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Thursday, October 30, 2014

मनोहर लाल खट्टर रचेंगे हरियाणा की प्रगति का नया इतिहास

भारतीय जनता पार्टी के नेता मनोहर लाल खट्टर ने 26 अक्टूबर को हरियाणा के 10वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्य, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री एवं भाजपा के शीर्ष नेताओं ने हजारों समर्थकों के साथ खट्टर के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की। अपार इंडिया ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशंस के डॉयरेक्टर प्रो अपार जैन को भी शपथ ग्रहण समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।

हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने पंचकुला के सेक्टर पांच स्थित मेला ग्राउंड में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 60 वर्षीय मनोहर लाल खट्टर को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने हिंदी में शपथ ली। खट्टर के अलावा नौ अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें से छह कैबिनेट और तीन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए हैं।

शपथ ग्रहण समारोह में शामिल प्रो अपार जैन ने समारोह को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि हरियाणा में ऎसा पहली बार हो रहा है कि मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह एक सार्वजनिक समारोह में हो रहा है, जबकि इससे पहले यह हरियाणा राजभवन में साधारण तरीके से होता था। उन्होंने उम्मीद जतायी कि संगठन कौशल के धनी एवं साफ-छवि वाले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हरियाणा की प्रगति का एक नया इतिहास रचेंगे।

Chhat puja celebrations







You can send the celebrations photo to info@dwarkaparichay.com

सनातन सखा (उपनिषद के आधार पर)


जीवात्मा तथा परमात्मा के बीच बहुत निकट का संबंध है । यों तो जीवात्मा परमात्मा का ही अंश है - दोनों अनादि है पर जीवात्मा परमात्मा से अनभिज्ञ रहता है कभी खुश होता है तो कभी दुखी । दूसरी तरफ परमात्मा अपने आप में मग्न रहता है- आनन्द से परिपूर्ण रहता है-सर्वदा एक रस रहता है तथा शान्त रहता है परमात्मा जीवात्मा को भी देखता है परन्तु जीवात्मा भोगों में मग्न होने के कारण परमात्मा के साथ रहते हुये भी उन्हें नही देख पाता ।
परमात्मा ----    जीवात्मा

इसे ही एक रूपक के द्वारा श्वेताश्वतरोपनिषद में इस प्रकार बताया गया है:

‘‘द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया समानं वृक्षं परिषस्वजाते ।
तयोरन्यः पिप्पलं स्वाद्वत्त्यनश्नन्नन यो अभिचाकशीति ।।’’


सयुजा = सदा साथ रहने वाले, (तथा) सखाया = परस्पर सख्यभाव रखने वाले, द्वा = दो, सुपर्णा = पक्षी (जीवात्मा तथा परमात्मा), समानम् = एक ही, वृक्षम = वृक्ष (शरीर) का आश्रय लेकर रहते है, तयोः = उन दोंनो में से, अन्य = एक (जीवात्मा) तो, पिप्पलम् =उस वृक्ष के फलेां (कर्म फलों) को, स्वादु=स्वाद ले-लेकर, अत्ति = खाता है, अन्यः=किन्तु दूसरा (ईश्वर), अनश्नन् =उनका उपभोग न करता हुआ, अभिचाकषीति = केवल देखता रहता है ।

यह मनुष्य शरीर एक पीपल का वृक्ष है । आत्मा तथा परमात्मा ये दोनों सनातन सखा अर्थात् दो पक्षी हैं जो इस शरीर रूपी वृक्ष पर हृदय रूपी घोसलें में एक साथ निवास करते हैं । इन दोनो में से एक तो इस शरीर रूपी अश्वत्त्थ (पीपल) वृक्ष के फल को खाता है - कभी मीठा फल मिलने पर वह आनन्द से हर्षित होकर एक टहनी से दूसरी टहनी पर फुदकता रहता है । जीवात्मा(भोक्ता) तो कभी आनंद से हर्षित होकर नाच उठता है -मोर की तरह | कभी कड़वे फल मिलने पर वह दुःख से कराह उठता है । फिर सुख की खोज में इधर से उधर व्याकुल होकर भागता रहता है । भागते भागते वह कभी गिर पड़ता है लहुलुहान होकर अधमरा सा हो जाता है । कभी थक कर बैठ जाता है । बेसहारा बेचारा |

उसका सारा उत्साह, सारा आनन्द जाता रहता है । वह दुःखी होकर शान्त बैठ जाता है । परमात्मा की प्रार्थना करता है - "हे प्रभो ! मुझे इन दुःखों से मुक्ति दें । मेरे अपराधों को क्षमा करें । हे सखा! हे मेरे सुहृद! मेरे ऊपर कृपा करें । हे दीनबंधु! अबकी बार मोहे उबारो| मेरे सामान इस संसार में अन्य कोई दुखी नहीं है और आप के सामान दूसरा कोई दीनबंधु नहीं |मेरी एकमात्र शरण,मेरी गति, हे परमात्मन् ! तू ही है ,तू ही है |"

उसकी आंखों से परमात्मा के लिये पश्चात्ताप के आँसू टपक पड़ते हैं। 

तभी एकाएक उसकी दृष्टि चुपचाप बैठे हुये उस सनातन सखा अर्थात् परमात्मा पर पड़ती है जो इन फलों को खाता नहीं है वह केवल देखता रहता है । परमात्मा(द्रष्टा) अर्थात शरीर में प्राप्त हुए सुख-दुःखों को भोगता नहीं है।

जीवात्मा भी तब भोक्ता नहीं द्रष्टा बन जाता है - और फिर वह उसका मित्र अर्थात् जीवात्मा तथा परमात्मा दो ही रह जाते है और वह सनातन सखा अर्थात् जीवात्मा और परमात्मा परस्पर मित्रता का आनन्द लूटते हैं ।

जीवात्मा परमानंद परमात्मा हो जाता है पीपल के फल की सत्ता ही गायब हो जाती है । एक प्राण दो शरीर हो जाता है । पूर्णतया घुल जाता है ठीक वैसे ही जैसे नमक की गुडि़या समुद्र की गहराई नापने के लिए जाये और घुलकर समुद्र ही हो जाता है । उस ज्ञानी पुरुष के लिए जो समस्त जगत को ब्रह्ममय देखता है , फिर ध्यान करने न करने, बोलने न बोलने को कुछ भी नहीं रह जाता है |

तब रह जाता है केवल आनंद-ही-आनन्द---परमानंद सत्-चित्-आनन्द-- शिवोहम्-शिवोहम्

- मधुरिता

Wednesday, October 29, 2014

Two days cultural festival started at CCRT, Dwarka

The 5th Kamladevi Chattopadhyay Memorial Lecture Soulful Mohan Veena Vadan 
by Pt. Vishwa Mohan Bhatt being felicitated by Sh.Girish Joshi Director CCRT.

Mesmerizing performance on Soulful Mohan Veena Vadan by Pt. Vishwa Mohan Bhatt 
with tabla player Pandit Ram Kumar Mishra

"बेटी- देश की शक्ति " सेमिनार का आयोजन किया


श्री ज्ञान गंगोत्री विकास संस्था (स्वयं सेवी संगठन) द्वारा गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली में "बेटीः देश की शक्ति " सेमिनार का आयोजन किया। हमारी संस्था समस्त संपादकीय मीडिया, इलैक्ट्रोनिक्स मीडिया से सहयोग चाहती है  कि 14 अप्रैल 2012 से संस्था द्वारा दिल्ली एन.सी.आर. में "बेटीः देश की शक्ति" कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जिससे कोलोनी और गांव में रहने वाली बेटी, बहन को विभिन्न प्रकार का सहयोग और आत्म शक्ति मिल रही है। दुःख इस बात का है कि भारत सरकार के वित्त मंत्री द्वारा 2014 के बजट में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का जो नारा दिया गया वे सिर्फ कागजों और फाईलों तक सीमित है। संस्था द्वारा महारतन कम्पनियों से सहयोग मांगने पर वे सीधे कहते है कि हमें सक्त निर्देश है कि सामाजिक संगठन को किसी भी प्रकार का प्रयोजन नहीं किया जाएगा। 

संस्था कैसे उम्मीद कर सकती है कि इस समस्या का समाधान आसानी से होगा। 31 अक्टूबर को भारत के प्रथम गृह मंत्री, सरदार वल्भ भाई पटेल जी की जयन्ती है इस कार्यक्रम को संस्था अपने एजेन्डे से जोड़कर उन महान पुरूषों की जयन्ती भी आयोजन कर रही है और हर साल करती है आ रही है। आज जरूरत है इस देश में एक अच्छे समाजसेवी की और भारत निर्माण में समाजसेवियों ने अपना अहम् योगदान दिया है। 

संस्था के संस्थापक महासचिव भाई भरत कुमार सिंह का निवेदन है कि महिलाओं एवं लडकियों पर हो रहे उत्पीडन और शोषण के लिए ठोस कानून बनाकर न्याय पालिका द्वारा कम से कम समय में उसे दंडित करने का प्रवधान करें। जिससे की ऐसे घिनौने खेल को रोका जा सका। कार्यक्रम में पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री नागमणी जी ने अपने विचार में संस्था द्वारा बेटीः देश की शक्ति कार्यक्रम को बहुत ही बेहतरीन तरीके अपने विचार व्यक्त किए। डी.सी.पी.सी.आर. के मेम्बर मदन मोहन विद्यार्थी जी ने कहा कि आज बाल शोषण आयोग, दिल्ली सरकार हर तरह की सुविधा मुहैया कराने के लिए तैयार है. कार्यक्रम में निर्भया ट्रस्ट की अध्यक्षा श्रीमति आशा देवी जी ने कहा कि जो हमारी बेटी के साथ हुआ वे घटना और बेटियों के साथ न घटे इसके लिए मुझे ध्यान देने की जरूरत है वहीं झुगी झोपड़ी एकता मंच के अध्यक्ष जवाहर सिंह ने कहा कि अब जरूरत इस बात कि है कि हमें एकजुट होकर संघर्ष करना पडेगा। वहीं अखिल भारतीय पटेल क्षत्रीय महासभा दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष इंजिनियर मिथलेश कुमार पटेल ने लोह पुरूष सरदार वल्लभ भाई की 137वीं जयन्ती पर अपने विचार व्यक्त कियें कार्यक्रम में डाॅ. संगीता पुरी राजकुमार कुशवहा, पप्पु सिंह, संस्था की महासचिव रानी कुमारी सिंह ने स्वागत भाषण में अपने विचार प्रकट किये कार्यक्रम में 200 महिलाओं एवं बच्चों ने भाग लिया इस अवसर पर रानी सिंह ने कहा कि आज पूरे देश विदेश में छठ पूजा का जय जयकार हो रहा है और संस्था बेटी बचाओं, बेटी पढाओ, बेटीः देश की शक्ति कार्यक्रम का आयोजन कर रही है इससे शुभ संदेश जाएगा।

The Chhath Puja - tuning our LIFE with NATURE


Chhath, also known as Dala Chhath is an important festival celebrated in Bihar and many other parts of India in which setting Sun (dawn) is worshiped . Although Bihar celebrates Chhath most elaborately it is also followed in some parts of West Bengal, Jharkhand, Orissa, Assam, Mauritius, mainly among the Bhojpuri and Maithali speaking people. Chhath is also important for Nepalese worshippers of god as well as in eastern Uttar Pradesh.The best place to witness Chhath would be around Northern Bihar where it is celebrated in great grandeur. The festival is observed and in Bihar since time immemorial with the constant faith that the Sun God fulfils wishes if 'araghya' is offered with complete dedication and devotion. Chhath is not just a physical attachment to the people of Bihar, it is also present in their hearts, and this is why the people bring wherever they have migrated. Nowadays it can be easily seen at the ghats of Yamuna in Delhi and other parts of India indicating its presence across the country.

It is a festival connected with purity, devotion to the Sun God who is considered as the source of life on this earth and is regarded as wish fulfiller.

The festival is with an aim to express thanks to Sun God for offering energy to earth continuously enabling the environment suitable for the people to live.

In the evening arghya people express their thanks to Sun God for its work in growing their crops during the preceding year and morning arghya is considered as a request for a bountiful crop, peace and prosperity in the year to come.

Devotees assemble at the ghats at rivers and ponds including Ganges and take a holy dip before preparing offerings (Prasad). The main constituent of the offerings are Thekua, which is a wheat based cake.

Offerings are preferably cooked on earthen Chulha (oven). Some traditions are exercised with little difference varying from region to region and across the families with basic similarity.

During the , offerings are contained in small, semicircular pans woven out of bamboo strips called soop.
Chhath is a Hindu festival but many muslim families also participates in this holy festival.

Chhath is also called ‘Suryasasthi’ as it observed after the six days of Diwali, the festival of light. Chhath takes place during 6th day (Shasthi) lunar fortnight of Kartik month. lasts for four days. There is also a "Chaiti Chhath" just after Holi during Chaitra Navratri in the month of Chaitra (March last to mid April).

In 2014, the festivity for Chhath puja on Wednesday, the 29th October.
First Day of Chhath Puja: Nahai Khai Nahai Khai (Bath & Eat)
The first day of the puja is known as Nahai Khai (Bath & Eat), the Vrati (devotees) take a bath preferably in sacred river Ganga and bring the holy water to cook offerings (Prasad) at home.

Second Day of Chhath Puja: Kharna
A whole day fast (without water) is observed by the vratis (devotees). The vratis end their fast in the evening after performing puja. Offerings (Prasad) are comprises of Rasiao-kheer (rice delicacy), puris (deep-fried puffs of wheat flour) or chapatti and bananas - are distributed among family, friends and visitors.

Third Day of Chhath Puja: Chhat Sandhya Argh (Chhat Dala Evening puja)Devotees observe fast without consuming water. The whole day is spent in preparing puja offerings. All the offerings are kept in tray made up of bamboo. Offerings comprises of Thekua, coconut, banana and other seasonal fruits.

The evening ritual is performed at the banks of river or pond or any clean water body. All the devotees, family, friends and visitors assemble their and the agrahya is offered to the setting Sun. ‘Kosi’ – One of the most charming events during Chhath Puja known as ‘Kosi’ is celebrated at the courtyard of the house after evening offerings. Lightened earthen lamps (diyas) are kept beneath the covering of five sugarcane sticks or 24 sticks (as per local tradition). The same event also takes place at the ghats in the early morning before morning offerings (arghyas).

Fourth Day of Chhath Puja: Chhath Suryodaya Argh (Chhath Dala Morning puja) This is the last and final event of the auspicious puja, the devotees again with their family, friends and relatives assemble on the bank of river or pond to offer arghyas (offerings) to the rising Sun. After performing arghyas devotees break their fast. Ginger and Sugar are used by devotees to break their fast (as per local tradition).

Know more about Chhath festival

Virasat : Kamaladevi Chattopadhay - A cultural festival at CCRT, Dwarka


Virasat - Kamaladevi : A cultural festival 
to honour the memory of 
Kamaladevi Chattopadhay
( Chairperson at CCRT : 1979 - 1981)

29 - 30 October 2014
at 
Centre for Cultural Resources and Training, 
15-A, Sector - 7, Dwarka, New Delhi - 110075


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