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Thursday, April 24, 2014

Can diabetes be ward off ?


Adhering to Mediterranean diet, rich in fruits and vegetables and low in animal products, may protect one against developing type 2 diabetes Padma Shri, Dr. B C Roy National Awardee & DST National Science Communication Awardee, Dr. K K Aggarwal, President Heart Care Foundation of India and Sr National Vice President Indian Medical Association.

The diet emphasizes olive oil, vegetables, fruits, nuts, cereals, legumes and fish, and deemphasizes meat and dairy products. It is a healthy eating plan that seems to help in the prevention of heart disease.

In the study published in the British Medical Journal, researchers tracked the diets of 13,380 Spanish university graduates with no history of diabetes. Participants filled out a 136–item food questionnaire, which measured their entire diet (including their intake of fats), their cooking methods and their use of dietary supplements. During an average of 4.4 years of follow–up, the team found that people who adhered to a Mediterranean diet had a lower risk of developing type 2 diabetes. In fact, those who stuck very closely to the diet reduced their risk by 83 percent.

Moreover, the people who tended to stick closest to the diet were those with factors that put them at the highest risk for developing diabetes, such as being older, having a family history of diabetes and being an ex–smoker. These people were expected to have a higher rate of diabetes, but when they adhered to the Mediterranean diet this was not the case.

Type 2 diabetes is typically brought on by poor eating habits, too much weight and too little exercise.
One key factor that might be responsible for the protective effect of the Mediterranean diet is its emphasis on olive oil for cooking, frying, putting on bread and mixing in salad dressings.

Preventing diabetes – TIPSEat less
Omit refined carbohydrates (white sugar, white rice and white maida)
Use olive oil, vegetables, fruits, nuts, cereals, legumes and fish, and reduce meat and dairy products

Goonj Collection Camp in Dwarka on 27th April


The Indian Heights School won International School Award 2014-17

Ms. Archana Narain, Principal

The Indian Heights School, sector 23, Dwarka, once again reached for greater heights by winning the International School Award (ISA) 2014-17, by the British Council the second time consecutively. It is a great achievement for the school which has always strive to maintain a global outlook and international perspective as a part of its curriculum. This accreditation has been a result of the unstinted guidance and support of the School Management and Principal, Ms. Archana Narain, who provided this platform to the staff and students to conduct various activities with schools in India & abroad.

PAHAL SCHOOL FOR SLUM CHILDREN

PAHAL SCHOOL FOR SLUM CHILDREN PROVIDING FREE EDUCATION FOR UNDER PRIVILEGED  AT 29, DDA MARKET,NEAR MANISH MALL, SECTOR-22, DWARKA,NEWDELHI-110077, MOB-9818670665

For admission, please contact Ms.Dimple 9717807339/ Mr.Chaman lal 9818670665

Wednesday, April 23, 2014

Dwarka way open



The portion of Pankha Road Flyover from Dwarka to Pankha Road which was long awaited was ultimately opened to public on April 23, 2014. It was beautiful scene to watch vehicles moving smoothly over the flyover and ultimately merging with the traffic from Uttam Nagar side. The project was started on 20.02.2008 at an estimated cost of Rs.90.23 crores and the proposed date of completion was 03.10.2010 but missed its deadline due non-completion of work by other departments like BSES, DJB, MTNL.

The side road or the slip road from Pankha Road for Dwarka is still under progress as few houses coming in the way are to be rehabilitated.

Citizen's reporter:
Arun Banerjee

MINDSCAPE - An Art Exhibition of Paintings by B Hussain from 6-12 May

MINDSCAPE - An Art Exhibition of Paintings by B Hussain from 6-12 May at AIFACS, New Delhi


Babu Hussain receiving top 10 AAA Award for All India Level

मंसूरी यानि प्राकृतिक सौन्दर्य का अदभुत नज़ारा

Ariel view of Mussorrie

एस. एस. डोगरा 

उत्तराखण्ड को भारत का स्विट्ज़रलैंड माना जाता है। हरे-भरे वृक्ष, ऊंची-ऊंची पहाड़ियाँ, झील-झरने, प्राकृतिक सौन्दर्य का अदभूत नज़ारा देखने को मिलता है पहाड़ों की रानी मंसूरी में। भारत की राजधानी दिल्ली से मात्र 290 किलोमीटर दूर तथा समुन्द्रतल से 2003 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बेहद लोकप्रिय पर्यटक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है मंसूरी। प्राकृतिक सौन्दर्य के दीवाने गर्मियों में ठण्डक लेने के लिए तथा सर्दियों में बर्फ से ढकी पहाड़ियों पर लुत्फ उठाने, मंसूरी, अक्सर घूमने चले आते हैं। उत्तराखण्ड की राजधानी देहारादून से केवल 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मंसूरी में अनेक दर्शनीय स्थल है। इन दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए स्थानीय बसों तथा निजी वाहनों की मदद से देखा जा सकता है। वैसे मंसूरी शहर में, स्थानीयबस सेवाओं हेतु लायब्रेरी बस स्टैंड, मैसोनिक लोजे तथा टिहरी बस स्टैंड से विभिन्न पर्यटक स्थल तक पहुँचने में सहायक साबित होते हैं। हालांकि इन निजी टैक्सी का भाड़ा थोड़ा अधिक खर्चीला पड़ता है। परन्तु अधिकांश रूप से निजी टैक्सी से अधिकाधिक दर्शनीय स्थल देखने में सुगमता रहती है।
Mussorrie Lake

हिमालयन श्रंखलाओं में स्थित पहाड़ों की रानी को चरितार्थ करने में मंसूरी का कोई मुक़ाबला नहीं है। हरियाली, विशाल पर्वत श्रंखलाओं, घाटियों, सुन्दर फूलों से सुसज्जित मंसूरी में अनेक दर्शनीय स्थल हैं जिनहे देखने के लिए वर्ष भर पर्यटकों का आवागमन चलता ही रहता है। मंसूरी में सबसे अधिक लोकप्रिय कैंपटी फॉल है जो मंसूरी से यमनोत्री रोड पर मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर निरन्तर बहता हुआ जीवन को जाँबाज तरीके से जीने का संदेश देता है। यह समुन्द्रतल से 4500 फीट ऊंचाई पर है तथा विशाल पर्वतों से घिरा हुआ यह झरना सभी उम्र वर्ग के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। गर्मियों के मौसम में, पर्यटक गर्मी से राहत पाने के लिए गगनचुंबी बहने वाली शीतल धाराओं के नीचे नहाकर आनन्द लेते हैं। यहाँ गढ़वाल विकास निगम मण्डल द्वारा स्थापित विश्राम गृह में महिलाओं - पुरुषों को अपना कीमती सामान सुरक्षित रखने तथा कपड़े आदि बदलने की सुविधा है। इसी के पास कैंपटी झील भी है जहां बोटिंग का आनन्द भी लिया जा सकता है।

मंसूरी में पर्यटकों के लिए काफी चर्चित नाम है गन हिल। गन हिल से हिमालय पर्वत श्रंखलाओं विशेष रूप से बंदपंच, श्रीकान्थ,पिथवाड़ा, गंगोत्री के अलावा मंसूरी तथा दून घाटी के दुर्लभ तथा अत्यंत मनोरम दृश्यों को देखा जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इसका नाम भी एक रोचक तथ्य है वास्तव में, भारतवर्ष में आजादी से पहले, इसी पहाड़ी पर ठीक दोपहर के समय एक तोप से गोला दागा जाता था ताकि लोग अपनी-अपनी घड़ियाँ समय जाँच कर ठीक कर सकें। इसलिए बाद में इसका नाम गन हिल पड़ गया। गन हिल पर पहुँचने के लिए पैदल रास्ता भी है तथा पर्यटक कार्यालय के पास ट्रालियाँ रोपवे के माध्यम से एकदम तिरछी ऊंचाई तथा माल रोड से 400 मीटर के रास्ते को रोमांचक सवारी से पहुंच जा सकता है जहां से दूर दूर तक फैली अपार प्राकृतिक सौन्दर्यता का नजारा लिया जा सकता है। यदि मंसूरी जाने का मौका मिले तो कम्पनी बाग भी अवशय जाना चाहिए क्योंकि यहाँ सुन्दर हरे भरे व्रक्षों के अलावा फूलों की महक अनायास ही पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता रखता है।
Ropeway Trolly to Gun Hill - Kampty Fall

भट्टा फ़ाल: भट्टा फ़ाल भी जल्द ही पिकनिक स्थल के रूप में विकसित हो गया है। यह मंसूरी-देहारादून रोड पर, मंसूरी से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और पर्यटकों को लुभाने में किसी से कम नहीं है। यहाँ मंसूरी उत्तरांचल जल,गलोगी जल विधयुत गृह सयन्त्र 1907 में स्थापित किया गया था। इस पिकनिक स्थल पर पर्यटक ठंडे पानी में स्नान आदि कर गर्मी से राहत मिलती है साथ में थकावट भी दूर हो जाती है। पर्वतों के बीच से इस झरने का नजारा भी दर्शनीय है। सूत्रों से पता चला कि इसका नाम इसके पास स्थित गाँव भट्टा गाँव पर ही पड़ा है जहां वर्षों पहले भट्टे लगे थे। इस पर्यटक स्थल तक पहुँचने के लिए निजी वाहन अथवा पैदल जाया जाता है। इस स्थल को विकसित करने की सख्त जरूरत है। भट्टा फ़ाल के आस-पास सुन्दर पार्क तथा विश्राम हेतु अच्छा इंतजाम है तथा पेट की भूख मिटाने के लिए रेस्तरां तथा कोल्ड ड्रिंक आदि उपलब्ध हैं।
Parks at Dhanolti - Youth Hostel

यूथ हॉस्टल: मंसूरी देहारादून रोड पर मंसूरी से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यूथ हॉस्टल बना है। यहाँ के वार्डन डी.एस. रावत का दावा है कि पर्यटक को घर जैसे माहौल में रहना तथा खाना और वह भी न्यूनतम दामों पर आसानी से उपलब्ध है। रावत के अनुसार युवा आवास, यूथ हॉस्टल्स असोशिएशन ऑफ इंडिया की शाखा है तथा युवा मामले एवं खेल मन्त्राल्य, भारत सरकार से मान्यता प्राप्त है। पूरे विश्व भर में 60 राष्ट्रों में 5000 यूथ होस्टल्स बने हुए हैं जिनका उद्देश्य पर्यावरण को हरा-भरा व स्वच्छ बनाना है। मंसूरी स्थित यूथ हॉस्टल में चार डबल बेड रूम (शौच सहित) तथा 6 व 8 बिस्तर की डोरमेट्री हैं जहां स्त्री व पुरुष को अलग-अलग ठहरने की व्यवस्था है। दूरभाष, टी.वी., साइबर कैफे, समाचार पत्र,ठंडे व गर्म पानी जैसी अनेक सुविधायों का आनन्द उठा सकते हैं। रावत जी ने अनुसशित  माहौल पैदा करके तथा आवास की अनौखी पहचान बनाने में खूब मेहनत की है। यहाँ पर कोंफ्रेंस आदि आयोजन के लिए लगभग 100 व्यक्तियों की क्षमता वाला सभागार भी बना हुआ है।

मंसूरी झील: यूथ हॉस्टल से ठीक एक किलोमीटर की दूरी पर मंसूरी झील बनी है। जो पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बिन्दु है। यहाँ वर्ष भर पर्यटकों का तांता लगा रहता है। यहाँ झील में नौका विहार के लिए नवविवाहित जोड़े, वृद्ध, युवा व बच्चे पास बने पार्क की सैर करना नहीं भूलते हैं। इस झील में अठखेलियाँ करती बतख़ें अपनी अदाओं से पर्यटकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने में अहम भूमिका अदा कर रही हैं। कुल्फी, कोल्ड ड्रिंक, चायूमीन, छोला भटूरा, भोजन आदि हेतु व्यवस्था है। इसी झील के पास पारा गलाईडिन्ग के माध्यम से खुले आकाश में पक्षी की भांति उड़ने का भरपूर मौका मिलता है। यहीं पर, कुछ अन्य एडवेंचर गतिविधियां को करने का भी पुख्ता इंतजाम है।

सर जार्ज एवरेस्ट हाउस: सर जार्ज एवरेस्ट हाउस मंसूरी से कुछेक दूरी पर स्थित है। सर एवरेस्ट, भारत के पहले महा पर्यवेक्षक थे। यहीं पर उन्होने अपना घर तथा कार्यालय बनाया, हालांकि अब यह इमारत जर्जर हालत में है लेकिन पर्यटक आज भी इसे बड़े चाव से देखने आते हैं। गौरतलब है कि विश्व की सबसे ऊंची 8848 मीटर ऊंचाई पर स्थित पर्वत चोटी का नाम भी सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर ही पड़ा है।

धनोल्टी: मंसूरी से टिहरी रोड की तरफ, मंसूरी से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मनोरम स्थल धनोल्टी की अनुपम छटा देखकर प्रकर्ति के चहेते  इस रमणीक स्थल को जरूर देखने आते हैं। यह पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र जहां देवदार के बड़े-बड़े वृक्ष तथा ऊंची-ऊंची पहाडों से प्रकर्तिक सौन्दर्य देखते ही बनता है। यहाँ दो सुन्दर पार्क भी पर्यटकों को अपनी तरफ खीचने में बेहद लोकप्रिय हैं। वैसे यहाँ पर गढ़वाल विकास निगम मण्डल का पर्यटक विश्राम गृह भी बना हुआ है तथा कुछेक होटल भी बने हैं। इस सुन्दर पर्यटक स्थल पर भी वर्ष भर पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है। यदि आप भी मंसूरी घूमने जाएँ तो धनोल्टी भी अवशय घूम कर आयें।

प्राचीनतम पुस्तकालय:
मंसूरी पुस्तकालय विश्व के प्राचीनतम पुस्तकालय में शुमार रखता है। इसकी स्थापना 1843 में हुई। सूत्रों के मुताबिक इसकी नींव दून के सुपरिंटेंडेंट वंसिहार्ट ने रखी। हालांकि इस जमीन के मालिक स्कॉट व पिट थे जिन्होने मेजर स्वेटेंहन को बेच दियाथा। पुस्तकालय में कार्यरत सुश्री रजनी भट्ट ने अहम जानकारी देते हुए बताया कि आज इस विश्व विख्यात पुस्तकालय में उपन्यास, जीवनी, आत्मकथा, यात्रा वृतांत आदि विषयों पर लगभग 14,000 पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसके अलावा यहाँ पर 10-12 दैनिक समाचार पत्र व पत्रिकाएँ भी पढ़ने के लिए उपलब्ध हैं। आज इस पुस्तकालय के करीब 80 सदस्य हैं। जबकि 10 आजीवन सदस्य हैं इनमें मशहूर लेखक रस्किन बॉण्ड भी शामिल हैं। बॉण्ड समय-समय पर पुस्तकालय में आते-रहते हैं।

उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड के देहारादून स्थित कार्यालय में कार्यरत, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी-योगेन्द्र गंगवार के अनुसार वैसे तो वर्ष भर, परन्तु मई-जून तथा दिसम्बर-जनवरी के महीनों में पर्यटकों की टोलियाँ मंसूरी में घूमना अधिक पसन्द करती हैं। मंसूरी में, केंप्टी फॉल, गन हिल, मंसूरी झील, भट्टा फॉल, कम्पनी बाग, माल रोड, जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट आदि विशेष आकर्षक एवं लोकप्रिय पर्यटक स्थल हैं।

जाने का रास्ता:
सड़क द्वारा: दिल्ली से मंसूरी (बस/जीप/कार)
रेल द्वारा: दिल्ली से देहारादून तक
हवाई मार्ग: दिल्ली से जौली ग्रांट, हवाई अड्डा, देहारादून तक

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड
देहारादून
फोन: 0135-2559898, 2559987
ईमेल:dd-tourism-ua@nic.in
वेब साइट:www.uttarakhandtourism.gov.in

ऐ श्याम तेरी बंसी मुझे घायल करती है


ऐ श्याम तेरी बंसी मुझे घायल करती है , मुस्कान तेरी मीठी मुझे कायल करती है ।

यह सोने की होती तो, ना जाने क्या होता , जब बाँस की होकर इतना इतराती हैँ ।

तुम गोरे होते तो, ना जाने क्या होता, जब तेरी सांवली सुरत पर दुनिया दीवानी है ।



तुम सीधे होते तो ना जाने, क्या होता, जब तेरी बांकी चाल पर दुनिया मरती है ।

कभी रास रचाते हो, कभी बंसी बजाते हो, कभी माखन खाने की भी मन में आ जाती है |

ऐ श्याम तेरी बंसी मुझे घायल करती है, मुस्कान तेरी मीठी मुझे कायल करती है ।


- मधुरिता 

Tuesday, April 22, 2014

Natural but interesting way is the key for a good dialogue says Shruti Vaidya


पाँव बड़ों के छुए जाते हैं आनंदी, हमारा रिश्ता बराबरी का है.
ये तब पूरा होगा जब आप मुझे खुद से बढ़कर नहीं, खुद के साथ पायेगी.


जी हाँ उपरोक्त डायलोग कलर टीवी पर प्रसारित लोकप्रिय सीरियल बालिका वधु का है और इसकी रचियता है श्रुति वैद जिन्होंने रघुवीर शेखावत जैसे सरीखे डायलोग राइटर को असिस्ट किया. हाल ही में हमारे प्रबंधक संपादक श्री एस.एस. डोगरा को श्रुति से रूबरू होने के मौका मिला. प्रस्तुत है आपके समक्ष बातचीत के प्रमुख अंश:
Shruti Vaidya with S S Dogra

लिखने में कब से रूचि शुरू हुई?
मैं बचपन से ही निबंध आदि लिखने में खूब दिलचस्पी लेती थी.

आपने पढाई किस विषय में और कहाँ की ?
मैंने दर्शनशास्त्र (Philosophy) में स्नातक की डिग्री रुपारेल कॉलेज, मतुन्गा, मुंबई से की.

थिएटर से जुड़ने का खुलासा करें?
मैं I.P.T.A.,मुंबई, पृथ्वी थिएटर आदि से भी जुडी हूँ.

नृत्य कौशल में भी कुछ कर रही हैं?
जी, मुझे प्रसिद्ध कत्थक गुरु बिरजू महाराज जी की वरिष्ठतम शिष्या सुश्री रेनू शर्मा से कत्थक सीखने का सौभाग्य मिला.

आपने कहाँ-कहाँ शो किए हैं?
मुंबई, नासिक, के आलावा हाल ही में देहरादून में शो किए हैं. आगामी महीनों में अमेरिका में शो करने की तैयारी चल रही है.

आप संवाद को बेहतर लिखने का श्रेय किसे देती हैं?
मैं अपने आसपास अपनी दादी, नानी, तथा अन्य रिश्तेदार व् फ्रेन्ड्स आदि से वार्तालाप कर संवाद को बेहतर लिखने में अत्यंत महत्तवपूर्ण योगदान समझती हूँ.

अच्छे संवाद का क्या गुण होता है?
देखिये एक अच्छे संवाद का सर्वोपरि गुण यही होता है कि आप एक सन्देश को स्वाभाविक व् दिलचस्प अंदाज में श्रोताओं के समक्ष पेश कर सकें.

अपने काम के बारे में बताएं?
मैंने बालिका वधु, लाडो, सरस्वती चन्द्र, गणेश लीला आदि जैसे टीवी पर प्रसारित लोकप्रिय सीरियल के लिए डायलोग लेखन किया है. और मेरे काम को लोगों ने खूब सराहा भी है.
Shruti Vaidya with Ruskin Bond

जीवन के कुछ यादगार पल?
अभी पिछले ही दिनों, मशहूर अंग्रेज लेखक रस्किन बांड के साथ मसूरी में हुई मुलाकात, मेरे जीवन के यादगार लम्हें है. मैं बांड साहेब के सरल व् सहज व्यक्तित्त्व से बहुत प्रभावित भी हुई.

भविष्य की क्या योजनाएं हैं?
मैं एक फिल्म के लिए स्क्रीन प्ले (पटकथा) लिख रही हूँ जो की एक लड़की के चरित्र पर आधारित होगी. यह पटकथा बालिका की अपरिपक्वता से लेकर परिपक्वता तक की जीवन यात्रा पर केन्द्रित होगी.

Art Exhibition -"Prakriti" Celebration of Earth Day- 22 - 28 April


Under the aegis of the art group Uchaan, 12 young and enthusiastic artists are collaborating to celebrate Earth Day by organizing Prakriti- An Art Exhibition at the All India Fine Arts & Crafts Society (AIFACS), Rafi Marg. The Exhibition was inaugurated by Shri Paramjeet Singh, Chairman, AIFACS on 22 April, 2014 and will continue till 28 April, 2014 from 11 am to 7 pm.
Works of Jyoti Kalra, Daya Chand, Shikha Jamwal & Suneel Jain

The objective of exhibition is to provide adequate aesthetic platform & promote new talent. Mr. Suneel Jain, one of the key artists behind this Art show claims, “While the focus of the initial exhibition was uninhibited expression of womanhood, the present exhibition focuses on presentation of variegated facets of Nature, human life and their reciprocity which is a fitting tribute to Earth Day.” He also added art connoisseurs will have the opportunity to witness and critique the works of notable names in the art field including Daya Chand, Dr. Shuchi Verma, Mamta Rana, Priyanka Jain, Poonam Saini, Preeti Jaiswal, Reena Jain, Suneel Jain, Shikha Jamwal, Shilpi Malik, Zulfiqar Ali during the exhibition.

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