर की साफ-सफाई कर के सुंदर रंगोली बनायी जाती हैं । महाराष्ट्र और मालवा-निमाड़ आदि में घर के खिड़कियों पर गुड़ी लगाने को विशेष तौर पर शुभ माना जाता है । गुड़ी को राम की लंका विजय के तौर पर व महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी के विजय की ध्वजा के तौर पर लगायी जाती है । लम्बी डंडी पर गहरी हरी या फिर पीली रंग की नई साड़ी लगाकर उस पर छोटा लोटा या फिर गिलास सजायी जाती है । उस पर काजल से आंख, नाक, मुंह बनाया जाता है और उस को फूल-हार से सजाके उस की अर्चना की जाती है । घरों में श्रीखंड व पूरनपोळी बनायी जाती हैं । आरोग्य की दृष्टि से नीम की टटकी पत्तियों का सेवन किया जाता है । इस तरह नये साल की शुरुआत वसंत के उत्सव के साथ सुख, समृद्धि व आरोग्य के संकल्प के साथ किया जाता है ।

चैती गीत का मूल स्रोत लोक संगीत ही है , किन्तु स्वर, लय आ ताल के कुछ विशेषता के कारण उपशास्त्रीय संगीत के मंचों पर बेहद लोकप्रिय है । इन गीतों के वर्ण्य विषय में शृंगार रस के संयोग आ वियोग, दोनों पक्ष प्रमुख होते हैं । अनेक चैती गीतों में भक्ति रस की प्रधानता होती है । चैत्र मास की नवमी तिथि को राम-जन्म का पर्व मनाया जाता है । इन गीतों को जब महिला या पुरुष एकल रूप में गाते हैं तो इसको ' चैती' कहा जाता है , किन्तु जब समूह या दल बना कर गाता जाता है तो इस को 'चैता' कहा जाता है । इस गायकी का एक और प्रकार है जिसको 'घाटो' कहा जाता है । 'घाटो' की धुन ' चैती' से थोड़ी भिन्न हो जाती है । इस की उठान बहुत ऊँच होती है और केवल पुरुष लोग इस को समूह में गाते हैं । कभी -कभी गायकों के दो दल में बाँट कर सवाल-जवाब या प्रतियोगिता के रूप में इन गीतों को प्रस्तुत किया जाता है , जिसको ‘ चैता दंगल' कहा जाता है । चैती गीतों का उपशास्त्रीय स्वरूप भी प्रसिद्ध है । चैती की भाव-भूमि तो लोक जीवन से प्रेरित होती है तथा प्रस्तुति ठुमरी अंग से कई गयी होती है - ‘चइत मासे चुनरी रंगइबे हो रामा।’

चैत मास की पूर्णिमा की रात के समय सरहुल [ उरांव जाति क जातीय नृत्य ] का आयोजन किया जाता है । यह नृत्य एक प्रकार से प्रकृति की पूजा का आदिम स्वरूप है । जनजाति लोगों का यह विश्वास है कि साल वृक्ष के समूह में, जिसको यहां 'सरना' कहा जाता है , उस में महादेव निवास करते हैं । जनजाति लोगों का बैगा सरना वृक्ष की पूजा करता है । वहाँ घड़े में जल रखके सरना के फूल से पानी छिड़का जाता है । इसी समय सरहुल नृत्य प्रारम्भ किया जाता है । सरहुल नृत्य के प्रारंभिक गीतों में धर्म प्रवणता व देवता की स्तुति होती है किन्तु जैसे-जैसे रात गहराती जाती है , उस के साथ -साथ नाच-संगीत मादक होने लगता है । यह नाच प्रकृति की पूजा का एक बहुत आदिम रूप है ।

लोककलाएं पहले उपजीं , परम्परागत रूप में उनका क्रमिक विकास हुआ तथा अपनी उच्चतम गुणवत्ता के कारण ये शास्त्रीय रूप में ढल गईं । चैती गीतों के लोक-रंजक-स्वरूप तथा स्वर व ताल पक्ष के चुम्बकीय गुण के कारण उपशास्त्रीय संगीत में इनको स्थान मिला । लोक परम्परा में चैती 14 मात्रा के चाँचर ताल में गायी जाती है , जिसके बीच-बीच में कहरवा ताल का प्रयोग होता है । गीतों की प्रचलित धुनों का जब सांगीतिक विश्लेषण किया जाता है तो हमको मालूम होता है कि दोनों तालों की मात्रा में समानता के कारण ही चैत गीत लोक व उपशास्त्रीय, दोनों स्वरूपों में लोकप्रिय है । भारतीय फिल्मों में चैती धुन का प्रयोग तो कई गीतों में किया गया है किन्तु धुन के साथ-साथ ऋतु के अनुकूल साहित्य का प्रयोग कुछ गिनी चुनी फिल्मी गीतों में मिलता है । 1963 में प्रेमचन्द के बहुचर्चित उपन्यास ‘गोदान’ पर इसी नाम से फिल्म बनी थी । इस फिल्म के संगीतकार विश्वविख्यात सितार वादक रविशंकर थे , जिन्होंने फिल्म के गीतों को पूर्वी भारत की लोकधुनों में निबद्ध किया था । लोकगीतों के विशेषज्ञ गीतकार अनजान ने फिल्म के कथानक, परिवेश व चरित्र के अनुरूप गीतों की रचना की थी । इन गीतों में एक चैती गीत था , जिसको मुकेश के स्वर में रिकार्ड किया गया था । गीत के बोल हैं - ‘हिया जरत रहत दिन रैन हो रामा…’।

चैत मास अपने स्वरूप में उत्सवधर्मी, ललित व विविधवर्णी है । कहीं निकल जाएँ , सांझ की वेला में सीवान में तो किसी सुगंध के झकोरे से आप का मन तृप्त हो जाएगा । आम के बौर, आम का टिकोरा, आम का गुड़ वाला अँचार ।

Madhuri Varshney elected the President of Dwarka Forum

Madhuri Varshney elected the new President of Dwarka Forum. The election for Dwarka Forum - New Office Bearers For the year - 2016-18 AGM was held on, Sunday, May 1, 2016 at Gokul Garden. Mr. Arvinder Singh Chhatwal- Vice President informed Dwarka Parichay that Ms. Madhuri Varshney - President, Shri Sanjeev Goyal - General Secretary Mr. P Menon - Treasurer Ms. Sudha Iyer- Media Advisor Joint Secretaries: Sushil Kumar, Rajeev Solanki, Anoop Rohera, Sunil Sareen, Anil Rajput, Shashi Kapur, P.B.Mishra.

Sri VIS students visit National Agricultural Science Museum


Sri VIS Eco-Crusade along with DCCW students – a school under Sarthi Programme of Climate EduXchange Project- an initiative of TERI in partnership with DELL Global Giving, visited National Agricultural Science Museum, situated in the premises of National Agricultural Science Centre (NASC) complex of the Indian Council of Agricultural Research, New Delhi.

Students got opportunity to explore interesting information on agriculture. The major sections were on:

1. Six Pillars of Agriculture
2. Agriculture in Pre-Historic Period Agriculture during: Indus-valley Civilization, Vedic and Post Vedic Period, Mogul Period & British Period.
3. Agriculture Science in Independent India.
4. Universal issues relating to Agriculture and its future in India.

As the visit was more on educating students on the role of agriculture in climate change, therefore we were more inclined towards the section in which detailed information in respect of environmental changes occurring in the world, such as green house effect, explosion of population, increasing agricultural costs, factors responsible for environmental pollution, application of organic technology for agriculture etc is provided.

After the visit a brief discussion was held wherein students were come out with their view points on --- the role of agriculture as a contributor to climate change, the effect of climate change on agriculture and the solutions from agriculture for climate change. Overall the entire visit was very informative and exciting.

मिराज़ स्टोर से ही करूंगी शादी की शॉपिंग: करिश्मा तन्ना


प्रेमबाबू शर्मा​


इंडिया में पहली बार दिल्ली के करोल बाग मार्केट में “मिराज स्टोर” लॉन्च हुआ। “मिराज स्टोर” लेडीज़ स्पेशल डिजाइनिंग ड्रेसिज़ लाइक लंहगा, अनारकली, गाउन जैसे डिजाइनिंग ड्रेसिज का स्टोर है।

स्टोर लॉन्च के मौके पर बिगबॉस फेम ‘करिश्मा तन्ना’, रोडीज़ फेम ‘काव्या’, मारवाह स्टूडियों के मालिक ‘संदीप मारवाह’, किंगफिशर मॉडल ‘कंचन तोमर’, क्वीन ऑफ रियैलिटी शोज़ यानि ‘रूपा खुराना’, इंडियाज़ नेक्सट टॉप मॉडल की रऩअरप ‘रूशाली रॉय’, मिया लाकरा, मीनाक्षी दत्त, उमेश दत्त जैसे कई फेमस सिलेब्रिटी मॉडल मौजूद थे। स्टोर लॉन्च के मौके पर फैशन शो के जरिए “मिराज” ने अपनी डिजाइनिंग ड्रेसिस के कलेक्शन को भी शो किया। जिसमें सभी मॉडल्स ने डिजाइनिंग और एथेनिक ड्रेसिज को पहनकर रैंप वॉक किया। रैंप वॉक पर मॉडल्स जब “मिराज” क्लेक्शन पहनकर रैंप पर उतरी तो ड्रेस की डिजाइनिंग देखते ही बनती थी।
लॉन्च के मौके पर ब्लू कलर के गाउन में क्वीन लुक दे रही करिश्मा तन्ना ने कहा कि “मिराज में ड्रेसिज की क्लेक्शन को देखकर मेरा तो दिल आ गया है। इन ड्रेसिस को ‘गगन’ और ‘सुनैना’ (डिजाइनर्स) ने इतनी खूबसूरती से डिजाइन किया है कि जो देखने में ही आपको कम्फर्टेबल लुक देती है। यहां की सारी ड्रेस बहुत अच्छी है और बेस्ट पार्ट यह है कि रेट्स भी काफी इकॉनोमिकल है जो कि आसानी से खरीदे जा सकते है। दरअसल मैं तो सोच रही हूं कि अपनी शादी के लिए मुझे कहीं और जाने की जरूरत ही नहीं पड़ने वाली, बस मिराज आ जाउंगी। मैं स्पेशली चाहूंगी कि मेरी शादी की सारी ड्रेसिस को सुनैना और गगन ही डिजाइन करें। क्योंकि यह ड्रेसिज़ इस मॉडर्न सोसाइटी में मुगलों की शाही ड्रेसिस वाली फील देती है।“

वहीं स्टोर के मालिक राजेंद्र कुमार चोपड़ा और सविता चोपड़ा ने कहा कि “मिराज एक ऐसा स्टोर है जहां लेडीज़ को आने के बाद अपनी इमैजनरी ड्रेस के लिए ज्यादा सोचना नहीं पड़ेगा। इसके लिए हमने प्राइस को काफी इकोनोमिकल भी रखा है क्योंकि हमारें लिए कस्टमर सेटिसफेक्शन मेन है।“ लॉन्च के मौके पर ड्रेसिज़ को डिजाइन करने वाली सुनैना ने कहा कि “हमने पूरी कोशिश की है कि ऐसी ड्रेस बनाई जाए जिसमें एक लड़की खुद को इमैजिन करती है। बल्कि मिराज नाम ही हमने उस सपने को पाने के लिए दिया है जो हर लड़की देखती है।“ वहीं सुनैना के साथ ड्रेस को डिजाइन करने वाले गगन ने कहा कि “फैशन की कोई सीमा नहीं होती, फैशन का मतलब किसी चीज को कॉपी करना भी नहीं होता। फैशन वो है जो आप कैरी करें, फैशन आप सब में से ही निकलता है। बस इसी चीज़ को ध्यान में रखते हुए ही हमनें इन ड्रेसिस को डिजाइन किया है।“

Promotion of International Career Seminar to be held on 14th May at National Law University, Delhi

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